ED Restructuring 2026: ED का पूरा सिस्टम बदलने की तैयारी, 50 PMLA और 5 FEMA जोन बनेंगे - 5 साल की जांच 18 महीने में कैसे सिमटेगी?
ED 1 जनवरी 2027 से अपने ढांचे में बड़ा बदलाव करेगा। 50 PMLA और 5 FEMA जोन बनाए जाएंगे, पद 2,029 से बढ़कर 3,256 होंगे। जांच अवधि 4-5 साल से घटाकर 18 महीने करने, ट्रायल, फॉरेंसिक और संपत्ति वापसी तेज करने पर जोर रहेगा।
ED Restructuring 2026: प्रवर्तन निदेशालय यानी ED अब देश में आर्थिक अपराधों की जांच को तेज करने के लिए अपने पूरे ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। नई कैडर रिस्ट्रक्चरिंग के तहत 1 जनवरी 2027 से ED का फील्ड नेटवर्क बढ़कर 50 PMLA जोन और 5 समर्पित FEMA जोन हो जाएगा। साथ ही जांच की मौजूदा अवधि, जो कई मामलों में 4 से 5 साल तक पहुंच जाती है, उसे करीब डेढ़ साल तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। इस बदलाव के साथ ED में स्वीकृत पदों की संख्या 2,029 से बढ़कर 3,256 और फंक्शनल यूनिट्स 131 से बढ़कर 241 हो जाएंगी।यह रोडमैप 14-15 सितंबर को बेंगलुरु में हुई ED के 36वें क्वार्टरली कॉन्फ्रेंस ऑफ जोनल ऑफिसर्स में सामने आया। बैठक की अध्यक्षता ED डायरेक्टर राहुल नवीन ने की। एजेंसी ने कहा है कि नई व्यवस्था का मकसद सिर्फ अधिकारियों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि जांच, ट्रायल, फॉरेंसिक और आर्थिक अपराध से जुड़ी संपत्तियों की वापसी की प्रक्रिया को भी ज्यादा समयबद्ध बनाना है।

ED का नया ढांचा कितना बड़ा होगा
नई व्यवस्था लागू होने के बाद ED के स्वीकृत पद करीब 60% बढ़ जाएंगे। मौजूदा 2,029 पदों की जगह 3,256 पद होंगे। इसी तरह फंक्शनल यूनिट्स की संख्या 131 से बढ़कर 241 हो जाएगी।PMLA यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट से जुड़े मामलों के लिए 50 जोन काम करेंगे। वहीं FEMA यानी फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट से जुड़े मामलों के लिए पांच अलग जोन बनाए जाएंगे। ये पांच FEMA जोन दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में होंगे। इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा उल्लंघन और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों की जांच के लिए अलग-अलग स्तर पर ज्यादा फोकस तैयार करना है।
ED का मौजूदा ढांचा पहले से ही देशभर में जोनल और सब-जोनल कार्यालयों के जरिए काम करता है। नई व्यवस्था उसी फील्ड नेटवर्क को ज्यादा कर्मचारियों और अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ मजबूत करेगी।
4-5 साल की जांच अब करीब 18 महीने में पूरी करने का लक्ष्य
ED के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबे समय तक चलने वाली जांच और मुकदमों की प्रक्रिया रही है। नई योजना में जांच के पूरे लाइफसाइकिल को मौजूदा 4-5 साल से घटाकर करीब 18 महीने करने का लक्ष्य रखा गया है।इसके लिए सिर्फ जांच अधिकारियों की संख्या बढ़ाने पर निर्भर नहीं किया जाएगा। ED ने डेटा एनालिटिक्स, साइबर फॉरेंसिक और अलग-अलग सरकारी डेटाबेस के इस्तेमाल को भी बढ़ाने की योजना बनाई है। कॉन्फ्रेंस में NATGRID, इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम, कॉरपोरेट और इमिग्रेशन डेटाबेस, वर्चुअल डिजिटल एसेट ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया से मिलने वाले विश्लेषणात्मक इनपुट के इस्तेमाल की समीक्षा की गई।
ED साइबर फॉरेंसिक के लिए एडवांस्ड टूल्स और फील्ड एक्विजिशन किट बढ़ाने की तैयारी में है। इसके अलावा नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी के साथ सहयोग बढ़ाकर क्षेत्रीय फॉरेंसिक लैब में विशेषज्ञों की तैनाती पर भी काम किया जाएगा।
