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धरती का सुरक्षा कवच भी नहीं रोक पाया अंतरिक्ष का खतरा! 'Killer Electrons' में 5,000 गुना उछाल से वैज्ञानिक हैरान

मई 2024 के भीषण सौर तूफान के दौरान पृथ्वी के आंतरिक रेडिएशन बेल्ट में अत्यधिक ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन्स की संख्या 5,000 गुना से ज्यादा बढ़ गई। नई रिसर्च ने उस सुरक्षा कवच को लेकर वैज्ञानिकों की पुरानी समझ पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे अब तक लगभग अभेद्य माना जाता था।

धरती का सुरक्षा कवच भी नहीं रोक पाया अंतरिक्ष का खतरा! 'Killer Electrons' में 5,000 गुना उछाल से वैज्ञानिक हैरान

अंतरिक्ष में पृथ्वी की सुरक्षा केवल उसके वायुमंडल तक सीमित नहीं है। हमारे ग्रह के चारों ओर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र और रेडिएशन बेल्ट भी उसे अंतरिक्ष से आने वाले ऊर्जावान कणों के प्रभाव से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन क्या होगा जब अंतरिक्ष में उठने वाला एक शक्तिशाली सौर तूफान इसी सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर दे? वैज्ञानिकों की एक नई खोज ने इसी सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है। अध्ययन के मुताबिक, मई 2024 के सौर तूफान के दौरान पृथ्वी के उस क्षेत्र में भी खतरनाक इलेक्ट्रॉन्स पहुंच गए, जिसे अब तक बेहद सुरक्षित माना जाता था।

क्या है Earth's Radiation Barrier Breached होने की पूरी कहानी?

Earth's Radiation Barrier Breached As 'Killer' Electrons Surge 5,000 Times
Earth's Radiation Barrier Breached As 'Killer' Electrons Surge 5,000 Times

पृथ्वी के चारों ओर दो बड़े डोनट के आकार के क्षेत्र मौजूद हैं, जिन्हें Van Allen Radiation Belts कहा जाता है। इन क्षेत्रों में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के कारण बड़ी संख्या में विद्युत आवेशित कण फंसे रहते हैं। इनमें से आंतरिक बेल्ट में मुख्य रूप से ऊर्जावान प्रोटॉन पाए जाते हैं, जबकि बाहरी बेल्ट में इलेक्ट्रॉन्स की संख्या अधिक होती है। इन कणों का व्यवहार सूर्य की गतिविधियों और अंतरिक्ष के मौसम से प्रभावित होता है। एक दशक से अधिक समय तक वैज्ञानिकों की धारणा थी कि आंतरिक रेडिएशन बेल्ट एक मजबूत प्राकृतिक अवरोध की तरह काम करती है। यह बेहद ऊर्जावान इलेक्ट्रॉन्स को पृथ्वी के करीब पहुंचने से रोकती है। इन इलेक्ट्रॉन्स को उनकी खतरनाक ऊर्जा और उपग्रहों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता के कारण 'Killer Electrons' कहा जाता है। लेकिन मई 2024 में आए शक्तिशाली सौर तूफान के दौरान दर्ज आंकड़ों ने इस धारणा को चुनौती दे दी। Geophysical Research Letters में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों ने उस संरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में भी असामान्य रूप से ऊर्जावान इलेक्ट्रॉन्स की मौजूदगी दर्ज की।

मई 2024 के Solar Storm ने कैसे बदली पूरी स्थिति?

मई 2024 में पृथ्वी ने एक बेहद शक्तिशाली भू-चुंबकीय तूफान का सामना किया था। इसे G5 श्रेणी में रखा गया, जो इस पैमाने की सबसे उच्च श्रेणी है। इससे पहले सूर्य पर कई शक्तिशाली सौर ज्वालाएं और कोरोनल मास इजेक्शन (CME) हुए थे। इनके कारण बड़ी मात्रा में आवेशित कण पृथ्वी की ओर आए। इस तूफान ने पृथ्वी के आसपास मौजूद प्लाज्मा क्षेत्र में ठंडे प्लाज्मा की मात्रा काफी कम कर दी। इस क्षेत्र को प्लाज्मास्फीयर कहा जाता है। इसके बाद वहां ऐसी परिस्थितियां बनीं, जिनमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें, जिन्हें 'Chorus Waves' कहा जाता है, इलेक्ट्रॉन्स को अत्यधिक ऊर्जा देने में सक्षम हो गईं। जापान की नागोया यूनिवर्सिटी के अंतरिक्ष भौतिक विज्ञानी योशिजुमी मियॉशी के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने इस प्रक्रिया का अध्ययन किया। उनके मुताबिक, इलेक्ट्रॉन्स की ऊर्जा बढ़ने की प्रक्रिया धीरे-धीरे हुई। पहले कम ऊर्जा वाले कण दिखाई दिए और फिर अगले 24 घंटों में अधिक ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन्स की संख्या बढ़ती गई।

Killer Electrons Surge 5000 Times: आखिर कितनी बढ़ गई इनकी ताकत?

