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Hafiz Saeed Non-Bailable Warrant: हाफिज सईद के खिलाफ 2 महीने में दूसरी बार गैर-जमानती वारंट जारी , जम्मू NIA कोर्ट ने क्यों जारी किया वारंट?

जम्मू की विशेष NIA अदालत ने हाफिज सईद के खिलाफ दूसरा गैर-जमानती वारंट जारी किया। NIA का आरोप है कि वह पाकिस्तान से कश्मीर में आतंकियों को हथियार, पैसे और निर्देश दे रहा था। इससे पहले पहलगाम हमला मामले में भी NBW जारी हुआ था।

Hafiz Saeed Non-Bailable Warrant: हाफिज सईद के खिलाफ 2 महीने में दूसरी बार गैर-जमानती वारंट जारी , जम्मू NIA कोर्ट ने क्यों जारी किया वारंट?

Hafiz Saeed Non-Bailable Warrant: लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक और भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल हाफिज सईद के खिलाफ जम्मू की विशेष NIA अदालत ने फिर गैर-जमानती वारंट जारी किया है। NIA ने कोर्ट को बताया कि हाफिज सईद इस समय पाकिस्तान में है और कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों को कथित तौर पर हथियार, पैसे और निर्देश दे रहा है। यह दो महीने के भीतर उसके खिलाफ जारी हुआ दूसरा गैर-जमानती वारंट है।सईद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा का रहने वाला है और भारत में नामित आतंकवादी है। NIA ने उसे इस मामले में फरार आरोपी बताया है। एजेंसी के मुताबिक वह गिरफ्तारी से बचने के लिए जानबूझकर पाकिस्तान में रह रहा है। कोर्ट ने 8 सितंबर को NIA की दलीलें सुनने के बाद वारंट जारी किया।

हाफिज सईद
हाफिज सईद

एक ग्रेनेड और 15 गोलियों से खुली आतंकी नेटवर्क की परतें

मामला इस साल श्रीनगर के बाहरी इलाके पांडाच में मोहम्मद नकीब भट की गिरफ्तारी से शुरू हुआ। जांच के दौरान उसके पास चीन में बना एक ग्रेनेड और 15 जिंदा गोलियां बरामद हुई थीं। इसके बाद जकोरा पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून यानी UAPA, आर्म्स एक्ट और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।आगे की जांच में एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में सक्रिय एक आतंकी नेटवर्क का पता लगाने का दावा किया। इस मामले में लश्कर-ए-तैयबा और उसके प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से कथित रूप से जुड़े कई आतंकियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में दो पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी भी हुई।
NIA के मुताबिक, इन्हीं गिरफ्तारियों और पूछताछ से हाफिज सईद की कथित भूमिका सामने आई। एजेंसी का आरोप है कि पाकिस्तान में मौजूद सईद कश्मीर घाटी में आतंकियों तक हथियार और आर्थिक मदद पहुंचाने के साथ उन्हें निर्देश भी दे रहा था। ये NIA की जांच में सामने आए आरोप हैं, जिनका अदालत में परीक्षण होना बाकी है।

दो महीने में दूसरी बार कोर्ट पहुंचा हाफिज सईद का मामला

हाफिज सईद के खिलाफ यह पहला गैर-जमानती वारंट नहीं है। इससे पहले 8 जुलाई 2026 को जम्मू की विशेष NIA अदालत ने पहलगाम आतंकी हमले के मामले में भी उसके खिलाफ NBW जारी किया था। यह कार्रवाई NIA की पूरक चार्जशीट दाखिल होने के दो दिन बाद हुई थी।उस मामले में NIA ने सईद को व्यक्तिगत तौर पर और लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक एवं प्रमुख के तौर पर आरोपी बनाया है। एजेंसी ने उसे पहलगाम हमले की साजिश में कथित प्रमुख भूमिका से जोड़ा है। अप्रैल 2025 में पहलगाम के बैसरन इलाके में हुए हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।
इस तरह जुलाई में जारी हुआ NBW पहलगाम आतंकी हमला मामले से जुड़ा था, जबकि सितंबर में जारी नया वारंट कश्मीर में आतंकियों को कथित हथियार, फंड और निर्देश देने से जुड़े अलग मामले में है।

कोर्ट ने क्यों माना कि गिरफ्तारी जरूरी है?

