12 जून को शिकायत के बाद सस्पेंड हुआ था लाइसेंस
मामला 12 जून को शुरू हुआ, जब खाद्य विषाक्तता की शिकायत के बाद FDA के फूड सेफ्टी अधिकारी ने दुकान का निरीक्षण किया। जांच में दुकान की साफ-सफाई और कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़ी कमियां सामने आईं।
इसके बाद FDA ने उसी दिन दुकान का फूड लाइसेंस सस्पेंड कर दिया। दुकान के मालिकों ने कमियां दूर करने के बाद FDA कमिश्नर के सामने अपील की और Compliance Report जमा की।
13 जुलाई की जांच में 98% सुधार मिला
FDA ने 13 जुलाई को दुकान की दोबारा जांच की। इस निरीक्षण में दुकान 98 फीसदी तक नियमों का पालन करती हुई मिली। इसके बावजूद लाइसेंस बहाल नहीं किया गया।
दुकान के मालिकों ने FDA को फिर आवेदन देकर सस्पेंशन वापस लेने की मांग की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में बताया गया कि जून से दुकान बंद रहने के कारण करीब 8.74 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
हाईकोर्ट ने FDA की कार्रवाई पर क्यों जताई नाराजगी?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि FDA की खाद्य सुरक्षा को लेकर मंशा अच्छी है, लेकिन 98 फीसदी अनुपालन सामने आने के बाद भी लाइसेंस सस्पेंड रखना जरूरत से ज्यादा कार्रवाई है।
बेंच ने कहा कि विभाग को 98 फीसदी Compliance सामने आने के बाद लाइसेंस तुरंत बहाल कर देना चाहिए था। कोर्ट ने होटल और खाने-पीने के प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड करने की विभागीय नीति को “strange” और “perverse” भी बताया।
कोर्ट की आपत्ति खाद्य सुरक्षा नियम लागू करने पर नहीं, बल्कि कमियां दूर होने के बाद लाइसेंस बहाल करने में हुई देरी पर थी।
FDA को देना होगा 5 लाख रुपये
हाईकोर्ट ने Gurunanak Dairy and Sweets को दोबारा कारोबार शुरू करने की अनुमति दे दी। साथ ही FDA को एक महीने के भीतर दुकान को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
दुकान की ओर से 8.74 लाख रुपये के राजस्व नुकसान की बात कही गई थी, लेकिन कोर्ट ने 5 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया।
महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तूकाराम मुंढे ने कहा कि वह कोर्ट का आदेश देखने के बाद प्रतिक्रिया देंगे। उन्होंने कहा कि FDA कानून और तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करता है।
महाराष्ट्र में FDA की कार्रवाई के बीच आया फैसला
यह फैसला ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र FDA का “Safe Food, Safe Drug, Safe Maharashtra” अभियान चल रहा है। 13 अगस्त को FDA टीमों ने राज्य में 86 प्रतिष्ठानों की जांच की थी। इनमें रेस्टोरेंट और क्विक-कॉमर्स से जुड़े प्रतिष्ठान भी शामिल थे।
जांच के दौरान 60 सुधार नोटिस जारी किए गए, एक प्रतिष्ठान को तत्काल बंद करने का आदेश दिया गया और 14 फूड बिजनेस लाइसेंस सस्पेंड किए गए।
इस कार्रवाई में पुणे का 1992 से चल रहा East Street स्थित Burger King आउटलेट, लोनावला के Hotel Sayaji का Fortune Enterprises, लोहेगांव का Hotel Chul Mutton और कराड के Domino’s व Pizza Hut आउटलेट भी शामिल थे। पुणे डिवीजन में 11 से 14 अगस्त के बीच 16 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन हाइजीन से जुड़ी कमियों के कारण सस्पेंड किए गए।
फैसले से क्या संदेश गया?
Pune Food Licence Case में हाईकोर्ट ने खाद्य सुरक्षा नियमों की जरूरत पर सवाल नहीं उठाया। फैसला मुख्य रूप से इस बात पर है कि किसी कारोबारी प्रतिष्ठान में कमियां मिलने पर कार्रवाई करने के साथ-साथ सुधार होने के बाद उसे समय पर राहत भी मिलनी चाहिए।
Gurunanak Dairy and Sweets के मामले में शुरुआती जांच के बाद लाइसेंस सस्पेंड किया गया, लेकिन बाद की जांच में 98 फीसदी अनुपालन सामने आने के बावजूद लाइसेंस बहाल नहीं हुआ। इसी देरी को कोर्ट ने अनुचित माना और 5 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया।