UPI Merchant Fees पर Supreme Court में Petition, नए MDR Rules को लेकर बढ़ा विवाद
UPI Merchant Fees Supreme Court मामले में एक याचिका के जरिए Rs 2,000 से अधिक के चुनिंदा merchant UPI transactions पर लागू होने वाले MDR framework को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि अतिरिक्त लागत को merchants आगे customers पर डाल सकते हैं, हालांकि सरकार ने pass-through रोकने की बात कही है।
भारत में UPI charges को लेकर नई कानूनी बहस शुरू हो गई है। UPI Merchant Fees Supreme Court मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक petition दाखिल की गई, जिसमें केंद्र की ओर से लागू किए गए नए Merchant Discount Rate यानी MDR framework को चुनौती दी गई है। याचिका एडवोकेट अंजन दत्ता ने दाखिल की है और इसमें 14 और 15 सितंबर को जारी notifications को रद्द करने की मांग की गई है।
केंद्र सरकार, RBI, NPCI और UPI & Services Steering Committee को respondents बनाया गया है। नया framework 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा Rs 2,000 से अधिक के person-to-merchant यानी P2M UPI transactions पर MDR लागू करता है। सरकार का कहना है कि यह charge consumer से सीधे नहीं लिया जाएगा और करीब 96% merchant transactions इससे प्रभावित नहीं होंगे।
Petition में क्या कहा गया है?
याचिका में तर्क दिया गया है कि MDR सीधे merchant-payment ecosystem में लगाया गया है, लेकिन businesses अतिरिक्त लागत को अपने customers तक पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। petition के मुताबिक ऐसा होने पर ordinary users के लिए UPI को free रखने का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। याचिकाकर्ता ने केंद्र के 14 और 15 सितंबर के notifications को चुनौती दी है। ऐसे में Supreme Court UPI Petition का मुख्य सवाल यह है कि नए merchant-fee framework का कानूनी और व्यावहारिक असर क्या होगा। हालांकि, फिलहाल यह केवल एक petition है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सुप्रीम कोर्ट ने नए MDR framework को गलत या असंवैधानिक घोषित कर दिया है।
नए UPI MDR Charges 2026 में कितना fee लगेगा?
नए नियमों के तहत Rs 2,000 से अधिक के चुनिंदा P2M transactions पर 0.4% MDR लागू होगा और Rs 75,000 या उससे ज्यादा के transaction पर MDR की अधिकतम सीमा Rs 300 प्रति transaction होगी। यह charge merchant-payment ecosystem में banks, payment service providers और UPI application providers के बीच वितरित किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई eligible merchant transaction Rs 10,000 का है तो 0.4% के हिसाब से MDR Rs 40 होगा। वहीं Rs 75,000 के transaction पर calculated MDR Rs 300 होने के कारण cap लागू होगा। कुछ essential और thin-margin sectors के लिए अलग flat MDR रखा गया है।
Railways, telecommunications, insurance, fuel और agricultural inputs जैसी categories में Rs 2,000 से ऊपर के eligible transactions पर Rs 5 का flat MDR होगा। Capital-market transactions के लिए 0.02% MDR और Rs 300 की maximum cap तय की गई है।
क्या Rs 2,000 तक UPI Payment अभी भी Free रहेगा?
हां। Rs 2,000 तक के merchant UPI payments पर zero-MDR framework जारी रहेगा। इसके अलावा person-to-person यानी P2P UPI transactions किसी भी amount पर free रहेंगे। छोटे merchants के लिए भी zero-MDR व्यवस्था जारी रखी गई है। सरकार के मुताबिक इन exemptions की वजह से लगभग 96% P2M transactions unaffected रहेंगे और MDR केवल specified merchant transactions पर लागू होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि Rs 2,000 से ज्यादा का हर UPI transaction customer के लिए payable हो जाएगा। मौजूदा framework में MDR merchant ecosystem की fee है, direct consumer fee नहीं।
UPI Consumer Charges को लेकर सरकार ने क्या कहा?
