सोशल मीडिया पर शेयर बाजार और निवेश से जुड़ी सलाह देने वाले Finfluencer अब बाजार नियामक SEBI की खास निगरानी में होंगे। SEBI ने Project SUDARSAN नाम का AI आधारित निगरानी सिस्टम शुरू किया है, जो सोशल मीडिया पर फर्जी निवेश सलाह, गारंटीड रिटर्न के दावे, नकली पहचान और अन्य संदिग्ध वित्तीय कंटेंट की पहचान करेगा। SEBI के Investor Survey के मुताबिक, 62% निवेशक Finfluencers से प्रभावित होते हैं, इसलिए नियामक ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निगरानी बढ़ाई है।
Project SUDARSAN क्या है और कैसे करेगा काम?
Project SUDARSAN का पूरा नाम Surveillance of Unauthorised Digital Activity via Real-time Scanner for Anti-fraud है। यह एक AI-powered intelligence platform है, जिसे सोशल मीडिया पर होने वाली अनधिकृत और संभावित धोखाधड़ी वाली गतिविधियों की पहचान के लिए विकसित किया गया है। यह सिस्टम केवल लिखे हुए शब्दों को ही नहीं, बल्कि वीडियो, ऑडियो, तस्वीरों, विज्ञापनों और क्षेत्रीय भाषाओं में मौजूद कंटेंट का भी विश्लेषण कर सकता है। इसके बाद यह अलग-अलग संकेतों और नियामकीय मानकों के आधार पर संदिग्ध कंटेंट को risk score देता है और संभावित कार्रवाई के लिए अलर्ट तैयार करता है। SEBI के अनुसार, नवंबर 2025 में Project SUDARSAN की शुरुआत के बाद से अब तक सोशल मीडिया पर 20,000 से अधिक फर्जी कंटेंट और पोस्ट की पहचान की जा चुकी है।

Finfluencer पर SEBI की नजर क्यों बढ़ी?
आज बड़ी संख्या में लोग शेयर बाजार और निवेश से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया से हासिल कर रहे हैं। SEBI के सर्वे में सामने आया कि 62% निवेशक Finfluencers से प्रभावित होते हैं। समस्या तब पैदा होती है जब कोई व्यक्ति बिना जरूरी पंजीकरण या जवाबदेही के निवेश संबंधी सलाह देता है। कई बार सोशल मीडिया पोस्ट में गारंटीड रिटर्न, फर्जी प्रमाण-पत्र, किसी पंजीकृत संस्था की नकल या बिना अनुमति निवेश सलाह जैसे दावे किए जाते हैं। देखने में यह कंटेंट विश्वसनीय लग सकता है, लेकिन इसके पीछे मौजूद व्यक्ति या संस्था की वास्तविकता स्पष्ट नहीं होती। इसी जोखिम को देखते हुए SEBI अब AI की मदद से ऐसे कंटेंट की पहचान को अधिक तेज और व्यापक बनाने की कोशिश कर रहा है।
SEBI AI Fraud Detection से कैसे रुकेगा फर्जी निवेश कंटेंट?
SEBI का AI सिस्टम सोशल मीडिया पर लगातार सार्वजनिक कंटेंट को स्कैन करता है। इसका उद्देश्य संभावित रूप से संदिग्ध गतिविधियों को शिकायत आने के बाद पकड़ने के बजाय पहले ही पहचानना है। इसके अलावा SEBI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ API आधारित व्यवस्था भी शुरू की है। इसके तहत प्रतिभूति बाजार से जुड़े विज्ञापन केवल सत्यापित और SEBI-पंजीकृत संस्थाओं द्वारा चलाए जाने की दिशा में काम किया जा रहा है। नियामक ने R(AI)DAR नाम का AI आधारित टूल भी लागू किया है, जो परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों के विज्ञापनों और निवेशक शिक्षा सामग्री में संभावित अनुपालन संबंधी समस्याओं की पहचान करने में मदद करता है।
निवेशकों के लिए SEBI ने और क्या कदम उठाए?
