भारत में Ethanol Blending को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग E20 Fuel से गाड़ियों के माइलेज और इंजन पर असर की चिंता जता रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार का दावा है कि Ethanol Blending Programme ने देश को आर्थिक, पर्यावरणीय और कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक लाभ पहुंचाया है। सरकार के अनुसार, 2014-15 से 2026 तक इस योजना के जरिए भारत ने ₹1.90 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा (Forex Savings) बचाई है और करोड़ों टन कच्चे तेल के आयात की जरूरत कम हुई है।आइए जानते हैं कि सरकार ने यह दावा किस आधार पर किया है और आखिर E20 Fuel को लेकर विवाद क्यों हो रहा है।
Ethanol Blending Programme क्या है?
Ethanol Blending Programme भारत सरकार की एक पहल है, जिसके तहत पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जाता है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो और स्वदेशी Renewable Fuel का उपयोग बढ़ सके।सरकार का लक्ष्य देश में E20 Fuel यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराना है। यह India Biofuel Policy का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और प्रदूषण कम करना है।

Ethanol Blending से भारत को क्या-क्या फायदा हुआ?
सरकार के मुताबिक, Ethanol Blending ने कई बड़े बदलाव किए हैं।
₹1.90 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बची
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के संयुक्त सचिव अश्विनी श्रीवास्तव के अनुसार, 2014-15 से 2026 तक एथेनॉल मिश्रण के कारण भारत ने 310 लाख टन से अधिक कच्चे तेल के आयात को प्रतिस्थापित किया, जिससे ₹1.90 लाख करोड़ से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बची।यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं।
CO₂ उत्सर्जन में बड़ी कमी
सरकार का दावा है कि इस कार्यक्रम से लगभग 930 लाख टन CO₂ उत्सर्जन कम हुआ है। इससे Green Fuel और Sustainable Energy को बढ़ावा मिला है और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिली है।
किसानों की आय बढ़ी
एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और मक्का जैसी फसलों की मांग बढ़ने से किसानों को अतिरिक्त बाजार मिला है। इससे कृषि क्षेत्र को भी सीधा लाभ पहुंचा है।
Ethanol Blending Programme से चीनी उद्योग को कैसे फायदा हुआ?
पहले सरकार को अतिरिक्त चीनी के निर्यात के लिए हजारों करोड़ रुपये की सब्सिडी देनी पड़ती थी।2014-15 से 2020-21 के बीच सरकार ने करीब ₹14,600 करोड़ की सहायता चीनी मिलों को दी थी। लेकिन अब अतिरिक्त चीनी का उपयोग Ethanol Fuel बनाने में होने लगा है।इससे चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति सुधरी है और किसानों के बकाया भुगतान में भी बड़ी कमी आई है।
मक्का बना Ethanol Fuel का नया आधार
पहले एथेनॉल उत्पादन में गन्ने की प्रमुख भूमिका थी, लेकिन अब मक्का (Maize) तेजी से सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है।सरकारी आंकड़ों के अनुसार–
- 2024-25 में तेल कंपनियों को सप्लाई किए गए एथेनॉल में 47% हिस्सा मक्का आधारित था।
- मौजूदा एथेनॉल वर्ष में यह हिस्सा लगभग 36% है।
- इससे मक्का किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है और Biofuel India को नया आधार मिला है।
E20 Fuel पर विवाद क्यों हो रहा है?
E20 Fuel को लेकर विवाद इसलिए है क्योंकि कुछ वाहन मालिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक एथेनॉल मिश्रण से माइलेज कम हो सकता है और पुराने इंजनों पर असर पड़ सकता है। हालांकि सरकार और उद्योग का कहना है कि कई वर्षों के परीक्षण के बाद ही E20 Fuel लागू किया गया है और इसे सुरक्षित पाया गया है। सरकार और Grain Ethanol Manufacturers Association (GEMA) का कहना है कि 2014 से 2018 के बीच चार वर्षों तक विभिन्न परिस्थितियों में E20 Fuel का परीक्षण किया गया। GEMA के अध्यक्ष सी.के. जैन के अनुसार, इन परीक्षणों में E20 Fuel सभी इंजनों के लिए सुरक्षित पाया गया। उनका कहना है कि इस विषय पर चर्चा तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि अफवाहों पर।
भारत की Ethanol उत्पादन क्षमता कितनी बढ़ी?
पिछले एक दशक में भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता में जबरदस्त वृद्धि हुई है।
- 2013-14: लगभग 21 करोड़ लीटर
- 2026: लगभग 2,000 करोड़ लीटर
यह वृद्धि भारत की Energy Security को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
Flex-Fuel Vehicles पर सरकार का अगला फोकस
सरकार अब Flex-Fuel Vehicles (FFVs) को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है।ये वाहन E20 से लेकर E100 तक अलग-अलग एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चल सकते हैं।भविष्य में E85 Fuel लाने की भी योजना है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे और पेट्रोल पर निर्भरता और कम होगी।
PMGKAY के चावल से भी मिलेगा फायदा
सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत वितरित होने वाले चावल में टूटे हुए दानों (Broken Rice) की सीमा 25% से घटाकर 10% कर दी है।इससे गरीबों को बेहतर गुणवत्ता वाला चावल मिलेगा, जबकि अतिरिक्त Broken Rice का उपयोग औद्योगिक कार्यों और एथेनॉल उत्पादन में किया जा सकेगा।
निष्कर्ष
भारत का Ethanol Blending कार्यक्रम अब केवल पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की योजना नहीं रह गया है। सरकार का दावा है कि इसने विदेशी मुद्रा बचाने, किसानों की आय बढ़ाने, चीनी उद्योग को मजबूत करने, Fuel Imports कम करने और पर्यावरण संरक्षण जैसे कई क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डाला है।हालांकि E20 Fuel को लेकर माइलेज और इंजन से जुड़े सवाल अभी भी चर्चा का विषय हैं, लेकिन सरकार और उद्योग दोनों का कहना है कि वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद ही इस कार्यक्रम को लागू किया गया है। आने वाले वर्षों में Ethanol Blending Programme भारत की ऊर्जा नीति का और भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
FAQs
Q1. भारत में Ethanol Blending Programme क्या है?
उत्तर: यह भारत सरकार की योजना है, जिसके तहत पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर कच्चे तेल के आयात को कम किया जाता है और स्वदेशी जैव ईंधन को बढ़ावा दिया जाता है।
Q2. E20 Fuel क्या होता है?
उत्तर: E20 Fuel में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण होता है।
Q3. सरकार के अनुसार Ethanol Blending से कितना Forex बचा?
उत्तर: सरकार का दावा है कि 2014-15 से 2026 तक ₹1.90 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाई गई।
Q4. Ethanol Blending से भारत को क्या लाभ हुआ?
उत्तर: इससे कच्चे तेल का आयात घटा, किसानों की आय बढ़ी, कार्बन उत्सर्जन कम हुआ और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई।
Q5. क्या सभी वाहन E20 Fuel का उपयोग कर सकते हैं?
उत्तर: नए E20-अनुकूल वाहनों में इसका उपयोग किया जा सकता है। पुराने वाहनों के लिए निर्माता की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

