Tamil Madras High Court Language: मद्रास हाई कोर्ट में तमिल बनेगी प्रमुख भाषा, CM विजय का प्रस्ताव; क्या केंद्र देगा मंजूरी?
तमिलनाडु के CM विजय ने मद्रास हाई कोर्ट की प्रमुख भाषा के रूप में तमिल को मान्यता देने का प्रस्ताव पेश किया। सरकार ने कानूनी तमिल और ट्रांसलेशन टेक्नोलॉजी में विकास का हवाला दिया। अब प्रस्ताव पर केंद्र की मंजूरी अहम होगी।
Tamil Madras High Court Language: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 3 सितंबर 2026 को विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें केंद्र सरकार से मद्रास हाई कोर्ट की प्रमुख भाषा के रूप में तमिल को मान्यता देने की मांग की गई है। प्रस्ताव में तमिल की प्राचीनता, कानूनी शब्दावली में हुए विकास और टेक्नोलॉजी आधारित ट्रांसलेशन सुविधाओं का हवाला दिया गया है। सरकार यह भी चाहती है कि हाई कोर्ट के सभी फैसले, डिक्री और न्यायिक आदेश तमिल में उपलब्ध कराने के लिए एक तय फ्रेमवर्क बनाया जाए।यह मुद्दा नया नहीं है। तमिलनाडु विधानसभा पहले भी 6 दिसंबर 2006 को मद्रास हाई कोर्ट में तमिल के इस्तेमाल के समर्थन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर चुकी है। अब करीब दो दशक बाद राज्य सरकार ने इस मांग को फिर केंद्र के सामने रखा है।
तमिल को लेकर फिर क्यों उठी हाई कोर्ट में भाषा की मांग?
तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि तमिल दुनिया की प्राचीन भाषाओं में से एक है और इसकी व्याकरणिक व साहित्यिक परंपरा कई हजार वर्षों पुरानी है। सरकार के अनुसार पिछले वर्षों में कानूनी क्षेत्र में भी तमिल शब्दावली का काफी विकास हुआ है।प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि आज टेक्नोलॉजी के कारण भाषा से जुड़ी कई पुरानी दिक्कतों को कम किया जा सकता है। ट्रांसलेशन टेक्नोलॉजी, ई-कोर्ट्स, लीगल डेटाबेस और दूसरी डिजिटल सुविधाओं के जरिए अदालत की कार्यवाही और दस्तावेजों को तमिल में उपलब्ध कराना पहले की तुलना में ज्यादा आसान हो सकता है।
सरकार का जोर सिर्फ कोर्ट की कार्यवाही में तमिल के इस्तेमाल पर नहीं है। वह ऐसा सिस्टम चाहती है, जिसके तहत मद्रास हाई कोर्ट के सभी जजमेंट, डिक्री और न्यायिक आदेश तमिल में भी उपलब्ध हों। इससे तमिल में कानूनी जानकारी हासिल करने वाले लोगों के लिए अदालत के फैसलों को समझना आसान हो सकता है।
अभी मद्रास हाई कोर्ट की भाषा क्या है?
भारत के संविधान का अनुच्छेद 348 सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की न्यायिक कार्यवाही में अंग्रेजी के इस्तेमाल से जुड़ा प्रावधान करता है। अनुच्छेद 348(1) के तहत जब तक संसद कानून बनाकर कुछ और तय नहीं करती, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की कार्यवाही अंग्रेजी में होती है।वहीं अनुच्छेद 348(2) राज्य की आधिकारिक भाषा या किसी अन्य राज्य भाषा को हाई कोर्ट की कार्यवाही में इस्तेमाल करने का रास्ता देता है। इसके लिए संबंधित राज्य के राज्यपाल को राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से अनुमति देनी होती है। हालांकि हाई कोर्ट के जजमेंट, डिक्री और आदेश के संबंध में अंग्रेजी की संवैधानिक आवश्यकता बनी रहती है।
यानी तमिलनाडु सरकार केवल विधानसभा में प्रस्ताव पास करके तमिल को हाई कोर्ट की प्रमुख भाषा नहीं बना सकती। इसके लिए संविधान में मौजूद प्रक्रिया के तहत केंद्र और राष्ट्रपति की भूमिका भी आती है।
2006 में भी विधानसभा ने पास किया था प्रस्ताव
मद्रास हाई कोर्ट में Tamil High Court language की मांग करीब 20 साल पुरानी है। 6 दिसंबर 2006 को तमिलनाडु विधानसभा ने तमिल को हाई कोर्ट में इस्तेमाल करने के समर्थन में एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था।यह प्रस्ताव बाद में केंद्र सरकार को भेजा गया। केंद्र ने इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के सामने भी रखा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया। अब राज्य सरकार ने उसी पुराने प्रयास को नए सिरे से आगे बढ़ाने की कोशिश की है।
केंद्र सरकार के 2015 के एक आधिकारिक जवाब में भी बताया गया था कि तमिलनाडु समेत कुछ राज्यों की हाई कोर्ट में क्षेत्रीय भाषाओं के इस्तेमाल से जुड़ी मांगों पर सुप्रीम कोर्ट से विचार किया गया था और उस समय प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए गए थे।
CM विजय के नए प्रस्ताव में क्या बदला है?
