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Jaishankar UNGA 2026: UNGA में 26 सितंबर को जयशंकर का संबोधन, दुनिया के सामने भारत का क्या होगा रुख?

एस. जयशंकर 26 सितंबर 2026 को UNGA के 81वें सत्र में भारत का पक्ष रखेंगे। उनके संबोधन में ग्लोबल साउथ, सुरक्षा, आतंकवाद, विकास और बहुपक्षीय व्यवस्था जैसे मुद्दे अहम रह सकते हैं। यह एंटोनियो गुटेरेस का आखिरी हाई-लेवल UNGA सत्र होगा।

Jaishankar UNGA 2026: UNGA में 26 सितंबर को जयशंकर का संबोधन, दुनिया के सामने भारत का क्या होगा रुख?

Jaishankar UNGA 2026: विदेश मंत्री एस. जयशंकर 26 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के हाई-लेवल जनरल डिबेट में भारत का पक्ष रखेंगे। संयुक्त राष्ट्र की संशोधित अस्थायी स्पीकर लिस्ट के मुताबिक जयशंकर का संबोधन 26 सितंबर की दोपहर के सत्र में प्रस्तावित है। यह लगातार दूसरा मौका होगा, जब जयशंकर UNGA के मंच से भारत का राष्ट्रीय बयान देंगे। हालांकि, स्पीकर लिस्ट अभी प्रोविजनल है और इसमें आगे बदलाव संभव है।81वीं UNGA का नियमित सत्र 8 सितंबर 2026 से शुरू होगा। इसका हाई-लेवल जनरल डिबेट 22 सितंबर से शुरू होकर 26 सितंबर तक चलेगा और 28 सितंबर को भी जारी रहेगा। इस दौरान दुनिया के अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्ष, सरकार प्रमुख और विदेश मंत्री अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने देशों की प्राथमिकताएं रखेंगे।

26 सितंबर को जयशंकर की बारी, भारत की नजर बड़े वैश्विक मुद्दों पर

जयशंकर का भाषण ऐसे समय में होने जा रहा है, जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों से गुजर रही है। UNGA के इस हाई-लेवल सेशन में युद्ध और संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, विकास, जलवायु परिवर्तन, समुद्री स्तर में बढ़ोतरी, महामारी से निपटने की तैयारी और परमाणु हथियारों से जुड़े मुद्दे प्रमुख एजेंडे में हैं।भारत के लिए यह मंच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि UNGA में दिया गया राष्ट्रीय बयान केवल किसी एक क्षेत्रीय मुद्दे तक सीमित नहीं होता। यहां देश अपनी विदेश नीति, वैश्विक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को लेकर अपना व्यापक नजरिया सामने रखते हैं।
भारत लंबे समय से विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता देता रहा है। ऐसे में जयशंकर के भाषण में विकासशील देशों की प्राथमिकताओं, वैश्विक संस्थाओं में सुधार, आतंकवाद, शांति और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भारत का रुख सामने आने की संभावना रहेगी। हालांकि, उनके 2026 के भाषण के अंतिम विषय अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किए गए हैं।

UNGA 2026 में दुनिया के बड़े नेता भी होंगे आमने-सामने

जनरल डिबेट की शुरुआत 22 सितंबर को होगी। संयुक्त राष्ट्र की परंपरा के मुताबिक ब्राजील पहला देश होगा, जो जनरल डिबेट में अपना बयान देगा। उसके बाद अमेरिका की बारी होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी 22 सितंबर को विश्व नेताओं को संबोधित करने वाले हैं।यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में UN General Assembly को दिया जाने वाला दूसरा संबोधन होगा। ऐसे में उनके भाषण पर भारत समेत दुनिया की कई राजधानियों की नजर रहेगी।
24 सितंबर को बांग्लादेश और नेपाल के सरकार प्रमुखों के संबोधन का कार्यक्रम है, जबकि पाकिस्तान का संबोधन 25 सितंबर को निर्धारित है। जयशंकर का भारत की ओर से संबोधन 26 सितंबर के दोपहर के सत्र में प्रस्तावित है। स्पीकर लिस्ट में बदलाव संभव होने के कारण अंतिम कार्यक्रम को संयुक्त राष्ट्र के अपडेट के साथ देखना होगा।
UN का 81वां सत्र बांग्लादेश के विदेश मंत्री खालिलुर रहमान की अध्यक्षता में चलेगा। उन्हें 2 जून 2026 को महासभा के अध्यक्ष के रूप में चुना गया था। उन्होंने साइप्रस के एंड्रियास काकौरिस को 99-91 के अंतर से हराया था। उनका एक साल का कार्यकाल 8 सितंबर से शुरू होगा।
इस सत्र की थीम है “Restoring Trust, Managing Transformation: A United Nations that Delivers for All”, यानी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में भरोसा बहाल करना और बदलावों को इस तरह संभालना कि संयुक्त राष्ट्र सभी के लिए प्रभावी तरीके से काम कर सके।

