India Petrol Supplier to Russia- रिफाइनरी हमलों के बीच रूस को भारत से क्यों मंगाना पड़ा पेट्रोल?
रूस में रिफाइनरी संचालन पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बाद घरेलू पेट्रोल उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे में भारत रूस के लिए अहम पेट्रोल सप्लायर बनकर उभरा है। पिछले दो महीनों में भारत से करीब 10 लाख बैरल गैसोलीन रूस पहुंचा।
रूस दुनिया के बड़े कच्चे तेल निर्यातकों में शामिल है, लेकिन इस समय उसे अपनी घरेलू ईंधन जरूरत पूरी करने के लिए विदेशों से पेट्रोल मंगाना पड़ रहा है। रूसी रिफाइनरियों पर लगातार हो रहे यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने वहां ईंधन उत्पादन को प्रभावित किया है। इसी बीच India Petrol Supplier to Russia के तौर पर भारत की भूमिका तेजी से महत्वपूर्ण हुई है। एनर्जी एनालिटिक्स फर्म Vortexa के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में भारत से रूस को करीब 10 लाख बैरल गैसोलीन भेजा गया। अगस्त में रूस का समुद्री गैसोलीन आयात रिकॉर्ड करीब 1.25 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो महीने में लगभग 4.70 लाख टन के बराबर है। खास बात यह है कि भारत के साथ तुर्की और मोरक्को भी रूस को गैसोलीन सप्लाई करने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहे।
India Petrol Supplier to Russia कैसे बना बड़ा सप्लायर?
रूस में पेट्रोल की कमी के बीच भारत से होने वाली ईंधन सप्लाई ने खास ध्यान खींचा है। अगस्त में रूस को भारत से आने वाले गैसोलीन कार्गो मुख्य रूप से गुजरात स्थित Nayara Energy की Vadinar Refinery से आए। इस रिफाइनरी में रूस की Rosneft की 50% हिस्सेदारी है। भारत पिछले कुछ वर्षों में रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। जून और जुलाई में भारत का रूसी क्रूड आयात 26 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक रहा, जबकि फरवरी में यह करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन था। इस दौरान भारत के कुल क्रूड आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा रही। ऐसे में संभावना है कि भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी क्रूड के एक हिस्से को पेट्रोल में बदलकर बाद में रूस को ही निर्यात किया हो।
रूस में Petrol Crisis क्यों गहराया?
रूस में ईंधन संकट के पीछे सबसे बड़ी वजह उसकी रिफाइनिंग क्षमता पर पड़ा असर है। Vortexa के अनुसार, जुलाई और अगस्त के दौरान रूसी रिफाइनरियों पर 32 हमले हुए, यानी औसतन लगभग हर दूसरे दिन एक हमला। इन हमलों के बाद रूस का घरेलू गैसोलीन उत्पादन कुछ समय में 70% तक घट गया। इससे पेट्रोल की घरेलू उपलब्धता पर दबाव बढ़ा और रूस को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए आयात बढ़ाना पड़ा। स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस खुद दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है। यानी कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने से तैयार पेट्रोल की कमी पैदा हो गई।
India-Russia Fuel Supply में Sanctions का क्या असर?
भारत से रूस पहुंचने वाले गैसोलीन कार्गो को लेकर Vortexa ने शिपिंग गतिविधियों पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी है। अगस्त में रूस के कुल गैसोलीन आयात का करीब 55%, यानी लगभग 2.60 लाख टन, प्रतिबंधों के दायरे वाले जहाजों से पहुंचा। Vortexa के अनुसार, अगस्त में भारत से रूस भेजे गए सभी गैसोलीन कार्गो sanctioned fleets के जरिए पहुंचे और भूमध्यसागर में dark ship-to-ship (STS) transfers किए गए। कुल रूसी गैसोलीन आयात का लगभग 40% हिस्सा ship-to-ship transfers के जरिए आया। इनमें से कई ऑपरेशंस के दौरान जहाजों ने अपने AIS signals बंद रखे, जिससे उनकी गतिविधियों की सार्वजनिक ट्रैकिंग सीमित हो गई।

रूस ने Petrol Export पर क्यों लगाई रोक?
