Home / Business / ₹22,000 करोड़ के विवाद पर Mukesh Ambani और Reliance Media से क्यों भिड़े Essel Group चेयरमैन?
Business

₹22,000 करोड़ के विवाद पर Mukesh Ambani और Reliance Media से क्यों भिड़े Essel Group चेयरमैन?

Essel Group के चेयरमैन Subhash Chandra ने NCLT मामले की मीडिया कवरेज को लेकर Reliance Industries और Mukesh Ambani पर गंभीर सवाल उठाए हैं। Chandra ने Reliance के मीडिया संस्थानों पर भ्रामक नैरेटिव फैलाने का आरोप लगाया, जिसे Reliance ने पूरी तरह खारिज कर दिया।

₹22,000 करोड़ के विवाद पर Mukesh Ambani और Reliance Media से क्यों भिड़े Essel Group चेयरमैन?

भारत के कारोबारी जगत में दो बड़े नामों के बीच बयानबाजी ने नया मोड़ ले लिया है। Essel Group के चेयरमैन Subhash Chandra ने Reliance Industries के चेयरमैन Mukesh Ambani और Reliance से जुड़े मीडिया संस्थानों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मामला उनके कर्ज और हालिया NCLT कार्यवाही की मीडिया कवरेज से जुड़ा है। चंद्रा का आरोप है कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह गलत तरीके से पेश किया गया कि ₹22,000 करोड़ का कर्ज NCLT के जरिए महज ₹6.5 करोड़ में सेटल हो गया। उन्होंने Reliance के मीडिया नेटवर्क पर उनके खिलाफ कथित तौर पर एकतरफा अभियान चलाने का आरोप लगाया है। चंद्रा ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर Mukesh Ambani से संपर्क करने की कोशिश की और बाद में उन्हें पत्र भी लिखा। उन्होंने Reliance से जुड़े मीडिया संस्थानों से तथ्यों के आधार पर रिपोर्टिंग करने की अपील की। हालांकि, चंद्रा के आरोपों के तुरंत बाद Reliance ने इन्हें पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि उसके मीडिया ब्रांड्स का इस्तेमाल कभी किसी व्यक्ति पर हमला करने के लिए नहीं किया गया है। इसके साथ ही मामला भारत के दो प्रमुख कारोबारी समूहों के बीच एक असामान्य सार्वजनिक टकराव के रूप में सामने आया है।

क्या है पूरा मामला?

Essel Group के चेयरमैन Subhash Chandra NCLT Concerns को लेकर दिए गए बयान के बाद देश के दो बड़े कारोबारी समूहों के बीच विवाद चर्चा में आ गया है। चंद्रा ने Reliance Industries के चेयरमैन Mukesh Ambani और Reliance Group से जुड़े मीडिया संस्थानों पर उनके कर्ज और हालिया NCLT कार्यवाही को लेकर कथित तौर पर गलत नैरेटिव पेश करने का आरोप लगाया है। Zee News को दिए एक इंटरव्यू में चंद्रा ने दावा किया कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह बताया गया कि उनके करीब Rs 22,000 करोड़ के कर्ज का निपटारा NCLT के जरिए महज Rs 6.5 करोड़ में हो गया। उन्होंने इस तरह की रिपोर्टिंग को भ्रामक बताया और Reliance से जुड़े मीडिया संस्थानों के रवैये पर सवाल उठाए। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि चंद्रा द्वारा लगाए गए आरोप उनके दावे हैं। Reliance ने इन आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है।

Subhash Chandra NCLT Concerns में क्या-क्या सवाल उठे?

Subhash Chandra ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर Mukesh Ambani से संपर्क करने की कोशिश की थी। उनके मुताबिक, जब उन्हें कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने Ambani को पत्र भी लिखा। चंद्रा ने Reliance के मीडिया नेटवर्क, जिसमें TV18 और CNBC का भी उन्होंने उल्लेख किया, पर उनके खिलाफ कथित तौर पर एकतरफा अभियान चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने Reliance के मीडिया संस्थानों से सही तथ्यों के साथ खबरें दिखाने और कथित 'प्रचार' बंद करने की अपील की। यह विवाद उस समय सामने आया है जब चंद्रा से जुड़ी व्यक्तिगत दिवालियापन कार्यवाही में NCLT के फैसले को लेकर पहले ही काफी चर्चा हो चुकी है।

Rs 22,000 करोड़ और Rs 6.5 करोड़ का विवाद क्या है?

NCLT ने Subhash Chandra के लिए एक repayment plan को मंजूरी दी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनके खिलाफ स्वीकार किए गए दावों की कुल राशि करीब Rs 22,006.57 करोड़ थी, जबकि प्रस्तावित repayment करीब Rs 6.5 करोड़ था। इसका अर्थ है कि लेनदारों को उनके दावों की तुलना में बेहद छोटी रकम की वसूली होगी। इसी वजह से इस मामले में करीब 99.97% haircut को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, NCLT का फैसला यह नहीं कहता कि Rs 22,000 करोड़ की पूरी राशि बाद में चुकाई जाएगी। Insolvency प्रक्रिया के तहत स्वीकृत repayment plan यह निर्धारित करता है कि संबंधित प्रक्रिया में लेनदारों को कितनी राशि प्राप्त होगी। कुछ लेनदारों ने इस प्रस्ताव का विरोध भी किया था। लेकिन योजना को करीब 80.81% voting share वाले creditors का समर्थन मिला। इसी आधार पर ट्रिब्यूनल ने कहा कि वह creditors की व्यावसायिक समझ को अपनी राय से प्रतिस्थापित नहीं कर सकता, यदि निर्णय कानूनी दायरे में है।

2019 के Zee विवाद पर भी चंद्रा ने उठाए सवाल

Subhash Chandra ने अपने बयान में 2019 की घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय Ambani से जुड़ी संस्थाओं की भूमिका के कारण Zee के शेयर की कीमत में तेज गिरावट आई थी। उन्होंने आगे दावा किया कि इसके बाद investor Invesco के साथ मिलकर Zee को हासिल करने की कोशिश भी हुई थी। चंद्रा के मुताबिक, यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि उनके अनुसार यह अल्पसंख्यक शेयरधारकों के हित में नहीं था। हालांकि, इन दावों को भी चंद्रा के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध बयान में Reliance ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

Reliance ने आरोपों पर क्या कहा?

