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Medical Stores मे CCTV को लेकर सरकार का बड़ा प्लान, Chemists के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल

देशभर की pharmacies में CCTV surveillance को लेकर सरकार ने बड़ा प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद prescription और controlled medicines की बिक्री पर नजर रखना है। हालांकि छोटे chemists ने लागत, बिजली-इंटरनेट और patient privacy को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं।

Medical Stores मे CCTV को लेकर सरकार का बड़ा प्लान, Chemists के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल

देश में अब दवाइयां खरीदने का तरीका बदल सकता है। CCTV at Medical Stores को लेकर केंद्र सरकार ने Drugs Rules, 1945 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत prescription पर दवा बेचने वाले licensed retail premises में CCTV surveillance अनिवार्य करने की बात कही गई है। प्रस्ताव में रिकॉर्डिंग को कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित रखने का प्रावधान भी है। हालांकि यह अभी draft proposal है, final rule नहीं बना है। इस कदम के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य prescription medicines, खासकर Schedule H, H1 और X drugs की अनधिकृत बिक्री और misuse पर रोक लगाना है। दूसरी ओर, All India Organisation of Chemists and Druggists यानी AIOCD का कहना है कि छोटे मेडिकल स्टोर्स पर इसका भारी आर्थिक और तकनीकी बोझ पड़ सकता है।

सरकार क्यों चाहती है Medical Store CCTV Surveillance?

सीधे शब्दों में कहें तो सरकार का मकसद prescription medicines की बिक्री का ऐसा verifiable record तैयार करना है, जिसे जरूरत पड़ने पर regulatory authorities जांच सकें। इससे बिना वैध prescription के संवेदनशील दवाओं की बिक्री, unauthorized access और drug diversion को पकड़ने में मदद मिल सकती है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने 8 सितंबर 2026 को जारी Draft Gazette Notification G.S.R. 791(E) के जरिए Drugs Rules, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा। मंत्रालय के मुताबिक यह कदम Schedule H, H1 और X drugs की regulatory monitoring को मजबूत करने के लिए है। प्रस्ताव पहले Drugs Consultative Committee के स्तर पर चर्चा में आया और बाद में Drugs Technical Advisory Board यानी DTAB के सदस्यों के सामने रखा गया, जिसके बाद DTAB ने इसे मंजूरी देने की सिफारिश की।

सरकार की चिंता खास तौर पर उन दवाओं को लेकर है जिनकी बिक्री डॉक्टर के prescription के आधार पर होती है और जिनके गलत इस्तेमाल से addiction या दूसरे public-health risks पैदा हो सकते हैं। प्रस्तावित CCTV व्यवस्था का उद्देश्य केवल कैमरा लगाना नहीं, बल्कि दवा की बिक्री को बाद में verify करने योग्य बनाना है।

यह विचार पहली बार सामने नहीं आया

Pharmacy CCTV Rules 2026 को पूरी तरह नई पहल मानना सही नहीं होगा। National Commission for Protection of Child Rights यानी NCPCR और अन्य सरकारी एजेंसियां पहले भी बच्चों तक prescription और intoxicating medicines की अनधिकृत पहुंच रोकने के लिए मेडिकल स्टोर्स पर CCTV लगाने की बात करती रही हैं।

2021 के Joint Action Plan में Schedule H और X drugs बेचने वाली pharmacies और chemist shops पर CCTV installation का प्रावधान सुझाया गया था। बाद की समीक्षा रिपोर्टों में भी कई राज्यों में मेडिकल स्टोर्स पर CCTV लगाए जाने की जानकारी दर्ज की गई। NCPCR की 2023-24 annual report में बताया गया कि Schedule H और X drugs बेचने वाले medical stores पर कुल 3,69,727 CCTV cameras लगाए जा चुके थे। यानी अब जो nationwide proposal सामने आया है, वह पहले से चल रही निगरानी व्यवस्था को एक समान regulatory framework देने की दिशा में अगला कदम माना जा सकता है।

CCTV at Medical Stores Rules में क्या बदलेगा?

प्रस्तावित संशोधन Drugs Rules, 1945 के Rule 65 में नया sub-rule जोड़ने से जुड़ा है। Draft के अनुसार registered medical practitioner के prescription पर दवा की supply, wholesale dealing को छोड़कर, ऐसे licensed premises से की जानी होगी जहां CCTV surveillance system लगा और maintain किया गया हो। रिकॉर्डिंग को कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित रखना होगा।

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। सरकार की official explanation Schedule H, H1 और X drugs की निगरानी को मजबूत करने पर जोर देती है, लेकिन draft के प्रस्तावित operative text में prescription पर supply होने वाली दवाओं के retail sale को व्यापक तरीके से cover किया गया है। इसलिए final rules आने तक यह कहना जल्दबाजी होगी कि surveillance केवल कुछ खास medicines तक सीमित रहेगा या सभी prescription sales पर लागू होगा।

इसी वजह से Medical Store New Rules 2026 को अभी लागू कानून की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। Health Ministry ने draft पर stakeholders और public से objections तथा suggestions मांगे हैं। Draft rules के बारे में अंतिम फैसला consultation process के बाद लिया जाएगा।

Chemists CCTV Proposal का विरोध क्यों कर रहे हैं?

