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चांद पर पहुंचने निकला NASA का मिशन, पीछे छोड़ गया आसमान में 5,000 KM लंबा 'छेद'! GPS पर भी पड़ा असर

NASA के Artemis II मिशन की लॉन्चिंग और रॉकेट के बाद के ऑपरेशन्स ने पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में तीन बार बड़ी गड़बड़ी पैदा की। इसका असर करीब 5,000 किलोमीटर तक फैला और GPS सिग्नल की सटीकता प्रभावित होने की आशंका सामने आई। वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक ही मिशन के दौरान इस तरह की तीन घटनाएं पहली बार दर्ज की गईं।

चांद पर पहुंचने निकला NASA का मिशन, पीछे छोड़ गया आसमान में 5,000 KM लंबा 'छेद'! GPS पर भी पड़ा असर

चांद की ओर इंसानों को लेकर उड़ान भरने वाला एक रॉकेट पृथ्वी के आसमान में भी हलचल पैदा कर सकता है? NASA के Artemis II मिशन को लेकर सामने आई नई रिसर्च कुछ ऐसा ही संकेत देती है। अध्ययन के अनुसार, इस मिशन के दौरान रॉकेट की लॉन्चिंग और बाद में किए गए इंजन बर्न ने पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में अस्थायी गड़बड़ी पैदा की। यह बदलाव इतना बड़ा था कि इसका विस्तार उत्तरी अमेरिका के बड़े हिस्से तक देखा गया। वैज्ञानिकों ने इसे Artemis II Mission Atmospheric Hole और आयनमंडल में हुई असामान्य हलचल के संदर्भ में समझाया है।

Study shows Artemis II launch created temporary atmospheric disruptions with potential GPS effects.
Study shows Artemis II launch created temporary atmospheric disruptions with potential GPS effects.

NASA का Artemis II मिशन 1 अप्रैल 2026 को अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च हुआ था। इसमें चार अंतरिक्ष यात्री - रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन सवार थे। यह पांच दशक से अधिक समय बाद चांद की ओर भेजा गया पहला मानवयुक्त मिशन था। ताइवान की नेशनल चेंग कुंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने Geophysical Research में प्रकाशित अध्ययन में बताया कि इस मिशन के दौरान आयनमंडल में तीन अलग-अलग गड़बड़ियां दर्ज की गईं। पहली गड़बड़ी रॉकेट के उड़ान भरने के दौरान हुई। इसके बाद 2 अप्रैल को लगभग दो घंटे बाद किए गए 'Apogee Raise Burn' के दौरान दूसरी और करीब 25 घंटे बाद 'Trans-Lunar Injection Burn' के दौरान तीसरी गड़बड़ी दर्ज की गई। शोधकर्ताओं के मुताबिक, रॉकेट से पैदा हुई ध्वनि और गुरुत्वाकर्षण तरंगों ने ऊपरी वायुमंडल को प्रभावित किया। दूसरे ऑपरेशन के दौरान पैदा हुई गड़बड़ी विशेष रूप से बड़ी थी और उत्तरी अमेरिका में लगभग 50 डिग्री देशांतर तक फैली हुई थी।

Artemis II Ionospheric Disturbance: 5,000 KM तक कैसे फैली हलचल?

इस अध्ययन की सबसे दिलचस्प बात इन गड़बड़ियों का विशाल आकार है। शोधकर्ताओं ने बताया कि आयनमंडल में पैदा हुए ये बदलाव पूर्व से पश्चिम दिशा में अमेरिकी महाद्वीप के बड़े हिस्से तक फैले। इनका विस्तार करीब 5,000 किलोमीटर (3,100 मील) तक था। इन्हें आसमान में बनने वाली विशाल हवाई जहाज की लकीरों यानी कॉन्ट्रेल्स जैसा बताया गया, हालांकि ये सामान्य बादल या आसमान में दिखाई देने वाले छेद नहीं थे। दरअसल, यह पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में मौजूद आयनमंडल के भीतर इलेक्ट्रॉन्स और आयनों के वितरण में आया अस्थायी बदलाव था। शोधकर्ताओं के अनुसार, एक ही अंतरिक्ष मिशन के लगातार तीन कक्षीय ऑपरेशन्स के दौरान एक ही क्षेत्र में इस तरह की तीन आयनमंडलीय गड़बड़ियां दर्ज होना पहली बार सामने आया है। तीसरे ऑपरेशन के दौरान भी ऐसी ही हलचल हुई, हालांकि उसका प्रभाव पहले की तुलना में कमजोर था।

आयनमंडल में छेद से GPS सिग्नल पर क्या असर पड़ सकता है?

पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल का एक हिस्सा आयनमंडल कहलाता है। यहां सूर्य की ऊर्जा के कारण गैस के कण आयन और इलेक्ट्रॉन्स में बदल जाते हैं। इसी क्षेत्र से होकर GPS सिग्नल भी गुजरते हैं। जब आयनमंडल में इलेक्ट्रॉन्स की संख्या और उनका वितरण बदलता है, तो GPS सिग्नल की गति और उनके रास्ते में बदलाव आ सकता है। इससे किसी स्थान की स्थिति तय करने में सटीकता प्रभावित हो सकती है। अध्ययन के सह-लेखक चार्ल्स लिन ने Space.com को बताया कि इस तरह की गड़बड़ी का असर केवल सामान्य नेविगेशन तक सीमित नहीं रह सकता। सेल्फ-ड्राइविंग कारों और ड्रोन की पोजिशनिंग पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, यहां एक अहम बात समझना जरूरी है। शोधकर्ताओं ने आयनमंडल में ऐसे बदलाव दर्ज किए हैं, जो GPS की सटीकता को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि Artemis II मिशन के कारण बड़े स्तर पर GPS सेवा ठप हो गई थी। यानी GPS सिग्नल में संभावित गड़बड़ी और पूरी सेवा बंद होने के बीच अंतर है।

चांद की यात्रा में Artemis II ने कौन-सा रिकॉर्ड बनाया?

Artemis II मिशन का मकसद केवल अंतरिक्ष यात्रियों को चांद के करीब पहुंचाना नहीं था। यह NASA के Artemis Programme के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण मिशन भी था। इसके तहत Space Launch System (SLS) रॉकेट और Orion अंतरिक्ष यान की क्षमताओं का परीक्षण किया गया। NASA के मुताबिक, इस मिशन के दौरान चारों अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी से इंसानों द्वारा तय की गई अब तक की सबसे अधिक दूरी का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने 1970 में Apollo 13 मिशन के चालक दल के 2,48,655 मील के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। चालक दल ने चांद के उस हिस्से की तस्वीरें भी कैद कीं, जो पृथ्वी से सीधे दिखाई नहीं देता। यह मिशन भविष्य में चांद पर मानव की लैंडिंग और वहां लंबे समय तक मौजूदगी की तैयारी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। NASA का लक्ष्य 2028 तक चांद पर मानव लैंडिंग को सक्षम बनाना है। इसके साथ ही भविष्य में मंगल ग्रह तक मानव मिशन भेजने की दिशा में भी यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

निष्कर्ष

NASA का Artemis II मिशन चांद की यात्रा और अंतरिक्ष अन्वेषण के लिहाज से ऐतिहासिक रहा, लेकिन इसके साथ सामने आई आयनमंडलीय गड़बड़ियों ने अंतरिक्ष अभियानों के एक दूसरे पहलू पर भी ध्यान खींचा है। Artemis II Mission Atmospheric Hole और Artemis II Ionospheric Disturbance से जुड़ी यह खोज बताती है कि रॉकेट लॉन्चिंग का असर पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल तक पहुंच सकता है। भविष्य में ऐसे प्रभावों को समझना GPS नेविगेशन, ड्रोन, स्वचालित वाहनों और अंतरिक्ष अभियानों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

आर्टेमिस II मिशन ने पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल को कैसे प्रभावित किया?

रॉकेट की लॉन्चिंग और बाद में किए गए दो इंजन बर्न से पैदा हुई ध्वनि तथा गुरुत्वाकर्षण तरंगों ने आयनमंडल में तीन अलग-अलग गड़बड़ियां पैदा कीं। इनमें से एक का विस्तार करीब 5,000 किलोमीटर तक देखा गया।

आयनमंडल में अस्थायी छेद (Ionospheric Hole) क्या होता है?

यह आयनमंडल में इलेक्ट्रॉन्स और आयनों के वितरण में आया अस्थायी बदलाव होता है। इसे आसमान में किसी वास्तविक छेद की तरह नहीं समझना चाहिए। इस बदलाव से रेडियो और GPS सिग्नल प्रभावित हो सकते हैं।

NASA का आर्टेमिस II मिशन कब लॉन्च हुआ?

Artemis II मिशन 1 अप्रैल 2026 को अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च हुआ था। इसमें चार अंतरिक्ष यात्री सवार थे।

रॉकेट लॉन्च से आयनमंडल में गड़बड़ी कैसे पैदा होती है?

रॉकेट के उड़ान भरने और इंजन बर्न के दौरान पैदा होने वाली ध्वनि तथा गुरुत्वाकर्षण तरंगें ऊपरी वायुमंडल तक पहुंच सकती हैं। इससे आयनमंडल में कणों का वितरण बदल सकता है।

आयनमंडल में बदलाव GPS सिग्नल को कैसे प्रभावित कर सकते हैं?

GPS सिग्नल आयनमंडल से होकर गुजरते हैं। यहां इलेक्ट्रॉन्स के वितरण में बदलाव होने पर सिग्नल की गति प्रभावित हो सकती है, जिससे लोकेशन की सटीकता कम हो सकती है। हालांकि, इस अध्ययन में व्यापक GPS सेवा बाधित होने की पुष्टि नहीं की गई है।

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