श्रीलंका में 5 घंटे तक क्यों गुल रही बिजली? रूफटॉप सोलर बना सवालों के घेरे में, भारत के लिए भी खतरे की घंटी!
श्रीलंका में 17 अक्टूबर को बिजली ग्रिड फेल होने से 2.3 करोड़ लोग पांच घंटे से ज्यादा अंधेरे में रहे। शुरुआती रिपोर्ट में रूफटॉप सोलर की भूमिका की आशंका जताई गई है। भारत के तेजी से बढ़ते सौर ऊर्जा नेटवर्क के लिए भी यह अहम चेतावनी है।
सौर ऊर्जा को भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा माना जाता है, लेकिन क्या इसकी तेजी से बढ़ती हिस्सेदारी बिजली ग्रिड के लिए चुनौती बन सकती है? श्रीलंका में हालिया Sri Lanka Power Blackout ने यही सवाल खड़ा कर दिया है। 17 अक्टूबर को देश का राष्ट्रीय बिजली ग्रिड ठप हो गया और करीब 2.3 करोड़ लोगों को पांच घंटे से ज्यादा समय तक बिजली नहीं मिली। बिजली बहाल करने की कोशिशों के बीच श्रीलंका के नेशनल सिस्टम ऑपरेटर (NSO) ने रूफटॉप सोलर संचालकों को अगली सूचना तक अपने सिस्टम बंद करने का निर्देश दिया। इस घटना ने विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा को बिजली ग्रिड से जोड़ने और उसकी स्थिरता बनाए रखने की चुनौतियों को फिर चर्चा में ला दिया है। भारत के लिए भी यह चिंता का विषय है, क्योंकि देश में रूफटॉप सोलर की स्थापित क्षमता 33.41 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है।
श्रीलंका में आखिर कैसे ठप हुआ बिजली ग्रिड?

श्रीलंका की शुरुआती जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 17 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 43 मिनट 29 सेकंड पर बिजली व्यवस्था में गड़बड़ी शुरू हुई। नेशनल सिस्टम कंट्रोल सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, देश के सबसे बड़े कोयला बिजली संयंत्र लैकविजया पावर प्लांट की यूनिट-1 का उत्पादन महज 450 मिलीसेकंड में 187 मेगावाट से घटकर 5 मेगावाट रह गया। इसके बाद बिजली ग्रिड की आवृत्ति (फ्रीक्वेंसी) तेजी से गिरने लगी। यह आवृत्ति बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन का संकेत देती है। रिपोर्ट के अनुसार, महज दो सेकंड में यह 49.906 हर्ट्ज से गिरकर 48.75 हर्ट्ज पर पहुंच गई। शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया है कि इस गड़बड़ी के शुरुआती चरण में नियंत्रित किए जा सकने वाले पारंपरिक बिजली संयंत्र बंद नहीं हुए थे। इसके बजाय, ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर जैसे मौसम पर निर्भर ऊर्जा स्रोतों के अचानक डिस्कनेक्ट होने की आशंका जताई गई है। बिजली की आपूर्ति घटने से ग्रिड की आवृत्ति और नीचे गई। इसके बाद अंडर फ्रीक्वेंसी लोड शेडिंग (UFLS) व्यवस्था के सभी पांच चरण सक्रिय किए गए। इस प्रणाली का उद्देश्य मांग घटाकर ग्रिड को स्थिर करना होता है। लेकिन ये सुरक्षा उपाय भी पूरी व्यवस्था को ढहने से नहीं रोक सके।सुबह 11:43:59 बजे तक लगभग सभी नियंत्रित बिजली उत्पादन इकाइयां कम आवृत्ति या कम वोल्टेज के कारण बंद हो गईं। इसके बाद बिजली बहाली का काम शुरू हुआ और शाम 4:58 बजे तक पूरा राष्ट्रीय ट्रांसमिशन सिस्टम बहाल कर दिया गया। यानी ब्लैकआउट करीब पांच घंटे 15 मिनट तक चला।
Rooftop Solar से बिजली ग्रिड को क्या खतरा हो सकता है?
