Sonam Wangchuk Ladakh Protest: लद्दाख में फिर आंदोलन की आहट, 19 सितंबर से प्रदर्शन की चेतावनी; केंद्र से बातचीत के बाद भी क्यों नाराज हैं नेता?
सोनम वांगचुक ने केंद्र को एक हफ्ते में लद्दाख के मुद्दों पर ठोस आश्वासन देने का अल्टीमेटम दिया है। मांग पूरी नहीं होने पर 19 से 24 सितंबर के बीच फिर आंदोलन की चेतावनी दी। MHA वार्ता में निर्वाचित निकाय का ड्राफ्ट नहीं आया।
Sonam Wangchuk Ladakh Protest: लद्दाख में एक बार फिर आंदोलन की आहट सुनाई दे रही है। सामाजिक कार्यकर्ता और लेह एपेक्स बॉडी (LAB) के प्रमुख चेहरों में शामिल सोनम वांगचुक ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार एक हफ्ते के भीतर लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर ठोस आश्वासन नहीं देती है तो 19 से 24 सितंबर 2026 के बीच फिर आंदोलन शुरू किया जा सकता है। यह चेतावनी 9 सितंबर को गृह मंत्रालय (MHA) की उपसमिति और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद आई है। वांगचुक और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने बातचीत पर निराशा जताई है, क्योंकि जिस निर्वाचित यूटी निकाय का ड्राफ्ट सामने आने की उम्मीद थी, वह बैठक में पेश नहीं किया गया।लद्दाख को लेकर केंद्र और लेह-कर्गिल के प्रतिनिधियों के बीच 2021 से बातचीत चल रही है। मुख्य मांगों में लद्दाख के लिए निर्वाचित शासन व्यवस्था, जमीन, रोजगार, संस्कृति और पहचान की संवैधानिक सुरक्षा तथा पहले से चल रहे मामलों को वापस लेना शामिल है। लद्दाख को 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग कर बिना विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया था।
MHA ने अधिकारों का प्रस्ताव रखा, लेकिन ड्राफ्ट नहीं आया
9 सितंबर की बैठक में गृह मंत्रालय की ओर से प्रस्तावित निर्वाचित यूटी निकाय के अधिकारों को लेकर कुछ अहम बातें सामने आईं। संयुक्त बयान के मुताबिक, यह निकाय सीधे चुनाव के जरिए चुना जाएगा और उसे जमीन, संस्कृति, भाषा, जंगल, पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों तथा संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत यूटी के लिए आरक्षित दूसरे विषयों पर कानून बनाने की शक्ति देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा निकाय को कार्यकारी, बजटीय, योजना और वित्तीय अधिकार देने की बात भी हुई।लेकिन यहीं सबसे बड़ा पेच बना हुआ है। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस का कहना है कि कानून-व्यवस्था और पुलिस पर निर्वाचित सरकार का कितना नियंत्रण होगा, यह अभी साफ नहीं है। लद्दाख के प्रतिनिधियों ने पुडुचेरी का उदाहरण देते हुए कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारों पर स्पष्टता मांगी है। सोनम वांगचुक का कहना है कि निर्वाचित निकाय को नौकरशाही और कानून-व्यवस्था पर भी पर्याप्त नियंत्रण मिलना चाहिए। इस मुद्दे पर आगे अक्टूबर में चर्चा होनी है।
बैठक से पहले लद्दाख के प्रतिनिधियों को उम्मीद थी कि केंद्र प्रस्तावित निर्वाचित निकाय की संरचना, अधिकार और कामकाज से जुड़ा विस्तृत ड्राफ्ट सामने रखेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वांगचुक ने कहा कि पिछली 22 मई की बैठक में जो बातें सामने आई थीं, मुख्य रूप से वही दोहराई गईं और इस बार विस्तृत ड्राफ्ट के बजाय सवालों की एक सूची दी गई, जिन पर अगली बैठक में चर्चा होनी है।

अनुच्छेद 371 की सुरक्षा पर भी बातचीत जारी