SEBI की रणनीति केवल Finfluencer की निगरानी तक सीमित नहीं है। निवेशकों को फर्जी संस्थाओं से बचाने के लिए नियामक ने SEBI Check और सत्यापित UPI हैंडल जैसी सुविधाएं भी शुरू की हैं। इनकी मदद से निवेशक यह जांच सकते हैं कि भुगतान सही SEBI-पंजीकृत मध्यस्थ को किया जा रहा है या नहीं। इसके अलावा, Google Play के साथ सत्यापित ऐप लेबल की पहल भी की गई है, जिससे निवेशकों को वास्तविक ट्रेडिंग ऐप पहचानने में मदद मिल सके।
निवेशकों के लिए सोशल मीडिया इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
SEBI के Investor Survey में 90,000 से अधिक भारतीय परिवारों को शामिल किया गया था। सर्वे के मुताबिक, 63% भारतीय परिवार कम से कम एक प्रतिभूति बाजार उत्पाद से परिचित हैं, लेकिन केवल 9.5% परिवार वास्तव में इनमें निवेश करते हैं। निवेश न करने वालों में 74% लोगों ने उत्पादों की जटिलता और जानकारी की कमी को बाधा बताया, जबकि 73% लोगों को संभावित नुकसान की चिंता है। ऐसे में आसान भाषा में निवेश समझाने वाले Finfluencers लोगों के लिए आकर्षक बन जाते हैं। सर्वे में 80% लोगों ने शॉर्ट-फॉर्म वीडियो और 69% ने सोशल मीडिया को वित्तीय जानकारी हासिल करने के पसंदीदा माध्यमों में बताया। क्षेत्रीय भाषाओं और हिंदी की मांग भी काफी अधिक रही।
निवेशकों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
सोशल मीडिया पर किसी Finfluencer की लोकप्रियता को उसकी विश्वसनीयता का प्रमाण नहीं मानना चाहिए। निवेश से पहले यह जांचना जरूरी है कि सलाह देने वाला व्यक्ति या संस्था SEBI के साथ पंजीकृत है या नहीं। साथ ही गारंटीड रिटर्न, जल्दी पैसा दोगुना करने और बिना जोखिम के मुनाफे जैसे दावों से विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए।
निष्कर्ष
सोशल मीडिया पर बढ़ते वित्तीय कंटेंट के बीच Finfluencer की भूमिका लगातार बड़ी हो रही है। लेकिन जब निवेशक बिना सत्यापन के ऐसी सलाह पर पैसा लगाने लगते हैं, तो धोखाधड़ी का जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसे में Project SUDARSAN के जरिए SEBI का AI आधारित निगरानी तंत्र डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, निवेशकों के लिए सबसे जरूरी सुरक्षा अब भी यही है कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले जानकारी और सलाह का स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया जाए।
FAQs
- Finfluencer क्या होते हैं?
Finfluencer ऐसे सोशल मीडिया क्रिएटर होते हैं जो निवेश, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या व्यक्तिगत वित्त से जुड़ी जानकारी और सलाह साझा करते हैं। - कितने प्रतिशत निवेशक Finfluencers से प्रभावित होते हैं?
SEBI के Investor Survey के अनुसार, 62% निवेशक Finfluencers से प्रभावित होते हैं। - SEBI Finfluencers पर AI से नजर क्यों रख रहा है?
फर्जी निवेश सलाह, गारंटीड रिटर्न के दावे, नकली पहचान और अनधिकृत वित्तीय सलाह जैसी गतिविधियों को पहचानने के लिए SEBI AI आधारित निगरानी बढ़ा रहा है। - Project SUDARSAN क्या करता है?
यह AI सिस्टम सोशल मीडिया पर वीडियो, ऑडियो, तस्वीरों, विज्ञापनों और अन्य कंटेंट का विश्लेषण करके संभावित रूप से फर्जी या अनधिकृत वित्तीय गतिविधियों की पहचान करता है। - निवेशक Finfluencer की सलाह लेने से पहले क्या करें?
निवेशक को सलाह देने वाले व्यक्ति या संस्था की SEBI registration स्थिति जांचनी चाहिए और किसी भी गारंटीड रिटर्न या बिना जोखिम वाले मुनाफे के दावे पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए।