सरकार जहां इसे transparency और accountability बढ़ाने का तरीका बता रही है, वहीं chemists का कहना है कि CCTV Pharmacy Rules 2026 का blanket implementation छोटे दुकानदारों के लिए मुश्किल हो सकता है। AIOCD ने Health Ministry को दिए अपने representation में कहा है कि CCTV cameras के अलावा DVR/NVR system, storage, wiring, internet connectivity और maintenance पर करीब Rs 50,000 से Rs 1 लाख या उससे अधिक का अतिरिक्त खर्च आ सकता है। संगठन के मुताबिक बड़े शहरों की pharmacy chains के लिए यह लागत संभालना आसान हो सकता है, लेकिन छोटे कस्बों और गांवों की दुकानों पर इसका असर ज्यादा होगा। AIOCD ने यह भी सवाल उठाया है कि हर छोटे medical store में एक जैसा surveillance setup लागू करना व्यावहारिक है या नहीं। खासकर ऐसे इलाकों में जहां बिजली की समस्या, कमजोर internet connectivity और technical support की कमी रहती है, वहां लगातार CCTV recording बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

Source- Indian Express
Source- Indian Express

सिर्फ खर्च ही नहीं, rural infrastructure भी बड़ी चिंता

ग्रामीण क्षेत्रों में कई pharmacy owners के लिए 24 घंटे recording बनाए रखने का मतलब सिर्फ camera खरीदना नहीं होगा। बिजली की कटौती के दौरान recording कैसे जारी रहेगी, storage system कितना बड़ा होगा और खराब होने पर उसका maintenance कौन करेगा- ये सवाल भी सामने आ रहे हैं। AIOCD ने यह भी चिंता जताई कि technical failure की स्थिति में अगर recording उपलब्ध नहीं रहती है, तो दुकानदारों को regulatory action का सामना करना पड़ सकता है। Association का तर्क है कि शहर और दूरदराज के गांवों के लिए एक जैसी compliance requirement वास्तविक परिस्थितियों को नजरअंदाज कर सकती है।

Pharmacy CCTV Rules 2026 में Privacy का मुद्दा भी बड़ा

Chemists के विरोध का एक दूसरा महत्वपूर्ण कारण pharmacy privacy concerns हैं। मेडिकल स्टोर पर आने वाला व्यक्ति सामान्य दवा के साथ-साथ ऐसी medicines भी खरीद सकता है जिनसे उसकी निजी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का अंदाजा लगाया जा सकता है। AIOCD ने patient confidentiality को लेकर चिंता जताई है और सवाल उठाया है कि अगर pharmacy में हर transaction का video record होगा, तो उस footage तक किसकी पहुंच होगी, वह कितने समय तक सुरक्षित रहेगी और उसका गलत इस्तेमाल कैसे रोका जाएगा। खास तौर पर HIV, TB, reproductive health या दूसरी sensitive conditions से जुड़ी दवाओं की खरीदारी में privacy का सवाल ज्यादा गंभीर हो सकता है।

सरकार का पक्ष यह है कि CCTV surveillance का उद्देश्य दवा बिक्री को अधिक accountable और verifiable बनाना है। लेकिन draft notification में footage की minimum retention period तीन महीने रखे जाने के साथ privacy और data access safeguards की व्यावहारिक व्यवस्था भी महत्वपूर्ण हो जाती है। अभी उपलब्ध official communication का मुख्य जोर drug regulation और monitoring पर है; final framework में data access और safeguards के बारे में और स्पष्टता की जरूरत पड़ सकती है।

Medical Store CCTV Mandatory होगा या अभी सिर्फ Proposal?

