Home / International / Iran Gulf Talks Postponed: ईरान-खाड़ी देशों की होर्मुज बैठक टली, सहमति नहीं बनने से बढ़ी चिंता; क्या गहराएगा तेल संकट?
International

Iran Gulf Talks Postponed: ईरान-खाड़ी देशों की होर्मुज बैठक टली, सहमति नहीं बनने से बढ़ी चिंता; क्या गहराएगा तेल संकट?

ईरान और खाड़ी देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर होने वाली बैठक क्षेत्रीय सहमति के अभाव में टल गई। ओमान की मध्यस्थता के बावजूद बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। इस बीच जहाजों और सऊदी तेल पाइपलाइन पर हमलों से वैश्विक तेल सप्लाई की चिंता बढ़ी।

Iran Gulf Talks Postponed: ईरान-खाड़ी देशों की होर्मुज बैठक टली, सहमति नहीं बनने से बढ़ी चिंता; क्या गहराएगा तेल संकट?

Iran Gulf Talks Postponed: ओमान में ईरान और खाड़ी देशों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर होने वाली अहम बैठक टल गई है। बैठक सोमवार को ओमान के सलालाह में प्रस्तावित थी, लेकिन ओमानी विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने कहा कि इसे क्षेत्रीय सहमति बनाने के हित में स्थगित किया गया है। ईरान ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि कुछ क्षेत्रीय देशों के अनुरोध के बाद तेहरान और मस्कट की संयुक्त सहमति से बैठक टाली गई। नई तारीख अभी तय नहीं हुई है।यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसका मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर व्यवस्था पर चर्चा करना था। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। युद्ध से पहले दुनिया की करीब पांचवीं तेल सप्लाई इस जलमार्ग से गुजरती थी। ऐसे में यहां लंबे समय तक आवाजाही प्रभावित होने का सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई पर पड़ सकता है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान में ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र अल-बुसैदी से मुलाकात की। (Credit : Reuters)
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान में ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र अल-बुसैदी से मुलाकात की। (Credit : Reuters)

सहमति नहीं बनी, इसलिए टली होर्मुज की बैठक

ओमान इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ओमान और ईरान पहले से ही होर्मुज में सुरक्षित नौवहन को लेकर बातचीत कर रहे हैं। अगस्त में दोनों देशों ने एक संभावित चरणबद्ध व्यवस्था पर चर्चा की थी, जिसमें अस्थायी नेविगेशन कॉरिडोर बनाने और जलमार्ग में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाने की व्यवस्था शामिल थी। इसके आगे स्थायी नौवहन व्यवस्था, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था पर भी बातचीत का प्रस्ताव था।इसी समझ को लेकर ईरान, ओमान और खाड़ी क्षेत्र के दूसरे देशों के बीच चर्चा आगे बढ़नी थी। लेकिन बैठक से पहले ही कुछ देशों ने और समय मांगा। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक स्थगन क्षेत्रीय देशों के अनुरोध पर हुआ और इसका फैसला तेहरान तथा मस्कट ने मिलकर लिया। ओमान ने इसे किसी पक्ष के पीछे हटने के बजाय क्षेत्रीय सहमति के लिए उठाया गया कदम बताया है।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि नई बैठक कब होगी। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि नई तारीख ओमान के साथ बातचीत करके तय की जाएगी। यानी बातचीत का रास्ता बंद नहीं हुआ है, लेकिन तत्काल कोई समझौता सामने आता नहीं दिख रहा।

होर्मुज में आखिर इतना बड़ा संकट क्यों है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे ऊर्जा उत्पादक देशों के लिए यह समुद्री रास्ता बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के बड़े तेल और एलएनजी निर्यात का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है।मौजूदा संघर्ष के दौरान होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। ईरान ने नौवहन को लेकर अपनी शर्तें रखी हैं और जलमार्ग को लेकर विवाद बना हुआ है। इसी वजह से तेल टैंकरों की आवाजाही काफी कम हुई है और कंपनियां इस क्षेत्र से गुजरने में ज्यादा जोखिम देख रही हैं।
ईरान और ओमान की प्रस्तावित व्यवस्था का एक मकसद इसी समस्या को कम करना था। लेकिन अगर क्षेत्रीय देशों के बीच ही प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर सहमति नहीं बनती है तो सुरक्षित और नियमित जहाज आवाजाही बहाल करना और मुश्किल हो सकता है।

जहाजों पर हमले ने बढ़ाई चिंता

बैठक स्थगित होने के बीच होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। यूके मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने क्षेत्र में एक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल लगने और आग लगने की घटना की जानकारी दी। चालक दल को जहाज खाली करना पड़ा। अलग-अलग घटनाओं की रिपोर्ट के बीच यह भी स्पष्ट नहीं है कि सभी घटनाएं एक ही हमले से जुड़ी थीं या नहीं।ऐसी घटनाओं का असर सिर्फ उस जहाज तक सीमित नहीं रहता। अगर शिपिंग कंपनियों को लगता है कि होर्मुज से गुजरना ज्यादा जोखिम वाला है तो वे जहाजों को रोक सकती हैं, रास्ता बदल सकती हैं या ज्यादा बीमा और सुरक्षा लागत के साथ काम कर सकती हैं। इससे तेल और दूसरे सामान की ढुलाई महंगी हो सकती है।