राज्य सरकार का कहना है कि 2006 के मुकाबले आज परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। तमिल में कानूनी शब्दावली पहले से ज्यादा विकसित हुई है और डिजिटल टेक्नोलॉजी ने भाषा संबंधी काम को आसान बनाया है।ई-कोर्ट सिस्टम, डिजिटल लीगल डेटाबेस और टेक्नोलॉजी आधारित ट्रांसलेशन जैसी सुविधाओं को सरकार अपने प्रस्ताव के समर्थन में अहम आधार मान रही है। इसलिए राज्य का तर्क है कि अब पुराने फैसले की दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री विजय के प्रस्ताव का मकसद केंद्र से तमिल को मद्रास हाई कोर्ट की प्रमुख भाषा के तौर पर अनुमति दिलाने के साथ-साथ अदालत के फैसलों और आदेशों को तमिल में उपलब्ध कराने के लिए जरूरी व्यवस्था तैयार करना है।
तमिल को कोर्ट की भाषा बनाने से क्या बदलेगा?
अगर प्रस्ताव को जरूरी संवैधानिक और प्रशासनिक मंजूरियां मिलती हैं, तो तमिल में हाई कोर्ट की कार्यवाही और कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा बदलाव हो सकता है। खासकर उन लोगों के लिए यह महत्वपूर्ण होगा जो अंग्रेजी की बजाय तमिल में कानूनी मामलों को बेहतर तरीके से समझते हैं।हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अंग्रेजी तुरंत हाई कोर्ट से खत्म हो जाएगी। मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में अंग्रेजी की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है। इसलिए तमिल के इस्तेमाल को बढ़ाने की प्रक्रिया कानूनी मंजूरियों और तय नियमों के तहत आगे बढ़ेगी।
राज्य सरकार के प्रस्ताव में इसी वजह से एक ऐसा फ्रेमवर्क बनाने की मांग की गई है, जिसमें तमिल में जजमेंट, डिक्री और न्यायिक आदेश उपलब्ध हो सकें।
अब गेंद केंद्र के पाले में
मुख्यमंत्री विजय का यह प्रस्ताव विधानसभा से आगे की संवैधानिक प्रक्रिया के लिए केंद्र सरकार के सामने राज्य की मांग को फिर से रखता है। 2006 में भी विधानसभा ने ऐसी ही मांग की थी, लेकिन तब इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी थी।इस बार तमिलनाडु सरकार का जोर भाषा की ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ कानूनी तमिल के विकास और नई टेक्नोलॉजी पर है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है और क्या इसे संवैधानिक प्रक्रिया के अगले चरण तक ले जाया जाता है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
तमिल को मद्रास हाई कोर्ट की प्रमुख भाषा बनाने की मांग क्यों की जा रही है?
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि तमिल एक प्राचीन और समृद्ध भाषा है, जिसकी कानूनी शब्दावली में भी काफी विकास हुआ है। सरकार का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ट्रांसलेशन सुविधाओं की मदद से हाई कोर्ट में तमिल का इस्तेमाल अब ज्यादा प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री विजय विधानसभा में कौन सा प्रस्ताव लाएंगे?
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 3 सितंबर 2026 को विधानसभा में केंद्र सरकार से तमिल को मद्रास हाई कोर्ट की प्रमुख भाषा के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव पेश किया। इसमें हाई कोर्ट के जजमेंट, डिक्री और न्यायिक आदेश तमिल में उपलब्ध कराने के लिए फ्रेमवर्क बनाने की मांग भी शामिल है।
मद्रास हाई कोर्ट की वर्तमान आधिकारिक भाषा क्या है?
हाई कोर्ट की न्यायिक कार्यवाही के लिए अंग्रेजी प्रमुख भाषा है। संविधान का अनुच्छेद 348 हाई कोर्ट की कार्यवाही में अंग्रेजी से जुड़ा प्रावधान करता है। राज्य की आधिकारिक भाषा के इस्तेमाल के लिए अनुच्छेद 348(2) के तहत निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया और राष्ट्रपति की पूर्व सहमति जरूरी होती है।
क्या हाई कोर्ट में तमिल भाषा का इस्तेमाल किया जा सकता है?
हां, संविधान का अनुच्छेद 348(2) राज्य की आधिकारिक भाषा को हाई कोर्ट की कार्यवाही में इस्तेमाल करने की अनुमति देने का प्रावधान करता है। इसके लिए राज्यपाल की अनुमति और राष्ट्रपति की पूर्व सहमति जरूरी होती है। जजमेंट, डिक्री और आदेश के मामले में अंग्रेजी से जुड़ी संवैधानिक शर्तें भी लागू होती हैं।
तमिल को हाई कोर्ट की प्रमुख भाषा बनाने के लिए केंद्र की मंजूरी क्यों जरूरी है?
क्योंकि हाई कोर्ट की भाषा का मामला संविधान के अनुच्छेद 348 से जुड़ा है। राज्य सरकार अकेले विधानसभा में प्रस्ताव पास करके व्यवस्था नहीं बदल सकती। राज्य की आधिकारिक भाषा को हाई कोर्ट में इस्तेमाल करने के लिए संविधान में निर्धारित प्रक्रिया के तहत राज्यपाल और राष्ट्रपति की सहमति की जरूरत होती है।