Home / International / UN Condemns Houthis - हूती हमलों से सऊदी पर बढ़ा संकट, UN के सख्त रुख से बाजार में क्यों मची हलचल?
International

UN Condemns Houthis - हूती हमलों से सऊदी पर बढ़ा संकट, UN के सख्त रुख से बाजार में क्यों मची हलचल?

रियाद में धमाकों के बाद सऊदी सिविल डिफेंस ने अलर्ट जारी किया, हालांकि बाद में ऑल-क्लियर दे दिया। बढ़ते हूती हमलों पर UN ने सऊदी नागरिकों, ऊर्जा ढांचे और Red Sea में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

UN Condemns Houthis - हूती हमलों से सऊदी पर बढ़ा संकट, UN के सख्त रुख से बाजार में क्यों मची हलचल?

UN Condemns Houthis : सऊदी अरब की राजधानी रियाद में शनिवार सुबह धमाकों की आवाज सुनाई देने के बाद सिविल डिफेंस ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया। कुछ देर बाद अधिकारियों ने खतरा टलने का संदेश देते हुए ऑल-क्लियर जारी कर दिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब यमन के ईरान-समर्थित हूती समूह और सऊदी अरब के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में हूतियों ने सऊदी क्षेत्र, आर्थिक और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों के साथ-साथ Red Sea में जहाजों को निशाना बनाया है। इसी बढ़ते तनाव के बीच UN Security Council ने 18 सितंबर को सऊदी अरब पर जारी हूती हमलों की कड़ी निंदा की और नागरिकों तथा ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई।

रियाद में धमाके, फिर सिविल डिफेंस का अलर्ट

शनिवार तड़के रियाद में धमाकों की आवाज सुनाई दी। इसके बाद सऊदी सिविल डिफेंस ने राजधानी में संभावित खतरे को लेकर लोगों को अलर्ट किया। अधिकारियों ने बाद में बताया कि खतरा टल गया है। लोगों से आधिकारिक निर्देशों का पालन जारी रखने और घटनास्थल पर भीड़ लगाने या घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग करने से बचने को कहा गया।सऊदी अधिकारियों ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि रियाद में सुनी गई धमाकों की आवाज किस घटना से जुड़ी थी। इसलिए इसे सीधे किसी खास हूती मिसाइल या ड्रोन हमले का परिणाम बताना अभी उचित नहीं है।

यह अलर्ट यमन की राजधानी सना में हूतियों के उस दावे के कुछ घंटे बाद आया, जिसमें समूह ने कहा था कि उसने सऊदी अरब की ओर से किए गए कथित “आपराधिक प्रयासों” को नाकाम कर दिया है और इसका जवाब देने की चेतावनी दी है। हूतियों ने इन कथित प्रयासों की विस्तृत जानकारी नहीं दी और न ही इसमें शामिल लोगों की पहचान बताई।

शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, रात के समय यमन से सऊदी अरब की राजधानी की ओर कम से कम पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। माना जा रहा है कि इनमें से एक निशाना शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक मिलिट्री एयरबेस था।
शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, रात के समय यमन से सऊदी अरब की राजधानी की ओर कम से कम पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। माना जा रहा है कि इनमें से एक निशाना शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक मिलिट्री एयरबेस था।

सऊदी पर हूती हमले क्यों बढ़े?

यमन के बड़े हिस्से, खासकर उत्तर और पश्चिम के कई इलाकों पर हूतियों का नियंत्रण है। पिछले कुछ हफ्तों में Saudi Arabia Houthi Conflict फिर तेज हुआ है। सितंबर की शुरुआत से दक्षिणी सऊदी अरब के कई शहरों और आर्थिक तथा ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं।8 सितंबर को अबहा, खमीस मुशैत, जिजान और नजरान जैसे इलाकों को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट आई थी। सऊदी अधिकारियों के अनुसार इन हमलों में 73 लोग घायल हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। हमलों से कुछ ऊर्जा सुविधाओं में आग लगी और उनके संचालन पर अस्थायी असर पड़ा।

इसके बाद भी हमले जारी रहे। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठकों में बताया गया कि 14 और 15 सितंबर को हुए हमलों में 13 नागरिक घायल हुए, जबकि घरों और रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचा और व्यावसायिक विमान सेवाएं भी प्रभावित हुईं।

हूतियों ने जुलाई में सऊदी अरब से जुड़े जहाजों के खिलाफ Red Sea में नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा की थी। इसके बाद सऊदी से जुड़े वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आईं। इससे Saudi Arabia Houthi Attacks का असर सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग तक पहुंच गया।

ताइफ में ड्रोन का मलबा गिरा, सऊदी ने यमन में एयरस्ट्राइक की

गुरुवार को पश्चिमी सऊदी अरब के ताइफ में एक हूती ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट किया गया। इसके बाद ड्रोन का मलबा एक इलाके में गिरा, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई और दो लोग घायल हुए। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक मृतक यमन का नागरिक था, जबकि घायलों में एक सऊदी महिला और एक पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे। कुछ इमारतों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।इस घटना के बाद सऊदी अरब ने उत्तर-पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी यमन में हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में कम से कम एक व्यक्ति के मारे जाने की रिपोर्ट सामने आई।

इससे पहले सऊदी अधिकारियों ने मक्का की दिशा में आ रहे एक ड्रोन को भी इंटरसेप्ट करने की जानकारी दी थी। सऊदी पक्ष ने इसे मक्का की ओर संभावित हमला बताया, जबकि हूतियों ने मक्का या किसी इस्लामिक पवित्र स्थल को निशाना बनाने से इनकार किया। भारत ने भी इस घटना पर चिंता जताते हुए सऊदी अरब के खिलाफ हमलों और नागरिकों तथा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने की निंदा की थी।

