Rocket Booster Recovery System: चीन ने कर दिखाया बड़ा कमाल! क्या अब SpaceX को मिलेगी सीधी टक्कर?

Rocket Booster Recovery System

Rocket Booster Recovery System के क्षेत्र में चीन ने बड़ी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। चीन ने पहली बार एक ऑर्बिटल-ग्रेड रॉकेट बूस्टर को समुद्र में मौजूद विशेष प्लेटफॉर्म पर सफलतापूर्वक रिकवर (वापस प्राप्त) किया है। इस सफल परीक्षण को चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इसका उद्देश्य भविष्य में पुन: प्रयोज्य (Reusable) रॉकेट विकसित कर लॉन्च की लागत कम करना है।यह परीक्षण चीन के Long March 10B रॉकेट के साथ किया गया, जिसने पहले एक उपग्रह को निर्धारित कक्षा (Orbit) में सफलतापूर्वक स्थापित किया और फिर उसका बूस्टर समुद्र में बने प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित वापस लाया गया।

चीन का Sea-Based Rocket Booster Recovery System क्या है?

Rocket Booster Recovery System ऐसी तकनीक है जिसमें रॉकेट के सबसे महंगे हिस्से यानी बूस्टर को मिशन पूरा होने के बाद सुरक्षित वापस लाया जाता है ताकि भविष्य में उसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।चीन के इस नए सिस्टम में समुद्र के बीच बने एक प्लेटफॉर्म पर बड़ा जाल (Net) लगाया गया था। बूस्टर ने लगभग छह मिनट बाद नियंत्रित तरीके से वापस आकर अपने विशेष “Landing Hooks” की मदद से इस जाल में खुद को सुरक्षित पकड़वा दिया।यह चीन का पहला सफल Sea-Based Rocket Recovery परीक्षण बताया जा रहा है।

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Rocket Booster Recovery System कैसे काम करता है?

इस परीक्षण की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार रही:

  • Long March 10B रॉकेट ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी।
  • उपग्रह को तय कक्षा में स्थापित किया गया।
  • बूस्टर मुख्य रॉकेट से अलग हुआ।
  • लगभग छह मिनट बाद बूस्टर ने नियंत्रित तरीके से पृथ्वी की ओर वापसी की।
  • समुद्र में मौजूद प्लेटफॉर्म पर लगे विशाल जाल में बूस्टर को सुरक्षित पकड़ लिया गया।

चीन की अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, यह तकनीक बूस्टर का वजन कम रखती है और अधिक पेलोड ले जाने में मदद करती है

SpaceX से कितना अलग है चीन का सिस्टम?

चीन के China Rocket Recovery सिस्टम की तुलना अक्सर SpaceX Falcon 9 से की जा रही है, लेकिन दोनों तकनीकों में बड़ा अंतर है।

SpaceX

रॉकेट अपने पैरों (Landing Legs) पर खुद उतरता है।

ड्रोन शिप या जमीन पर सीधी लैंडिंग करता है।

एक ही बूस्टर का कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है।

चीन

बूस्टर के नीचे Landing Legs नहीं हैं।

चार विशेष हुक (Landing Hooks) की मदद से समुद्र में लगे जाल में पकड़ा जाता है।

इससे बूस्टर का वजन कम रहता है और अधिक पेलोड ले जाया जा सकता है।

हालांकि चीन अभी शुरुआती चरण में है, जबकि SpaceX कई वर्षों से इस तकनीक का व्यावसायिक उपयोग कर रही है।

चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए क्यों है यह बड़ी उपलब्धि?

चीन पिछले लगभग एक दशक से Reusable Rocket Technology पर काम कर रहा है। इस सफलता से:

  • लॉन्च की लागत कम हो सकती है।
  • कम समय में अधिक मिशन लॉन्च किए जा सकेंगे।
  • Commercial Satellite मिशनों को गति मिलेगी।
  • चीन के Commercial Space China सेक्टर को मजबूती मिलेगी।

2030 से पहले प्रस्तावित मानवयुक्त चंद्र मिशन (Crewed Lunar Mission) में भी इस तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।चीन ने यह भी कहा है कि इसी वर्ष के अंत तक इसी बूस्टर का दोबारा इस्तेमाल करने की योजना है।

 

शेयर बाजार पर भी दिखा असर

इस सफलता के बाद चीन की कई एयरोस्पेस कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली। विशेष रूप से:

  • China Spacesat
  • China Satellite Communications

के शेयरों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का भरोसा चीन के अंतरिक्ष उद्योग पर बढ़ता दिखाई दिया।

 

निष्कर्ष

Rocket Booster Recovery System में चीन की यह सफलता उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। हालांकि यह तकनीक अभी SpaceX के स्तर तक नहीं पहुंची है, लेकिन समुद्र आधारित रिकवरी सिस्टम के सफल परीक्षण ने यह संकेत जरूर दिया है कि चीन पुन: प्रयोज्य रॉकेट तकनीक की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यदि आने वाले परीक्षण भी सफल रहते हैं, तो भविष्य में वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा और अधिक रोचक हो सकती है।

 

FAQs

Q1. चीन का Sea-Based Rocket Booster Recovery System क्या है?

यह ऐसी तकनीक है जिसमें रॉकेट के बूस्टर को समुद्र में बने विशेष प्लेटफॉर्म और जाल (Net) की मदद से सुरक्षित वापस लाया जाता है ताकि भविष्य में उसका दोबारा उपयोग किया जा सके।

 

Q2. इस तकनीक का उद्देश्य क्या है?

मुख्य उद्देश्य लॉन्च लागत कम करना, रॉकेट को पुन: उपयोग योग्य बनाना और अंतरिक्ष मिशनों को अधिक किफायती बनाना है।

 

Q3. रॉकेट बूस्टर रिकवरी सिस्टम कैसे काम करता है?

रॉकेट का बूस्टर मिशन के बाद मुख्य रॉकेट से अलग होकर नियंत्रित तरीके से समुद्र में बने प्लेटफॉर्म पर लगे जाल में उतरता है।

 

Q4. इस परीक्षण का चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

इससे चीन को पुन: प्रयोज्य रॉकेट तकनीक विकसित करने में मदद मिलेगी और भविष्य के Commercial तथा Lunar Missions को गति मिल सकती है।

 

Q5. क्या यह तकनीक SpaceX जैसी है?

कुछ हद तक उद्देश्य समान है, लेकिन SpaceX अपने बूस्टर को Landing Legs की मदद से सीधे उतारती है, जबकि चीन जाल आधारित Sea Recovery System का उपयोग कर रहा है।

 

Q6. समुद्र आधारित रिकवरी प्रणाली के क्या फायदे हैं?

इससे रॉकेट का वजन कम रहता है, अधिक पेलोड ले जाया जा सकता है और रिकवरी प्रक्रिया अधिक लचीली बनती है।

 

Q7. चीन इस तकनीक का उपयोग किन मिशनों में करेगा?

चीन भविष्य के Commercial Satellite Launches और 2030 से पहले प्रस्तावित मानवयुक्त चंद्र मिशनों में इस तकनीक का उपयोग करना चाहता है।