लद्दाख के लिए विशेष संवैधानिक सुरक्षा देने को लेकर अनुच्छेद 371 के तहत अलग व्यवस्था पर भी चर्चा चल रही है। कुछ रिपोर्टों में इसे प्रस्तावित अनुच्छेद 371(K) के रूप में बताया गया है। इसका मकसद लद्दाख के लिए उसकी परिस्थितियों के अनुरूप एक अलग संवैधानिक सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना है। हालांकि इसका अंतिम ड्राफ्ट और अधिकार अभी तय नहीं हुए हैं।यह व्यवस्था लद्दाख की पुरानी छठी अनुसूची की मांग से अलग हो सकती है। लद्दाख के संगठन लंबे समय से जमीन, रोजगार, संस्कृति और स्थानीय पहचान की सुरक्षा के लिए संवैधानिक गारंटी की मांग कर रहे हैं। केंद्र की ओर से सामने आए प्रस्ताव में भी जमीन, संस्कृति, भाषा, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों जैसे विषयों पर निर्वाचित निकाय को अधिकार देने की बात हुई है, लेकिन अंतिम संवैधानिक ढांचा अभी तैयार नहीं हुआ है।
वहीं लद्दाख के नेताओं ने यह भी कहा है कि जब तक निर्वाचित यूटी निकाय नहीं बन जाता, तब तक प्रशासनिक व्यवस्था, जमीन के हस्तांतरण या लद्दाख के मौजूदा ढांचे में ऐसे बड़े और अपरिवर्तनीय बदलाव नहीं होने चाहिए, जो बाद में बदले न जा सकें। उनका कहना है कि पहले लोकतांत्रिक निकाय बने और उसके बाद बड़े फैसले लिए जाएं।
2025 की हिंसा के मामलों और मुआवजे का मुद्दा भी उठा
बातचीत में सितंबर 2025 की हिंसा से जुड़े मामलों का मुद्दा भी सामने आया। 24 सितंबर 2025 को लेह में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। पुलिस फायरिंग में 4 लोगों की मौत और करीब 80 लोग घायल हुए थे। इसके बाद कई लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे।LAB और KDA ने इन मामलों को चरणबद्ध तरीके से नहीं, बल्कि एक साथ वापस लेने की मांग की है। बैठक में गृह मंत्रालय की ओर से इस मामले को देखने की बात कही गई। साथ ही 2025 की हिंसा में मारे गए लोगों और घायलों के लिए मुआवजा पैकेज देने का आश्वासन भी दिए जाने की बात लद्दाख के प्रतिनिधियों ने कही है।
पहले 10 सितंबर की पदयात्रा टली, अब 19 से 24 सितंबर का अल्टीमेटम
लेह एपेक्स बॉडी ने सितंबर को मार्टियर्स मंथ के तौर पर मनाने का फैसला किया है। इसी दौरान कारगिल से लेह तक 10 सितंबर को पदयात्रा निकालने की योजना थी, लेकिन 9 सितंबर की MHA बैठक को देखते हुए इसे फिलहाल टाल दिया गया। अब बातचीत से अपेक्षित नतीजा नहीं निकलने के बाद 19 से 24 सितंबर के बीच नए आंदोलन की चेतावनी दी गई है।सोनम वांगचुक ने केंद्र को एक हफ्ते का समय देते हुए कहा है कि जब तक लद्दाख के लिए निर्वाचित शासन व्यवस्था नहीं बनती, तब तक बड़े फैसले नहीं लिए जाने चाहिए। उन्होंने प्रशासन पर ऐसे फैसलों का आरोप भी लगाया है, जिनसे लद्दाख की जनसांख्यिकी में बदलाव हो सकता है। वांगचुक का कहना है कि अगर मौजूदा प्रशासन ही बड़े फैसले करता रहेगा तो भविष्य में बनने वाले निर्वाचित निकाय के पास करने के लिए क्या बचेगा।
वांगचुक ने यह भी कहा है कि अगर लद्दाख के मुद्दों पर प्रगति नहीं हुई तो देशभर के लोगों से आंदोलन के समर्थन में आगे आने की अपील की जाएगी। उनका कहना है कि लद्दाख के लोग देश की सीमाओं पर रहते हुए क्षेत्र, पर्यावरण और अपनी पहचान की सुरक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं।
वांगचुक पहले भी आंदोलन और जेल का सामना कर चुके हैं
सोनम वांगचुक को पिछले साल 24 सितंबर की हिंसा के दो दिन बाद 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। वह करीब छह महीने तक जोधपुर जेल में रहे और मार्च 2026 में रिहा हुए। केंद्र सरकार ने उस समय उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था, जबकि वांगचुक ने आरोपों को खारिज किया था।रिहाई के बाद उन्होंने जून 2026 में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों के समर्थन में 28 जून से 26 दिनों तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी की थी। अब लद्दाख के मुद्दे पर उनकी नई आंदोलन की चेतावनी ऐसे समय आई है, जब केंद्र के साथ बातचीत एक बार फिर अटकती दिखाई दे रही है।