रूस में घरेलू ईंधन संकट बढ़ने के कारण मॉस्को ने अपने पेट्रोल निर्यात पर भी सख्ती बढ़ाई है। जुलाई में रूस ने उत्पादकों और गैर-उत्पादकों के लिए लगाए गए पूर्ण गैसोलीन निर्यात प्रतिबंध को जनवरी 2027 के अंत तक बढ़ा दिया। डीजल निर्यात पर लगी रोक को भी 1 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया। इसका सीधा असर रूस के पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर पड़ा है। Vortexa के अनुसार, 25 अगस्त तक रूस का समुद्री डीजल/गैसऑयल निर्यात करीब 1.50 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 6.10 लाख बैरल प्रतिदिन कम है।
रूस को आगे भी भारत से Petrol क्यों लेना पड़ सकता है?
रूस में रिफाइनरी संचालन पर दबाव और घरेलू पेट्रोल उत्पादन में कमी को देखते हुए निकट अवधि में विदेशी सप्लाई की जरूरत बनी रह सकती है। Vortexa का अनुमान है कि रूस आने वाले समय में भी कुछ मात्रा में गैसोलीन आयात करता रहेगा। इसकी एक वजह रूस की ऐतिहासिक रूप से कम गैसोलीन-से-डीजल उत्पादन क्षमता भी है। भारत के लिए यह स्थिति ऊर्जा व्यापार के लिहाज से दिलचस्प है। एक तरफ भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय रिफाइनिंग क्षमता से तैयार पेट्रोल रूस तक पहुंच रहा है।
निष्कर्ष
India Petrol Supplier to Russia के तौर पर भारत की बढ़ती भूमिका रूस में पैदा हुए ईंधन संकट और वैश्विक ऊर्जा व्यापार में बदलते समीकरणों को दिखाती है। यूक्रेनी हमलों से रूसी रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने के बाद मॉस्को को पेट्रोल आयात पर निर्भर होना पड़ा है। भारत से करीब 10 लाख बैरल गैसोलीन की सप्लाई और रूसी क्रूड के बढ़ते आयात के बीच दोनों देशों का ऊर्जा व्यापार एक दिलचस्प चक्र बनाता दिख रहा है। आने वाले महीनों में रूस की घरेलू रिफाइनिंग स्थिति और प्रतिबंधों के कारण यह सप्लाई कितनी बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।
FAQ (Frequently Asked Questions):
India Petrol Supplier to Russia क्यों बना है?
रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण घरेलू गैसोलीन उत्पादन प्रभावित हुआ है। पेट्रोल की कमी पूरी करने के लिए रूस ने भारत समेत दूसरे देशों से ईंधन आयात बढ़ाया है।
रूस में Petrol Supply की समस्या क्यों बढ़ी है?
रूस की कई रिफाइनरियां हमलों से प्रभावित हुई हैं। Vortexa के अनुसार, इन हमलों के बाद घरेलू गैसोलीन उत्पादन में कुछ समय के दौरान 70% तक की गिरावट आई।
भारत से रूस को Petrol कहां से भेजा गया?
भारत से रूस जाने वाले गैसोलीन कार्गो मुख्य रूप से गुजरात स्थित Nayara Energy की Vadinar Refinery से आए।
Russia ने Petrol Export पर रोक क्यों लगाई?
घरेलू बाजार में पेट्रोल की उपलब्धता बनाए रखने और ईंधन संकट से निपटने के लिए रूस ने गैसोलीन निर्यात पर प्रतिबंध बढ़ाया है।
क्या भारत रूस से कच्चा तेल भी खरीदता है?
हां। जून और जुलाई के दौरान भारत का रूसी क्रूड आयात 26 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक रहा और रूसी तेल भारत के कुल क्रूड आयात के आधे से ज्यादा हिस्से के लिए जिम्मेदार रहा।