सिर्फ जांच नहीं, ट्रायल भी तेज करने की तैयारी
ED ने आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में अदालत की प्रक्रिया को तेज करने पर भी जोर दिया है। हर क्षेत्र में कम से कम 10 हाई-प्रोफाइल PMLA मामलों की पहचान करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें 6 से 8 महीने के भीतर ट्रायल पूरा कर सजा तक पहुंचने की कोशिश होगी।इसके लिए लाइव ट्रायल पेंडेंसी डैशबोर्ड और एडजर्नमेंट यानी तारीख बढ़ने की वजहों को रिकॉर्ड करने वाली व्यवस्था तैयार की जा रही है। 10 साल से ज्यादा समय से लंबित मामलों को अलग मॉनिटरिंग रजिस्टर में रखकर हर महीने समीक्षा करने का भी फैसला किया गया है।
ED ने प्री-ट्रायल प्रक्रिया को भी व्यवस्थित करने पर जोर दिया है। अभियोजन शिकायत के साथ जरूरी दस्तावेज और गवाहों की सूची, सबूतों का कैलेंडर और इलेक्ट्रॉनिक या वैकल्पिक तरीके से समन की सेवा जैसे कदमों को ज्यादा व्यवस्थित किया जाएगा। लंबे समय से अदालत में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा भी होगी।
जब्त संपत्तियां पीड़ितों तक पहुंचाने पर जोर
ED ने आर्थिक अपराधों से जुड़ी जब्त और कुर्क संपत्तियों को वास्तविक पीड़ितों या वैध दावेदारों तक वापस पहुंचाने को भी प्रमुख लक्ष्य बनाया है।एजेंसी के मुताबिक अब तक 76 मामलों में 73,800 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति की वापसी की जा चुकी है। जोनल अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जहां संभव हो, चार्ज फ्रेम होने का इंतजार किए बिना वैध पीड़ितों को संपत्ति लौटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
इसके साथ ही सभी कन्फर्म्ड अटैच्ड प्रॉपर्टीज का छह महीने के भीतर सरकारी मान्यता प्राप्त वैल्यूअर्स से मूल्यांकन और जियो-टैगिंग कराने का लक्ष्य रखा गया है। उनकी वास्तविक यानी कंस्ट्रक्टिव पजेशन प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया जाएगा।
Project Pravartan Bhavan से 39 शहरों में अपने ऑफिस
ED ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए Project Pravartan Bhavan के तहत 31 मार्च 2029 तक अपने दायरे के सभी 39 शहरों में खुद के ऑफिस परिसर तैयार करने का लक्ष्य रखा है।कॉन्फ्रेंस में जमीन अधिग्रहण, निर्माण की स्थिति और बाकी कार्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। इसका उद्देश्य बढ़ते फील्ड नेटवर्क के लिए स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है।
पुलिस से लेकर CBI, SEBI तक एजेंसियों के साथ तालमेल
आर्थिक अपराधों की जांच में अलग-अलग एजेंसियों के बीच जानकारी का तेज आदान-प्रदान भी नई रणनीति का हिस्सा है। ED ने राज्य पुलिस के साथ-साथ CBI, कस्टम्स, DRI, NCB और SEBI के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया है।इसका खास महत्व उन मामलों में है जिनमें मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर फ्रॉड, बैंक फ्रॉड, संगठित अपराध, विदेशी लेनदेन या संपत्तियों से जुड़े कई पहलू एक साथ सामने आते हैं। एजेंसी का लक्ष्य है कि संबंधित संस्थाओं से मिलने वाली जानकारी को जांच में ज्यादा तेजी से इस्तेमाल किया जा सके।
AI का इस्तेमाल बढ़ेगा, लेकिन डेटा लीक का खतरा भी
