UN Peacekeepers Lebanon: साल के अंत में क्यों खत्म हो सकता है 50 साल पुराना मिशन, इजरायल-लेबनान सीमा पर बढ़ेगा खतरा?
लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के करीब 50 साल पुराने शांति मिशन UNIFIL का कार्यकाल 2026 के अंत में समाप्त होने वाला है। लेबनान मिशन जारी रखने की मांग कर रहा है, लेकिन नए विकल्पों पर अब तक फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच लेबनान की सुरक्षा व्यवस्था एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है। UN Peacekeepers Lebanon को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। लेकिन साल 2026 के अंत में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) का कार्यकाल समाप्त होने वाला है और उसके बाद किस तरह की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी रहेगी, इस पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के अवर महासचिव जीन-पियरे लैक्रोआ ने 14 अक्टूबर 2026 को बेरूत में अधिकारियों और शांति मिशन में योगदान देने वाले देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि लेबनान के अधिकारियों की आवाज को भविष्य की व्यवस्था तय करने वाली बातचीत में स्पष्ट रूप से सुना जाना चाहिए। सवाल यह है कि अगर मौजूदा मिशन हट गया, तो इजरायल-लेबनान सीमा पर निगरानी और तनाव कम करने की जिम्मेदारी कौन संभालेगा?
UN Peacekeepers Lebanon Mandate: 2026 के अंत में क्यों खत्म हो रहा है मिशन?

UNIFIL यानी United Nations Interim Force in Lebanon की स्थापना वर्ष 1978 में हुई थी। इसका शुरुआती उद्देश्य दक्षिणी लेबनान से इजरायली सैनिकों की वापसी की निगरानी करना था। इजरायल ने 1982 में दोबारा लेबनान पर आक्रमण किया और वर्ष 2000 में दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना वापस बुला ली।संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अगस्त 2025 में मतदान के जरिए UNIFIL का कार्यकाल 2026 के अंत में समाप्त करने का फैसला किया था। यह निर्णय अमेरिका और उसके करीबी सहयोगी इजरायल के दबाव के बीच लिया गया। इजरायल लंबे समय से दक्षिणी लेबनान में इस बल की मौजूदगी का विरोध करता रहा है।फिलहाल लेबनानी अधिकारी मिशन के कार्यकाल को अंतिम समय में बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस मांग पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है। लैक्रोआ के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र की भविष्य की मौजूदगी कैसी होगी या UNIFIL के बाद कोई दूसरा मिशन रहेगा भी या नहीं, इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।उन्होंने संकेत दिया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जल्द ही इस मुद्दे पर गंभीर बातचीत शुरू होने की उम्मीद है। मिशन का कार्यकाल समाप्त होने से पहले भविष्य की व्यवस्था पर फैसला करना जरूरी होगा।
UN Peacekeepers Lebanon की भूमिका क्या है और मिशन हटने से क्या बदलेगा?
UN Peacekeepers Lebanon का काम केवल सीमा पर गश्त करना नहीं है। यह बल इजरायल और लेबनान के बीच तनाव कम करने, संघर्षविराम के पालन की निगरानी करने और दोनों देशों की सेनाओं के बीच गलतफहमी से पैदा होने वाली सैन्य टकराव की आशंका को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।वर्तमान में UNIFIL में करीब 7,500 शांति सैनिक तैनात हैं, जो लगभग 46 देशों से आते हैं। यह संख्या अपने चरम पर रहे लगभग 10,000 सैनिकों से कम है। पहले मिशन में करीब 50 देशों के 7,500 कर्मियों का उल्लेख भी किया गया है। इसकी प्रमुख जिम्मेदारियां हैं:
- सीमा पर निगरानी: लेबनान और इजरायल के बीच निर्धारित ब्लू लाइन पर गश्त करना और उल्लंघनों की रिपोर्ट देना।- तनाव कम करना: इजरायली और लेबनानी सैनिकों के बीच संपर्क और समन्वय बनाए रखना, ताकि अनजाने में सैन्य टकराव न बढ़े।
- संघर्षविराम की निगरानी: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 के तहत तय व्यवस्थाओं के पालन पर नजर रखना।
- नागरिकों और सहायता की मदद: सहायता सामग्री के काफिलों को सुरक्षा देना और इजरायल के कब्जे वाले क्षेत्रों के भीतर बिखरे इलाकों में रहने वाले नागरिकों की आवाजाही में मदद करना।
मिशन की वापसी के बाद इन जिम्मेदारियों को कौन संभालेगा, यह अब भी बड़ा सवाल है। तय व्यवस्था के अनुसार, कार्यकाल समाप्त होने के बाद UNIFIL को अपना काम समेटने और सैनिकों की वापसी पूरी करने के लिए एक साल का समय मिलेगा।
Lebanon Stability UN: इजरायल-लेबनान सीमा पर क्यों बढ़ी चिंता?
