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Saudi Arabia Oil Pipeline Attack: ड्रोन हमले के बाद सऊदी ने बंद की तेल पाइपलाइन, बाब-अल-मंदेब में हूतियों के कब्जे से दुनिया भर में क्यों मची खलबली?

इराक से आए ड्रोन ने सऊदी की अहम तेल पाइपलाइन पर हमला किया, जिसके बाद इसे कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा। इसी बीच हूतियों के बाब-अल-मंदेब तक पहुंचने से सऊदी के तेल निर्यात और दुनिया में तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई।

Saudi Arabia Oil Pipeline Attack: ड्रोन हमले के बाद सऊदी ने बंद की तेल पाइपलाइन, बाब-अल-मंदेब में हूतियों के कब्जे से दुनिया भर में क्यों मची खलबली?

Saudi Arabia Oil Pipeline Attack: सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर इराक से आए कई ड्रोन ने हमला किया, जिसके बाद सऊदी अधिकारियों ने पाइपलाइन को एहतियात के तौर पर अस्थायी रूप से बंद कर दिया। हमले में कुछ लोग घायल हुए और पाइपलाइन से जुड़े ढांचे को नुकसान पहुंचा। इराक ने भी पुष्टि की कि हमले इराकी क्षेत्र से किए गए थे और माइसॉन प्रांत के ऑपरेशंस कमांडर को हटा दिया गया है। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब ईरान की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल परिवहन बुरी तरह प्रभावित है और सऊदी अरब अपने तेल को लाल सागर के रास्ते दुनिया तक पहुंचाने के लिए ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ज्यादा निर्भर है।

इराक से आए ड्रोन ने सऊदी की अहम तेल लाइन को बनाया निशाना

सऊदी विदेश मंत्रालय के मुताबिक रियाद और मदीना क्षेत्र में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को कई ड्रोन ने निशाना बनाया। हमले में कुछ लोगों के घायल होने और नुकसान की जानकारी सामने आई है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से पाइपलाइन को रोक दिया गया।सैटेलाइट तस्वीरों में मदीना के आसपास पाइपलाइन के सामान्य रूट के पास काला धुआं उठता दिखाई दिया। हमले से कितना तेल निर्यात प्रभावित हुआ और पाइपलाइन कितने समय तक बंद रही, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
इराकी सरकार ने बाद में पुष्टि की कि हमले दक्षिणी इराक के माइसॉन प्रांत के एक इलाके से किए गए थे। प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के कार्यालय के मुताबिक माइसॉन ऑपरेशंस कमांड के कमांडर को पद से हटा दिया गया और मामले की जांच के लिए जांच परिषद बनाई गई। बगदाद ने सऊदी अरब पर हुए हमले की निंदा करते हुए कहा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल पड़ोसी देश पर हमले के लिए नहीं होना चाहिए।
सऊदी अरब ने फिलहाल इराक के खिलाफ जवाबी हमला नहीं किया है। रियाद ने कहा कि इराकी प्रधानमंत्री के अनुरोध पर वह अभी जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा और इराक की उन कोशिशों का समर्थन करेगा, जिनका मकसद इराक से सऊदी अरब या उसके पड़ोसी देशों पर होने वाले हमलों को रोकना है। हालांकि सऊदी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अपनी सुरक्षा, संप्रभुता, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और नागरिकों की रक्षा के लिए वह जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखता है।

11 सितंबर, 2026 को प्लैनेट लैब्स PBC की ली गई एक सैटेलाइट इमेज में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के पास मदीना के दक्षिण-पूर्व में आग लगने से खराब हुए एक इंफ्रास्ट्रक्चर साइट को दिखाया गया है। (Image Credit : Planet Labs/AFP/Getty Images)
11 सितंबर, 2026 को प्लैनेट लैब्स PBC की ली गई एक सैटेलाइट इमेज में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के पास मदीना के दक्षिण-पूर्व में आग लगने से खराब हुए एक इंफ्रास्ट्रक्चर साइट को दिखाया गया है। (Image Credit : Planet Labs/AFP/Getty Images)

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है, इसलिए यह पाइपलाइन सऊदी के लिए और अहम हो गई

ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को पेट्रोलाइन भी कहा जाता है। यह करीब 1,200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन है, जो सऊदी अरब के पूर्व में अबकैक के तेल उत्पादन क्षेत्र को पश्चिम में लाल सागर के किनारे स्थित यनबू बंदरगाह से जोड़ती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि सऊदी अरब को अपना तेल फारस की खाड़ी से होकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर भेजने की जरूरत नहीं पड़ती।सामान्य तौर पर इसकी क्षमता करीब 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन थी, लेकिन 2026 में होर्मुज संकट के दौरान समानांतर पाइपलाइन क्षमता का इस्तेमाल करके इसे करीब 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक चलाया गया। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने अप्रैल में भी बताया था कि ईस्ट-वेस्ट सिस्टम की पंपिंग क्षमता करीब 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक बहाल की गई थी।
यानी यह सिर्फ एक पाइपलाइन नहीं, बल्कि मौजूदा संकट में सऊदी के लिए तेल निर्यात का वैकल्पिक रास्ता है। खासकर तब, जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर तेल की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित है। हाल के महीनों में सऊदी ने यनबू और लाल सागर के रास्ते तेल भेजने पर ज्यादा जोर दिया है।

होर्मुज को बायपास करने वाली सऊदी की पाइपलाइन (Image Credit - NDTV)
होर्मुज को बायपास करने वाली सऊदी की पाइपलाइन (Image Credit - NDTV)

पाइपलाइन बंद होने से दुनिया में तेल की चिंता क्यों बढ़ी?

इस हमले का सबसे बड़ा असर सिर्फ सऊदी अरब तक सीमित नहीं है। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने का मतलब है कि सऊदी के पास होर्मुज के बाहर तेल भेजने के लिए उपलब्ध महत्वपूर्ण विकल्पों में से एक पर भी खतरा पैदा हो गया है।हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस हमले से वैश्विक तेल सप्लाई में कितनी स्थायी कमी आएगी। पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद किया गया है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। लेकिन बाजार पहले से ही बेहद तनाव में है। 11 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 104.61 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ और सप्ताह के दौरान इसमें 8% से ज्यादा की बढ़त रही।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA ने भी बताया है कि मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और सप्लाई बाधाओं के कारण 2026 में वैश्विक तेल आपूर्ति में करीब 5.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन की गिरावट का अनुमान है। सऊदी अरब की कच्चे तेल की सप्लाई भी तीन दशक से ज्यादा समय के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गई है।
इसलिए ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमला बाजार के लिए एक और बड़ा जोखिम है। अगर पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है या बार-बार हमले होते हैं, तो तेल की सप्लाई और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

बाब-अल-मंदेब पर हूतियों की बढ़ती पकड़ ने संकट और गहरा दिया

सऊदी तेल के लिए मुश्किल सिर्फ होर्मुज तक सीमित नहीं है। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के पश्चिमी तट पर तेजी से बढ़त बनाई है। गुरुवार को हूतियों ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जे का दावा किया और शुक्रवार को बाब-अल-मंदेब के बीच स्थित पेरिम यानी मयून द्वीप तक पहुंच गए। यमन की सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक वहां तैनात सरकारी बल पीछे हट गए थे।पेरिम द्वीप बाब-अल-मंदेब के सबसे संकरे हिस्से में स्थित है और इस जलडमरूमध्य को दो समुद्री रास्तों में बांटता है। इसलिए इस इलाके पर नियंत्रण का मतलब लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच जहाजों की आवाजाही पर बड़ा रणनीतिक असर हो सकता है।
हूती पहले ही जुलाई में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा कर चुके हैं और लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाने की धमकी दे चुके हैं। अब पेरिम द्वीप तक उनकी पहुंच ने सऊदी के उस वैकल्पिक समुद्री रास्ते को भी ज्यादा जोखिम में डाल दिया है, जिस पर वह होर्मुज संकट के दौरान अधिक निर्भर हो गया था।

