Egg Price Inflation India - अंडे 50% तक महंगे और 70% लोगों को मिलावट की चिंता, आखिर सर्वे में क्या सामने आया?
डों की कीमत में पिछले छह महीनों में तेज बढ़ोतरी हुई है। सर्वे में 84% परिवारों ने कीमत बढ़ने की बात कही, जबकि 48% ने खरीद कम की। महंगे फीड, मक्का, इथेनॉल की मांग और गर्मी से सप्लाई घटने को प्रमुख वजह बताया गया।
अंडा, जिसे लंबे समय से सस्ता और आसानी से मिलने वाला प्रोटीन माना जाता रहा है, अब घरों के बजट पर असर डालने लगा है। Egg Price Inflation India का असर पिछले छह महीनों में साफ दिखाई दे रहा है। लोकलसर्किल्स के सर्वे के मुताबिक, 84% अंडा खाने वाले परिवारों ने कीमत बढ़ने की बात कही है, जबकि 62% ने बताया कि अंडे 10 से 50% तक महंगे हुए हैं। करीब 48% परिवारों ने बढ़ती कीमतों के कारण अंडे खरीदने की मात्रा या फ्रीक्वेंसी कम कर दी है।यह स्थिति ऐसे समय में है जब देश में खाने-पीने की चीजों की महंगाई भी बढ़ी हुई है। जुलाई 2026 में भारत की फूड इन्फ्लेशन 5.52% रही, जो जून के 5.32% से ज्यादा है। हालांकि यह आंकड़ा पूरे फूड बास्केट का है और सिर्फ अंडों की महंगाई को नहीं दर्शाता।
छह महीने में 84% परिवारों ने अंडे महंगे होने की बात कही
लोकलसर्किल्स ने अंडों की कीमत में पिछले छह महीनों में हुए बदलाव को लेकर 21,469 लोगों से जवाब लिए। इनमें 31% लोगों ने कहा कि अंडों की कीमत 10 से 25% बढ़ी है। इतने ही यानी 31% ने 25 से 50% तक की बढ़ोतरी बताई।इसके अलावा 22% लोगों ने कीमत में 10% तक की बढ़ोतरी बताई, जबकि 16% लोग यह अनुमान नहीं लगा सके कि कीमत कितनी बढ़ी है। किसी भी उत्तरदाता ने यह नहीं कहा कि अंडों की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। इस तरह 84% परिवारों ने किसी न किसी स्तर पर कीमत बढ़ने की बात कही और 62% ने 10 से 50% की बढ़ोतरी बताई।
सर्वे के आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि कीमतों में बढ़ोतरी केवल किसी एक शहर या क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। फार्म से निकलने वाले अंडों की कीमत में भी बड़ा उछाल आया है और उसका असर रिटेल मार्केट तक पहुंचा है।
फार्म से रिटेल तक अंडे की कीमत में बड़ा उछाल
रिपोर्ट के मुताबिक, एक्स-फार्म यानी फार्म से निकलने वाले अंडे की कीमत अब करीब ₹7 प्रति अंडा पहुंच गई है। एक साल पहले यह लगभग ₹4.94 प्रति अंडा थी। यानी फार्म लेवल पर कीमत करीब 35-40% बढ़ी है।रिटेल मार्केट में कई जगह अंडे ₹8.50 से ₹9 प्रति पीस तक बिक रहे हैं। कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कीमत करीब ₹14 प्रति अंडा तक पहुंच गई है। हालांकि रिटेल कीमत शहर, बाजार, ब्रांड और सप्लाई के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।
एनईसीसी के थोक रेट की बात करें तो सितंबर 2025 में 100 अंडों की कीमत करीब ₹558 थी, जो दिसंबर में बढ़कर ₹686 हो गई। बड़े कंजम्पशन सेंटर में कीमत 100 अंडों के लिए ₹800 से भी ऊपर पहुंच गई।
यानी अंडे की महंगाई का असर केवल थोक बाजार में नहीं है, बल्कि सप्लाई चेन के अलग-अलग स्तरों से गुजरते हुए इसका बड़ा हिस्सा ग्राहक तक पहुंच रहा है।
असली दबाव मुर्गियों के दाने पर, मक्का महंगा होना बड़ी वजह
