Home / National / Hospital Consumables 2841% Markup: ₹11 का मेडिकल सामान ₹325 MRP पर, कीमतों में 2841% का अंतर - तुकाराम मुंढे ने क्यों उठाया सवाल?
National

Hospital Consumables 2841% Markup: ₹11 का मेडिकल सामान ₹325 MRP पर, कीमतों में 2841% का अंतर - तुकाराम मुंढे ने क्यों उठाया सवाल?

महाराष्ट्र FDA के सर्वे में ₹11.05 के IV सेट पर ₹325 MRP मिली, यानी करीब 2,841% का अंतर। सिरिंज और कैथेटर में भी बड़ा फर्क सामने आया। तुकाराम मुंढे ने मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों की निगरानी और मार्जिन नियमों की समीक्षा मांगी है।

Hospital Consumables 2841% Markup: ₹11 का मेडिकल सामान ₹325 MRP पर, कीमतों में 2841% का अंतर - तुकाराम मुंढे ने क्यों उठाया सवाल?

Hospital Consumables 2841% Markup: महाराष्ट्र में अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों को लेकर एक सर्वे ने बड़ा सवाल खड़ा किया है। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के सर्वे में कुछ मेडिकल सामान की खरीद कीमत और उस पर छपी MRP के बीच बहुत बड़ा अंतर सामने आया। सबसे ज्यादा चर्चा उस IV इन्फ्यूजन सेट की है, जिसे ₹11.05 में खरीदा गया, लेकिन उस पर ₹325 की MRP छपी थी। FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स और नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) से नियमों की समीक्षा और कीमतों की निगरानी की मांग की है।

महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे मुंबई के एक कॉलेज में हाल ही में हुए एक इंटरैक्टिव सेशन के दौरान। (Credit : PTI)
महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे मुंबई के एक कॉलेज में हाल ही में हुए एक इंटरैक्टिव सेशन के दौरान। (Credit : PTI)

₹11.05 के IV सेट पर ₹325 MRP, 2,841% का अंतर कैसे निकला?

महाराष्ट्र FDA ने जुलाई 2026 में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर के करीब 20 अस्पतालों में अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों का सर्वे किया। इसमें IV सेट, सिरिंज, कैथेटर, ऑक्सीजन मास्क, ट्रांसफ्यूजन सेट और दूसरे मेडिकल सामान शामिल थे।सर्वे में एक IV इन्फ्यूजन सेट की ट्रेड प्रोक्योरमेंट कीमत ₹11.05 मिली, जबकि उस पर ₹325 की MRP छपी थी। ₹11.05 से ₹325 का अंतर करीब ₹313.95 है। जब इस अंतर को खरीद कीमत के मुकाबले प्रतिशत में देखा गया तो यह करीब 2,841% बैठता है। इसी वजह से यह आंकड़ा चर्चा में आया है।
यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है। 2,841% का आंकड़ा खरीद कीमत और छपी MRP के बीच का मार्कअप है। इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि हर अस्पताल ने हर मरीज से ₹325 ही वसूले या पूरा अंतर अस्पताल का मुनाफा था। FDA की जांच में कीमतों के इस अंतर को लेकर चिंता जताई गई है और अब इसकी नियामकीय समीक्षा की मांग की गई है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक अस्पताल कई मामलों में MRP के भीतर ही मरीज से राशि लेते थे, जिसके कारण मौजूदा नियमों के तहत कार्रवाई करना भी आसान नहीं था।

सिरिंज और कैथेटर में भी बड़ा फर्क मिला

IV सेट अकेला मामला नहीं था। तुकाराम मुंढे के मुताबिक सर्वे में ₹6.75 की खरीद कीमत वाली एक सिरिंज पर ₹57.20 की MRP मिली। इसी तरह ₹29.41 में खरीदे गए एक कैथेटर पर ₹310 की MRP थी। ऑक्सीजन मास्क, नेब्युलाइजर और दूसरे अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले कंज्यूमेबल्स में भी खरीद कीमत और MRP के बीच बड़े अंतर की बात सामने आई।मुंढे का तर्क है कि अस्पताल में भर्ती मरीज के पास इन सामानों की कीमत की तुलना करने या वैकल्पिक उत्पाद चुनने का सामान्य तौर पर मौका नहीं होता। इलाज के दौरान डॉक्टर और अस्पताल की जरूरत के मुताबिक ये सामान इस्तेमाल होते हैं और मरीज के पास पैकेट पर छपी MRP को चुनौती देने की स्थिति भी सीमित रहती है।
यही वजह है कि उन्होंने इसे सिर्फ कीमत का मामला नहीं, बल्कि जानकारी के अंतर का मामला भी बताया है। उनके मुताबिक जिस व्यक्ति पर खर्च का बोझ पड़ता है, उसके पास उस कीमत को परखने के लिए सबसे कम जानकारी होती है।