इराकी मिलिशिया पर पहले भी लगते रहे हैं आरोप

सऊदी अरब पहले भी ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया पर अपनी तेल और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाता रहा है। हालांकि इस ताजा हमले के लिए किसी एक संगठन को आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। सऊदी ने फिलहाल सिर्फ इतना कहा है कि ड्रोन इराक से आए थे।इसलिए इराक से हमले का स्रोत सामने आने और हूतियों के बाब-अल-मंदेब तक पहुंचने को एक ही सैन्य ऑपरेशन मानना सही नहीं होगा। दोनों घटनाएं अलग हैं, लेकिन उनका असर एक ही बड़ी समस्या पर पड़ता है—मध्य-पूर्व से दुनिया तक तेल पहुंचाने वाले महत्वपूर्ण रास्तों की सुरक्षा।
बहरीन, जॉर्डन और कतर ने सऊदी पाइपलाइन पर हमले की निंदा की है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल ने इसे सऊदी की सुरक्षा के लिए गंभीर और अस्वीकार्य खतरा बताया है।

आगे बढ़ी तो तेल से लेकर महंगाई तक असर दिख सकता है

सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल है। इसलिए उसके तेल निर्यात के रास्तों में लंबे समय तक रुकावट आने का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है। अभी पाइपलाइन बंद होने का अंतिम असर स्पष्ट नहीं है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में हर अतिरिक्त व्यवधान तेल बाजार की चिंता बढ़ा रहा है।अगर ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन जल्दी बहाल हो जाती है तो नुकसान सीमित रह सकता है। लेकिन अगर पाइपलाइन, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब—तीनों जगहों पर सुरक्षा जोखिम बने रहते हैं, तो सऊदी के लिए तेल को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना और महंगा व मुश्किल हो सकता है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों से होते हुए पेट्रोल, डीजल, परिवहन और दूसरी अर्थव्यवस्थाओं की लागत पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल सऊदी अरब ने जवाबी सैन्य कार्रवाई से परहेज किया है और इराक को हमले रोकने की जिम्मेदारी दी है। दूसरी ओर यमन में हूतियों की बढ़त और होर्मुज संकट जारी है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Saudi Arabia ने East-West Oil Pipeline को क्यों बंद किया?

रियाद और मदीना क्षेत्र में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर कई ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब ने इसे एहतियात के तौर पर अस्थायी रूप से बंद कर दिया। हमले में कुछ लोग घायल हुए और पाइपलाइन से जुड़े ढांचे को नुकसान पहुंचा।

Riyadh और Madinah में हुए Attacks क्या थे?

इन क्षेत्रों में ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को कई ड्रोन से निशाना बनाया गया। सऊदी ने बताया कि ड्रोन इराक से आए थे। बाद में इराकी सरकार ने भी पुष्टि की कि हमले उसके माइसॉन प्रांत के एक इलाके से किए गए थे।

East-West Oil Pipeline क्या है?

यह करीब 1,200 किलोमीटर लंबी तेल पाइपलाइन है, जो पूर्वी सऊदी अरब के अबकैक क्षेत्र को लाल सागर के यनबू बंदरगाह से जोड़ती है। इसका इस्तेमाल सऊदी अरब को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बायपास करके तेल निर्यात करने में मदद करता है।

Saudi Arabia के लिए यह Pipeline इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?

क्योंकि यह सऊदी अरब के तेल को फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बचाकर लाल सागर तक पहुंचाने का रास्ता देती है। मौजूदा होर्मुज संकट में इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई है। इसकी प्रभावी क्षमता 2026 में करीब 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंचाई गई थी।

Pipeline Shutdown से Saudi Oil Exports पर क्या असर पड़ेगा?

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अस्थायी बंदी से कुल तेल निर्यात में कितनी कमी आएगी। नुकसान और पाइपलाइन बंद रहने की अवधि का आकलन जारी है। लेकिन लंबे समय तक बंद रहने पर सऊदी के वैकल्पिक तेल निर्यात मार्गों पर दबाव बढ़ सकता है।

क्या East-West Pipeline Strait of Hormuz का Alternative Route है?

हां। यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का समुद्री विकल्प नहीं, बल्कि तेल पहुंचाने वाला जमीन के रास्ते का वैकल्पिक मार्ग है। पूर्वी सऊदी अरब से तेल पाइपलाइन के जरिए यनबू के लाल सागर बंदरगाह तक पहुंचाया जाता है, जहां से इसे समुद्री रास्ते से आगे भेजा जा सकता है।

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