North Korea Second Naval Destroyer: नॉर्थ कोरिया ने उतारा दूसरा 5,000 टन युद्धपोत - अमेरिका से क्यों बढ़ा तनाव?
नॉर्थ कोरिया ने दूसरा 5,000 टन का डिस्ट्रॉयर कांग कॉन नौसेना में शामिल किया। किम जोंग उन ने समुद्र से न्यूक्लियर जवाबी क्षमता बढ़ाने का संकेत दिया। इसी दौरान अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान की फ्रीडम एज ड्रिल से क्षेत्रीय तनाव बढ़ा।
North Korea Second Naval Destroyer : नॉर्थ कोरिया ने अपनी नौसैनिक ताकत बढ़ाते हुए दूसरे 5,000 टन के नेवल डिस्ट्रॉयर कांग कॉन को आधिकारिक तौर पर नौसेना में शामिल कर लिया है। 6 सितंबर को वॉनसान में हुई कमीशनिंग सेरेमनी में नेता किम जोंग उन खुद मौजूद रहे। इसी दौरान उन्होंने देश की नौसेना को न्यूक्लियर हथियारों से लैस करने और ज्यादा भरोसेमंद न्यूक्लियर डिटरेंस बनाने की जरूरत बताई। खास बात यह है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान ने नॉर्थ कोरिया पर केंद्रित पांच दिन की फ्रीडम एज सैन्य ड्रिल शुरू की है।कांग कॉन को नॉर्थ कोरियन नेवी के ईस्ट सी फ्लीट में शामिल किया जाएगा। इससे पहले जून 2026 में नॉर्थ कोरिया ने अपने पहले 5,000 टन के डिस्ट्रॉयर चोए ह्योन को नौसेना में शामिल किया था। दोनों जहाजों को नॉर्थ कोरिया के सबसे आधुनिक युद्धपोतों में गिना जा रहा है और इनमें न्यूक्लियर क्षमता वाले मिसाइल सिस्टम इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
किम का संदेश- अब समुद्र से भी न्यूक्लियर जवाब
कांग कॉन की कमीशनिंग के दौरान किम जोंग उन ने कहा कि नॉर्थ कोरिया को अपनी न्यूक्लियर वॉर डिटरेंस को ज्यादा शक्तिशाली और भरोसेमंद बनाना होगा। उनके मुताबिक नौसेना में न्यूक्लियर हथियारों की मौजूदगी से देश अपने न्यूक्लियर डिटरेंस का ज्यादा अलग-अलग और व्यावहारिक तरीके से इस्तेमाल कर सकता है।किम ने नए डिस्ट्रॉयर को सिर्फ समुद्री सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाला जहाज नहीं बताया, बल्कि इसे नॉर्थ कोरिया के स्टेट न्यूक्लियर काउंटरएक्शन सिस्टम का हिस्सा बताया। उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया के मुताबिक किम ने कहा कि नई पीढ़ी के इस युद्धपोत को दुश्मन के खिलाफ जवाबी हमला करने में सक्षम होना चाहिए।
किम ने यह भी संकेत दिया कि नौसेना के विस्तार की यह शुरुआत भर है। उन्होंने अगले आठ महीनों में नौसैनिक ताकत बढ़ाने के एक और चरण का संकेत दिया है। इसके साथ ही पूर्वी तट पर नए नौसैनिक अड्डे बनाने, नई नौसैनिक यूनिट तैयार करने और अलग-अलग श्रेणी के युद्धपोत विकसित करने की योजना भी सामने आई है।

कांग कॉन कितना खास है?