असली सवाल MRP और अस्पताल की खरीद कीमत के बीच का है

किसी मेडिकल डिवाइस की MRP और अस्पताल की खरीद कीमत हमेशा एक जैसी नहीं होती। किसी अस्पताल को किसी उत्पाद की खरीद के अलावा स्टोरेज, स्टेराइल चेन, इन्वेंट्री, एक्सपायरी का जोखिम, स्टाफ, उपकरणों की देखभाल और मरीज तक सुरक्षित तरीके से उत्पाद पहुंचाने जैसी लागत भी उठानी पड़ सकती है।मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री की ओर से भी यही बात रखी गई है कि हर डिवाइस में सिर्फ खरीद कीमत को अंतिम मरीज कीमत मानना सही नहीं होगा। खासकर जटिल और तकनीकी उपकरणों के मामले में अस्पताल की डिलीवरी और सुरक्षा से जुड़ी अतिरिक्त लागत हो सकती है। हालांकि, उद्योग की ओर से यह भी कहा गया है कि साधारण और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले कंज्यूमेबल्स में असाधारण रूप से ऊंचे मार्जिन की अलग से जांच होनी चाहिए।
यानी विवाद का मुख्य सवाल यह है कि कितना अंतर उचित है और किस स्तर के बाद उस अंतर की निगरानी या सीमा तय होनी चाहिए।

दवाओं के मुकाबले मेडिकल डिवाइस का नियम अलग क्यों है?

मुंढे ने जिस नियामकीय अंतर की ओर ध्यान दिलाया है, वह इस पूरे मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शेड्यूल्ड दवाओं की कीमतों पर ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर यानी DPCO, 2013 के तहत कीमत नियंत्रण की व्यवस्था है। लेकिन कई मेडिकल डिवाइस और कंज्यूमेबल्स पर दवाओं जैसी सीधी कीमत सीमा लागू नहीं है।इसी वजह से महाराष्ट्र FDA ने केंद्र से मेडिकल डिवाइस और अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले कंज्यूमेबल्स के लिए ज्यादा स्पष्ट निगरानी व्यवस्था की मांग की है। प्रस्ताव में खरीद कीमत और घोषित MRP के बीच एक अनुमत अंतर तय करने, जरूरी मेडिकल डिवाइस की कुछ श्रेणियों को संरचित प्राइस मॉनिटरिंग के तहत लाने और ट्रेड मार्जिन की सीमा तय करने जैसे विकल्प शामिल हैं।

अब केंद्र ने NPPA से रिपोर्ट मांगी

मामला अब सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रह गया है। 17 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार ने NPPA से इस कीमत अंतर को लेकर रिपोर्ट मांगी है। डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स NPPA के विश्लेषण के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।NPPA को पहले भी पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु के ड्रग कमिश्नरों की ओर से मेडिकल डिवाइस की कीमतों से जुड़ी ऐसी ही शिकायतें या प्रतिनिधित्व मिलने की बात सामने आई है। इसका मतलब यह है कि मुद्दा सिर्फ महाराष्ट्र में मिले एक उदाहरण तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि मेडिकल डिवाइस की कीमतों की निगरानी को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो सकती है।

मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री ने भी समीक्षा का समर्थन किया

महाराष्ट्र FDA की मांग को मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री के एक बड़े संगठन, एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMeD), का समर्थन मिला है। संगठन ने मेडिकल डिवाइस के लिए संरचित प्राइस मॉनिटरिंग और ट्रेड मार्जिन को तर्कसंगत बनाने की मांग का समर्थन किया है। AiMeD का कहना है कि कीमत तय करने की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे मरीजों को उचित कीमत मिले और मेडिकल डिवाइस उद्योग में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे।दूसरी ओर, अस्पताल उद्योग ने कहा है कि मेडिकल डिवाइस की खरीद कीमत और मरीज तक उसे सुरक्षित तरीके से पहुंचाने की कुल लागत को एक ही चीज नहीं माना जा सकता। इसलिए किसी भी नई व्यवस्था में अलग-अलग तरह के मेडिकल डिवाइस के लिए अलग मानदंड जरूरी हो सकते हैं।

मरीजों के लिए इसका मतलब क्या है?

