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Trump Praises Modi Anti Drug Push - भारत US की ड्रग लिस्ट में फिर शामिल, फिर भी ट्रंप ने मोदी की तारीफ क्यों की?

अमेरिका ने वित्त वर्ष 2027 की 23 देशों वाली Major Drug Transit or Producing Countries सूची में भारत को फिर शामिल किया है। हालांकि, ट्रंप ने मोदी सरकार के अवैध अफीम की खेती रोकने के प्रयासों की तारीफ की। भारत “Failed Demonstrably” श्रेणी में नहीं है।

Trump Praises Modi Anti Drug Push - भारत US की ड्रग लिस्ट में फिर शामिल, फिर भी ट्रंप ने मोदी की तारीफ क्यों की?

Trump Praises Modi Anti Drug Push: अमेरिका ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत को 23 ऐसे देशों की सूची में शामिल किया है, जिन्हें अमेरिका प्रमुख ड्रग ट्रांजिट या अवैध ड्रग उत्पादन वाले देश मानता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह निर्धारण 15 सितंबर को अमेरिकी कांग्रेस को भेजा। लेकिन इसी दस्तावेज में ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के अवैध अफीम की खेती रोकने के प्रयासों की तारीफ भी की है। उन्होंने भारत के साथ ड्रग नियंत्रण के मुद्दे पर आगे भी सहयोग जारी रखने की बात कही है।

भारत को US की ड्रग लिस्ट में रखने का मतलब क्या है?

अमेरिका हर साल कानून के तहत ऐसे देशों की सूची जारी करता है, जो अवैध ड्रग्स या उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स के उत्पादन या ट्रांजिट से जुड़े माने जाते हैं। किसी देश को इस सूची में रखने के पीछे उसके भौगोलिक, व्यापारिक और आर्थिक हालात भी देखे जाते हैं। यानी किसी देश का बड़ा अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क, भौगोलिक स्थिति या किसी खास ड्रग के उत्पादन और ट्रांजिट से जुड़ाव उसे सूची में ला सकता है।इसलिए भारत का इस सूची में होना यह नहीं कहता कि भारत सरकार खुद ड्रग तस्करी को बढ़ावा दे रही है या अमेरिकी सहयोग से इनकार कर रही है। अमेरिकी निर्धारण साफ करता है कि कोई देश इस सूची में तब भी हो सकता है, जब उसकी सरकार ड्रग्स के खिलाफ मजबूत कानून और कार्रवाई कर रही हो।
दरअसल भारत पहले भी ऐसी अमेरिकी सूची में शामिल रहा है। वित्त वर्ष 2026 की सूची में भी भारत, चीन और पाकिस्तान समेत यही 23 देश शामिल थे। यानी 2027 की सूची में भारत का नाम आना अपने आप में कोई नई अमेरिकी खोज नहीं है।

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फिर ट्रंप ने मोदी की तारीफ क्यों की?

भारत का नाम सूची में होने के बावजूद ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी और भारत सरकार के काम की अलग से सराहना की। उन्होंने कहा कि वह भारत में अवैध अफीम की खेती रोकने और सप्लाई चेन की निगरानी मजबूत करने के प्रयासों का स्वागत करते हैं।ट्रंप ने यह भी कहा कि वह यूएस-इंडिया ड्रग पॉलिसी फ्रेमवर्क के तहत भारत के साथ आगे भी सहयोग की उम्मीद करते हैं।
इसका मतलब यह है कि वॉशिंगटन का संदेश दो हिस्सों में है। एक तरफ अमेरिका भारत को उस व्यापक सूची में रख रहा है, दूसरी तरफ वह भारत की मौजूदा काउंटर-नारकोटिक्स कोशिशों और दोनों देशों के सहयोग को भी मान्यता दे रहा है।
जनवरी 2026 में अमेरिका और भारत के बीच यूएस-इंडिया ड्रग पॉलिसी एग्जीक्यूटिव वर्किंग ग्रुप की पहली बैठक भी हुई थी। इसमें दोनों देशों ने अवैध ड्रग्स और उनके प्रीकर्सर केमिकल्स की तस्करी रोकने, कानून प्रवर्तन सहयोग बढ़ाने और फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने पर काम आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई थी।

