कावेरी के पानी पर फिर घमासान! Karnataka-Tamil Nadu के बीच बढ़ा विवाद, अब Supreme Court में बड़ा फैसला 

Cauvery Water Dispute

कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। तमिलनाडु की सी. जोसेफ विजय सरकार ने कर्नाटक से कावेरी जल छोड़ने के निर्देश की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया है। अब सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर 13 अगस्त 2026 को सुनवाई करेगा। तमिलनाडु का आरोप है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण यानी Cauvery Water Management Authority (CWMA) के निर्देश के बावजूद कर्नाटक ने निर्धारित मात्रा में पानी नहीं छोड़ा। वहीं कर्नाटक का पक्ष रहा है कि कम बारिश और जलाशयों में सीमित पानी के कारण उसके सामने खुद पेयजल और अन्य जरूरतों का संकट है। यही वजह है कि कावेरी का पानी अब सिर्फ जल विवाद नहीं, बल्कि दोनों राज्यों के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है।

Supreme Court Cauvery Water Plea में तमिलनाडु की क्या मांग है?

तमिलनाडु सरकार ने 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कर्नाटक को CWMA के आदेश का पालन करने का निर्देश देने की मांग की थी। राज्य चाहता है कि कर्नाटक कावेरी नदी का 3,500 क्यूसेक पानी प्रतिदिन 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए छोड़े। CWMA ने 30 जुलाई को कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) की सिफारिश को बरकरार रखते हुए कर्नाटक को 15 दिनों तक रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। यह पानी कर्नाटक के कबिनी और कृष्णराज सागर (KRS) जलाशयों से छोड़ा जाना है। तमिलनाडु ने अपनी याचिका में करीब 4.536 टीएमसी पानी की मांग की है, जिसकी गणना 3,500 क्यूसेक प्रतिदिन के हिसाब से 15 दिनों के लिए की गई है। राज्य का कहना है कि निर्धारित पानी नहीं मिलने से उसकी सिंचाई और किसानों की जरूरतों पर असर पड़ रहा है।

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Tamil Nadu Cauvery Water Dispute आखिर इतना बड़ा क्यों है?

कावेरी जल विवाद की जड़ में नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चला आ रहा मतभेद है। कर्नाटक कावेरी नदी के ऊपरी हिस्से में स्थित है, जबकि तमिलनाडु निचले हिस्से में आता है। कर्नाटक का तर्क है कि उसे अपने किसानों, शहरों और खासकर बेंगलुरु की पेयजल जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी चाहिए। दूसरी ओर तमिलनाडु का कहना है कि कावेरी के पानी पर उसके लाखों किसान सिंचाई के लिए निर्भर हैं और तय हिस्से में कमी से कृषि व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। कावेरी बेसिन का कुछ हिस्सा केरल में भी आता है, इसलिए वह भी इस नदी के जल बंटवारे में संबंधित राज्य है। हालांकि मौजूदा विवाद में तमिलनाडु की ताजा याचिका का निशाना कर्नाटक है।

Cauvery Water Release Karnataka के लिए क्यों बना चुनौती?

कर्नाटक ने 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश पर आपत्ति जताते हुए जल संकट और कम बारिश का हवाला दिया था। राज्य के अधिकारियों के मुताबिक जलाशयों में उपलब्ध पानी को पेयजल जरूरतों के लिए भी सुरक्षित रखना जरूरी है। CWRC के आदेश के बाद कर्नाटक ने CWMA के सामने अपना पक्ष रखा था, लेकिन 30 जुलाई को CWMA ने 3,500 क्यूसेक प्रतिदिन छोड़ने के निर्देश को बरकरार रखा। हालांकि बाद में कर्नाटक की ओर से कहा गया कि बारिश और जल उपलब्धता में सुधार के कारण वह आदेश का पालन करने की स्थिति में आ सकता है। 4 अगस्त की रिपोर्टों के अनुसार राज्य ने 7 अगस्त तक निर्धारित रिलीज को पूरा करने की दिशा में काम करने की बात कही थी। इस बीच तमिलनाडु का कहना है कि उसे अपने हिस्से का पानी समय पर मिलना चाहिए और इसके लिए प्रशासनिक तथा कानूनी आदेशों का पालन जरूरी है।