रूफटॉप सोलर पैनल सीधे बिजली ग्रिड से नहीं जुड़ते। इनके साथ इन्वर्टर लगाए जाते हैं, जो सोलर पैनल से मिलने वाली डायरेक्ट करंट (DC) बिजली को अल्टरनेटिंग करंट (AC) में बदलते हैं। यही बिजली घरों और ग्रिड में इस्तेमाल होती है। इन इन्वर्टर में सुरक्षा प्रणाली होती है। यदि ग्रिड का वोल्टेज या फ्रीक्वेंसी तय सीमा से बाहर जाती है, तो इन्वर्टर खुद को ग्रिड से अलग कर सकते हैं। समस्या तब पैदा होती है, जब बड़ी संख्या में सोलर सिस्टम एक साथ डिस्कनेक्ट हो जाएं। ऐसी स्थिति में अचानक बिजली उत्पादन घट सकता है। इससे बाकी बिजली संयंत्रों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और ग्रिड की स्थिरता बिगड़ सकती है।श्रीलंका में फरवरी 2025 में हुए ब्लैकआउट की जांच में भी रूफटॉप सोलर इन्वर्टर की भूमिका सामने आई थी। उस समय पनादुरा ग्रिड सबस्टेशन में बसबार की खराबी से स्थानीय वोल्टेज गिरा था। इसके बाद बड़ी संख्या में सोलर इन्वर्टर ग्रिड से अलग हो गए थे। जांच में कुछ इन्वर्टर की सुरक्षा सेटिंग जरूरत से ज्यादा संवेदनशील पाई गई थीं। कुछ इन्वर्टर 49.5 हर्ट्ज जैसी आवृत्ति या सामान्य वोल्टेज के 94 प्रतिशत तक गिरने पर भी डिस्कनेक्ट हो सकते थे। इससे बिजली उत्पादन अचानक घटा और पारंपरिक संयंत्रों पर दबाव बढ़ गया।
India Rooftop Solar Energy के सामने क्या हैं चुनौतियां?
भारत में India Rooftop Solar Energy का विस्तार तेजी से हो रहा है। देश में रूफटॉप सोलर की स्थापित क्षमता 33.41 गीगावॉट है। ऐसे में श्रीलंका का अनुभव भारत के लिए महत्वपूर्ण है। स्मार्ट ग्रिड समाधान देने वाली कंपनी स्मार्ट ग्रिड एनालिटिक्स के संस्थापक और सीईओ कुमार एम के मुताबिक, फरवरी 2025 के ब्लैकआउट के बाद श्रीलंका की बिजली कंपनियों ने इन्वर्टर के लिए लो-वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी राइड-थ्रू सेटिंग अनिवार्य की थी। इससे इन्वर्टर कुछ समय तक वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी में गड़बड़ी होने के बावजूद ग्रिड से जुड़े रह सकते हैं। हालांकि, उनके अनुमान के अनुसार, स्थापित रूफटॉप सोलर क्षमता के 50 प्रतिशत से भी कम हिस्से में ये सेटिंग अपनाई गई है। पुराने इन्वर्टर, अपडेट न हो पाने वाले फर्मवेयर और कमजोर निगरानी इसकी प्रमुख वजहें हैं।भारत भी बड़े स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ने की चुनौतियों का सामना कर चुका है। केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) के रिकॉर्ड के मुताबिक, जनवरी 2022 से जून 2025 के बीच नवीकरणीय ऊर्जा परिसरों में 68 गड़बड़ियां दर्ज की गईं, जिनमें 1 से 7 गीगावॉट तक बिजली उत्पादन का नुकसान हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत को हर राज्य में यह आकलन करना होगा कि जब बिजली की मांग सबसे कम और सौर उत्पादन सबसे अधिक हो, तब स्थानीय ग्रिड कितनी ऊर्जा संभाल सकता है। इसके लिए बिजली वितरण फीडर की क्षमता, ग्रिड की आवृत्ति में बदलाव और अचानक बिजली उत्पादन घटने की स्थिति का अध्ययन जरूरी है।
भारत के लिए क्या हैं श्रीलंका के ब्लैकआउट से सबक?