सऊदी की तेल पाइपलाइन बंद होने से संकट और गहराया

होर्मुज संकट के बीच सऊदी अरब की 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन का बंद होना भी बड़ी चिंता बन गया है। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल को फारस की खाड़ी से सीधे लाल सागर के तट तक पहुंचाने में मदद करती है और इस तरह होर्मुज को बायपास करने का विकल्प देती है। ड्रोन हमले के बाद सऊदी ने इसे एहतियाती तौर पर बंद किया।रॉयटर्स के मुताबिक यह पाइपलाइन हाल में करीब 40 से 50 लाख बैरल तेल रोजाना ले जा रही थी। इसके बंद रहने पर सऊदी के लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह पर मौजूद निर्यात योग्य तेल का स्टॉक करीब 5 से 7 दिन तक ही निर्यात को सहारा दे सकता है, अगर पाइपलाइन जल्दी चालू नहीं होती।
इसका मतलब यह है कि एक तरफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित है और दूसरी तरफ उसे बायपास करने वाला सऊदी का महत्वपूर्ण तेल मार्ग भी हमले के कारण बंद है। यही वजह है कि वैश्विक तेल बाजार में चिंता तेजी से बढ़ी है।

तेल की कीमतों पर सीधा असर

कूटनीतिक बातचीत टलने और ऊर्जा ढांचे पर हमलों की खबरों के बाद तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। 14 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 3 फीसदी बढ़कर 107.54 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई करीब 2.9 फीसदी बढ़कर 102.93 डॉलर तक पहुंच गया था। बाजार को डर है कि अगर होर्मुज और सऊदी के तेल मार्गों में लंबे समय तक व्यवधान रहा तो वैश्विक सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहने पर वैश्विक तेल सप्लाई का करीब 4 फीसदी तक हिस्सा प्रभावित होने का जोखिम है। हालांकि यह संभावित प्रभाव है, वास्तविक नुकसान इस बात पर निर्भर करेगा कि पाइपलाइन कितनी जल्दी बहाल होती है और दूसरे रास्तों से कितनी सप्लाई उपलब्ध रहती है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल महंगा रहने पर आयात बिल बढ़ सकता है और लंबे समय में इसका असर पेट्रोल-डीजल, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ सकता है। हालांकि घरेलू ईंधन कीमतों पर असर केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत से तय नहीं होता।

आगे क्या होगा

बैठक टलने का मतलब यह नहीं है कि ईरान और खाड़ी देशों के बीच बातचीत खत्म हो गई है। ओमान लगातार संवाद और क्षेत्रीय स्थिरता की बात कर रहा है और ईरान ने भी नई तारीख तय करने के लिए मस्कट के साथ बातचीत जारी रखने की बात कही है।लेकिन मौजूदा हालात में कूटनीतिक रास्ता आसान नहीं है। होर्मुज में सुरक्षित नौवहन, ईरान की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ी चिंताएं, खाड़ी देशों की समुद्री सुरक्षा और तेल निर्यात - सभी मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब तक इन पर न्यूनतम क्षेत्रीय सहमति नहीं बनती, तब तक होर्मुज में सामान्य जहाज आवाजाही बहाल करना मुश्किल रहेगा।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Iran Gulf talks Oman में क्यों postponed हुईं?

ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने कहा कि बैठक को क्षेत्रीय सहमति बनाने के हित में स्थगित किया गया। ईरान के मुताबिक कुछ क्षेत्रीय देशों ने बैठक टालने का अनुरोध किया था और इसके बाद तेहरान व मस्कट ने संयुक्त रूप से फैसला लिया।

Iran और Gulf countries की meeting किस मुद्दे पर होनी थी?

बैठक का मुख्य मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षित और व्यवस्थित जहाज आवाजाही था। इसमें नौवहन व्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी थी।

Strait of Hormuz talks को क्यों टाला गया?

मुख्य वजह क्षेत्रीय सहमति की कमी बताई गई है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार कुछ देशों ने और समय मांगा था। नई तारीख अभी तय नहीं हुई है।

Oman की Iran Gulf diplomacy में क्या भूमिका है?

ओमान ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच संवाद कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। वह ईरान के साथ होर्मुज में सुरक्षित नौवहन और भविष्य की स्थायी व्यवस्था को लेकर बातचीत कर चुका है।

क्या Iran और Gulf countries के बीच talks फिर शुरू होंगी?

बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। ईरान ने कहा है कि नई तारीख ओमान के साथ समन्वय करके तय की जाएगी। हालांकि अभी कोई नई तारीख घोषित नहीं की गई है।

Hormuz crisis का global oil supply पर क्या असर हो सकता है?

होर्मुज में लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही प्रभावित रहने पर तेल और एलएनजी की वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। सऊदी की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन भी बंद होने से चिंता और बढ़ी है। इसके कारण 14 सितंबर को ब्रेंट 107 डॉलर से ऊपर पहुंच गया।

Was this article useful?