UN ने कहा- नागरिक और Energy Infrastructure को निशाना बनाना चिंता की बात

18 सितंबर को UN Security Council ने सऊदी अरब पर जारी हूती हमलों की कड़ी निंदा की। परिषद के सदस्यों ने कहा कि इन हमलों में नागरिकों और Energy Infrastructure को नुकसान पहुंचा है तथा महिलाओं और बच्चों समेत नागरिक घायल हुए हैं।सुरक्षा परिषद ने सऊदी अरब के आत्मरक्षा के अधिकार का भी समर्थन किया और Red Sea तथा Bab-el-Mandeb में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों और धमकियों की निंदा की। परिषद ने अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता का सम्मान करने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही हूतियों तक हथियार, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता पहुंचने से रोकने के लिए हथियार प्रतिबंध लागू करने में व्यावहारिक सहयोग की अपील की।

UN Security Council की यह प्रतिक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला सिर्फ Saudi Arabia Houthi Conflict तक सीमित नहीं रह गया है। हूती हमलों का असर Red Sea में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर भी पड़ रहा है।

भारत ने भी हमलों को बताया ‘अस्वीकार्य’

भारत ने सऊदी अरब पर हूती हमलों की निंदा करते हुए इन्हें “अस्वीकार्य” बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय सुरक्षा को कमजोर करते हैं और Bab-el-Mandeb से होकर होने वाली समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करते हैं।भारत ने सऊदी आर्थिक और नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाए जाने के साथ मक्का की ओर हुए कथित ड्रोन हमले की भी निंदा की। नई दिल्ली ने क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल होने की उम्मीद जताई है।

भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम एशिया के समुद्री रास्तों का सीधा संबंध ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से है। भारत ने UN में भी कहा है कि किसी एक महत्वपूर्ण समुद्री chokepoint में रुकावट आने पर वैकल्पिक रास्तों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे माल ढुलाई, बीमा, ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति की लागत प्रभावित हो सकती है।

Bab-el-Mandeb क्यों है इतना अहम?

Bab-el-Mandeb अफ्रीका के Horn of Africa और अरब प्रायद्वीप के बीच स्थित एक रणनीतिक समुद्री chokepoint है। यह Red Sea को Gulf of Aden से जोड़ता है और आगे Arabian Sea तक समुद्री व्यापार का रास्ता बनाता है।यही रास्ता एशिया और यूरोप के बीच होने वाले बड़े समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। Red Sea में हूती हमलों और Saudi Arabia से जुड़े जहाजों को निशाना बनाए जाने से इस पूरे क्षेत्र की maritime security पर चिंता बढ़ी है। विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय संगठन इसलिए चेतावनी दे रहे हैं कि संघर्ष और बढ़ने पर इसका असर सिर्फ यमन या सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहेगा।

FAQ (Frequently Asked Questions):

UN ने Houthis के Saudi Arabia पर attacks की condemnation क्यों की?

UN Security Council ने इसलिए निंदा की क्योंकि हूती हमलों से सऊदी अरब में नागरिक और ऊर्जा से जुड़ा बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ तथा महिलाओं और बच्चों समेत नागरिक घायल हुए। परिषद ने Red Sea और Bab-el-Mandeb में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने और समुद्री आवाजाही को खतरे में डालने पर भी चिंता जताई।

Houthis ने Saudi Arabia में किन targets पर attacks किए?

सितंबर में अबहा, खमीस मुशैत, जिजान और नजरान जैसे इलाकों में नागरिक और आर्थिक सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट सामने आई। ऊर्जा से जुड़ी सुविधाएं भी प्रभावित हुईं। इसके अलावा सऊदी से जुड़े वाणिज्यिक जहाजों को Red Sea में निशाना बनाए जाने की घटनाएं हुई हैं।

UN Security Council ने Saudi Arabia के बारे में क्या कहा?

UN Security Council ने सऊदी अरब पर हूती हमलों की कड़ी निंदा की और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसके आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया। परिषद ने नागरिकों, ऊर्जा ढांचे और वाणिज्यिक जहाजों को प्रभावित करने वाले हमलों को रोकने की जरूरत बताई।

क्या Houthi attacks अभी भी जारी हैं?

हां। सितंबर 2026 में भी सऊदी अरब के खिलाफ हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। 19 सितंबर को रियाद में धमाकों की आवाज के बाद सिविल डिफेंस अलर्ट जारी किया गया और बाद में ऑल-क्लियर दिया गया।

Saudi Arabia और Houthis के बीच conflict क्या है?

हूतियों और सऊदी अरब के बीच संघर्ष यमन के लंबे गृहयुद्ध से जुड़ा है। हूती समूह यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है, जबकि सऊदी अरब ने यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन किया है। 2022 की UN-मध्यस्थता वाली शांति व्यवस्था के बाद बड़े पैमाने की लड़ाई में कमी आई थी, लेकिन 2026 में तनाव फिर तेजी से बढ़ा है।

Red Sea security पर Houthi attacks का क्या असर है?

हूती हमलों ने Red Sea और Bab-el-Mandeb में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को प्रभावित किया है। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए हमलों के बढ़ने से शिपिंग, बीमा और माल ढुलाई की लागत पर दबाव बढ़ने तथा वैश्विक व्यापार मार्गों पर असर पड़ने की चिंता है।

Was this article useful?
Full page popup ad