श्रीलंका की घटना बताती है कि केवल सौर ऊर्जा की क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उसके साथ मजबूत ग्रिड प्रबंधन, बेहतर इन्वर्टर तकनीक और निगरानी व्यवस्था भी जरूरी है।विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि भारत में अंडर फ्रीक्वेंसी लोड शेडिंग व्यवस्था को उन फीडरों के हिसाब से भी तैयार करना होगा, जो सौर उत्पादन के दौरान बिजली की खपत करने के बजाय ग्रिड को बिजली भेजते हैं। ऐसे फीडरों को डिस्कनेक्ट करने से मांग घटने के बजाय बिजली उत्पादन भी कम हो सकता है। इसके अलावा, ब्लैकआउट के बाद ग्रिड को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया यानी ब्लैक स्टार्ट में भी रूफटॉप सोलर सिस्टम के दोबारा जुड़ने के तरीके को ध्यान में रखना होगा। बैटरी स्टोरेज और बेहतर ग्रिड प्रबंधन भी सौर ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी को संभालने में मददगार हो सकते हैं।
निष्कर्ष
Sri Lanka Power Blackout ने साफ कर दिया है कि नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार करते समय बिजली ग्रिड की स्थिरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत में India Rooftop Solar Energy तेजी से बढ़ रही है, इसलिए मजबूत इन्वर्टर मानक, बेहतर निगरानी, स्थानीय ग्रिड की क्षमता का आकलन और प्रभावी बैकअप व्यवस्था जरूरी होगी। स्वच्छ ऊर्जा का लक्ष्य तभी सफल होगा, जब बिजली उत्पादन के साथ उसकी निर्बाध आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा सके।
FAQ (Frequently Asked Questions):
श्रीलंका में हाल ही में बिजली गुल होने की घटना क्यों हुई?
17 अक्टूबर को श्रीलंका के बिजली ग्रिड में अचानक गड़बड़ी हुई। शुरुआती जांच रिपोर्ट में रूफटॉप सोलर जैसे मौसम पर निर्भर ऊर्जा स्रोतों के अचानक डिस्कनेक्ट होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, उनकी भूमिका की पूरी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
श्रीलंका के ब्लैकआउट से भारत को क्या सबक मिल सकता है?
Sri Lanka Power Blackout से भारत को सीख मिलती है कि सौर ऊर्जा का विस्तार करते समय ग्रिड की स्थिरता, इन्वर्टर की सुरक्षा सेटिंग और बिजली बहाली की व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी है।
भारत में रूफटॉप सोलर ऊर्जा को बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है?
Rooftop solar energy India में स्वच्छ बिजली उत्पादन बढ़ाने, पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और घरों को अपनी बिजली पैदा करने का विकल्प देने के लिए प्रोत्साहित की जा रही है।
रूफटॉप सोलर सिस्टम से बिजली ग्रिड को कौन-सी चुनौतियां हो सकती हैं?
यदि बड़ी संख्या में सोलर इन्वर्टर वोल्टेज या फ्रीक्वेंसी में बदलाव के कारण एक साथ डिस्कनेक्ट हो जाएं, तो बिजली उत्पादन अचानक घट सकता है। इससे electricity grid stability प्रभावित हो सकती है।
सौर ऊर्जा के बेहतर उपयोग के लिए बैटरी स्टोरेज और ग्रिड प्रबंधन क्यों जरूरी हैं?
बैटरी स्टोरेज अतिरिक्त सौर बिजली को जरूरत के समय इस्तेमाल करने में मदद करता है। वहीं, बेहतर solar power grid management बिजली की मांग और आपूर्ति में संतुलन बनाए रखने तथा ग्रिड को स्थिर रखने में मदद करता है।