लेबनान में संयुक्त राष्ट्र की मौजूदगी समाप्त होने की आशंका ऐसे समय सामने आई है, जब क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति पहले से तनावपूर्ण है। इजरायल और लेबनान के बीच संघर्षविराम लागू है, लेकिन हालात स्थिर नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर कब्जा कर रखा है और वहां इमारतों को ध्वस्त करने तथा हमले करने की घटनाएं जारी हैं। हजारों घर तबाह हो चुके हैं और कुछ मामलों में पूरे गांवों को नुकसान पहुंचा है।पिछले साल मार्च में युद्ध शुरू होने के बाद से इजरायली हमलों में कम से कम सात UNIFIL शांति सैनिकों की मौत होने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है। ऐसे माहौल में अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ने की आशंका लेबनान की चिंता बढ़ा रही है।लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने 14 अक्टूबर को लैक्रोआ से मुलाकात के बाद कहा कि शांति सैनिकों की वापसी से सुरक्षा व्यवस्था में खालीपन पैदा हो सकता है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और घटनाओं पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी समाप्त होने का खतरा रहेगा। लेबनान और इजरायल के बीच औपचारिक रूप से सहमत सीमा नहीं होने के कारण संयुक्त राष्ट्र ने ब्लू लाइन निर्धारित की थी। UNIFIL इसी रेखा पर निगरानी और गश्त करता है। ऐसे में इस बल की अनुपस्थिति में सीमा पर होने वाली गतिविधियों की निगरानी और विवादों को नियंत्रित करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
UNIFIL Mission Extension के विकल्प क्या हैं? क्या कोई दूसरा बल लेगा जगह?
UNIFIL का कार्यकाल समाप्त होने से पहले संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जो सीमा पर निगरानी और तनाव कम करने की मौजूदा जरूरतों को पूरा कर सके।संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी के मुताबिक, भविष्य में किस तरह की मौजूदगी रखी जाएगी, इस पर कई विकल्पों पर विचार हो रहा है। हालांकि, किसी विकल्प को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।यूरोपीय संघ ने लेबनान के लिए एक नए सहायता मिशन की योजना घोषित की है। इसका मुख्य ध्यान लेबनानी सेना और अन्य सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण देने पर होगा। लेकिन यह मिशन UNIFIL की तरह सीमा क्षेत्र में गश्त करने या उल्लंघनों की निगरानी करने की भूमिका नहीं निभाएगा।UNIFIL की वापसी के बाद संयुक्त राष्ट्र का एक छोटा, निहत्था पर्यवेक्षक बल UNTSO मौजूद रहेगा। हालांकि, लैक्रोआ ने सवाल उठाया कि क्या यह बल संयुक्त राष्ट्र की सैन्य मौजूदगी से मिलने वाली सुरक्षा के बिना प्रभावी ढंग से काम कर पाएगा।इसलिए UNIFIL Mandate 2026 का अंत केवल सैनिकों की वापसी का मामला नहीं है। इससे सीमा पर निगरानी, सहायता काफिलों की सुरक्षा, नागरिकों की आवाजाही और इजरायल तथा लेबनान की सेनाओं के बीच समन्वय जैसे कई काम प्रभावित हो सकते हैं।
निष्कर्ष
UN Peacekeepers Lebanon का भविष्य अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा। लेबनान चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी बनी रहे, जबकि मौजूदा UNIFIL मिशन का कार्यकाल समाप्त करने का फैसला पहले ही लिया जा चुका है।करीब पांच दशक से जारी इस मिशन की वापसी के बाद सीमा पर निगरानी और तनाव कम करने की जिम्मेदारी किसे मिलेगी, इसका स्पष्ट जवाब अभी सामने नहीं आया है। यूरोपीय संघ का प्रस्तावित सहायता मिशन प्रशिक्षण पर केंद्रित है और UNTSO की सीमित मौजूदगी से UNIFIL की सभी जिम्मेदारियां पूरी होने की गारंटी नहीं है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र के सामने चुनौती सिर्फ नया ढांचा तैयार करने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि मिशन बदलने के दौरान लेबनान की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता कमजोर न पड़े।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Lebanon में UN Peacekeepers की भूमिका क्या है?
UN Peacekeepers का काम लेबनान और इजरायल के बीच सीमा पर निगरानी करना, उल्लंघनों की रिपोर्ट देना, संघर्षविराम से जुड़ी व्यवस्थाओं पर नजर रखना और दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव कम करने में मदद करना है। UNIFIL नागरिकों की आवाजाही और सहायता काफिलों को सुरक्षित बनाने में भी भूमिका निभाता है।
UNIFIL का Mandate कब समाप्त होने वाला है?
UNIFIL का मौजूदा कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाला है। इसके बाद बल को अपने अभियान समेटने और सैनिकों की वापसी पूरी करने के लिए एक साल का समय मिलेगा।
संयुक्त राष्ट्र Lebanon में स्थिरता क्यों बनाए रखना चाहता है?
लेबनान और इजरायल के बीच तनाव, सीमा पर सैन्य गतिविधियों और दक्षिणी लेबनान में जारी अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय निगरानी महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र की मौजूदगी संघर्ष बढ़ने की आशंका कम करने और घटनाओं पर नजर रखने में मदद करती है।
UN Peacekeeping Mission का मुख्य उद्देश्य क्या है?
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों का मुख्य उद्देश्य संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में मदद करना है। इनके कार्यों में संघर्षविराम की निगरानी, नागरिकों की सुरक्षा में सहायता, पक्षों के बीच समन्वय और तनाव कम करने के प्रयास शामिल हो सकते हैं। जिम्मेदारियां हर मिशन के निर्धारित जनादेश पर निर्भर करती हैं।
Lebanon और Israel की सीमा पर सुरक्षा की स्थिति कैसी है?
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच संघर्षविराम लागू है, लेकिन दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा की स्थिति नाजुक बनी हुई है। इजरायली हमलों और तबाही की घटनाओं के बीच UNIFIL की भविष्य की भूमिका और सीमा पर निगरानी को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।