Subhash Chandra के बयान के बाद Reliance ने उनके आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। Reliance के प्रवक्ता ने कहा कि Essel Group चेयरमैन की टिप्पणियां निराधार हैं और समूह के मीडिया संस्थानों के खिलाफ लगाए गए आरोपों तथा संकेतों को वह पूरी तरह खारिज करता है। Reliance ने यह भी कहा कि उसके मीडिया ब्रांड्स का इस्तेमाल कभी किसी व्यक्ति पर हमला करने के लिए नहीं किया गया है और भविष्य में भी ऐसा नहीं किया जाएगा। कंपनी ने साथ ही चंद्रा के कारोबारी और उद्यमी के रूप में सम्मान की बात कही। इस तरह दोनों पक्षों के बयानों ने मामले को एक सीधे कारोबारी और मीडिया विवाद का रूप दे दिया है।

विवाद की जड़ में क्या है?

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि Subhash Chandra की व्यक्तिगत insolvency proceedings से जुड़ी है। मामला उस समय शुरू हुआ जब Vivek Infracon द्वारा लिए गए करीब Rs  170 करोड़ के कर्ज के लिए चंद्रा ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी। कर्ज के डिफॉल्ट के बाद Indiabulls Housing Finance ने उनके खिलाफ insolvency proceedings शुरू की थीं। यह मामला 2022 में दायर हुआ और अप्रैल 2024 में NCLT ने व्यक्तिगत insolvency proceedings को स्वीकार किया। बाद में repayment plan सामने आया, जिस पर creditors के बीच मतभेद भी देखने को मिले। कुछ lenders ने प्रस्तावित recovery को बेहद कम बताया, जबकि योजना को आवश्यक बहुमत वाले creditors का समर्थन हासिल हुआ।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

यह विवाद सिर्फ Subhash Chandra और Reliance के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। इससे भारत में personal insolvency, creditors की commercial wisdom और NCLT की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल उठते हैं। मामले में एक तरफ creditors की भारी रकम और प्रस्तावित recovery के बीच बड़ा अंतर है, तो दूसरी तरफ NCLT ने यह भी देखा कि अगर repayment plan को खारिज कर दिया जाता और bankruptcy की स्थिति आती, तो creditors की recovery इससे भी कम हो सकती थी। इसी वजह से ट्रिब्यूनल ने creditors के बहुमत के फैसले को महत्व दिया।

निष्कर्ष

Subhash Chandra NCLT Concerns ने एक बार फिर Zee Group, Subhash Chandra, Reliance और मीडिया कवरेज से जुड़े पुराने विवादों को चर्चा में ला दिया है। चंद्रा ने Reliance के मीडिया संस्थानों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि Reliance ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। वहीं NCLT का repayment plan करीब ₹22,006.57 करोड़ के admitted claims के मुकाबले सिर्फ Rs 6.5 करोड़ की recovery से जुड़ा है। अब इस मामले में आगे की कानूनी और कारोबारी घटनाओं पर नजर रहेगी।

FAQ (Frequently Asked Questions):

NCLT ने Subhash Chandra के मामले में क्या फैसला दिया?

NCLT ने Subhash Chandra के लिए एक repayment plan को मंजूरी दी, जिसके तहत creditors को करीब Rs 6.5 करोड़ की recovery प्रस्तावित है, जबकि admitted claims की राशि करीब Rs 22,006.57 करोड़ है।

Subhash Chandra ने Reliance Media पर क्या आरोप लगाए?

Subhash Chandra ने आरोप लगाया कि Reliance से जुड़े कुछ मीडिया संस्थानों ने उनके कर्ज और NCLT कार्यवाही को लेकर भ्रामक नैरेटिव पेश किया और उनके खिलाफ कथित अभियान चलाया।

Reliance ने Subhash Chandra के आरोपों पर क्या कहा?

Reliance ने चंद्रा के आरोपों को निराधार बताते हुए पूरी तरह खारिज किया। कंपनी ने कहा कि उसके मीडिया ब्रांड्स का इस्तेमाल किसी व्यक्ति पर हमला करने के लिए नहीं किया गया है।

Rs 22,000 करोड़ और Rs 6.5 करोड़ का मामला क्या है?

NCLT proceedings में Subhash Chandra के खिलाफ admitted claims करीब Rs 22,006.57 करोड़ बताए गए, जबकि approved repayment plan में creditors को करीब Rs 6.5 करोड़ की recovery प्रस्तावित है।

क्या NCLT के फैसले से पूरा Rs 22,000 करोड़ का कर्ज माफ हो गया?

मामला insolvency resolution process के तहत recovery से जुड़ा है। स्वीकृत repayment plan creditors को insolvency प्रक्रिया में मिलने वाली राशि निर्धारित करता है; इसे सीधे तौर पर पूरे Rs 22,000 करोड़ के भुगतान के रूप में नहीं देखा जा सकता।

Was this article useful?