भारत में चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की पकड़ हुई कमजोर, 2020 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुँची बाजार हिस्सेदारी; जानिए क्या है इसकी वजह!

Chinese Smartphone Companies in India

भारत के स्मार्टफोन बाजार में वर्षों तक दबदबा रखने वाली चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की पकड़ अब कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। मार्केट रिसर्च फर्म Counterpoint Research की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में भारतीय बाजार में चीनी स्मार्टफोन ब्रांड्स की संयुक्त बाजार हिस्सेदारी वर्ष 2020 के बाद दूसरी तिमाही के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है। बढ़ती उत्पादन लागत, कमजोर उपभोक्ता मांग और स्मार्टफोन बदलने की लंबी होती अवधि इस गिरावट की प्रमुख वजह मानी जा रही हैं।

भारत के स्मार्टफोन बाजार की मौजूदा स्थिति

Counterpoint Research के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के दौरान भारत में कुल स्मार्टफोन शिपमेंट में साल-दर-साल 10% की गिरावट दर्ज की गई। यह पिछले छह वर्षों की सबसे कमजोर जून तिमाही रही। रिपोर्ट के मुताबिक, कमजोर मांग और बढ़ती लागत का असर लगभग सभी प्रमुख स्मार्टफोन कंपनियों पर देखने को मिला। हालांकि, चुनौतीपूर्ण बाजार परिस्थितियों के बावजूद कुछ कंपनियों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।

चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी क्यों घटी?

  1. स्मार्टफोन की कीमतों में बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, NAND Flash और DRAM जैसे मेमोरी चिप्स की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इससे स्मार्टफोन निर्माण की लागत बढ़ी और कंपनियों को अपने कई मॉडलों की कीमतों में इजाफा करना पड़ा। इसका सबसे अधिक असर बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन सेगमेंट पर पड़ा।

  1. बजट सेगमेंट में कमजोर मांग

भारत में Xiaomi, Vivo, Oppo और Realme जैसे ब्रांड्स की बड़ी बिक्री एंट्री-लेवल और मिड-रेंज स्मार्टफोन सेगमेंट पर निर्भर करती है।

  1. लोग अब जल्दी स्मार्टफोन नहीं बदल रहे

बेहतर प्रोसेसर, लंबे समय तक मिलने वाले सॉफ़्टवेयर अपडेट और बेहतर बैटरी लाइफ के कारण उपभोक्ता अब अपने स्मार्टफोन पहले की तुलना में अधिक समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे नए स्मार्टफोन की मांग पर असर पड़ा है।

  1. कमजोर उपभोक्ता मांग

Counterpoint Research के अनुसार, कमजोर उपभोक्ता मांग और बढ़ती कीमतों के कारण कई ग्राहकों ने नया स्मार्टफोन खरीदने या पुराने फोन को अपग्रेड करने का फैसला टाल दिया। इसका सीधा असर स्मार्टफोन शिपमेंट और बाजार हिस्सेदारी पर देखने को मिला।

किन चीनी कंपनियों पर सबसे अधिक असर पड़ा?

बाजार में आई इस गिरावट का असर कई प्रमुख चीनी स्मार्टफोन कंपनियों पर देखने को मिला, जिनमें शामिल हैं-

  • Xiaomi
  • Vivo
  • Oppo
  • Realme
  • OnePlus
  • iQOO
  • Poco

हालांकि, इन सबके बीच Vivo लगभग 18% बाजार हिस्सेदारी के साथ दूसरी तिमाही में भारत का सबसे बड़ा स्मार्टफोन ब्रांड बना रहा। इसके बावजूद चीनी ब्रांड्स की संयुक्त बाजार हिस्सेदारी वर्ष 2020 के बाद दूसरी तिमाही के सबसे निचले स्तर पर दर्ज की गई।

किन कंपनियों को मिला फायदा?

जहाँ अधिकांश चीनी कंपनियों की शिपमेंट घटी, वहीं Samsung शीर्ष पाँच स्मार्टफोन कंपनियों में एकमात्र ऐसा ब्रांड रहा जिसने साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की। वहीं, Nothing ने सबसे तेज़ वृद्धि दर्ज करते हुए अपनी शिपमेंट में 105% की सालाना बढ़ोतरी हासिल की। दूसरी ओर, Apple के प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग बनी रही। हालांकि, सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के कारण कंपनी की कुल शिपमेंट में करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई।

 

क्या सरकारी नीतियों का भी पड़ा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारत सरकार द्वारा स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना लागू करने और नियामकीय निगरानी बढ़ाने से स्मार्टफोन उद्योग में प्रतिस्पर्धा का स्वरूप बदला है। हालांकि, Counterpoint Research के अनुसार मौजूदा तिमाही में बाजार हिस्सेदारी में आई गिरावट का मुख्य कारण सरकारी नीतियाँ नहीं, बल्कि कमजोर उपभोक्ता मांग, बढ़ती कीमतें और स्मार्टफोन बदलने की लंबी होती अवधि रही।

 

आगे क्या रह सकती है स्थिति?

