Anantnag Terror Attack: बुधवार, 23 जुलाई को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के लाल चौक इलाके में अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। इस हमले के तुरंत बाद पूरे कश्मीर घाटी में अब तक के सबसे बड़े आतंक विरोधी अभियानों में से एक शुरू किया गया, जिसके तहत 1000 से अधिक संदिग्ध ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल हमलावर को पकड़ना नहीं, बल्कि आतंकियों को मदद पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है।

बाजार में खरीदारी कर रहे पुलिसकर्मी को बनाया निशाना
पुलिस अधिकारियों के अनुसार 35 वर्षीय हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी बडगाम जिले के रहने वाले थे और अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात थे। दोपहर लगभग 12:30 बजे वह अनंतनाग के लाल चौक बाजार में एक दुकान से सामान खरीद रहे थे। इसी दौरान एक अकेला आतंकी, जिसे शुरुआती जांच में पाकिस्तानी नागरिक माना जा रहा है, दुकान के बाहर कपड़े में लिपटी असॉल्ट राइफल के साथ खड़ा था।
दुकानदार को हमलावर की मंशा का अंदाजा नहीं था। उसने सामान्य ग्राहक समझकर उससे पूछा कि क्या उसे कुछ खरीदना है। तभी आतंकी ने अचानक कपड़े में छिपी राइफल निकाली और हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी पर नजदीक से कई गोलियां चला दीं।
गंभीर रूप से घायल कुरैशी को तुरंत अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह वर्ष 2026 में घाटी में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाकर किया गया पहला बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है।
TRF ने ली हमले की जिम्मेदारी
हमले के कुछ ही समय बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने सोशल मीडिया के जरिए इस हमले की जिम्मेदारी ली।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि TRF पिछले कुछ वर्षों से कश्मीर में कई लक्षित हत्याओं और आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय रहा है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इसे लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन मानती हैं, जिसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की पहचान छिपाने के लिए किया जाता है।

पूरे इलाके की घेराबंदी, आतंकियों की तलाश शुरू
हमले के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे लाल चौक और आसपास के क्षेत्रों की घेराबंदी कर दी। अतिरिक्त सुरक्षा बलों को मौके पर भेजा गया और बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया गया।