US की “Major’s List” और “फेल” घोषित करने में फर्क

इस मामले में सबसे ज्यादा भ्रम इसी बात को लेकर हो सकता है। Major’s List में शामिल होना और “Failed Demonstrably” घोषित होना एक ही बात नहीं है।2027 की अमेरिकी सूची में कुल 23 देश हैं। इनमें अफगानिस्तान, बहामास, बेलीज, बोलीविया, बर्मा यानी म्यांमार, चीन, कोलंबिया, कोस्टा रिका, डोमिनिकन रिपब्लिक, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, हैती, होंडुरास, भारत, जमैका, लाओस, मैक्सिको, निकारागुआ, पाकिस्तान, पनामा, पेरू और वेनेजुएला शामिल हैं।
इन 23 देशों में से अफगानिस्तान, बोलीविया, बर्मा और कोलंबिया को अलग से पिछले 12 महीनों में अंतरराष्ट्रीय काउंटर-नारकोटिक्स दायित्वों को पूरा करने और पर्याप्त प्रयास करने में “फेल्ड डेमॉन्स्ट्रेबली” बताया गया है। भारत इस अलग श्रेणी में नहीं है।
इसलिए भारत के मामले में सिर्फ “अमेरिका ने भारत को ड्रग्स के खिलाफ नाकाम देश घोषित किया” कहना सही नहीं होगा।

भारत का नाम आखिर क्यों आता है?

भारत की भौगोलिक स्थिति भी इस चर्चा में महत्वपूर्ण है। भारत एशिया के ऐसे इलाके में स्थित है, जहां अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय ड्रग रूट और बाजार मौजूद हैं। इसके अलावा देश का बड़ा व्यापारिक नेटवर्क और रासायनिक एवं फार्मास्युटिकल उद्योग भी सप्लाई चेन की निगरानी को महत्वपूर्ण बनाते हैं।अमेरिकी कानून में किसी देश को Major Drug Transit या Major Illicit Drug Producing Country मानने के लिए सिर्फ यह नहीं देखा जाता कि वहां की सरकार ड्रग्स रोक रही है या नहीं। कानून में ड्रग्स या प्रीकर्सर केमिकल्स के उत्पादन और ट्रांजिट से जुड़े भौगोलिक, आर्थिक और व्यापारिक कारकों को भी आधार बनाया जाता है।
भारत के लिए अवैध अफीम की खेती भी एक अहम मुद्दा है। यही वजह है कि ट्रंप ने अपने निर्धारण में अवैध अफीम की खेती पर भारत की कार्रवाई का विशेष उल्लेख किया है। लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि भारत का नाम केवल अफीम की खेती के कारण ही सूची में है, ऐसा अमेरिकी दस्तावेज नहीं कहता।

चीन और पाकिस्तान का नाम भी साथ

इस सूची में भारत अकेला बड़ा एशियाई देश नहीं है। चीन और पाकिस्तान भी 2027 की Major’s List में शामिल हैं। चीन को लेकर अमेरिका ने विशेष रूप से उन प्रीकर्सर केमिकल्स का मुद्दा उठाया है, जिनका इस्तेमाल फेंटानिल, मेथामफेटामाइन और दूसरे सिंथेटिक ड्रग्स बनाने में हो सकता है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यह मुद्दा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने भी उठाया है।वहीं पाकिस्तान का नाम भी सूची में है, लेकिन उसे भी उन चार देशों की “फेल्ड डेमॉन्स्ट्रेबली” वाली अलग श्रेणी में नहीं रखा गया है।

भारत-अमेरिका ड्रग सहयोग आगे क्या करेगा?

भारत और अमेरिका के बीच ड्रग नियंत्रण अब सिर्फ पारंपरिक नशीले पदार्थों तक सीमित नहीं है। दोनों देश ड्रग तस्करी, प्रीकर्सर केमिकल्स, सप्लाई चेन की सुरक्षा और कानून प्रवर्तन सहयोग जैसे क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं।जनवरी 2026 की वर्किंग ग्रुप बैठक में दोनों देशों ने अवैध ड्रग्स और प्रीकर्सर केमिकल्स की सप्लाई रोकने के लिए संयुक्त प्रयास मजबूत करने पर सहमति जताई थी। अमेरिका की 2026 नेशनल ड्रग कंट्रोल स्ट्रैटेजी में भी भारत के साथ आगे काउंटर-ड्रग सहयोग बढ़ाने का उल्लेख किया गया है।
इसलिए 2027 की सूची को भारत-अमेरिका ड्रग संबंधों में किसी बड़े टकराव के रूप में देखना सही नहीं होगा। मौजूदा दस्तावेज में एक तरफ भारत का नाम सूची में है, तो दूसरी तरफ भारत के प्रयासों की तारीफ और सहयोग जारी रखने की बात भी है।

भारत के लिए असल मायने क्या हैं?