अक्टूबर में फिर बातचीत, लेकिन उससे पहले आंदोलन का दबाव
MHA और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच अगली बातचीत अक्टूबर के पहले सप्ताह में कर्गिल में होने की संभावना है। इसमें प्रस्तावित संवैधानिक प्रावधान के ड्राफ्ट पर चर्चा होने की बात कही गई है।केंद्र के पक्ष से लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने बातचीत को सकारात्मक बताया है। उनके मुताबिक अनुच्छेद 371 के तहत लद्दाख के लिए एक अलग, परिस्थितियों के अनुरूप शासन मॉडल के व्यापक ढांचे पर चर्चा हुई है और इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना है। दूसरी ओर LAB और KDA का कहना है कि जब तक लिखित ड्राफ्ट और अधिकारों की स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आती, तब तक वे इसे ठोस प्रगति नहीं मान सकते।
यही अंतर अब लद्दाख में आगे की स्थिति तय करेगा। अगर केंद्र एक हफ्ते में भरोसेमंद आश्वासन देता है तो 19 से 24 सितंबर का प्रस्तावित आंदोलन टल सकता है। लेकिन अगर बातचीत में फिर ठोस प्रगति नहीं हुई तो सोनम वांगचुक और लद्दाख के संगठनों के सामने आंदोलन दोबारा शुरू करने का विकल्प खुला है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
सोनम वांगचुक ने Ladakh में fresh protest की चेतावनी क्यों दी?
सोनम वांगचुक ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार एक हफ्ते के भीतर लद्दाख के मुद्दों पर ठोस आश्वासन नहीं देती है तो 19 से 24 सितंबर के बीच फिर आंदोलन किया जा सकता है। उनकी नाराजगी 9 सितंबर की MHA बैठक में विस्तृत ड्राफ्ट नहीं आने और कई अधिकारों पर स्पष्टता नहीं होने को लेकर है।
Ladakh Talks Centre के साथ क्यों विफल हुए?
लद्दाख के संगठनों ने बातचीत को निराशाजनक बताया है क्योंकि वे प्रस्तावित निर्वाचित यूटी निकाय का विस्तृत ड्राफ्ट चाहते थे, लेकिन बैठक में ड्राफ्ट पेश नहीं किया गया। कानून-व्यवस्था और पुलिस जैसे अधिकारों पर भी अभी स्पष्ट सहमति नहीं बनी है। हालांकि केंद्र ने व्यापक शासन मॉडल पर बातचीत को सकारात्मक बताया है।
19 September से Ladakh में क्या होने वाला है?
अगर केंद्र से एक हफ्ते के भीतर संतोषजनक आश्वासन नहीं मिलता है तो सोनम वांगचुक ने 19 से 24 सितंबर के बीच नए आंदोलन की चेतावनी दी है। इसे फिलहाल अंतिम रूप से शुरू हो चुका आंदोलन नहीं, बल्कि सरकार को दिया गया अल्टीमेटम समझना चाहिए।
Ladakh leaders की मुख्य demands क्या हैं?
मुख्य मांगों में निर्वाचित यूटी-स्तरीय शासन व्यवस्था, उसके अधिकारों की स्पष्टता, जमीन, रोजगार, संस्कृति और पहचान की संवैधानिक सुरक्षा तथा बड़े प्रशासनिक बदलावों पर रोक शामिल है। कानून-व्यवस्था और पुलिस पर निर्वाचित सरकार के नियंत्रण को लेकर भी LAB और KDA स्पष्टता चाहते हैं।
Ladakh को Sixth Schedule की मांग क्यों है?
लद्दाख के संगठन लंबे समय से जमीन, रोजगार, संस्कृति और स्थानीय पहचान की सुरक्षा के लिए मजबूत संवैधानिक गारंटी मांग रहे हैं। छठी अनुसूची इसके लिए एक प्रमुख मांग रही है, हालांकि मौजूदा बातचीत में केंद्र की ओर से लद्दाख के लिए अलग अनुच्छेद 371 आधारित व्यवस्था पर चर्चा हो रही है।
Leh Apex Body और Kargil Democratic Alliance क्या चाहते हैं?
LAB और KDA लद्दाख के लिए सीधे चुनाव से बनने वाला यूटी-स्तरीय निर्वाचित निकाय चाहते हैं, जिसे जमीन, संस्कृति, भाषा, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों जैसे विषयों पर अधिकार मिलें। वे इसके साथ कार्यकारी, वित्तीय और योजना संबंधी शक्तियों तथा कानून-व्यवस्था पर स्पष्ट अधिकार की भी मांग कर रहे हैं।