 

Vijay Government Cauvery Water पर क्या है रुख?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कावेरी को राज्य की lifeline बताते हुए कहा है कि उनकी सरकार राज्य के जल अधिकारों से समझौता नहीं करेगी। विजय ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से बातचीत के लिए बेंगलुरु जाने की इच्छा भी जताई थी। उनका तर्क था कि जब विरोधी देश भी विवाद सुलझाने के लिए बातचीत कर सकते हैं, तो पड़ोसी राज्य बातचीत क्यों नहीं कर सकते। हालांकि कावेरी विवाद पर राजनीतिक दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। तमिलनाडु की विपक्षी पार्टी डीएमके ने भी इसी मुद्दे पर अलग आवेदन दायर किया है। विजय सरकार ने कर्नाटक की प्रस्तावित मेकदातु बांध परियोजना का भी विरोध किया है। तमिलनाडु का कहना है कि यह परियोजना राज्य के downstream water share को प्रभावित कर सकती है। सरकार ने केंद्र से भी इस परियोजना को किसी तरह की कानूनी या प्रशासनिक मंजूरी नहीं देने की मांग की है।

 

Supreme Court Cauvery Water Hearing में अब क्या होगा?

अब सभी की नजर 13 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह होगा कि क्या कर्नाटक को CWMA के निर्देश के मुताबिक तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने का आदेश दिया जाए और जल बंटवारे से जुड़े निर्देशों को किस तरह लागू कराया जाए। कावेरी विवाद ऐसे समय में फिर गरमाया है जब दोनों राज्यों में पानी की उपलब्धता और मानसून की स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का रुख आने वाले दिनों में Tamil Nadu Karnataka Water Dispute की दिशा तय करने में अहम हो सकता है।

 

निष्कर्ष

Supreme Court Cauvery Water Plea ने कावेरी जल विवाद को एक बार फिर देश के सबसे संवेदनशील अंतरराज्यीय जल विवादों में ला दिया है। तमिलनाडु जहां अपने निर्धारित जल हिस्से और किसानों की जरूरतों को लेकर कर्नाटक से पानी छोड़ने की मांग कर रहा है, वहीं कर्नाटक अपनी पेयजल और जल भंडारण की जरूरतों का हवाला दे रहा है। अब 13 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि Cauvery Water Release Karnataka को लेकर आगे क्या निर्देश दिए जाते हैं।

 

FAQs

1. सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विवाद पर तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई कब तय की है?

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर 13 अगस्त 2026 को सुनवाई तय की है। याचिका में कर्नाटक को CWMA के पानी छोड़ने संबंधी निर्देश का पालन करने का आदेश देने की मांग की गई है।

 

2. तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख क्यों किया है?

तमिलनाडु का कहना है कि कर्नाटक ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देश के मुताबिक पानी नहीं छोड़ा। इसलिए तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट से CWMA के आदेश को लागू कराने के लिए निर्देश देने की मांग की है।

 

3. तमिलनाडु ने कर्नाटक से कितने क्यूसेक कावेरी जल छोड़ने की मांग की है?

तमिलनाडु ने CWMA के निर्देश के अनुसार 3,500 क्यूसेक पानी प्रतिदिन 15 दिनों तक छोड़ने की मांग की है। CWMA ने 30 जुलाई को इस निर्देश को बरकरार रखा था।

 

4. कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने कर्नाटक को कितना पानी छोड़ने का निर्देश दिया था?

CWMA ने कर्नाटक को 15 दिनों तक रोजाना 3,500 क्यूसेक कावेरी पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। यह निर्देश CWRC की 28 जुलाई की सिफारिश को बरकरार रखते हुए दिया गया था।

 

5. कावेरी जल विवाद किन राज्यों के बीच है?

कावेरी जल विवाद मुख्य रूप से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच है। इसके अलावा कावेरी बेसिन का कुछ हिस्सा केरल और पुडुचेरी से भी संबंधित है। मौजूदा विवाद में तमिलनाडु की याचिका कर्नाटक से पानी छोड़ने को लेकर है