विश्लेषकों का मानना है कि यदि मेमोरी चिप्स की कीमतों में स्थिरता आती है और त्योहारी सीजन के दौरान मांग बढ़ती है, तो भारतीय स्मार्टफोन बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है। Counterpoint Research का मानना है कि लागत का दबाव बना रहने पर वर्ष 2026 के दौरान भारतीय स्मार्टफोन बाजार पर दबाव जारी रह सकता है। ऐसे में कंपनियाँ किफायती 5G और 4G स्मार्टफोन लॉन्च कर ग्राहकों को आकर्षित करने की रणनीति अपना सकती हैं।

 

निष्कर्ष

भारतीय स्मार्टफोन बाजार में प्रतिस्पर्धा का स्वरूप लगातार बदल रहा है। वर्षों तक मजबूत पकड़ रखने वाली चीनी स्मार्टफोन कंपनियाँ बढ़ती उत्पादन लागत, कमजोर उपभोक्ता मांग और बदलती खरीदारी की आदतों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। वहीं, Samsung और Nothing जैसी कंपनियों ने इस चुनौतीपूर्ण बाजार में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि Apple ने प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखी। आने वाले महीनों में त्योहारी सीजन की बिक्री, नए स्मार्टफोन लॉन्च और उपभोक्ता मांग में सुधार यह तय करेंगे कि चीनी स्मार्टफोन कंपनियाँ भारतीय बाजार में अपनी खोई हुई हिस्सेदारी वापस हासिल कर पाती हैं या नहीं।

 

मुख्य बातें

  • अप्रैल-जून 2026 में भारत की स्मार्टफोन शिपमेंट में 10% की गिरावट दर्ज की गई।
  • चीनी स्मार्टफोन ब्रांड्स की संयुक्त बाजार हिस्सेदारी वर्ष 2020 के बाद दूसरी तिमाही के सबसे निचले स्तर पर पहुँची।
  • Vivo लगभग 18% बाजार हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा स्मार्टफोन ब्रांड रहा।
  • Samsung शीर्ष पाँच कंपनियों में साल-दर-साल वृद्धि दर्ज करने वाला एकमात्र ब्रांड रहा।
  • Nothing ने 105% की सालाना शिपमेंट वृद्धि दर्ज की।
  • Apple के प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग बनी रही, लेकिन सप्लाई संबंधी चुनौतियों के कारण कुल शिपमेंट में लगभग 3% की गिरावट आई।

 

FAQs

  1. भारत में चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी क्यों घटी?

स्मार्टफोन की बढ़ती उत्पादन लागत, कमजोर उपभोक्ता मांग, मेमोरी चिप्स की बढ़ी कीमतें और स्मार्टफोन बदलने की लंबी होती अवधि इसके प्रमुख कारण हैं।

 

  1. किन चीनी स्मार्टफोन ब्रांड्स पर सबसे अधिक असर पड़ा है?

Xiaomi, Oppo, Realme, OnePlus, Poco, iQOO और अन्य प्रमुख चीनी ब्रांड्स की बाजार हिस्सेदारी और शिपमेंट पर असर देखने को मिला है।

 

  1. भारत के स्मार्टफोन बाजार में अब कौन-सी कंपनियां आगे हैं?

दूसरी तिमाही में Vivo सबसे बड़ा स्मार्टफोन ब्रांड रहा। वहीं Samsung शीर्ष पाँच कंपनियों में वृद्धि दर्ज करने वाला एकमात्र ब्रांड रहा, जबकि Nothing सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला ब्रांड बना।

 

  1. क्या सरकारी नीतियों का चीनी कंपनियों पर प्रभाव पड़ा है?

स्थानीय विनिर्माण और PLI जैसी योजनाओं ने बाजार की प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किया है। हालांकि, हालिया गिरावट का मुख्य कारण कमजोर मांग, बढ़ती कीमतें और स्मार्टफोन बदलने की लंबी होती अवधि रही है।

 

  1. भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद में क्या बदलाव आया है?

उपभोक्ता अब अपने स्मार्टफोन पहले की तुलना में अधिक समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं और नया फोन खरीदते समय कीमत, फीचर्स तथा लंबे सॉफ़्टवेयर सपोर्ट को अधिक महत्व दे रहे हैं।

 

  1. क्या Apple और Samsung को इसका लाभ मिला है?

Samsung ने दूसरी तिमाही में साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की। वहीं Apple के प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग बनी रही, हालांकि सप्लाई संबंधी चुनौतियों के कारण उसकी कुल शिपमेंट में हल्की गिरावट दर्ज की गई।