युद्ध से लेकर क्लाइमेट और न्यूक्लियर हथियारों तक एजेंडे में कई मुद्दे

81वीं UNGA का हाई-लेवल वीक केवल जनरल डिबेट तक सीमित नहीं रहेगा। 23 सितंबर को विकास के अधिकार से जुड़ी घोषणा की 40वीं वर्षगांठ पर हाई-लेवल बैठक होगी। इसी दिन क्लाइमेट एक्शन और जस्ट ट्रांजिशन पर भी बैठक रखी गई है।24 सितंबर को समुद्र के बढ़ते स्तर से पैदा हो रहे अस्तित्व संबंधी खतरे पर हाई-लेवल बैठक होगी। इसके अगले दिन यानी 25 सितंबर को महामारी की रोकथाम, तैयारी और उससे निपटने की क्षमता पर बैठक होगी। 28 सितंबर को डरबन डिक्लेरेशन एंड प्रोग्राम ऑफ एक्शन को अपनाए जाने की 25वीं वर्षगांठ से जुड़ी हाई-लेवल बैठक होगी। 29 सितंबर को परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दिवस को लेकर हाई-लेवल प्लेनरी बैठक निर्धारित है।
इन बैठकों के बीच दुनिया में चल रहे युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव भी UNGA के एजेंडे पर हावी रहने की उम्मीद है। खासकर पश्चिम एशिया और अन्य संघर्षों का असर ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, व्यापार और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है।
भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह इन वैश्विक संकटों के बीच अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं के साथ-साथ विकासशील देशों की चिंताओं को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखे।

भारत के लिए UNGA मंच क्यों अहम है

भारत संयुक्त राष्ट्र में लंबे समय से सुरक्षा परिषद में सुधार और वैश्विक संस्थाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला बनाने की मांग करता रहा है। भारत का मानना है कि मौजूदा वैश्विक संस्थाओं को आज की आर्थिक और राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।जयशंकर के पिछले UNGA संबोधनों में भी ग्लोबल साउथ, आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून, विकास और बहुपक्षीय व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। 2023 में UNGA में भारत के राष्ट्रीय बयान के दौरान उन्होंने ग्लोबल साउथ की चिंताओं, संघर्षों और विकास के लिए संसाधनों की कमी पर जोर दिया था।
इसलिए 26 सितंबर का Jaishankar UNGA 2026 संबोधन भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण मंच होगा। खासकर ऐसे समय में जब दुनिया में कई मोर्चों पर तनाव है और विकासशील देशों पर युद्ध, ऊर्जा कीमतों और आर्थिक अस्थिरता का असर पड़ रहा है।

इस बार UNGA इसलिए भी खास, Guterres का आखिरी हाई-लेवल सत्र

81वीं UNGA में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। वर्तमान UN Secretary-General एंटोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इसलिए यह उनके कार्यकाल का आखिरी हाई-लेवल UNGA सेशन होगा।गुटेरेस के उत्तराधिकारी की चयन प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार सदस्य देशों से उम्मीदवारों के नाम मांगे गए हैं और उम्मीदवारों के साथ इंटरैक्टिव डायलॉग भी हो चुके हैं। नए महासचिव का कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से शुरू होना है।
इस बार की प्रक्रिया में महिलाओं की उम्मीदवारी भी खास चर्चा में है। कई महिला उम्मीदवार मैदान में हैं, इसलिए यह सवाल भी महत्वपूर्ण बना हुआ है कि क्या संयुक्त राष्ट्र अपने इतिहास में पहली बार किसी महिला को महासचिव नियुक्त करेगा। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि अगला महासचिव कौन होगा।
कुल मिलाकर, Jaishankar UNGA 2026 संबोधन ऐसे समय में हो रहा है जब UN खुद अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में भरोसा, सुधार और प्रभावशीलता को लेकर बड़े सवालों का सामना कर रहा है। 26 सितंबर को जयशंकर के भाषण में भारत किस तरह इन वैश्विक चुनौतियों को देखता है और ग्लोबल साउथ के लिए क्या प्राथमिकताएं रखता है, इस पर खास नजर रहेगी।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Jaishankar UNGA 2026 में कब address करेंगे?

संयुक्त राष्ट्र की संशोधित अस्थायी स्पीकर लिस्ट के अनुसार विदेश मंत्री एस. जयशंकर 26 सितंबर 2026 को UNGA के जनरल डिबेट के दोपहर के सत्र में भारत का राष्ट्रीय बयान देंगे। कार्यक्रम प्रोविजनल है और इसमें बदलाव संभव है।

Jaishankar UN General Assembly Address में किन global issues पर बात कर सकते हैं?

उनके अंतिम भाषण का एजेंडा अभी आधिकारिक रूप से जारी नहीं हुआ है। लेकिन भारत की पारंपरिक विदेश नीति प्राथमिकताओं को देखते हुए ग्लोबल साउथ, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, आतंकवाद, विकास, बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार और वैश्विक संघर्ष जैसे मुद्दे अहम हो सकते हैं।

External Affairs Minister UNGA session में India की क्या priorities रखेंगे?

भारत आम तौर पर विकासशील देशों की चिंताओं, ग्लोबल साउथ, आतंकवाद, विकास और संयुक्त राष्ट्र में सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता देता है। 2026 के भाषण में कौन-से मुद्दे प्राथमिकता में होंगे, यह जयशंकर के वास्तविक संबोधन से स्पष्ट होगा।

UN General Assembly 2026 में India का diplomatic focus क्या रहेगा?

भारत का डिप्लोमैटिक फोकस ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, अंतरराष्ट्रीय कानून और नियम आधारित व्यवस्था तथा शांति और विकास से जुड़े मुद्दों पर रहने की संभावना है।

Jaishankar September 26 का UNGA address भारत की foreign policy के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

UNGA का मंच भारत को एक साथ दुनिया के लगभग सभी देशों के सामने अपनी विदेश नीति और वैश्विक मुद्दों पर अपना पक्ष रखने का अवसर देता है। ऐसे समय में जब कई क्षेत्रों में संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव है, यह मंच भारत के रुख को सामने रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

UNGA 2026 में General Debate कब होगा?

81वीं UNGA का General Debate 22 से 26 सितंबर और फिर 28 सितंबर 2026 को होगा। 8 सितंबर को 81वें सत्र की शुरुआत होगी।

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