NIA ने कोर्ट में कहा कि सईद फरार है और सामान्य तरीके से उसकी कोर्ट में मौजूदगी सुनिश्चित नहीं की जा सकी। एजेंसी ने गैर-जमानती वारंट के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 75 के तहत आवेदन दिया।कोर्ट ने जांच के दौरान सामने आई सईद की कथित भूमिका और उसके फरार होने की स्थिति को देखते हुए सामान्य गैर-जमानती वारंट जारी किया। जुलाई में पहलगाम मामले में भी NIA ने कहा था कि सईद गिरफ्तारी से जानबूझकर बच रहा है और उसकी गिरफ्तारी तथा पूछताछ जांच को पूरा करने के लिए जरूरी है।
गैर-जमानती वारंट का मतलब यह नहीं है कि आरोपी को हर स्थिति में बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के सजा मिल गई। इसका मतलब है कि अदालत ने आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश करने का आदेश दिया है और सामान्य परिस्थितियों में जमानत उसका स्वतः अधिकार नहीं होती। जमानत का फैसला अदालत करती है।

पहलगाम हमले में NIA की चार्जशीट में भी नाम

हाफिज सईद का नाम सिर्फ मौजूदा आतंकी नेटवर्क वाले मामले तक सीमित नहीं है। NIA ने जुलाई 2026 में पहलगाम आतंकी हमला मामले में दाखिल पूरक चार्जशीट में सईद को आरोपी बनाया था।NIA के मुताबिक, उसे व्यक्तिगत क्षमता के साथ-साथ प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा और उसके सक्रिय प्रॉक्सी संगठन TRF के प्रमुख के रूप में भी आरोपी बनाया गया। इसके बाद विशेष NIA अदालत ने 8 जुलाई को उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।
पहलगाम हमला 22 अप्रैल 2025 को हुआ था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। NIA की जांच में हाफिज सईद और सीमा पार मौजूद आतंकी नेटवर्क की कथित भूमिका को जांच का हिस्सा बनाया गया है।

हाफिज सईद पर भारत में पहले से गंभीर आतंकी आरोप

हाफिज सईद लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है और उसे भारत तथा अमेरिका ने नामित वैश्विक आतंकवादी के तौर पर सूचीबद्ध किया है। उसका नाम 2008 के मुंबई आतंकी हमलों की साजिश से भी लंबे समय से जोड़ा जाता रहा है।अब जम्मू की विशेष NIA अदालत में उसके खिलाफ अलग-अलग मामलों में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ रही है। ताजा गैर-जमानती वारंट का सीधा संबंध कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को कथित मदद पहुंचाने वाले नेटवर्क की जांच से है, जबकि जुलाई वाला वारंट पहलगाम हमले की जांच से जुड़ा है।
चूंकि सईद पाकिस्तान में मौजूद है, इसलिए भारतीय अदालत का वारंट जारी होना और उसकी वास्तविक गिरफ्तारी दो अलग प्रक्रियाएं हैं। फिलहाल NIA की कार्रवाई का अगला चरण उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत के सामने लाने से जुड़ा है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Jammu NIA Court ने Hafiz Saeed के खिलाफ Non-Bailable Warrant क्यों जारी किया?

NIA के मुताबिक हाफिज सईद पाकिस्तान में रहकर जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को कथित तौर पर हथियार, पैसे और निर्देश दे रहा है। वह इस मामले में फरार आरोपी है और सामान्य तरीके से उसकी गिरफ्तारी या अदालत में मौजूदगी सुनिश्चित नहीं हो सकी। इसी आधार पर कोर्ट ने NBW जारी किया।

Hafiz Saeed का Pahalgam Terror Attack से क्या connection है?

NIA ने जुलाई 2026 में दाखिल पूरक चार्जशीट में हाफिज सईद को पहलगाम आतंकी हमले की साजिश से कथित तौर पर जोड़ा है। इसी मामले में 8 जुलाई को जम्मू की विशेष NIA अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।

NIA ने Hafiz Saeed के खिलाफ कौन से आरोप लगाए हैं?

ताजा मामले में NIA का आरोप है कि पाकिस्तान में मौजूद हाफिज सईद कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को कथित तौर पर हथियार, आर्थिक मदद और निर्देश उपलब्ध करा रहा था। पहलगाम मामले में भी एजेंसी ने उसे कथित आतंकी साजिश से जोड़ा है। ये आरोप हैं और मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

Non-Bailable Warrant क्या होता है?

गैर-जमानती वारंट अदालत का ऐसा आदेश है जिसके तहत आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश किया जा सकता है। इसमें जमानत अपने आप नहीं मिलती; जमानत देने या न देने का फैसला अदालत परिस्थितियों और मामले के आधार पर करती है।

Hafiz Saeed को NIA क्यों तलाश कर रही है?

NIA अलग-अलग मामलों में उसकी कथित आतंकी भूमिका की जांच कर रही है। ताजा मामले में एजेंसी ने कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को कथित हथियार, फंड और निर्देश देने का आरोप लगाया है। इससे पहले पहलगाम आतंकी हमला मामले में भी उसका नाम पूरक चार्जशीट में शामिल किया गया था।

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