अंडे की कीमत बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा दबाव पोल्ट्री फीड की लागत का है। लोकलसर्किल्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अंडा तैयार करने की कुल लागत में फीड की हिस्सेदारी करीब 65-70% होती है।पोल्ट्री फीड में मक्के की बड़ी हिस्सेदारी होती है। रिपोर्ट के अनुसार, मक्के की कीमत करीब ₹14,000 प्रति टन से बढ़कर लगभग ₹26,500 प्रति टन हो गई है। सोयाबीन मील की कीमत भी करीब ₹40,000 से बढ़कर ₹65,000 प्रति टन और डी-ऑयल्ड राइस ब्रान की कीमत ₹12,000 से बढ़कर लगभग ₹22,000 प्रति टन हो गई है।
जुलाई 2026 में पोल्ट्री फीड की लागत एक साल पहले की तुलना में करीब 15% ज्यादा बताई गई। जब मुर्गियों को पालने और अंडे तैयार करने की लागत बढ़ती है, तो इसका असर स्वाभाविक रूप से फार्म-गेट कीमत और फिर रिटेल कीमत पर पड़ता है।
इथेनॉल के लिए मक्के की बढ़ती मांग का भी असर
अंडों की बढ़ती कीमत को लेकर एक और महत्वपूर्ण कड़ी मक्के की बढ़ती मांग है। मक्का केवल पोल्ट्री फीड में ही इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि इथेनॉल प्रोडक्शन में भी इसकी मांग बढ़ी है।लोकलसर्किल्स की रिपोर्ट में दिए आंकड़ों के मुताबिक, डिस्टिलरीज को भेजे जाने वाले मक्के की मात्रा 2022-23 में 8.3 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 125.75 लाख टन हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की मक्का फसल का करीब 37% हिस्सा अब इथेनॉल के लिए जा रहा है।
इसका मतलब है कि मक्का अब इंसानों के भोजन, पशु-पक्षियों के चारे और फ्यूल प्रोडक्शन - तीनों के लिए इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में इसकी मांग बढ़ने पर पोल्ट्री सेक्टर के लिए फीड की लागत भी बढ़ सकती है।
गर्मी से लाखों पक्षियों की मौत, अंडों की सप्लाई भी घटी
सिर्फ फीड महंगा होना ही वजह नहीं है। गर्मी ने भी अंडों की सप्लाई पर असर डाला है।रिपोर्ट के मुताबिक, तटीय आंध्र प्रदेश के प्रमुख लेयर बेल्ट में गर्मी के दौरान 16.35 लाख से ज्यादा पक्षियों की मौत हुई। इससे इस क्षेत्र में रोजाना अंडे देने की क्षमता करीब 30% घट गई।
पोल्ट्री बर्ड्स पर ज्यादा गर्मी का असर उनकी सेहत और अंडा देने की क्षमता पर पड़ सकता है। अगर किसी बड़े उत्पादन क्षेत्र से सप्लाई घटती है और दूसरी तरफ मांग बनी रहती है, तो कीमतों पर ऊपर जाने का दबाव बढ़ जाता है।
यह दबाव आने वाले महीनों में भी महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि सर्दियों में आमतौर पर अंडों की खपत बढ़ जाती है।
महंगे अंडों से परिवारों ने खरीदारी घटाई
कीमत बढ़ने का सीधा असर अब लोगों के खरीदने के तरीके पर दिख रहा है। 19,638 लोगों से पूछा गया कि उन्होंने महंगे अंडों के बाद क्या बदलाव किया।इनमें 48% ने कहा कि उन्होंने अंडे खरीदने की मात्रा या फ्रीक्वेंसी कम कर दी। करीब 10% लोग सस्ते विकल्प या दूसरे स्रोतों की ओर चले गए। वहीं 37% लोगों ने कहा कि कीमत बढ़ने के बावजूद वे पहले जितनी ही मात्रा में अंडे खरीद रहे हैं।
5% लोगों ने कहा कि उन्हें कीमत में कोई खास बढ़ोतरी महसूस नहीं हुई। किसी भी उत्तरदाता ने यह नहीं कहा कि उसने पूरी तरह अंडे खरीदना बंद कर दिया है।
इससे पता चलता है कि अंडा अभी भी परिवारों के लिए जरूरी प्रोटीन स्रोत है, लेकिन कीमत बढ़ने पर लोग उसकी मात्रा कम करने या सस्ता विकल्प तलाशने लगे हैं।
कीमत बढ़ने के साथ अंडों की क्वालिटी को लेकर भी चिंता