ED अपनी जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल बढ़ाना चाहता है, लेकिन डायरेक्टर राहुल नवीन ने इसके साथ जुड़े एक खास खतरे की ओर भी ध्यान दिलाया है।उन्होंने कहा कि ऑफलाइन AI सिस्टम के इस्तेमाल में भी डेटा लीक का जोखिम हो सकता है। इसलिए संवेदनशील और गोपनीय केस मटेरियल को AI टूल्स के साथ इस्तेमाल करते समय बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने की संस्कृति को “जरूरत होने पर जानकारी” से “जानकारी साझा करने की जिम्मेदारी” की ओर ले जाने पर जोर दिया।
ED ने क्रिप्टो से जुड़े नए जोखिमों पर भी चर्चा की। इनमें डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस, स्टेबलकॉइन, हवाला नेटवर्क, चेन-हॉपिंग, क्रॉस-चेन ब्रिज, मिक्सर, टम्बलर और प्राइवेसी कॉइन जैसे माध्यम शामिल हैं।
Insolvency और बड़े आर्थिक फ्रॉड पर भी नजर
नई रणनीति में इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड और PMLA के तहत होने वाले फ्रॉड की पहचान पर भी जोर दिया गया है। खासतौर पर ऐसे मामलों की दोबारा जांच की बात कही गई है, जहां बहुत बड़े “हेयरकट” के बाद प्रमोटर कथित तौर पर दोबारा संपत्ति पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं।ED ने बैंक फ्रॉड, बिल्डर-बायर फ्रॉड, दिवालियापन से जुड़े मामलों और साइबर अपराधों में अपनी कार्रवाई को सार्वजनिक करने के लिए नियमित प्रेस रिलीज और मीडिया एंगेजमेंट पर भी जोर दिया है। साथ ही संगठन के भीतर भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई गई है।
कुल मिलाकर ED Restructuring 2026 सिर्फ नए जोन बनाने या कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। 1 जनवरी 2027 से प्रस्तावित बदलाव में जांच को तेज करना, टेक्नोलॉजी और फॉरेंसिक क्षमता बढ़ाना, ट्रायल की निगरानी मजबूत करना और आर्थिक अपराधों से जुड़ी संपत्तियों को पीड़ितों तक जल्दी पहुंचाना शामिल है। ED की अपनी योजना के मुताबिक सबसे बड़ा लक्ष्य यही है कि जो जांच अभी 4-5 साल तक चल सकती है, उसका पूरा चक्र करीब डेढ़ साल में पूरा हो।
FAQ (Frequently Asked Questions):
ED Restructuring 2026 क्या है और इसमें क्या बदलाव किए गए हैं?
ED की स्वीकृत कैडर रिस्ट्रक्चरिंग के तहत 1 जनवरी 2027 से फील्ड स्ट्रक्चर को 50 PMLA जोन और 5 समर्पित FEMA जोन तक बढ़ाने का लक्ष्य है। स्वीकृत पद 2,029 से बढ़कर 3,256 और फंक्शनल यूनिट्स 131 से बढ़कर 241 होंगी।
Enforcement Directorate Restructuring के तहत कितने नए PMLA Zones बनाए जाएंगे?
नई व्यवस्था में ED का फील्ड स्ट्रक्चर 50 PMLA जोन तक विस्तारित होगा। इनका मुख्य काम PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच करना होगा।
ED New Zones बनाने का उद्देश्य क्या है?
मुख्य उद्देश्य ED की फील्ड मौजूदगी और जांच क्षमता बढ़ाना तथा आर्थिक अपराधों की जांच को ज्यादा समयबद्ध बनाना है। एजेंसी ने जांच की अवधि 4-5 साल से घटाकर करीब डेढ़ साल करने का लक्ष्य रखा है।
50 PMLA Zones का Enforcement Directorate की जांच पर क्या असर होगा?
ज्यादा जोन और बढ़ी हुई स्टाफ क्षमता से मामलों को क्षेत्रीय स्तर पर संभालने की क्षमता बढ़ाने की कोशिश होगी। इसके साथ डेटा एनालिटिक्स, साइबर फॉरेंसिक और दूसरी एजेंसियों के साथ सूचना साझा करने पर भी जोर है।
5 FEMA Zones की स्थापना क्यों की जा रही है?
पांच समर्पित FEMA जोन विदेशी मुद्रा से जुड़े उल्लंघनों पर फोकस करेंगे। ये दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में स्थापित किए जाएंगे।
ED Cadre Restructuring से अधिकारियों और जांच क्षमता में क्या बदलाव आएगा?
स्वीकृत पद 2,029 से बढ़कर 3,256 होंगे, यानी करीब 60% की बढ़ोतरी। फंक्शनल यूनिट्स भी 131 से बढ़कर 241 होंगी। इसके साथ फॉरेंसिक, तकनीक, डेटा और ट्रायल मॉनिटरिंग क्षमता बढ़ाने की योजना है।