इस अध्ययन का सबसे चौंकाने वाला निष्कर्ष इलेक्ट्रॉन्स की संख्या में हुई असाधारण वृद्धि है। शोधकर्ताओं ने लगभग 3 मेगाइलेक्ट्रॉन वोल्ट (MeV) ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन्स में तूफान से पहले दर्ज स्तर की तुलना में 5,000 गुना से अधिक बढ़ोतरी देखी। यह अवलोकन जापान के अरासे (Arase) उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित है। यह उपग्रह वर्ष 2017 से पृथ्वी के रेडिएशन बेल्ट की निगरानी कर रहा है। शोधकर्ताओं का मानना है कि ये इलेक्ट्रॉन्स केवल बाहरी क्षेत्र से अंदर की ओर नहीं आए थे, बल्कि आंतरिक रेडिएशन बेल्ट में ही तरंगों की मदद से उनकी ऊर्जा बढ़ी थी। यानी जिस क्षेत्र को अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा रहा था, वहीं कणों के अत्यधिक ऊर्जावान होने की प्रक्रिया देखी गई। इसका असर भी कुछ समय तक बना रहा। अरासे उपग्रह ने अक्टूबर 2024 तक इन अत्यधिक ऊर्जावान इलेक्ट्रॉन्स के स्तर में गिरावट दर्ज की। इसी दौरान एक अन्य सौर तूफान ने उस क्षेत्र को प्रभावित किया।

सैटेलाइट और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए कितना बड़ा खतरा?

ये इलेक्ट्रॉन्स प्रकाश की गति के करीब पहुंचने वाली रफ्तार से यात्रा कर सकते हैं। उनकी अत्यधिक ऊर्जा उन्हें उपग्रहों की सुरक्षा परतों को भेदने में सक्षम बनाती है। इससे संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नुकसान पहुंच सकता है और अंतरिक्ष यानों की कार्यक्षमता तथा जीवनकाल प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, अंतरिक्ष में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भी ऐसे कण रेडिएशन के संपर्क का जोखिम बढ़ा सकते हैं। यही वजह है कि अंतरिक्ष एजेंसियों के लिए सौर तूफानों और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में होने वाले बदलावों पर नजर रखना बेहद जरूरी है। यह खोज केवल एक असामान्य अंतरिक्ष घटना को समझने तक सीमित नहीं है। इससे वैज्ञानिकों को Space Weather Research बेहतर बनाने और भविष्य में उपग्रहों, अंतरिक्ष यानों तथा अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रेडिएशन जोखिम का आकलन करने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष

मई 2024 के सौर तूफान के दौरान दर्ज हुई यह घटना बताती है कि पृथ्वी का प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र भी चरम अंतरिक्ष परिस्थितियों में अप्रत्याशित बदलावों से अछूता नहीं है। Earth's Radiation Barrier Breached होने और Killer Electrons में 5,000 गुना से अधिक वृद्धि का यह अध्ययन वैज्ञानिकों को Van Allen Radiation Belts की कार्यप्रणाली पर दोबारा विचार करने के लिए प्रेरित करता है। आने वाले समय में ऐसी घटनाओं की बेहतर निगरानी अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों और मानव अभियानों की सुरक्षा के लिए अहम साबित हो सकती है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

पृथ्वी की रेडिएशन बैरियर क्या है?

पृथ्वी के चारों ओर मौजूद Van Allen Radiation Belts को रेडिएशन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संरचना माना जाता है। इनमें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में फंसे ऊर्जावान आवेशित कण मौजूद रहते हैं।

उच्च ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन्स में 5,000 गुना वृद्धि क्यों हुई?

मई 2024 के शक्तिशाली सौर तूफान ने पृथ्वी के आसपास प्लाज्मा की परिस्थितियों को बदल दिया। इससे Chorus Waves सक्रिय हुईं और उन्होंने इलेक्ट्रॉन्स को अत्यधिक ऊर्जा प्रदान की।

वैन एलन रेडिएशन बेल्ट क्या हैं?

ये पृथ्वी के चारों ओर मौजूद दो डोनट के आकार के क्षेत्र हैं, जिनमें चुंबकीय क्षेत्र के कारण आवेशित कण फंसे रहते हैं। इनमें आंतरिक बेल्ट में प्रोटॉन और बाहरी बेल्ट में मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉन्स पाए जाते हैं।

मई 2024 के सौर तूफान ने पृथ्वी की रेडिएशन बैरियर को कैसे प्रभावित किया?

G5 श्रेणी के इस भू-चुंबकीय तूफान ने प्लाज्मास्फीयर में ठंडे प्लाज्मा की मात्रा कम कर दी। इससे Chorus Waves के जरिए आंतरिक रेडिएशन बेल्ट में इलेक्ट्रॉन्स की ऊर्जा बढ़ने की परिस्थितियां बनीं।

उच्च ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन्स सैटेलाइट और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खतरनाक क्यों हैं?

ये इलेक्ट्रॉन्स उपग्रहों की सुरक्षा परतों को भेदकर उनके संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। साथ ही, अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रेडिएशन के संपर्क का जोखिम भी बढ़ा सकते हैं।

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