सर्वे में केवल कीमत ही नहीं, बल्कि अंडों की सेफ्टी और मिलावट को लेकर भी चिंता सामने आई। अंडों में एडॉल्टरेशन को लेकर 26,560 लोगों से जवाब लिए गए।इनमें 70% लोगों ने कहा कि वे अंडों की मिलावट को लेकर बहुत चिंतित हैं। 20% कुछ हद तक चिंतित थे। 2% ने कहा कि वे चिंतित नहीं हैं, जबकि 4% लोग इस सवाल पर कुछ नहीं कह सके।
यह चिंता ऐसे समय सामने आई है जब एफएसएसएआई की ओर से अंडों की सेफ्टी को लेकर निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान एक ब्रांडेड अंडों के बैच में नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स मिलने की रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ था। हालांकि एफएसएसएआई ने कहा है कि अंडे खाने के लिए सुरक्षित हैं और अंडों को कैंसर से जोड़ने वाले दावे वैज्ञानिक रूप से सही नहीं हैं।
जुलाई में फूड इन्फ्लेशन 5.52%, महंगाई का दबाव बरकरार
अंडों की कीमत ऐसे समय बढ़ रही है जब पूरे फूड बास्केट में भी महंगाई का दबाव बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स आधारित फूड इन्फ्लेशन 5.52% रही, जबकि जून में यह 5.32% थी। ग्रामीण इलाकों में फूड इन्फ्लेशन 5.79% और शहरी इलाकों में 5.05% रही।हालांकि यह समझना जरूरी है कि फूड इन्फ्लेशन का आंकड़ा पूरे खाद्य बास्केट की कीमतों को दिखाता है। अंडों की 35-40% सालाना बढ़ोतरी अलग सप्लाई और प्रोडक्शन परिस्थितियों से जुड़ी है।
आगे अंडों की कीमत पर क्या असर पड़ेगा?
अंडों की कीमत आगे किस दिशा में जाएगी, यह मुख्य रूप से पोल्ट्री फीड की लागत, मक्के की उपलब्धता, इथेनॉल सेक्टर की मांग, मौसम और अंडों की सप्लाई पर निर्भर करेगा। अगर गर्मी और फीड कॉस्ट का दबाव बना रहता है और सर्दियों में मांग बढ़ती है, तो कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है।फिलहाल तस्वीर यह है कि अंडा पहले की तरह सस्ता प्रोटीन विकल्प तो बना हुआ है, लेकिन उसकी कीमत में आई तेज बढ़ोतरी ने परिवारों को अपनी खरीद कम करने पर मजबूर करना शुरू कर दिया है। Egg Price Inflation India का असर अब केवल पोल्ट्री सेक्टर तक सीमित नहीं, बल्कि सीधे घरेलू बजट और रोजमर्रा की खाने की आदतों में दिखाई दे रहा है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
पिछले छह महीनों में अंडे कितने महंगे हुए हैं?
लोकलसर्किल्स के सर्वे में 62% परिवारों ने पिछले छह महीनों में अंडों की कीमत 10 से 50% बढ़ने की बात कही। कुल 84% परिवारों ने किसी न किसी स्तर पर कीमत बढ़ने की जानकारी दी।
अभी एक अंडे की कीमत कितनी है?
रिपोर्ट के मुताबिक एक्स-फार्म कीमत करीब ₹7 प्रति अंडा है। कई रिटेल बाजारों में कीमत ₹8.50-9 और कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर करीब ₹14 प्रति अंडा तक पहुंच गई है।
अंडे महंगे होने की सबसे बड़ी वजह क्या है?
पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत सबसे बड़ी वजहों में है। फीड में इस्तेमाल होने वाला मक्का, सोयाबीन मील और डी-ऑयल्ड राइस ब्रान महंगे हुए हैं। इसके अलावा गर्मी से सप्लाई घटने और मक्के की इथेनॉल मांग बढ़ने का भी दबाव है।
कितने परिवारों ने अंडे खरीदना कम किया?
19,638 जवाबों में 48% लोगों ने कहा कि उन्होंने अंडे खरीदने की मात्रा या फ्रीक्वेंसी कम कर दी है। 10% लोग सस्ते विकल्प या दूसरे स्रोतों की ओर गए।
क्या अंडों में मिलावट को लेकर लोग चिंतित हैं?
हां। 26,560 जवाबों में 70% लोगों ने अंडों की मिलावट को लेकर बहुत चिंता जताई, जबकि 20% कुछ हद तक चिंतित थे। एफएसएसएआई की ओर से अंडों की सेफ्टी को लेकर निगरानी अभियान भी चलाया जा रहा है।