फिलहाल Medical Store CCTV Mandatory कहना तकनीकी रूप से सही नहीं है, क्योंकि nationwide requirement अभी final rule नहीं बनी है। केंद्र सरकार ने draft notification जारी किया है और stakeholders से objections तथा suggestions मांगे हैं। Final amendment प्रकाशित होने और उसके effective होने के बाद ही nationwide legal obligation तय होगा। यही अंतर इस पूरी कहानी में सबसे जरूरी है। DTAB ने proposal को approval की recommendation दी है और Health Ministry ने draft notification जारी किया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि देश की हर pharmacy पर तुरंत नया कानून लागू हो गया है।

भविष्य में final rules के जरिए कैमरा placement, recording quality, storage standards, access permissions, technical failures और compliance procedure जैसे पहलुओं को और स्पष्ट किया जा सकता है। अभी draft का केंद्रीय प्रावधान prescription-based retail supply को CCTV surveillance से जोड़ने और recordings को minimum three months तक रखने पर है।

सरकार और Chemists के बीच असली टकराव क्या है?

यह मामला केवल camera लगाने का नहीं है। एक तरफ सरकार prescription और controlled medicines की बिक्री में बेहतर निगरानी चाहती है, ताकि unauthorized sale और diversion को रोका जा सके। दूसरी तरफ chemists चाहते हैं कि regulation लागू करने से पहले उसकी लागत, infrastructure और customer privacy जैसे पहलुओं पर विचार किया जाए।

इस बहस में एक तीसरा सवाल भी महत्वपूर्ण है- क्या हर pharmacy के लिए एक जैसा surveillance model जरूरी है, या high-risk medicines और high-risk areas के आधार पर अलग compliance system बनाया जा सकता है? इसी तरह यह भी देखा जाना होगा कि CCTV footage के साथ existing billing records, prescription registers और Track & Trace mechanisms को किस तरह जोड़ा जाएगा। यानी CCTV Prescription Drug Sales को लेकर सरकार का उद्देश्य monitoring मजबूत करना है, लेकिन implementation model तय करना इस प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण अगला चरण होगा।

निष्कर्ष

CCTV at Medical Stores को लेकर सरकार का प्रस्ताव prescription medicines की बिक्री पर नजर मजबूत करने और unauthorized access को रोकने की कोशिश के रूप में सामने आया है। DTAB की सिफारिश के बाद Health Ministry ने Draft G.S.R. 791(E) जारी कर इसे formal regulatory process में ला दिया है। हालांकि chemists का कहना है कि AIOCD CCTV Proposal छोटे दुकानदारों पर ₹50,000 से ₹1 लाख या उससे अधिक का खर्च डाल सकता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, इंटरनेट और maintenance की समस्याएं अलग चुनौती हैं। इसके साथ patient privacy और footage security का सवाल भी जुड़ा है। इस समय सबसे अहम बात यह है कि यह draft rule है, लागू हो चुका nationwide law नहीं। आगे stakeholders की आपत्तियों और सरकार के final decision से तय होगा कि CCTV Pharmacy Rules 2026 किस रूप में लागू होते हैं और छोटे chemists के लिए compliance कितना व्यावहारिक बनाया जाता है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

सरकार medical stores में CCTV क्यों लगाना चाहती है?

सरकार prescription medicines, खासकर regulated और potentially misused drugs की बिक्री को अधिक transparent और verifiable बनाना चाहती है। CCTV से जरूरत पड़ने पर किसी transaction की जांच में मदद मिल सकती है और unauthorized sale पर निगरानी बढ़ाई जा सकती है।

Chemists medical store CCTV proposal का विरोध क्यों कर रहे हैं?

Chemists का कहना है कि cameras, DVR/NVR, storage, wiring और maintenance पर ₹50,000 से ₹1 लाख या उससे अधिक खर्च हो सकता है। वे rural areas में power cuts, weak internet और patient privacy को लेकर भी चिंतित हैं।

Medical store CCTV rules 2026 में किन medicines की निगरानी होगी?

Health Ministry ने Schedule H, H1 और X drugs पर regulatory oversight मजबूत करने की बात कही है। हालांकि draft के operative text में registered medical practitioner के prescription पर retail supply को व्यापक रूप से cover किया गया है। Final scope notification के अंतिम रूप पर निर्भर करेगा।

क्या pharmacy में CCTV लगाना अभी mandatory हो गया है?

नहीं। अभी यह draft proposal है। सरकार ने stakeholders और public से objections तथा suggestions मांगे हैं। Final notification के बाद ही इसकी कानूनी बाध्यता स्पष्ट होगी।

CCTV footage कितने समय तक सुरक्षित रखना होगा?

Draft notification में CCTV recordings को कम से कम तीन महीने तक preserve करने का प्रस्ताव है।

क्या medical store CCTV से patient privacy प्रभावित हो सकती है?

Chemists ने patient confidentiality को लेकर चिंता जताई है, खासकर sensitive medicines की खरीदारी के संदर्भ में। इसलिए footage तक access, storage और data security के स्पष्ट safeguards इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे।

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