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Tata Sons का बड़ा फैसला N Chandrasekaran को 5 साल का एक्सटेंशन पहले खुद किया था मना अब क्यों बदला फैसला?

Tata Sons ने N Chandrasekaran को Executive Chairman के तौर पर पांच साल के नए कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त करने को मंजूरी दी है। खास बात यह है कि अगस्त में Chandrasekaran ने तीसरा कार्यकाल लेने से इनकार किया था। अब Board के अनुरोध पर उन्होंने अपना फैसला बदल दिया है।

Tata Sons का बड़ा फैसला N Chandrasekaran को 5 साल का एक्सटेंशन पहले खुद किया था मना अब क्यों बदला फैसला?

N Chandrasekaran को Tata Sons में 5 साल का एक्सटेंशन

Tata Sons Board ने N Chandrasekaran को Executive Chairman के तौर पर पांच साल के नए कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। यह फैसला 17 सितंबर 2026 को हुई Tata Sons Board Meeting में लिया गया। Tata Sons के अनुसार Chandrasekaran ने Board के अनुरोध पर अपने पहले के फैसले पर पुनर्विचार किया। इसके बाद Board ने बहुमत से उन्हें मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद पांच साल के नए कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त करने का फैसला लिया। उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होना है। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अगस्त में Chandrasekaran ने खुद साफ किया था कि वह मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा Chairman बनने की पेशकश स्वीकार नहीं करेंगे।

अगस्त में तीसरा कार्यकाल लेने से किया था इनकार

N Chandrasekaran ने अगस्त 2026 में Tata Sons Board को बताया था कि वह 20 फरवरी 2027 को अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद तीसरे कार्यकाल के लिए खुद को उपलब्ध नहीं कराएंगे।इसके बाद Tata Sons में Leadership Succession को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ने लगी थी। Tata Trusts की ओर से भी Chandrasekaran के उत्तराधिकारी की तलाश से जुड़ी प्रक्रिया शुरू किए जाने की खबर सामने आई थी , हालांकि सितंबर की शुरुआत में घटनाक्रम बदल गया। Tata Sons की Nomination and Remuneration Committee यानी NRC ने 3 सितंबर को बैठक की और Chandrasekaran से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया। Tata Sons के बयान के अनुसार NRC ने उनके योगदान और Tata Group के व्यापक हितों को देखते हुए उन्हें दोबारा Executive Chairman बनाए जाने की सिफारिश भी की। इसके बाद Chandrasekaran ने Board के अनुरोध पर अपने फैसले पर पुनर्विचार किया।

अब क्यों बदला Chandrasekaran का फैसला ?

Chandrasekaran के फैसले में बदलाव की एक ही आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि उन्होंने केवल IPO या RBI के दबाव के कारण अपना फैसला बदला।Tata Sons के आधिकारिक बयान में बताया गया है कि NRC ने उनके योगदान और Tata Group के व्यापक हितों को देखते हुए उनसे पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। Board ने भी उनके नए कार्यकाल को बहुमत से मंजूरी दी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच Tata Sons के सामने एक बड़ा नियामकीय मुद्दा भी है। Reserve Bank of India ने Tata Sons को Core Investment Company के तौर पर अपनी Registration से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी है। इसके बाद कंपनी को RBI के लागू नियमों के अनुसार आगे की compliance प्रक्रिया पर काम करना होगा।
Tata Sons ने अब Board के स्तर पर RBI guidelines के अनुरूप कदम शुरू करने और RBI तथा अन्य संबंधित stakeholders से compliance requirements पर guidance लेने का फैसला किया है।
इसलिए Chandrasekaran के नए कार्यकाल का फैसला Tata Sons के लिए ऐसे समय आया है जब Leadership के साथ साथ Regulatory Compliance और कंपनी के भविष्य के ढांचे से जुड़े बड़े फैसले भी सामने हैं।

क्या यह N Chandrasekaran का तीसरा कार्यकाल होगा ?

हां। अगर आगे की जरूरी Corporate Approval प्रक्रिया पूरी होती है तो यह N Chandrasekaran का Tata Sons Executive Chairman के तौर पर तीसरा पांच साल का कार्यकाल होगा।Chandrasekaran पहली बार 2017 में Tata Sons के Executive Chairman बने थे। इसके बाद 2022 में उन्हें दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त किया गया था। अब Board ने मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद पांच साल के नए कार्यकाल के लिए उनकी Reappointment को मंजूरी दी है। उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना है।

N Chandrasekaran पहली बार Tata Sons Chairman कब बने ?