फिलहाल इस मामले में कोई नया राष्ट्रीय प्राइस कैप लागू नहीं हुआ है। अभी महाराष्ट्र FDA के सर्वे के आधार पर केंद्र और NPPA स्तर पर समीक्षा की प्रक्रिया चल रही है। इसलिए 2,841% आंकड़े को यह कहकर पेश करना सही नहीं होगा कि देश के सभी अस्पतालों में मेडिकल सामान इसी अनुपात में महंगा बेचा जा रहा है।लेकिन यह मामला एक अहम सवाल जरूर उठाता है। अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले ऐसे जरूरी सामान की खरीद कीमत, MRP और मरीज से वसूली जाने वाली वास्तविक राशि के बीच कितना अंतर होना चाहिए, इसे लेकर ज्यादा पारदर्शिता कैसे लाई जाए।
अगर केंद्र सरकार आगे कोई नई व्यवस्था बनाती है तो उसका असर अस्पतालों, मेडिकल डिवाइस कंपनियों और सबसे ज्यादा मरीजों के बिल पर पड़ सकता है। अभी अगला महत्वपूर्ण कदम NPPA की समीक्षा और उसके आधार पर सरकार का फैसला होगा।

Hospital Consumables पर 2,841% Markup का मामला क्या है?

महाराष्ट्र FDA के सर्वे में एक IV इन्फ्यूजन सेट की खरीद कीमत ₹11.05 मिली, जबकि उस पर ₹325 की MRP छपी थी। खरीद कीमत और MRP के अंतर की गणना करने पर मार्कअप करीब 2,841% आया।

तुकाराम मुंढे ने Hospital Consumables की Pricing Review क्यों मांगी?

उनका कहना है कि मरीज अस्पताल में इलाज के दौरान मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमत की तुलना या मोलभाव नहीं कर पाता। इसलिए खरीद कीमत और MRP के बीच बड़े अंतर की निगरानी और एक स्पष्ट अनुमत सीमा जरूरी हो सकती है।

Survey में Hospital Consumables की कीमतों को लेकर क्या सामने आया?

सर्वे में IV सेट के अलावा सिरिंज और कैथेटर समेत कई मेडिकल कंज्यूमेबल्स में खरीद कीमत और MRP के बीच बड़ा अंतर मिला। उदाहरण के तौर पर ₹6.75 की सिरिंज पर ₹57.20 और ₹29.41 के कैथेटर पर ₹310 की MRP बताई गई।

2,841% Markup का क्या मतलब है?

इसका मतलब है कि जिस उत्पाद की खरीद कीमत ₹11.05 थी, उस पर ₹325 की MRP छपी थी। ₹11.05 के मुकाबले MRP में करीब ₹313.95 का अंतर है, जो खरीद कीमत के लगभग 2,841% के बराबर है। यह खरीद कीमत बनाम MRP का अंतर है, जरूरी नहीं कि पूरा अंतर अस्पताल का मुनाफा हो।

Hospital Consumables में किन Products की कीमतों की जांच की गई?

सर्वे में IV इन्फ्यूजन सेट, सिरिंज, कैथेटर, नेब्युलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और दूसरे इन-पेशेंट मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों की जांच की गई।

Maharashtra में Medical Consumables की Pricing को लेकर क्या समस्या है?

मुख्य समस्या खरीद कीमत और घोषित MRP के बीच बहुत बड़े अंतर की है। महाराष्ट्र FDA ने इस अंतर की समीक्षा, स्पष्ट अनुमत मार्जिन और जरूरी मेडिकल डिवाइस की कीमतों के लिए बेहतर निगरानी की मांग की है। अब केंद्र ने NPPA से रिपोर्ट मांगी है।

Was this article useful?
Full page popup ad