किसानों ने मूंग उगाई नहीं, फिर भी सरकार ने खरीद ली फसल, मध्य प्रदेश में ₹13 लाख के फर्जीवाड़े का खुलासा !
मध्य प्रदेश के रायसेन में मूंग खरीदी में कथित फर्जीवाड़ा सामने आया है। किसानों की जमीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर फर्जी पंजीयन किए गए और बाजार से सस्ती मूंग खरीदकर सरकारी समर्थन मूल्य पर बेचने का आरोप है। EOW ने FIR दर्ज की है।
रायसेन में क्या है पूरा मूंग खरीदी फर्जीवाड़ा ?
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में सामने आया यह कथित MP Moong Scam सरकारी समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी की व्यवस्था से जुड़ा है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW ने मामले में तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।जांच के अनुसार आरोपियों ने ऐसे किसानों की जमीन के रिकॉर्ड का कथित तौर पर इस्तेमाल किया जिन्होंने मूंग बेचने के लिए सरकारी व्यवस्था में पंजीयन नहीं कराया था। इन जमीनों के रिकॉर्ड के आधार पर कथित तौर पर फर्जी पंजीयन किए गए। इसके बाद बाजार से कम कीमत पर मूंग खरीदकर उसे संबंधित किसानों की उपज के रूप में सरकारी खरीद में बेचने का आरोप है। EOW की आधिकारिक वेबसाइट पर इस मामले से जुड़ी FIR 8 सितंबर 2026 को अपराध क्रमांक 95/2026 के रूप में दर्ज है।

कैसे हुआ Raisen Moong Scam ?
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार यह मामला किसानों की जमीन के रिकॉर्ड और सरकारी खरीद व्यवस्था में मौजूद जानकारी के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। समर्थन मूल्य पर मूंग बेचने के लिए किसानों की जमीन और फसल से संबंधित विवरण का पंजीयन सरकारी व्यवस्था में किया जाता है। आरोप है कि उपार्जन केंद्रों से जुड़े कुछ कर्मचारियों को यह जानकारी थी कि किन किसानों ने मूंग बेचने के लिए पंजीयन नहीं कराया है।जांच के अनुसार इसी जानकारी का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। ऐसे किसानों की जमीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर आरोपियों या उनके परिचितों को सिकमीदार दिखाते हुए कथित तौर पर पंजीयन किए गए। इसके बाद इन्हीं पंजीयनों के आधार पर सरकारी खरीद की गई।
यानी जिन किसानों ने मूंग की फसल नहीं उगाई थी उनके जमीन रिकॉर्ड से जुड़े पंजीयनों के आधार पर खरीदी गई मूंग को उनकी उपज के रूप में सरकारी खरीद में दर्ज करने का आरोप है।
किसानों ने मूंग उगाई नहीं तो सरकारी खरीद कैसे हुई ?
यही इस Moong Procurement Scam का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा है।EOW से जुड़ी रिपोर्टिंग के अनुसार बाजार से मूंग करीब ₹1500 से ₹3300 प्रति क्विंटल की कीमत पर खरीदी गई। इसके बाद इसी मूंग को सरकारी खरीद व्यवस्था में समर्थन मूल्य पर बेचने का आरोप है। संबंधित वर्षों में मूंग का MSP बाजार खरीद मूल्य से काफी अधिक था। वर्ष 2024 25 में मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP ₹8558 प्रति क्विंटल था। वर्ष 2025 26 में मूंग का MSP ₹8628 प्रति क्विंटल था।
इस तरह बाजार से कम कीमत पर खरीदी गई मूंग और सरकारी समर्थन मूल्य के बीच का अंतर कथित तौर पर अनुचित लाभ का आधार बना।
किसानों की जमीन का Fake Farmer Registration कैसे हुआ ?
जांच के अनुसार जिन किसानों ने मूंग बेचने के लिए पंजीयन नहीं कराया था उनकी जमीन के रिकॉर्ड का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि कुछ मामलों में आरोपियों या उनके परिचितों को इन जमीनों का सिकमीदार दिखाया गया और इसी आधार पर सरकारी खरीद के लिए पंजीयन कराया गया।यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जांच में जमीन का मालिकाना हक आरोपियों के नाम ट्रांसफर होने की बात नहीं है। आरोप किसानों के जमीन रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से सरकारी खरीद के लिए पंजीयन कराने से जुड़ा है। जिन किसानों की जमीन और पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल हुआ उन्होंने जांच के दौरान कहा कि उन्हें ऐसे पंजीयन की जानकारी नहीं थी।
रिपोर्टों के अनुसार कुछ किसानों ने यह भी कहा कि उन्होंने इसके लिए कोई सहमति नहीं दी थी और कोई कौलीनामा भी नहीं दिया था। जांच में कुछ पंजीयनों से जुड़े बैंक खाते संबंधित किसानों के खाते नहीं पाए गए। किसानों ने कथित तौर पर बताया कि उनके नाम से हुई खरीद का पैसा उन्हें नहीं मिला।
यही वजह है कि मामले में Farmer Identity Misuse और Fake Farmer Registration के आरोप महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
MP Moong Procurement Fraud में कितने रुपये का खेल हुआ ?
EOW की जांच के अनुसार तीन मामलों में कुल ₹13,34,905 का अनुचित लाभ होने और शासन को लगभग इतनी ही राशि की आर्थिक क्षति होने की बात सामने आई है। इन मामलों में सरकारी खरीद से मिलने वाले भुगतान और बाजार से मूंग खरीदने की अनुमानित लागत के बीच बड़ा अंतर सामने आया। श्रीराम ठाकुर का मामला जांच के अनुसार श्रीराम ठाकुर के नाम करीब 12.62 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा पंजीयन किया गया।इसके आधार पर करीब 151.524 क्विंटल मूंग की सरकारी खरीद दिखाई गई। इसके बदले करीब ₹13.15 लाख का भुगतान हुआ जबकि मूंग खरीदने की अनुमानित लागत करीब ₹4.54 लाख बताई गई। EOW की जांच के अनुसार इससे करीब ₹8.61 लाख का अनुचित लाभ हुआ।
रंजीत ठाकुर का मामला
रंजीत ठाकुर के नाम करीब 3.523 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा पंजीयन होने की बात सामने आई। इस आधार पर करीब 42.276 क्विंटल मूंग की सरकारी खरीद दिखाई गई। इसके बदले करीब ₹3.67 लाख का भुगतान हुआ जबकि अनुमानित खरीद लागत करीब ₹1.27 लाख थी। जांच के अनुसार इससे करीब ₹2.40 लाख का अनुचित लाभ हुआ। गौरव ठाकुर का मामला गौरव ठाकुर के मामले में करीब 3.428 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा पंजीयन बताया गया। इसके आधार पर करीब 41.136 क्विंटल मूंग की खरीद दिखाई गई। इसके बदले करीब ₹3.57 लाख का भुगतान हुआ जबकि अनुमानित खरीद लागत करीब ₹1.23 लाख थी। जांच के अनुसार इससे करीब ₹2.34 लाख का अनुचित लाभ हुआ। तीनों मामलों को मिलाकर कथित अनुचित लाभ ₹13,34,905 बताया गया है।
कौन हैं आरोपी ?
EOW ने मामले में रंजीत ठाकुर, श्रीराम ठाकुर और गौरव ठाकुर के खिलाफ FIR दर्ज की है।जांच से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार श्रीराम ठाकुर देहरीकला समिति से कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में जुड़े थे। गौरव ठाकुर भारकच्छ कला समिति से कंप्यूटर ऑपरेटर बताए गए हैं। रंजीत ठाकुर भी संबंधित सहकारी समिति व्यवस्था से जुड़े बताए गए हैं। मामला रायसेन जिले की बाड़ी तहसील से जुड़ी सहकारी समितियों का बताया गया है। इनमें देहरीकला, भारकच्छ कला और गूगलवाड़ा की समितियां शामिल हैं।

MP Moong Scam सामने कैसे आया ?
यह मामला एक किसान की शिकायत के बाद जांच के दायरे में आया। रिपोर्टों के अनुसार किसान ने अपनी जमीन से जुड़े ऐसे पंजीयन पर सवाल उठाया जिसके बारे में उसने खुद कोई पंजीयन नहीं कराया था। इसके बाद जमीन के रिकॉर्ड और सरकारी मूंग खरीद से जुड़े पंजीयनों की जांच की गई। जांच में ऐसे मामले सामने आए जिनमें किसानों के नाम और जमीन के रिकॉर्ड का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया था जबकि संबंधित किसानों ने ऐसी खरीद के लिए पंजीयन कराने से इनकार किया।इस मामले की खास बात यह है कि EOW की कार्रवाई से पहले सहकारिता विभाग की ओर से भी जांच की गई थी। रिपोर्टों के अनुसार विभागीय जांच में भी अनियमितताएं सामने आई थीं। कुछ मामलों में कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई लेकिन मामला आपराधिक जांच तक नहीं पहुंचा।
बाद में शिकायत और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के आधार पर EOW ने FIR दर्ज की।
इससे जांच में यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद पहले की विभागीय जांचों में आगे कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
Moong MSP Scam में सरकार को कितना नुकसान हुआ ?
EOW की जांच के अनुसार तीन मामलों में करीब ₹13.35 लाख का अनुचित लाभ हुआ और शासन को लगभग इतनी ही राशि की आर्थिक क्षति होने की बात सामने आई है। आरोप के अनुसार बाजार से कम कीमत पर मूंग खरीदी गई और फिर उसे सरकारी समर्थन मूल्य पर बेचने की व्यवस्था का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। यानी जिस सरकारी व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित समर्थन मूल्य दिलाना था उसी व्यवस्था का कथित तौर पर फायदा उठाकर सरकारी धन हासिल किया गया।हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि यह राशि EOW की जांच में सामने आया कथित नुकसान और अनुचित लाभ है। अदालत में आरोप साबित होने के बाद ही अंतिम कानूनी निष्कर्ष निकलेगा।
क्या किसानों को भी पैसा मिला था ?
