Afghanistan India Relations: भारत और अफगानिस्तान के संबंध एक बार फिर चर्चा में हैं। अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई एवं पशुपालन मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी (Mawlawi Attaullah Omari) ने अपनी पहली भारत यात्रा के दौरान कहा कि भारत में उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे अपने ही लोगों के बीच हों। उन्होंने भारत सरकार द्वारा मिले स्वागत के लिए धन्यवाद देते हुए कहा, “It feels like our own country… Our DNA is one.” उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और काबुल क्षेत्रीय सहयोग के नए विकल्प तलाश रहा है।
यह बयान केवल भावनात्मक टिप्पणी नहीं माना जा रहा, बल्कि दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीति के बीच भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों में बढ़ती नजदीकी का संकेत भी माना जा रहा है।

अफगान मंत्री ने भारत को बताया अपना
नई दिल्ली में आयोजित India-Afghanistan Trade Opportunities Industry Interactive Session को संबोधित करते हुए मौलवी अताउल्लाह ओमारी ने कहा कि यह उनकी पहली भारत यात्रा है और यहां उन्हें शुरुआत से ही बेहद गर्मजोशी से स्वागत मिला।

उन्होंने कहा कि भारत में उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे अपने ही देश में हों। उनके अनुसार भारत की मेहमाननवाजी अफगानिस्तान के लोगों के लिए उम्मीद की किरण है। उन्होंने यह भी कहा कि अफगानिस्तान की लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि, सिंचाई और पशुपालन पर निर्भर है तथा अब इन क्षेत्रों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से विकसित करने की आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने भारत सहित अन्य देशों से सहयोग की अपेक्षा जताई।
यह बयान इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है?
ओमारी का यह बयान ऐसे समय आया है जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा सुरक्षा, आतंकी गतिविधियों और कूटनीतिक संबंधों को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में भारत की सार्वजनिक प्रशंसा करना यह संकेत देता है कि काबुल अपनी विदेश नीति में भारत के साथ आर्थिक और विकासात्मक सहयोग को अधिक महत्व देना चाहता है। हालांकि अफगान सरकार ने इसे किसी तीसरे देश के खिलाफ कदम नहीं बताया है, लेकिन क्षेत्रीय परिस्थितियों के कारण इस बयान को व्यापक रणनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
भारत और अफगानिस्तान के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
ओमारी की यात्रा के दौरान नई दिल्ली में भारत-अफगानिस्तान संयुक्त समिति (India-Afghanistan Joint Committee) की चौथी बैठक भी आयोजित हुई। इस बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों की समीक्षा की।
बैठक में मानवीय सहायता, विकास परियोजनाएं, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, कौशल विकास, खेल, व्यापार, वीजा सुविधा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
भारत ने भी अफगानिस्तान के विकास में अपना सहयोग जारी रखने और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
Afghanistan India Relations: भारत और अफगानिस्तान के संबंध
भारत और अफगानिस्तान के संबंध हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संपर्कों पर आधारित हैं। प्राचीन काल से दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार, संस्कृति, शिक्षा और लोगों का आवागमन होता रहा है।
आधुनिक दौर में भी भारत ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संसद भवन, सलमा बांध (अब अफगान-भारत मैत्री बांध), सड़क परियोजनाएं, बिजली अवसंरचना, अस्पताल, स्कूल और क्षमता निर्माण कार्यक्रम भारत की प्रमुख विकास परियोजनाओं में शामिल रहे हैं।
अफगानिस्तान में राजनीतिक परिवर्तन के बाद भी भारत ने मानवीय सहायता, खाद्यान्न, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति जारी रखी है।
दोनों देशों के लिए व्यापार और कृषि सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि आधारित है। देश की बड़ी आबादी खेती, पशुपालन और सिंचाई पर निर्भर है। ऐसे में आधुनिक कृषि तकनीक, सिंचाई प्रबंधन, बीज विकास, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि निवेश के क्षेत्र में भारत का अनुभव अफगानिस्तान के लिए उपयोगी माना जाता है।
भारत के लिए भी अफगानिस्तान मध्य एशिया तक पहुंच, क्षेत्रीय व्यापार और आर्थिक सहयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण साझेदार है।
क्या इस यात्रा का क्षेत्रीय राजनीति पर भी असर पड़ सकता है?
दक्षिण एशिया में बदलते सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरणों के बीच भारत और अफगानिस्तान के बढ़ते संपर्कों पर क्षेत्र के अन्य देशों की भी नजर है। हालांकि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार, कृषि और विकास सहयोग को मजबूत करना बताया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित संवाद दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


FAQ
- अफगान मंत्री ने भारत के साथ ‘Our DNA Is One’ क्यों कहा?
अफगानिस्तान के कृषि मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी ने भारत में मिले गर्मजोशी भरे स्वागत और दोनों देशों के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत उन्हें अपने ही देश जैसा लगा। इसी भावना को व्यक्त करते हुए उन्होंने “Our DNA is one” कहा। - अफगान मंत्री की भारत यात्रा का उद्देश्य क्या है?
इस यात्रा का उद्देश्य भारत के साथ कृषि, सिंचाई, पशुपालन, व्यापार, निवेश और विकास सहयोग को मजबूत करना था। साथ ही दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। - भारत और अफगानिस्तान के संबंध कितने पुराने हैं?
भारत और अफगानिस्तान के संबंध हजारों वर्ष पुराने हैं। दोनों देशों के बीच प्राचीन काल से व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सभ्यतागत संपर्क रहे हैं। आधुनिक दौर में भी भारत अफगानिस्तान के विकास और पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदार रहा है। - इस यात्रा का पाकिस्तान के साथ तनाव से क्या संबंध है?
यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा सुरक्षा और अन्य मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है। ऐसे में भारत और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता संवाद क्षेत्रीय कूटनीति की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि यात्रा का आधिकारिक उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना था। - दोनों देशों के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
बैठक में मानवीय सहायता, विकास साझेदारी, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, क्षमता निर्माण, खेल, व्यापार, वीजा सुविधा, कनेक्टिविटी तथा कृषि और सिंचाई क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। - भारत-अफगानिस्तान व्यापार संबंध कैसे हैं?
दोनों देशों के बीच कृषि उत्पाद, सूखे मेवे, केसर, औषधीय उत्पाद और अन्य वस्तुओं का व्यापार होता है। भारत अफगानिस्तान के प्रमुख विकास और व्यापारिक साझेदारों में शामिल है तथा दोनों देश व्यापार बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। - क्या इस यात्रा से क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ेगा?
भारत और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और आपसी विश्वास को मजबूत कर सकता है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव भविष्य में दोनों देशों के सहयोग और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