N Chandrasekaran ने 2017 में Tata Sons के Executive Chairman के तौर पर जिम्मेदारी संभाली थी।इससे पहले वह Tata Consultancy Services यानी TCS के Chief Executive Officer और Managing Director रह चुके थे।
TCS में नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्हें Tata Group की Holding Company Tata Sons की कमान दी गई। 2022 में उन्हें पांच साल के दूसरे कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त किया गया था।

Tata Sons Board में Chandrasekaran की Reappointment पर क्या हुआ ?

Tata Sons Board ने Chandrasekaran की Reappointment को बहुमत से मंजूरी दी। Board में Tata Trusts के Chairman Noel Tata ने इस फैसले का विरोध किया।Tata Sons के बयान के अनुसार Noel Tata इस Reappointment के खिलाफ वोट करने वाले एकमात्र Director थे। लेकिन Board के फैसले के तुरंत बाद मामला और महत्वपूर्ण हो गया। Tata Trusts ने Chandrasekaran की Reappointment को illegal और legal nullity बताया।
Tata Trusts का कहना है कि Chandrasekaran का पहले तीसरा कार्यकाल न लेने का फैसला स्वीकार किया जा चुका था और वह निर्णय अंतिम था। Trusts ने Board के नए फैसले की वैधता पर सवाल उठाया है।
इस विवाद के कारण Chandrasekaran की Reappointment का अगला महत्वपूर्ण चरण अब Shareholders की बैठक होगी।

AGM में क्या होगा ?

Chandrasekaran का नया कार्यकाल Board के फैसले से मंजूर हुआ है लेकिन इससे पूरी प्रक्रिया खत्म नहीं होती। उनकी Director के तौर पर आगे की स्थिति और Reappointment से जुड़े जरूरी Corporate Approvals AGM के स्तर पर महत्वपूर्ण होंगे। Tata Sons की Annual General Meeting इस मामले में अगला बड़ा पड़ाव बन सकती है। Tata Trusts की Tata Sons में लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसलिए Shareholders की भूमिका इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण हो जाती है।Moneycontrol की रिपोर्ट के अनुसार Tata Trusts इस मुद्दे को AGM में आगे ले जाने की तैयारी कर सकता है। इसलिए फिलहाल Chandrasekaran की Reappointment को Board level approval के रूप में देखना ज्यादा सटीक है।

Tata Sons IPO और Chandrasekaran का नया कार्यकाल

N Chandrasekaran की Reappointment का फैसला ऐसे समय आया है जब Tata Sons के Listing से जुड़ा मुद्दा भी फिर सामने है।RBI द्वारा Tata Sons की Core Investment Company Registration से बाहर निकलने की कोशिश को मंजूरी नहीं मिलने के बाद कंपनी के लिए RBI guidelines के तहत आगे की compliance महत्वपूर्ण हो गई है।
Tata Sons Board ने अब लागू RBI guidelines के अनुरूप कदम शुरू करने और RBI तथा अन्य stakeholders से जरूरी compliance requirements पर guidance लेने का फैसला किया है। इससे Tata Sons की संभावित Public Listing की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता खुल सकता है , हालांकि यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि Tata Sons का IPO अभी हो नहीं गया है और इसकी Listing Date भी तय नहीं हुई है। मौजूदा स्थिति में कंपनी ने Regulatory Compliance की दिशा में कदम बढ़ाने का फैसला किया है। यही वजह है कि Chandrasekaran की Reappointment और Tata Sons Listing दोनों को एक ही समय के बड़े Corporate Developments के रूप में देखा जा रहा है।

Tata Sons Leadership 2026 में क्यों अहम है फैसला ?

Tata Sons के लिए 2026 का यह फैसला Leadership और Corporate Governance दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण है। कुछ सप्ताह पहले तक Chandrasekaran के बाद नए Chairman की तलाश की दिशा में घटनाक्रम आगे बढ़ रहा था। अब Board ने उन्हें ही एक और पांच साल के कार्यकाल के लिए वापस रखने का फैसला किया है।दूसरी तरफ Tata Trusts ने Board के इस फैसले को चुनौती दी है। इसका मतलब है कि Tata Sons में Leadership का सवाल अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
एक तरफ Board ने Chandrasekaran की Reappointment को मंजूरी दी है। दूसरी तरफ Tata Trusts ने इसकी वैधता पर सवाल उठाया है। अब आगे की Corporate Approval और Shareholder प्रक्रिया इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Tata Group Chairman Extension का आगे क्या असर होगा ?

