Tamil Nadu Temple Treasures: 900 साल बाद लौट रही हैं भारत की अनमोल धरोहर! आखिर ऑस्ट्रेलिया ने क्यों लिया यह बड़ा फैसला?

Tamil Nadu Temple Treasures

Tamil Nadu Temple Treasures को लेकर भारत के लिए एक बड़ी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। ऑस्ट्रेलिया ने तमिलनाडु के मंदिरों से चोरी हुई तीन बहुमूल्य प्राचीन कलाकृतियों को भारत लौटाने का फैसला किया है। इनमें चोल काल की भगवान कार्तिकेय (षण्मुख), नंदी की प्रतिमा और देवी भद्रकाली से सुशोभित एक त्रिशूल शामिल हैं।ये सिर्फ प्राचीन मूर्तियां नहीं, बल्कि सदियों से पूजा जा रहे मंदिरों की जीवित धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। इनकी वापसी भारत के लिए सांस्कृतिक न्याय और विरासत संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

कौन-कौन सी कलाकृतियां भारत लौट रही हैं?

ऑस्ट्रेलिया जिन तीन धरोहरों को भारत लौटा रहा है, वे तमिलनाडु के अलग-अलग प्राचीन मंदिरों से जुड़ी हैं।

  1. भगवान कार्तिकेय (षण्मुख) की प्रतिमा
  • लगभग 900 वर्ष पुरानी चोलकालीन प्रतिमा।
  • तमिलनाडु के नागनाथस्वामी मंदिर, मनम्बाड़ी (कुंभकोणम के पास) से संबंधित।
  • छह मुखों वाले भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) का स्वरूप दर्शाती है।

यह प्रतिमा राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल से जुड़ी मानी जाती है।

  1. नंदी की प्रतिमा
  • एक ही पत्थर से तराशी गई।
  • 13वीं से 16वीं शताब्दी के बीच की मानी जाती है।
  • कैलासनाथर मंदिर, कडुवनकुडी (तिरुवारुर) से संबंधित।

इसकी अनुमानित कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये बताई गई है, हालांकि इसकी धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता इससे कहीं अधिक है।

  1. भद्रकाली युक्त त्रिशूल
  • श्री काशी विश्वनाथस्वामी मंदिर का धार्मिक प्रतीक।
  • चोल काल का यह त्रिशूल मंदिर उत्सवों और शोभायात्राओं में इस्तेमाल किया जाता था।
  • इसके शीर्ष पर देवी भद्रकाली की आकृति बनी हुई है।

Tamil Nadu Temple Treasures की वापसी कैसे संभव हुई?

इन Tamil Nadu Temple Treasures Returned की वापसी एक दिन में संभव नहीं हुई।इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत 2016 में हुई, जब तमिलनाडु की Idol Wing CID ने मंदिर रिकॉर्ड, पुराने फोटो, सरकारी दस्तावेज और अभिलेखों की मदद से इन कलाकृतियों के चोरी होने की जांच शुरू की।बाद में भारत ने Mutual Legal Assistance Treaty (MLAT) के तहत ऑस्ट्रेलिया से आधिकारिक अनुरोध किया। उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद ऑस्ट्रेलिया ने इन Repatriated Artefacts को भारत लौटाने पर सहमति जताई।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों में क्यों है यह फैसला अहम?

इस घोषणा के दौरान ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया सिर्फ रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी करीबी मित्र हैं।उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने भी चेन्नई के सरकारी संग्रहालय में सुरक्षित ऑस्ट्रेलिया के एक आदिवासी पूर्वज के अवशेष वापस करने का फैसला किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला India Australia Relations को और मजबूत करेगा तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में दोनों देशों के सहयोग का नया उदाहरण बनेगा।

दुनिया भर में लौट रही हैं भारत की प्राचीन धरोहरें

पिछले कुछ वर्षों में कई देशों के संग्रहालयों ने भारत की चोरी हुई Indian Antiquities वापस लौटाई हैं। इनमें शामिल हैं:

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन

अब संग्रहालयों में किसी भी कलाकृति की Provenance (मालिकाना इतिहास) की जांच पहले से कहीं अधिक गंभीरता से की जाती है। यदि किसी वस्तु के अवैध तरीके से विदेश पहुंचने के प्रमाण मिलते हैं, तो उसे मूल देश को लौटाया जा रहा है।

 

इन धरोहरों का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

ये कलाकृतियां केवल संग्रहालयों में रखने योग्य प्राचीन वस्तुएं नहीं हैं। इनका महत्व इसलिए भी विशेष है क्योंकि:

  • ये आज भी सक्रिय मंदिरों का हिस्सा हैं।
  • सदियों से इनकी पूजा होती रही है।
  • ये चोल साम्राज्य की कला और शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
  • ये भारत की Indian Cultural Heritage और Cultural Heritage India की अमूल्य धरोहर हैं।

इनकी वापसी उन मंदिरों के लिए भी भावनात्मक क्षण होगी, जहां से ये वर्षों पहले चोरी हो गई थीं।

 

निष्कर्ष

Tamil Nadu Temple Treasures की वापसी भारत के सांस्कृतिक इतिहास के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भगवान कार्तिकेय, नंदी और भद्रकाली त्रिशूल जैसी अमूल्य धरोहरों का अपने मूल मंदिरों में लौटना केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक आस्था और विरासत संरक्षण की बड़ी जीत है। आने वाले समय में ऐसी और भी चोरी हुई भारतीय धरोहरों की वापसी की उम्मीद की जा रही है।

 

FAQs

Q1. ऑस्ट्रेलिया ने भारत को कौन-कौन सी मंदिर कलाकृतियां लौटाई हैं?

ऑस्ट्रेलिया भगवान कार्तिकेय (षण्मुख) की प्रतिमा, नंदी की प्रतिमा और देवी भद्रकाली युक्त त्रिशूल भारत को लौटा रहा है।

 

Q2. ये कलाकृतियां तमिलनाडु के किस मंदिर से चोरी हुई थीं?

ये कलाकृतियां नागनाथस्वामी मंदिर (मनम्बाड़ी), कैलासनाथर मंदिर (कडुवनकुडी) और श्री काशी विश्वनाथस्वामी मंदिर से संबंधित हैं।

 

Q3. इन प्राचीन धरोहरों की वापसी कैसे संभव हुई?

तमिलनाडु Idol Wing CID की जांच, पुराने अभिलेखों और भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच कानूनी सहयोग (MLAT) के आधार पर इनकी वापसी संभव हुई।

 

Q4. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक सहयोग में इसका क्या महत्व है?

यह फैसला दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक विश्वास और विरासत संरक्षण के सहयोग को और मजबूत करता है।

 

Q5. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की क्या भूमिका होती है?

ASI और संबंधित एजेंसियां प्राचीन धरोहरों की पहचान, संरक्षण और कानूनी प्रक्रिया में तकनीकी सहायता प्रदान करती हैं।

 

Q6. क्या भारत पहले भी विदेशों से अपनी सांस्कृतिक धरोहर वापस ला चुका है?

हाँ। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा सहित कई देशों से भारत अपनी अनेक प्राचीन मूर्तियां और कलाकृतियां वापस ला चुका है।

 

Q7. इन कलाकृतियों की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता क्या है?

ये चोलकालीन कला, भारतीय शिल्पकला और तमिलनाडु की जीवित मंदिर परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और सदियों से धार्मिक आस्था से जुड़ी रही हैं।