इस पूरे मामले को एक लाइन में समझें तो भारत का नाम अमेरिकी Major’s List में होना एक कानूनी और प्रशासनिक वर्गीकरण है, जबकि ट्रंप की मोदी की तारीफ भारत की काउंटर-नारकोटिक्स कार्रवाई को लेकर अलग संदेश देती है।अमेरिकी कानून के तहत यह सूची उन देशों की पहचान करती है, जहां की भौगोलिक, व्यापारिक या आर्थिक परिस्थितियां अवैध ड्रग्स या प्रीकर्सर केमिकल्स के उत्पादन या ट्रांजिट से जुड़ी हैं। खुद अमेरिकी व्यवस्था स्पष्ट करती है कि सूची में होना किसी सरकार के ड्रग विरोधी प्रयासों की नकारात्मक रेटिंग नहीं है।
यानी India Narcotics List 2026-27 को भारत के खिलाफ किसी नई अमेरिकी कार्रवाई या प्रतिबंध की सूची समझना गलत होगा। फिलहाल ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत और अमेरिका ड्रग तस्करी रोकने के लिए अपना द्विपक्षीय सहयोग आगे बढ़ा रहे हैं और वॉशिंगटन भारत के कुछ काउंटर-नारकोटिक्स प्रयासों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी कर रहा है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

ट्रंप ने मोदी के Anti-Drug Push की तारीफ क्यों की?

डोनाल्ड ट्रंप ने भारत में अवैध अफीम की खेती रोकने और सप्लाई चेन की निगरानी मजबूत करने के प्रयासों का स्वागत किया। उन्होंने यूएस-इंडिया ड्रग पॉलिसी फ्रेमवर्क के तहत दोनों देशों के बीच आगे भी सहयोग जारी रखने की बात कही।

India का US Narcotics List में शामिल होने का क्या मतलब है?

भारत को वित्त वर्ष 2027 की अमेरिकी Major Drug Transit या Major Illicit Drug Producing Countries की सूची में रखा गया है। इसका मतलब यह है कि अमेरिकी कानून के तहत भारत की भौगोलिक, व्यापारिक और आर्थिक परिस्थितियां ड्रग्स या प्रीकर्सर केमिकल्स के उत्पादन या ट्रांजिट से जुड़ी मानी जाती हैं।

US Narcotics List क्या होती है?

यह अमेरिका की वार्षिक “Major’s List” है, जिसमें उन देशों की पहचान की जाती है जो अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण ड्रग उत्पादन या ट्रांजिट से जुड़े माने जाते हैं। इसमें शामिल होना अपने आप में उस देश की सरकार को ड्रग नियंत्रण में विफल घोषित करना नहीं है।

India को Narcotics List में क्यों शामिल किया गया?

अमेरिकी निर्धारण के अनुसार सूची में शामिल करने का आधार किसी देश के भौगोलिक, व्यापारिक और आर्थिक हालात हो सकते हैं, जिनसे ड्रग्स या प्रीकर्सर केमिकल्स का उत्पादन या ट्रांजिट संभव होता है। भारत को सूची में शामिल करने का मतलब यह नहीं कि अमेरिकी सरकार ने भारत की मौजूदा ड्रग नियंत्रण व्यवस्था को विफल माना है।

ट्रंप ने India की Drug Control Policy को लेकर क्या कहा?

ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के अवैध अफीम की खेती रोकने के प्रयासों की तारीफ की और कहा कि वह यूएस-इंडिया ड्रग पॉलिसी फ्रेमवर्क के तहत आगे भी सहयोग की उम्मीद करते हैं।

India में Drug Trafficking रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा रहे हैं?

भारत और अमेरिका के बीच कानून प्रवर्तन सहयोग, ड्रग तस्करी रोकने, प्रीकर्सर केमिकल्स की निगरानी और सप्लाई चेन सुरक्षा पर सहयोग चल रहा है। जनवरी 2026 में दोनों देशों के ड्रग पॉलिसी वर्किंग ग्रुप की पहली बैठक में इन क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर चर्चा हुई थी।

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