उपलब्ध जांच रिपोर्टों के अनुसार जिन किसानों की जमीन और पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल हुआ उन्हें इस खरीद की जानकारी नहीं थी। जांच में कुछ पंजीयनों से जुड़े बैंक खाते संबंधित किसानों के खाते नहीं पाए गए। कुछ किसानों ने कथित तौर पर बताया कि उनके नाम से हुई खरीद का पैसा उन्हें नहीं मिला। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार ने किसानों को ₹13 लाख बांट दिए। जांच के अनुसार सरकारी खरीद के जरिए हुए भुगतान से आरोपियों को कथित तौर पर अनुचित लाभ हुआ।
क्या यह पूरे मध्य प्रदेश का Moong Procurement Scam है ?
अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा। मामला फिलहाल रायसेन जिले की बाड़ी तहसील की संबंधित सहकारी समितियों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का है। EOW ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। इसलिए पूरे मध्य प्रदेश की मूंग खरीद व्यवस्था को इस एक मामले के आधार पर फर्जी या भ्रष्ट बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
जांच में आगे क्या होगा ?
EOW ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। जांच में पंजीयन रिकॉर्ड किसानों की जमीन से जुड़े दस्तावेज बैंक खातों सरकारी खरीद के रिकॉर्ड और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।जांच का एक अहम सवाल यह भी है कि कथित फर्जी पंजीयन की प्रक्रिया में केवल तीन लोगों की भूमिका थी या सरकारी खरीद व्यवस्था से जुड़े अन्य लोगों की भी कोई भूमिका सामने आती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी वरिष्ठ अधिकारी की संलिप्तता को साबित तथ्य के रूप में लिखना उचित नहीं होगा।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश का यह MP Moong Scam सरकारी MSP खरीद व्यवस्था में निगरानी और सत्यापन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। रायसेन में EOW की जांच के अनुसार किसानों की जमीन के रिकॉर्ड का कथित दुरुपयोग कर पंजीयन किए गए। इसके बाद बाजार से सस्ती मूंग खरीदकर उसे सरकारी समर्थन मूल्य पर बेचने का आरोप है। तीन मामलों में कुल ₹13,34,905 के अनुचित लाभ और शासन को लगभग इतनी ही राशि की आर्थिक क्षति होने की बात जांच में सामने आई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन किसानों की जमीन और पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल हुआ उनमें से कुछ ने ऐसी खरीद से अनजान होने की बात कही है।मामले में EOW की जांच अभी जारी है। इसलिए सामने आए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं बल्कि जांच में सामने आए आरोपों के रूप में देखना जरूरी है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
मध्य प्रदेश में Moong Procurement Scam कैसे सामने आया ?
मामला एक किसान की शिकायत के बाद जांच के दायरे में आया। जमीन के रिकॉर्ड और सरकारी खरीद से जुड़े पंजीयनों की जांच में ऐसे मामले सामने आए जिनमें किसानों की जमीन और पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया था।
Madhya Pradesh Moong Scam में किसानों ने मूंग की फसल नहीं उगाई थी फिर Government Moong Procurement कैसे हुई ?
जांच के अनुसार ऐसे किसानों की जमीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया जिन्होंने मूंग बेचने के लिए पंजीयन नहीं कराया था। आरोप है कि बाजार से खरीदी गई मूंग को इन्हीं पंजीयनों के आधार पर संबंधित किसानों की उपज के रूप में सरकारी खरीद में दर्ज किया गया।
Raisen Moong Scam में किसानों की जमीन का Fake Farmer Registration कैसे किया गया ?
जांच के अनुसार किसानों की जमीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर आरोपियों या उनके परिचितों को सिकमीदार दिखाते हुए कथित तौर पर पंजीयन किए गए। इन पंजीयनों के आधार पर सरकारी मूंग खरीद की गई।
MP Moong Procurement Fraud में किसानों के नाम पर कितने रुपये का Financial Loss हुआ ?
EOW की जांच के अनुसार तीन मामलों में कुल ₹13,34,905 का अनुचित लाभ हुआ और शासन को लगभग इतनी ही राशि की आर्थिक क्षति होने की बात सामने आई है।
Fake Moong Registration में किसानों के बैंक खातों और जमीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल कैसे किया गया ?
जांच के अनुसार किसानों की जमीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल कथित फर्जी पंजीयन के लिए किया गया। कुछ पंजीयनों से जुड़े बैंक खाते संबंधित किसानों के खाते नहीं पाए गए और किसानों ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें इस खरीद का भुगतान नहीं मिला।
Moong MSP Scam में आरोपियों ने सरकारी खरीद से कितना Illegal Profit कमाया ?
EOW की जांच के अनुसार तीन मामलों में कुल ₹13,34,905 का अनुचित लाभ होने की बात सामने आई है। इसमें श्रीराम ठाकुर से जुड़े मामले में करीब ₹8.61 लाख का अनुचित लाभ बताया गया है।