इलाके से बाहर जाने वाले सभी रास्तों पर नाकेबंदी कर वाहनों और लोगों की गहन जांच शुरू की गई। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुट गईं कि हमले में केवल एक आतंकी शामिल था या उसके साथ अन्य सहयोगी भी मौजूद थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि हमलावर फायरिंग के बाद किस दिशा में भागा और उसे स्थानीय स्तर पर किसने मदद पहुंचाई।
DGP ने खुद संभाली कमान
हमले की गंभीरता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक (DGP) नलिन प्रभात स्वयं अनंतनाग पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था और तलाशी अभियान की समीक्षा की।
इसके बाद पूरे दक्षिण कश्मीर में आतंक विरोधी अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए गए। पुलिस, सेना और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाते हुए कई जिलों में एक साथ कार्रवाई शुरू कर दी गई ताकि हमलावर और उसके सहयोगियों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।
घाटी में शुरू हुआ व्यापक Anti Terror Operation
अनंतनाग में हुए इस हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने केवल घटनास्थल तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी। अभियान को तेजी से पूरे कश्मीर घाटी तक विस्तारित कर दिया गया।
अनंतनाग, श्रीनगर, पुलवामा, बडगाम, कुलगाम और शोपियां सहित कई जिलों में एक साथ सर्च ऑपरेशन शुरू किए गए। सुरक्षा एजेंसियों ने उन सभी इलाकों को प्राथमिकता दी जहां आतंकियों के छिपे होने या उन्हें स्थानीय मदद मिलने की आशंका थी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह केवल एक सामान्य तलाशी अभियान नहीं, बल्कि आतंकवाद को स्थानीय स्तर पर मिलने वाले समर्थन तंत्र को तोड़ने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियों ने एक साथ कई जिलों में समन्वित कार्रवाई शुरू की, ताकि किसी भी संदिग्ध नेटवर्क को सक्रिय होने का मौका न मिल सके।
1000 से ज्यादा संदिग्ध हिरासत में, आतंकियों के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई
अनंतनाग हमले के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घाटीभर में बड़े पैमाने पर आतंक विरोधी अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार 1000 से अधिक संदिग्ध ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) और आतंकियों के सहयोगियों को पूछताछ एवं सत्यापन के लिए हिरासत में लिया गया। इनमें सबसे अधिक कार्रवाई श्रीनगर में हुई, जहां करीब 700 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
पुलिस का कहना है कि यह अभियान विश्वसनीय खुफिया सूचनाओं और चल रही जांच के आधार पर शुरू किया गया। हिरासत में लिए गए लोगों से स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत पूछताछ की जा रही है ताकि आतंकियों को स्थानीय स्तर पर मिलने वाले सहयोग की पूरी कड़ी सामने लाई जा सके।
आतंकियों को मदद पहुंचाने वाले नेटवर्क पर सबसे बड़ा प्रहार
जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल हमलावर को पकड़ना नहीं, बल्कि आतंकवाद के पूरे सपोर्ट सिस्टम को खत्म करना है। जांच एजेंसियां ऐसे लोगों की पहचान कर रही हैं जो आतंकियों को ठिकाना, हथियार, वित्तीय सहायता, संचार सुविधा, परिवहन या अन्य तरह की रसद उपलब्ध कराते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे स्थानीय नेटवर्क सक्रिय रहने तक आतंकवादी संगठन घाटी में हमले करने में सक्षम रहते हैं। इसलिए इस बार कार्रवाई सीधे उसी तंत्र को निशाना बनाकर की जा रही है।
अलग-अलग जिलों में एक साथ चला अभियान
श्रीनगर में सबसे बड़ी कार्रवाई के अलावा पुलवामा, शोपियां, बडगाम, कुलगाम और अनंतनाग में भी सुरक्षा अभियान तेज कर दिया गया।
पुलवामा में पुलिस ने कई स्थानों पर मोबाइल चेक पोस्ट बनाकर वाहनों और लोगों की गहन तलाशी शुरू की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शफात नजर स्वयं तलाशी अभियान की निगरानी करते रहे।
शोपियां में पुलिस और सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया ताकि किसी भी आतंकी गतिविधि या शांति भंग करने की कोशिश को रोका जा सके।
बडगाम में पुलिस की निवारक कार्रवाई के दौरान 200 से अधिक संदिग्धों, जिनमें ओवरग्राउंड वर्कर्स, उपद्रवी तत्व और मादक पदार्थों से जुड़े आरोपी भी शामिल थे, को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सभी प्रभावित जिलों में अभियान की लगातार निगरानी की।
शहीद पुलिसकर्मी को दी गई अंतिम श्रद्धांजलि
अनंतनाग पुलिस लाइन में जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों ने शहीद हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी को श्रद्धांजलि दी। तिरंगे में लिपटे उनके पार्थिव शरीर को बाद में उनके पैतृक गांव बडगाम भेजा गया, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। परिवार और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में भावुक माहौल देखने को मिला।
मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल ने की कड़ी निंदा
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हमले को कायराना आतंकी वारदात बताते हुए कहा कि शहीद पुलिसकर्मी का बलिदान शांति बहाल करने के प्रयासों को कमजोर नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों से प्रशासन का संकल्प और मजबूत होगा। हालांकि उन्होंने मौके पर किसी राजनीतिक टिप्पणी से इनकार करते हुए कहा कि पहले शहीद जवान को सम्मान देना जरूरी है, बाकी मुद्दों पर बाद में चर्चा होगी।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस जघन्य वारदात के जिम्मेदार आतंकियों और उनके सहयोगियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सुरक्षा बल जल्द ही दोषियों को न्याय के कटघरे तक पहुंचाएंगे।
सीपीआई (एम) नेता एम.वाई. तारीगामी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन और अपनी पार्टी के प्रमुख अल्ताफ बुखारी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी इस हमले की निंदा की।
घाटी में हाल के प्रमुख आतंकी घटनाक्रम
अनंतनाग हमला ऐसे समय हुआ है जब सुरक्षा बल पिछले कुछ महीनों से आतंकवाद के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं।
18 जुलाई को राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के तारकुंडी सेक्टर में संदिग्ध घुसपैठ की कोशिश के बाद भारतीय सेना और संदिग्ध आतंकियों के बीच करीब डेढ़ घंटे तक रुक-रुक कर गोलीबारी हुई थी। हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।
इससे पहले 8 जुलाई को शोपियां में संयुक्त अभियान के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर जाकिर अहमद गनी को मार गिराया गया था। वह पहलगाम आतंकी हमले के बाद जारी 14 मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शामिल था।

FAQs
- अनंतनाग आतंकी हमले में क्या हुआ?
अनंतनाग के लाल चौक क्षेत्र में अमरनाथ यात्रा सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। - इस हमले में किस पुलिसकर्मी की मौत हुई?
जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी शहीद हुए। वह बडगाम जिले के निवासी थे। - दक्षिण कश्मीर में आतंक विरोधी अभियान क्यों शुरू किया गया?
हमले के बाद आतंकियों और उन्हें स्थानीय सहायता देने वाले नेटवर्क को खत्म करने के लिए पूरे कश्मीर में व्यापक Anti Terror Operation शुरू किया गया। - अभियान में कौन-कौन सी सुरक्षा एजेंसियां शामिल हैं?
जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना, सीआरपीएफ और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से अभियान चला रही हैं। - क्या किसी आतंकी को पकड़ा या मार गिराया गया है?
फिलहाल हमलावर की तलाश जारी है। हालांकि 1000 से अधिक संदिग्ध ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) और सहयोगियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। - हमले के पीछे किस संगठन का हाथ होने की आशंका है?
पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है।