केंद्र ने स्पष्ट किया है कि MDR merchant payment ecosystem में लागू होने वाला charge है और customers से MDR वसूलने का प्रावधान नहीं है। सरकार ने banks को निर्देश दिया है कि merchants इस cost को customers पर pass न करें। UPI application providers को platform fees या hidden charges लगाने से भी रोका गया है। यानी official framework के मुताबिक UPI Consumer Charges का बोझ individual customer पर नहीं डाला जाना चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल petition का तर्क यही है कि व्यवहार में merchants अतिरिक्त processing cost को किसी अन्य तरीके से recover करने की कोशिश कर सकते हैं। यह फिलहाल petitioner का दावा है, न कि अदालत द्वारा तय तथ्य।

छोटे merchants और आम UPI users पर क्या असर होगा?
नए rules में छोटे merchants को अलग protection दी गई है। P2PM category के वे merchants जिन्हें UPI QR के जरिए महीने में Rs 1 लाख तक प्राप्त होते हैं, zero-MDR व्यवस्था में बने रहेंगे। इससे छोटे दुकानदारों और low-value transactions को नए fee structure से बाहर रखने की कोशिश की गई है। सरकार का कहना है कि framework का उद्देश्य high-value commercial transactions के लिए payment ecosystem को financially sustainable बनाना है, जबकि छोटे transactions और person-to-person payments को free रखा जाए। Reuters के अनुसार अगस्त 2026 में UPI ने 24.5 billion transactions process किए थे, जिससे इस payment system का scale भी समझ आता है।
Supreme Court UPI Petition के बाद अब आगे क्या?
Supreme Court UPI Petition दाखिल होने के बाद अब अदालत के सामने नए MDR framework को लेकर उठाए गए कानूनी सवाल आएंगे। 15 अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था फिलहाल government notifications और NPCI framework के अनुसार आगे बढ़ रही है। इस बीच सरकार ने दो बातें स्पष्ट रखी हैं- P2P UPI payments free रहेंगे और merchants पर लागू MDR को customers पर pass नहीं किया जाना चाहिए। दूसरी ओर petition में consumer burden की संभावित चिंता उठाई गई है। आगे की न्यायिक कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि इस चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है।
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निष्कर्ष
UPI Merchant Fees Supreme Court petition ने नए UPI MDR Charges 2026 को लेकर बहस को अदालत तक पहुंचा दिया है। नए framework में चुनिंदा Rs 2,000 से अधिक के merchant transactions पर MDR लागू होगा, जबकि P2P payments और Rs 2,000 तक के merchant payments free रहेंगे। सरकार ने कहा है कि MDR customers से नहीं लिया जाना चाहिए और merchants को इसे pass करने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं याचिकाकर्ता ने आशंका जताई है कि अतिरिक्त लागत अप्रत्यक्ष रूप से consumers तक पहुंच सकती है। इस मुद्दे पर अंतिम स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Supreme Court में UPI merchant fees के खिलाफ petition क्यों दाखिल की गई?
याचिका में कहा गया है कि merchants पर लागू MDR की अतिरिक्त लागत आगे चलकर customers से वसूली जा सकती है। इसलिए 14 और 15 सितंबर की notifications को चुनौती दी गई है।
नए UPI MDR charges किन transactions पर लागू होंगे?
15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा P2M UPI transactions जो Rs 2,000 से अधिक हैं, उन पर standard MDR 0.4% होगा, जबकि कुछ sectors के लिए अलग flat या concessional rates हैं।
क्या Rs 2,000 से ऊपर UPI payments पर merchant fee लगेगी?
हर transaction पर नहीं। केवल specified merchant transactions पर MDR लागू होगा। कुछ categories को अलग rates या exemptions मिले हैं। P2P transactions किसी भी amount पर free रहेंगे।
क्या UPI अभी भी consumers के लिए free है?
P2P UPI transactions free हैं और Rs 2,000 तक के merchant payments भी zero-MDR framework में हैं। सरकार ने कहा है कि MDR को customers पर pass नहीं किया जाना चाहिए।
UPI merchant fees का burden consumers तक कैसे पहुंच सकता है?
Petition में यही आशंका जताई गई है कि merchants अतिरिक्त payment-processing cost को किसी अन्य तरीके से customers से recover कर सकते हैं। यह फिलहाल याचिकाकर्ता का तर्क है, अदालत का निष्कर्ष नहीं।