N Chandrasekaran का नया कार्यकाल Tata Sons के लिए Leadership Continuity का संकेत देता है। लेकिन इस फैसले के साथ Corporate Governance से जुड़ा विवाद भी सामने आया है।Chandrasekaran 2017 से Tata Sons का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके कार्यकाल में Tata Group ने Air India के अधिग्रहण और नए कारोबारों में निवेश जैसे कई बड़े रणनीतिक कदम उठाए हैं।
अब उनके प्रस्तावित तीसरे कार्यकाल के दौरान Tata Sons को RBI Compliance और Listing से जुड़े मुद्दों के साथ साथ Shareholder और Governance से जुड़े सवालों पर भी आगे बढ़ना होगा। इसलिए इस समय सबसे महत्वपूर्ण बात केवल पांच साल का Extension नहीं बल्कि यह है कि Board के फैसले के बाद Tata Trusts और Shareholders की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

निष्कर्ष

Tata Sons Board ने N Chandrasekaran को Executive Chairman के तौर पर पांच साल के नए कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त करने को मंजूरी दी है।यह फैसला इसलिए बड़ा है क्योंकि अगस्त में Chandrasekaran ने खुद तीसरा कार्यकाल लेने से इनकार किया था। सितंबर में Tata Sons की Nomination and Remuneration Committee ने उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया और उनकी Reappointment की सिफारिश की। इसके बाद Chandrasekaran ने अपना फैसला बदल दिया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई है। Noel Tata ने Board के फैसले का विरोध किया है और Tata Trusts ने Reappointment को illegal बताते हुए इसकी वैधता पर सवाल उठाया है।
इसी बीच Tata Sons ने RBI guidelines के अनुसार compliance की दिशा में कदम शुरू करने का फैसला किया है। इससे कंपनी की संभावित Listing का मुद्दा भी फिर महत्वपूर्ण हो गया है।
इसलिए फिलहाल Tata Sons में Chandrasekaran की Leadership को लेकर Board का फैसला सामने आ चुका है लेकिन आगे की Shareholder और Corporate Approval प्रक्रिया इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।

FAQ (Frequently Asked Questions):

N Chandrasekaran को Tata Sons में 5 year extension क्यों दिया गया है ?

Tata Sons की Nomination and Remuneration Committee ने 3 सितंबर को उनके योगदान और Tata Group के व्यापक हितों को देखते हुए Chandrasekaran से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। इसके बाद उन्होंने Board के अनुरोध को स्वीकार किया और Board ने बहुमत से उनकी Reappointment को मंजूरी दी।

N Chandrasekaran का नया Tata Sons term कब से शुरू होगा ?

उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना है। Board की मंजूरी के अनुसार नया पांच साल का कार्यकाल मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद शुरू होगा। हालांकि आगे की जरूरी Corporate Approval प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

क्या यह N Chandrasekaran का Tata Sons Chairman के रूप में तीसरा term होगा ?

हां। Chandrasekaran 2017 में पहली बार Tata Sons के Executive Chairman बने थे। 2022 में उन्हें दूसरा पांच साल का कार्यकाल मिला था। अब Board ने मौजूदा कार्यकाल के बाद उनके तीसरे पांच साल के कार्यकाल को मंजूरी दी है।

N Chandrasekaran पहली बार Tata Sons Chairman कब बने थे ?

N Chandrasekaran पहली बार 2017 में Tata Sons के Executive Chairman बने थे। इससे पहले वह Tata Consultancy Services के CEO और Managing Director रह चुके थे।

Tata Sons Board ने Chandrasekaran की Reappointment पर क्या फैसला लिया ?

Tata Sons Board ने Chandrasekaran को मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद पांच साल के नए कार्यकाल के लिए Executive Chairman के रूप में फिर नियुक्त करने को बहुमत से मंजूरी दी। Noel Tata ने इस फैसले का विरोध किया था।

क्या N Chandrasekaran का extension Tata Sons IPO से जुड़ा है ?

Chandrasekaran की Reappointment और Tata Sons की Listing से जुड़ी प्रक्रिया एक ही समय में आगे बढ़ी है। Tata Sons Board ने RBI guidelines के अनुरूप compliance की दिशा में कदम शुरू करने और RBI तथा अन्य stakeholders से guidance लेने का फैसला किया है। हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि Chandrasekaran ने केवल IPO की वजह से अपना फैसला बदला।

Tata Trusts ने N Chandrasekaran की Reappointment पर क्या कहा ?

Tata Trusts ने Chandrasekaran की Reappointment को illegal और legal nullity बताया है। Trusts का कहना है कि उनका पहले तीसरा कार्यकाल न लेने का फैसला स्वीकार किया जा चुका था। इस वजह से Board के नए फैसले की वैधता पर Trusts ने सवाल उठाया है।

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