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Cognizant Green Card Filings Suspended - वीजा फ्रॉड की जांच के बीच कॉग्निजेंट पर अमेरिकी सरकार का बड़ा शिकंजा, क्या हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर मंडरा रहा है संकट?

अमेरिकी श्रम विभाग ने वीजा फ्रॉड जांच के बीच कॉग्निजेंट की नई ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप के लिए PERM फाइलिंग निलंबित कर दी है। कार्रवाई का असर नई ग्रीन कार्ड प्रक्रियाओं पर पड़ेगा, जबकि H-1B कर्मचारियों की मौजूदा स्थिति तुरंत प्रभावित नहीं होगी।

Cognizant Green Card Filings Suspended - वीजा फ्रॉड की जांच के बीच कॉग्निजेंट पर अमेरिकी सरकार का बड़ा शिकंजा, क्या हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर मंडरा रहा है संकट?

Cognizant Green Card Filings Suspended: अमेरिका के श्रम विभाग ने भारत में शुरू हुई और अब अमेरिका में मुख्यालय वाली टेक कंपनी कॉग्निजेंट की नई ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप के लिए PERM फाइलिंग पर रोक लगा दी है। यह कार्रवाई कंपनी के H-1B और PERM वीजा कार्यक्रमों में कथित फर्जीवाड़े की चल रही जांच के बीच हुई है। अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी'एस्पोसिटो ने 8 सितंबर को सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी और कहा कि अमेरिकी कर्मचारियों के लिए खतरा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी कार्रवाई में टेक कंपनी क्लाउडेरा की PERM फाइलिंग भी निलंबित की गई है।यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कॉग्निजेंट अमेरिका में H-1B वीजा इस्तेमाल करने वाली बड़ी कंपनियों में शामिल है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा के आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2026 तक कॉग्निजेंट की 3,510 H-1B याचिकाएं मंजूर हुई थीं। कंपनी की शुरुआत 1994 में चेन्नई से हुई थी और अब इसका मुख्यालय अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य के टीनेक में है।

ग्रीन कार्ड की राह में PERM पर रोक क्यों अहम है

PERM यानी प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया का शुरुआती और महत्वपूर्ण चरण है। किसी कंपनी को किसी विदेशी कर्मचारी के लिए स्थायी नौकरी के आधार पर ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर करना हो तो आम तौर पर उसे पहले श्रम विभाग से यह प्रमाणन लेना होता है।इस प्रक्रिया में कंपनी को यह दिखाना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिला और विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों की मजदूरी या काम की परिस्थितियों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। इसके लिए कंपनी को अमेरिकी श्रम बाजार में नौकरी का विज्ञापन भी करना होता है। PERM मंजूर होने के बाद ही ग्रीन कार्ड की आगे की प्रक्रिया बढ़ती है।
इसलिए Cognizant PERM Suspension का सीधा मतलब यह है कि कंपनी फिलहाल नई PERM फाइलिंग आगे नहीं बढ़ा सकती। हालांकि इसे कॉग्निजेंट के सभी H-1B कर्मचारियों के वीजा रद्द होने के रूप में नहीं समझना चाहिए। मौजूदा H-1B स्टेटस या पहले से मंजूर आवेदनों पर इस आदेश का सीधा असर होने की बात सामने नहीं आई है।

जांच में क्या आरोप सामने आए हैं

अमेरिकी श्रम विभाग की जांच H-1B और PERM जैसे रोजगार आधारित वीजा कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग से जुड़ी है। रिपोर्टों के अनुसार, जांच की शुरुआत व्हिसलब्लोअर शिकायतों के बाद हुई और इसमें यह देखा जा रहा है कि कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए अमेरिकी श्रमिकों से जुड़े नियमों का पालन किया या नहीं।अमेरिकी अधिकारियों ने व्यापक जांच में कथित फर्जी वीजा आवेदन, वेतन से जुड़े गलत लेनदेन, विदेशी कर्मचारियों के शोषण और अमेरिकी कर्मचारियों को नुकसान पहुंचाने वाली प्रथाओं जैसे पहलुओं की जांच की बात कही है। हालांकि, कॉग्निजेंट के मामले में सरकार ने अभी सार्वजनिक रूप से किसी खास कथित फर्जीवाड़े का अंतिम निष्कर्ष नहीं बताया है। इसलिए फिलहाल इसे जांच और आरोपों का मामला कहना सही है, न कि कंपनी को दोषी घोषित करना।
इंस्पेक्टर जनरल डी'एस्पोसिटो ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि विभाग व्हाइट हाउस फ्रॉड टास्क फोर्स के साथ मिलकर “तथ्यों, धोखाधड़ी और वित्तीय लेनदेन” की जांच कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी कर्मचारियों के लिए खतरे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ट्रंप प्रशासन ने पहले ही शुरू कर रखा है वीजा पर सख्त अभियान

यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका ने H-1B कार्यक्रम के दुरुपयोग और अमेरिकी कर्मचारियों के संभावित विस्थापन पर निगरानी बढ़ाई है। अमेरिकी श्रम विभाग ने 19 सितंबर 2025 को प्रोजेक्ट फायरवॉल शुरू किया था। इसका उद्देश्य H-1B कार्यक्रम के नियमों का पालन सुनिश्चित करना और यह देखना है कि योग्य अमेरिकी कर्मचारियों को अनुचित तरीके से विदेशी कर्मचारियों से प्रतिस्थापित न किया जाए।प्रोजेक्ट फायरवॉल के तहत विभाग ऐसे मामलों को प्राथमिकता देता है जहां अमेरिकी कर्मचारियों को हटाने, अमेरिकी श्रमिकों की वास्तविक भर्ती न करने, योग्य अमेरिकी उम्मीदवार उपलब्ध होने के बावजूद H-1B कर्मचारियों को प्राथमिकता देने या वीजा कार्यक्रम के अन्य दुरुपयोग के संकेत मिलते हैं। नियमों का उल्लंघन मिलने पर बकाया वेतन की वसूली, आर्थिक जुर्माना और कुछ मामलों में H-1B कार्यक्रम से प्रतिबंध जैसी कार्रवाई हो सकती है।
श्रम विभाग के अनुसार 2025 में प्रोजेक्ट फायरवॉल के तहत करीब 200 कंपनियों की जांच शुरू की गई थी। इससे पता चलता है कि कॉग्निजेंट पर हुई कार्रवाई व्यापक अमेरिकी नीति का हिस्सा है, केवल एक कंपनी तक सीमित कदम नहीं।

कॉग्निजेंट के लिए मामला इसलिए भी बड़ा है

कॉग्निजेंट अमेरिका में H-1B वीजा की बड़ी उपयोगकर्ता कंपनियों में है। 2026 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कंपनी की 3,510 H-1B याचिकाएं मंजूर हुई थीं। तुलना के लिए 2020 में यह संख्या 9,413 थी। यानी कंपनी अभी भी बड़ी संख्या में विदेशी तकनीकी कर्मचारियों के लिए अमेरिकी रोजगार वीजा व्यवस्था का इस्तेमाल करती है।कॉग्निजेंट के लिए PERM पर रोक का सबसे बड़ा असर उन विदेशी कर्मचारियों पर पड़ सकता है जो कंपनी के जरिए भविष्य में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया शुरू कराने की उम्मीद कर रहे हैं। नई फाइलिंग रुकने से उनकी स्थायी निवास प्रक्रिया शुरू होने या आगे बढ़ने में देरी हो सकती है। हालांकि, किसी कर्मचारी के व्यक्तिगत मामले पर असर उसकी मौजूदा वीजा स्थिति और आवेदन के चरण पर निर्भर करेगा।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि PERM पर रोक का मतलब H-1B कार्यक्रम पर पूरी तरह रोक नहीं है। दोनों अलग प्रक्रियाएं हैं। H-1B अस्थायी रोजगार की अनुमति देता है, जबकि PERM रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की दिशा में शुरुआती प्रक्रिया है।

अमेरिका में भारतीय आईटी कर्मचारियों पर क्या असर पड़ सकता है

कॉग्निजेंट जैसी बड़ी आईटी कंपनियां लंबे समय से भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी कर्मचारियों की आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। इसलिए इस तरह की कार्रवाई का असर केवल कंपनी के स्तर पर नहीं, बल्कि उन भारतीय तकनीकी कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है जो अमेरिका में लंबे समय तक काम करने के बाद ग्रीन कार्ड की उम्मीद रखते हैं।फिलहाल सबसे सीधा असर नई PERM फाइलिंग पर है। इसका मतलब यह नहीं है कि कॉग्निजेंट में काम कर रहे हर भारतीय H-1B कर्मचारी की नौकरी या मौजूदा वीजा तुरंत खतरे में है। आगे का असर जांच के निष्कर्ष और अमेरिकी अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
कॉग्निजेंट के खिलाफ जांच जारी है और अमेरिकी अधिकारियों ने अभी यह नहीं बताया है कि जांच का अंतिम नतीजा क्या होगा। ऐसे में फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि Cognizant Green Card Filings Suspended होने से कंपनी की नई रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप प्रक्रिया प्रभावित हुई है, जबकि कथित वीजा दुरुपयोग की जांच अभी जारी है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Cognizant Green Card Filings Suspended क्यों किए गए?

अमेरिकी श्रम विभाग ने कॉग्निजेंट की नई PERM फाइलिंग निलंबित की है। यह कार्रवाई कंपनी के H-1B और PERM कार्यक्रमों में कथित वीजा फर्जीवाड़े की चल रही जांच के बीच हुई है। हालांकि, कंपनी को अभी इस मामले में दोषी घोषित नहीं किया गया है।

Cognizant PERM Suspension का कर्मचारियों पर क्या असर होगा?

नई PERM फाइलिंग रुकने से उन विदेशी कर्मचारियों की रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है जिनके लिए कंपनी नई फाइलिंग करना चाहती थी। मौजूदा H-1B स्टेटस पर इसका अपने आप सीधा असर नहीं पड़ता।

Cognizant Visa Abuse Probe में क्या जांच की जा रही है?

जांच में H-1B और PERM कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग, रोजगार वीजा नियमों के पालन और अमेरिकी कर्मचारियों पर संभावित प्रभाव जैसे पहलुओं को देखा जा रहा है। अधिकारियों ने जांच के वित्तीय पहलुओं का भी उल्लेख किया है।

Cognizant Green Card Suspension से H1B workers प्रभावित होंगे?

हर H-1B कर्मचारी पर इसका सीधा असर नहीं माना जा सकता। PERM और H-1B अलग प्रक्रियाएं हैं। सबसे स्पष्ट असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जो कॉग्निजेंट के जरिए नई रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया शुरू कराने वाले थे।

US Immigration Investigation में Cognizant के खिलाफ क्या आरोप हैं?

कॉग्निजेंट पर रोजगार आधारित वीजा कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग को लेकर जांच चल रही है। सार्वजनिक जानकारी में सरकार ने अभी कंपनी के खिलाफ किसी खास आरोप पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। इसलिए मौजूदा स्थिति को जांच के स्तर पर ही समझना चाहिए।

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