कांग कॉन करीब 5,000 टन का डिस्ट्रॉयर है। यह नॉर्थ कोरिया के अब तक के सबसे बड़े और आधुनिक युद्धपोतों में शामिल है। जुलाई में किम जोंग उन ने इसी जहाज से स्ट्रैटेजिक क्रूज मिसाइल, मुख्य तोप, ऑटोमैटिक गन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के परीक्षणों का निरीक्षण किया था। जहाज की टारगेट डिटेक्शन और इंफॉर्मेशन प्रोसेसिंग क्षमता का भी परीक्षण किया गया था।कांग कॉन का सफर भी आसान नहीं रहा। मई 2025 में इसे लॉन्च करने की शुरुआती कोशिश के दौरान जहाज का संतुलन बिगड़ गया और यह आंशिक रूप से पलट गया था। बाद में इसकी मरम्मत की गई और करीब एक महीने बाद इसे दोबारा लॉन्च किया गया। इसके बाद समुद्री परीक्षण और हथियारों के परीक्षण पूरे किए गए, जिसके बाद सितंबर 2026 में इसे आधिकारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया।
इससे पहले जून में शामिल किया गया चोए ह्योन नॉर्थ कोरिया का पहला 5,000 टन का डिस्ट्रॉयर था। दोनों जहाजों की कमीशनिंग के बीच तीन महीने से भी कम का अंतर है। इससे साफ है कि किम जोंग उन अब अपनी नौसेना को तेजी से आधुनिक बनाने पर जोर दे रहे हैं।

किम की बेटी की मौजूदगी भी रही चर्चा में
कांग कॉन की कमीशनिंग सेरेमनी में किम जोंग उन की किशोर बेटी किम जू-ए भी उनके साथ नजर आईं। सरकारी तस्वीरों में वह सफेद ड्रेस और ब्लेजर में अपने पिता के साथ रेड कार्पेट पर चलती, युद्धपोत का निरीक्षण करती और नौसैनिकों के साथ दिखाई दीं।दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी पहले ही जू-ए को किम जोंग उन की संभावित उत्तराधिकारी बता चुकी है। इसलिए सैन्य और राजनीतिक कार्यक्रमों में उनकी बढ़ती सार्वजनिक मौजूदगी को उत्तर कोरिया के सत्ता हस्तांतरण से जुड़े संकेत के तौर पर देखा जाता है। हालांकि उनके उत्तराधिकारी होने की औपचारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
अमेरिका-जापान-दक्षिण कोरिया की ड्रिल ने बढ़ाया तनाव
कांग कॉन की कमीशनिंग के अगले ही दिन अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान ने फ्रीडम एज सैन्य अभ्यास शुरू किया। पांच दिन चलने वाला यह अभ्यास दक्षिण कोरिया के दक्षिण में स्थित जेजू द्वीप के आसपास अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हो रहा है।दक्षिण कोरिया के मुताबिक इसका उद्देश्य नॉर्थ कोरिया के न्यूक्लियर और मिसाइल खतरे से निपटने की साझा क्षमता को मजबूत करना है। इसमें तीनों देशों की नौसेना और वायुसेना की प्रमुख सैन्य क्षमताओं के साथ निगरानी, मिसाइल डिफेंस और समुद्री अभियानों से जुड़ी ट्रेनिंग शामिल है। दक्षिण कोरिया इसे रक्षात्मक अभ्यास बताता है, लेकिन नॉर्थ कोरिया लंबे समय से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को अपने खिलाफ हमले की तैयारी यानी वॉर रिहर्सल मानता आया है।
नॉर्थ कोरिया के विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह फ्रीडम एज को लेकर अमेरिका पर ज्यादा टकराव वाला रुख अपनाने का आरोप लगाया था। प्योंगयांग ने अमेरिकी अधिकारियों के उन बयानों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें नॉर्थ कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य पर अमेरिकी प्रतिबद्धता दोहराई गई थी।
ट्रंप ने ड्रिल छोटी की, किम ने फिर भी नहीं माना
इस तनाव के बीच अगस्त में अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने अपना वार्षिक उल्ची फ्रीडम शील्ड अभ्यास तय समय से छह दिन पहले खत्म कर दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेंटागन को इस अभ्यास को काफी कम करने का आदेश दिया था और इसे किम जोंग उन के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की कोशिश के तौर पर पेश किया था।लेकिन किम की बहन और वरिष्ठ अधिकारी किम यो जोंग ने इस कदम को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ अभ्यास की अवधि कम करने से उसकी कथित उकसावे वाली प्रकृति नहीं बदलती। इसके बाद नॉर्थ कोरिया ने समुद्र की ओर करीब 10 शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह कार्रवाई उसके उस पहले के बयान के बाद हुई थी, जिसमें उसने अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास का जवाब देने की बात कही थी।
नॉर्थ कोरिया की नौसेना अब नई दिशा में
