Railway Land Encroachment को लेकर एक आरटीआई (RTI) में सामने आए आंकड़ों ने भारतीय रेलवे की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का खुलासा किया है। मार्च 2025 तक 1,068.54 हेक्टेयर Railway Land Under Encroachment पाई गई है। यह क्षेत्रफल इतना बड़ा है कि इसमें लगभग 42 नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम या करीब 1,496 फीफा मानक फुटबॉल मैदान समा सकते हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि पिछले पांच वर्षों में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण लगातार बढ़ा है, जबकि उसे हटाने की रफ्तार काफी धीमी रही।
आरटीआई में क्या खुलासा हुआ?
RTI Report के अनुसार मार्च 2025 तक भारतीय रेलवे की 1,068.54 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जा है। वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा 810.31 हेक्टेयर था, जो पांच वर्षों में लगभग 32 प्रतिशत बढ़ गया। रेलवे बोर्ड ने यह भी स्वीकार किया कि वह केवल पिछले पांच वर्षों का ही केंद्रीय रिकॉर्ड रखता है।

Railway Land Encroachment लगातार क्यों बढ़ रहा है?
रेलवे बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि 2021-22 में अतिक्रमण का क्षेत्रफल घटकर 782.81 हेक्टेयर हुआ था, लेकिन इसके बाद स्थिति तेजी से बिगड़ी।
- 2020-21: 810.31 हेक्टेयर
- 2021-22: 782.81 हेक्टेयर
- 2023-24: 1,078.55 हेक्टेयर
- 2024-25: 1,068.54 हेक्टेयर
सिर्फ एक वर्ष में लगभग 268 हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो पांच वर्षों में सबसे बड़ी छलांग रही।सरकार के अनुसार भारतीय रेलवे के पास लगभग 4.99 लाख हेक्टेयर भूमि है, जिसमें से लगभग 0.21 प्रतिशत जमीन फिलहाल अतिक्रमण की चपेट में है।
1,068 हेक्टेयर जमीन आखिर कितनी बड़ी है?
आंकड़ों को समझना आसान नहीं होता, इसलिए इसकी तुलना बड़े खेल परिसरों से की गई है।
- लगभग 42 नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम जितनी भूमि।
- करीब 1,496 FIFA Standard Football Fields के बराबर क्षेत्रफल।
- यह क्षेत्र किसी बड़े शहर के कई प्रमुख खेल परिसरों से भी अधिक है।
- यानी भारतीय रेलवे की इतनी बड़ी संपत्ति फिलहाल उसके उपयोग में नहीं है।
रेलवे ने कितनी जमीन वापस हासिल की?
Ministry of Railways के अनुसार पिछले पांच वर्षों में रेलवे ने केवल 98.02 हेक्टेयर जमीन ही अतिक्रमण से मुक्त कराई है।वापस मिली जमीन का उपयोग इन परियोजनाओं में किया जा रहा है–
- नई रेलवे लाइन और मल्टी-ट्रैकिंग
- यात्री टर्मिनल
- फ्रेट टर्मिनल
- रेलवे वर्कशॉप
अन्य रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं
जो जमीन तत्काल उपयोग में नहीं आती, उसे Rail Land Development Authority (RLDA) को व्यावसायिक विकास के लिए सौंप दिया जाता है।
सबसे बड़ा सवाल: रेलवे के पास 25 साल का रिकॉर्ड क्यों नहीं है?
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि रेलवे बोर्ड के पास 25 वर्षों का कोई केंद्रीकृत डेटा उपलब्ध नहीं है।आरटीआई में जब पिछले 25 वर्षों के अतिक्रमण का रिकॉर्ड मांगा गया तो रेलवे बोर्ड ने जवाब दिया कि वह केवल पिछले पांच वर्षों का डेटा ही रखता है।इतना ही नहीं, किस राज्य में सबसे ज्यादा रेलवे भूमि पर कब्जा है, इसका भी कोई केंद्रीय रिकॉर्ड रेलवे बोर्ड के पास नहीं है। इसके लिए अलग-अलग जोनल रेलवे कार्यालयों से जानकारी लेने की सलाह दी गई।यह डेटा गैप भविष्य की नीति और निगरानी दोनों पर सवाल खड़े करता है।
इस खुलासे का क्या मतलब है?
भारतीय रेलवे देश की सबसे बड़ी सरकारी संपत्तियों में से एक का मालिक है। ऐसी स्थिति में हजारों एकड़ भूमि पर अतिक्रमण न केवल सरकारी संपत्ति का नुकसान है बल्कि भविष्य की रेलवे परियोजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी असर डाल सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रेलवे के पास लंबे समय का डिजिटल रिकॉर्ड और बेहतर निगरानी व्यवस्था हो, तो Government Land Encroachment जैसी समस्याओं पर अधिक प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाया जा सकता है।
निष्कर्ष
Railway Land Encroachment पर सामने आए ताजा RTI Report ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा एक गंभीर चुनौती बन चुका है। मार्च 2025 तक 1,068.54 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमण की चपेट में है, जबकि पिछले पांच वर्षों में केवल 98.02 हेक्टेयर जमीन ही वापस हासिल की जा सकी। अब सबसे बड़ी जरूरत पारदर्शी रिकॉर्ड, बेहतर निगरानी और तेज कार्रवाई की है, ताकि देश की महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्ति सुरक्षित रह सके।
FAQs:
RTI Report के अनुसार मार्च 2025 तक भारतीय रेलवे की 1,068.54 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जा है।
मार्च 2025 तक कुल 1,068.54 हेक्टेयर रेलवे भूमि पर अतिक्रमण दर्ज किया गया है।
पिछले पांच वर्षों में अतिक्रमण लगातार बढ़ा है, जबकि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अपेक्षाकृत धीमी रही है और लंबे समय का केंद्रीकृत रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है।
रेलवे ने पिछले पांच वर्षों में 98.02 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। इस जमीन का उपयोग रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों में किया जा रहा है।
नहीं। रेलवे बोर्ड ने आरटीआई के जवाब में बताया कि वह केवल पिछले पांच वर्षों का ही केंद्रीय रिकॉर्ड रखता है।

