Oil Prices Rise: अमेरिका-ईरान टकराव से 6 हफ्ते की सबसे ऊंची कीमत पर पहुंचा कच्चा तेल, दुनिया भर में बढ़ी महंगाई की चिंता

Oil Prices Rise

Oil Prices Rise एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता बन गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और लाल सागर (Red Sea) में तेल टैंकरों पर बढ़ते खतरे तथा यमन के हूती विद्रोहियों की नई कार्रवाई के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 88 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता दिखाई दिया। लगातार दूसरे दिन आई इस तेजी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर भी नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचा ब्रेंट और WTI

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा (Brent Crude Futures) करीब 2 प्रतिशत की तेजी के साथ 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इससे एक दिन पहले भी इसमें 3 डॉलर से अधिक की तेजी दर्ज की गई थी और यह 94.07 डॉलर पर बंद हुआ था। दूसरी ओर अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड लगभग 1.7 प्रतिशत बढ़कर 88.27 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को भी इसमें लगभग 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।

विश्लेषकों का मानना है कि यह तेजी केवल मांग बढ़ने की वजह से नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति (Supply) को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता का परिणाम है। निवेशकों को डर है कि यदि मध्य पूर्व का संकट और गहराया तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।

 

अमेरिकी हमलों से बढ़ा टकराव

तेल बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता सैन्य संघर्ष है। अमेरिकी सेना ने ईरान पर लगातार बारहवीं रात भी हमले किए। इससे कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज को निशाना बनाता है तो अमेरिका उसके जवाब में ईरान के किसी पुल या बिजली संयंत्र को नष्ट कर देगा। इस बयान ने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच टकराव अब और गंभीर रूप ले सकता है।

 

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का सख्त रुख

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में बारूदी सुरंगों वाले मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे एक तेल टैंकर में विस्फोट के बाद आग लग गई, जबकि दो अन्य टैंकर बीच रास्ते से लौट गए। गार्ड्स ने यह भी कहा कि जब तक अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य उनके नियंत्रण में रहेगा और किसी भी तेल टैंकर को ईरान के समन्वय के बिना प्रवेश या निकास की अनुमति नहीं दी जाएगी।

यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यदि यहां लंबी अवधि तक व्यवधान बना रहता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

 

लाल सागर में हूतियों ने खोला नया मोर्चा

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी संघर्ष को नया मोड़ देते हुए सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) की घोषणा कर दी। हूतियों ने कहा कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb Strait) से गुजरने वाले सऊदी तेल टैंकर अब उनके निशाने पर होंगे।

समूह ने दावा किया कि उसने दो सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाया है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार हूतियों द्वारा बताए गए जहाजों में से एक, सऊदी ध्वज वाला तेल टैंकर ‘Encelia’, लाल सागर में हमले का शिकार हुआ। हूतियों ने यह भी दावा किया कि उनकी चेतावनी के बाद लगभग 10 जहाजों ने अपना रास्ता बदल दिया और सऊदी बंदरगाहों की ओर जाने से इनकार कर दिया। हालांकि समाचार एजेंसी रॉयटर्स स्वतंत्र रूप से इस दावे की पुष्टि नहीं कर सकी।

 

वैश्विक तेल आपूर्ति पर बढ़ा खतरा

अब तक तेल बाजार की चिंता मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित थी, लेकिन लाल सागर में हूतियों की नई कार्रवाई ने जोखिम को और बढ़ा दिया है। यदि होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों समुद्री मार्गों पर लगातार खतरा बना रहता है तो एशिया, यूरोप और अफ्रीका तक तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि निवेशकों ने संभावित आपूर्ति संकट को देखते हुए तेल की खरीद बढ़ा दी, जिससे कीमतों में तेजी आई।

 

अमेरिकी भंडार बढ़ा, फिर भी कीमतें चढ़ीं

आमतौर पर जब कच्चे तेल का भंडार बढ़ता है तो कीमतों पर दबाव पड़ता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार पिछले सप्ताह अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार लगभग 20 लाख बैरल बढ़ गया। रिफाइनरियों की गतिविधियां धीमी पड़ने, निर्यात घटने और आयात बढ़ने से यह वृद्धि हुई। बाजार को उम्मीद थी कि भंडार में लगभग 11 लाख बैरल की कमी आएगी, लेकिन वास्तविक आंकड़े इसके उलट रहे। इसके बावजूद भू-राजनीतिक तनाव इतना बड़ा रहा कि भंडार बढ़ने का असर कीमतों पर दिखाई नहीं दिया।

 

भारत पर कितना पड़ सकता है असर

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ता है। यदि तेल लंबे समय तक 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के बीच बना रहता है तो पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन और परिवहन लागत पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि खुदरा ईंधन कीमतों में बदलाव का फैसला तेल विपणन कंपनियां कई अन्य आर्थिक कारकों को ध्यान में रखकर करती हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़ने का असर तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचे, यह जरूरी नहीं है।

 

अभी भी रिकॉर्ड स्तर से नीचे है तेल

हालांकि मौजूदा तेजी ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें अभी भी इस संघर्ष के शुरुआती दौर में बने लगभग 126 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से काफी नीचे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव कम होता है और समुद्री मार्ग सामान्य रहते हैं तो कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है। वहीं यदि सैन्य कार्रवाई और तेज होती है या प्रमुख समुद्री मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहते हैं तो तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर की ओर बढ़ सकता है।

 

FAQs

  1. कच्चे तेल की कीमतें 96 डॉलर तक क्यों पहुंच गईं?
    अमेरिका-ईरान सैन्य तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट और लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमलों की वजह से वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी, जिससे कीमतों में तेजी आई।
  2. अमेरिका-ईरान तनाव का तेल बाजार पर क्या असर पड़ा?
    निवेशकों को तेल आपूर्ति बाधित होने का डर बढ़ा, जिसके कारण ब्रेंट और WTI दोनों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई।
  3. क्या भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं?
    यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है तो भारत के आयात बिल और ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि खुदरा कीमतों का फैसला कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
  4. ब्रेंट क्रूड और WTI में क्या अंतर है?
    ब्रेंट क्रूड उत्तरी सागर से निकलने वाला वैश्विक बेंचमार्क है, जबकि WTI अमेरिका में उत्पादित कच्चा तेल है और अमेरिकी बाजार का प्रमुख मानक माना जाता है।
  5. वैश्विक तेल बाजार में आगे क्या संभावना है?
    यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है या होर्मुज तथा लाल सागर के समुद्री मार्ग बाधित होते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। वहीं तनाव कम होने पर कीमतों में नरमी आने की संभावना रहेगी।