नॉर्थ कोरिया लंबे समय से बैलिस्टिक मिसाइल और जमीन आधारित न्यूक्लियर हथियारों पर ज्यादा निर्भर रहा है। लेकिन किम जोंग उन के हालिया कदम बताते हैं कि अब समुद्र आधारित न्यूक्लियर क्षमता पर भी जोर बढ़ रहा है।कांग कॉन और चोए ह्योन जैसे बड़े डिस्ट्रॉयर इसी बदलाव का हिस्सा हैं। किम ने पहले ही न्यूक्लियर-पावर्ड सबमरीन विकसित करने की महत्वाकांक्षा जाहिर की है। 2026 में उन्होंने नौसैनिक ताकत बढ़ाने के लिए बड़े युद्धपोतों और पानी के भीतर से लॉन्च होने वाली मिसाइल क्षमताओं को भी सैन्य आधुनिकीकरण के लक्ष्यों में शामिल किया है।
इसका रणनीतिक मतलब यह है कि नॉर्थ कोरिया अपनी न्यूक्लियर क्षमता को सिर्फ जमीन से दागी जाने वाली मिसाइलों तक सीमित नहीं रखना चाहता। समुद्र से जवाबी हमला करने की क्षमता विकसित होने पर उसके न्यूक्लियर डिटरेंस का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि नॉर्थ कोरिया की वास्तविक समुद्री युद्ध क्षमता और इन सिस्टम की पूरी ऑपरेशनल क्षमता को लेकर बाहरी विशेषज्ञों के पास सीमित और आंशिक जानकारी ही है।
2019 के बाद फिर आमने-सामने अमेरिका और किम
किम जोंग उन पहले भी कह चुके हैं कि अगर अमेरिका अपनी कथित शत्रुतापूर्ण नीति छोड़ता है और नॉर्थ कोरिया को न्यूक्लियर स्टेट के रूप में स्वीकार करता है तो बातचीत की संभावना बन सकती है। अमेरिका और नॉर्थ कोरिया के बीच किम-ट्रंप कूटनीति 2019 में उस समय टूट गई थी, जब दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नहीं हो सके कि सीमित परमाणु निरस्त्रीकरण के बदले नॉर्थ कोरिया को कितनी आर्थिक राहत दी जाए।अब स्थिति पहले से अलग है। नॉर्थ कोरिया ने अपने न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है और रूस तथा चीन के साथ उसके संबंध भी मजबूत हुए हैं। ऐसे में किम के पास भविष्य की बातचीत में पहले की तुलना में ज्यादा सैन्य और रणनीतिक leverage होने का आकलन किया जा रहा है।
कांग कॉन की कमीशनिंग और उसी समय अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान की फ्रीडम एज ड्रिल शुरू होना इसलिए महत्वपूर्ण है। एक तरफ तीनों देश नॉर्थ कोरिया की न्यूक्लियर और मिसाइल क्षमता के खिलाफ अपनी साझा तैयारी मजबूत कर रहे हैं, वहीं प्योंगयांग समुद्र से न्यूक्लियर जवाबी क्षमता बढ़ाने का संदेश दे रहा है। इससे कोरियन पेनिनसुला में सैन्य तनाव कम होने के बजाय फिलहाल और बढ़ता दिखाई दे रहा है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
North Korea ने second naval destroyer को commission क्यों किया?
नॉर्थ कोरिया अपनी नौसैनिक ताकत को आधुनिक बनाने और समुद्र से भी न्यूक्लियर डिटरेंस मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। किम जोंग उन ने कांग कॉन को स्टेट न्यूक्लियर काउंटरएक्शन सिस्टम का हिस्सा बताया है।
North Korea के नए naval destroyer की क्या खासियत है?
कांग कॉन करीब 5,000 टन का डिस्ट्रॉयर है। इसमें एडवांस्ड हथियार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता है और इसे न्यूक्लियर क्षमता वाले मिसाइल सिस्टम ले जाने में सक्षम बताया गया है। यह नॉर्थ कोरिया का दूसरा 5,000 टन का डिस्ट्रॉयर है।
US, South Korea और Japan ने military drill क्यों शुरू की?
फ्रीडम एज अभ्यास का घोषित उद्देश्य नॉर्थ कोरिया के न्यूक्लियर और मिसाइल खतरे के खिलाफ तीनों देशों की साझा डिटरेंस और रिस्पॉन्स क्षमता मजबूत करना है।
North Korea की naval power कितनी मजबूत है?
नॉर्थ कोरिया की नौसेना अब कांग कॉन और चोए ह्योन जैसे आधुनिक 5,000 टन के डिस्ट्रॉयर और नई समुद्री न्यूक्लियर क्षमता विकसित करने की दिशा में बढ़ रही है। हालांकि उसकी पूरी ऑपरेशनल क्षमता की स्वतंत्र जानकारी सीमित है।
Korean Peninsula में military tensions क्यों बढ़ रही हैं?
नॉर्थ कोरिया अपने न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रम तथा नौसैनिक आधुनिकीकरण को आगे बढ़ा रहा है, जबकि अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे हैं। प्योंगयांग इन अभ्यासों को सुरक्षा खतरे के रूप में देखता है, जबकि तीनों देश इन्हें नॉर्थ कोरिया की सैन्य क्षमता के जवाब में रक्षात्मक तैयारी बताते हैं।
Kim Jong Un के naval expansion plan का क्या उद्देश्य है?
इसका उद्देश्य नॉर्थ कोरिया की समुद्री सैन्य क्षमता बढ़ाना, न्यूक्लियर डिटरेंस को ज्यादा विविध बनाना और समुद्र से जवाबी हमले की क्षमता विकसित करना है। किम ने नए नौसैनिक अड्डों, नई यूनिट और अलग-अलग श्रेणी के युद्धपोत विकसित करने का भी संकेत दिया है।