NSQ Drugs Rules 1945 : घटिया दवा मिलने पर तुरंत सस्पेंड होगा कंपनी का लाइसेंस, सरकार क्यों बदल रही है Drugs Rules?
केंद्र सरकार ने Drugs Rules, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत पांच गंभीर गुणवत्ता मानकों पर दवा NSQ पाए जाने पर मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस तुरंत सस्पेंड हो सकेगा। लाइसेंस तभी बहाल होगा, जब कंपनी कमी दूर करेगी और सुधारों का सत्यापन होगा।
केंद्र सरकार ने देश में दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने Drugs Rules, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत अगर किसी दवा के सैंपल में तय गुणवत्ता मानकों की गंभीर कमी मिलती है, तो उसका मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस तुरंत सस्पेंड किया जा सकेगा। अभी लाइसेंस निलंबित या रद्द करने से पहले कारण बताओ नोटिस समेत तय प्रक्रिया अपनाई जाती है। इससे दवा को घटिया घोषित किए जाने और कार्रवाई शुरू होने के बीच समय लग सकता है। नए प्रस्ताव का मकसद इस देरी को कम करना और ऐसी दवाओं का निर्माण व वितरण रोकना है।

पांच गुणवत्ता मानकों पर फेल होने पर तुरंत कार्रवाई का प्रस्ताव
प्रस्ताव के मुताबिक, सरकारी विश्लेषक (Government Analyst) की रिपोर्ट में किसी दवा को पांच महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों पर Not of Standard Quality (NSQ) घोषित किए जाने पर संबंधित दवा का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस तुरंत सस्पेंड किया जा सकेगा। ये मानक हैं- अस्से (Assay), डिसॉल्यूशन (Dissolution), रिलेटेड सब्सटेंसेज (Related Substances), इम्प्योरिटीज (Impurities) और स्टेरिलिटी (Sterility)।इन मानकों का संबंध दवा की गुणवत्ता और उसके सुरक्षित इस्तेमाल से है। अस्से टेस्ट से पता चलता है कि दवा में सक्रिय तत्व की मात्रा निर्धारित मानक के अनुसार है या नहीं। डिसॉल्यूशन टेस्ट जांचता है कि दवा शरीर में कितनी तेजी और किस तरह घुलती है। रिलेटेड सब्सटेंसेज और इम्प्योरिटीज की जांच से दवा में मौजूद दूसरे रासायनिक पदार्थों या अशुद्धियों का पता चलता है। वहीं, स्टेरिलिटी टेस्ट यह सुनिश्चित करता है कि जिन दवाओं का संक्रमण-मुक्त होना जरूरी है, उनमें जीवित सूक्ष्मजीव मौजूद न हों।
प्रस्ताव के तहत केंद्र की सेंट्रल लाइसेंसिंग अप्रूविंग अथॉरिटी या संबंधित राज्य की स्टेट लाइसेंसिंग अथॉरिटी सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई कर सकेगी। ड्राफ्ट में Drugs Rules के नियम 85 और 122O में बदलाव प्रस्तावित हैं। नियम 85 के तहत इन पांच महत्वपूर्ण मानकों पर NSQ पाए जाने पर तत्काल निलंबन का प्रावधान है, जबकि नियम 122O में सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट में दवा के NSQ घोषित होने पर लाइसेंस सस्पेंड करने का प्रस्ताव है।
लाइसेंस तभी बहाल होगा, जब कंपनी कमी दूर करेगी
प्रस्ताव में सिर्फ लाइसेंस सस्पेंड करने की बात नहीं है, बल्कि उसे दोबारा बहाल करने के लिए भी शर्तें रखी गई हैं। इसके तहत दवा निर्माता कंपनी को सबसे पहले Root Cause Analysis करना होगा। इसका मतलब है कि दवा गुणवत्ता जांच में फेल क्यों हुई, इसकी असली वजह का पता लगाना।इसके बाद कंपनी को Corrective and Preventive Action (CAPA) लागू करना होगा। इसमें मौजूदा समस्या को ठीक करने के साथ ऐसे उपाय करना शामिल है, ताकि भविष्य में वही गलती दोबारा न हो। उदाहरण के लिए, अगर दवा की गुणवत्ता में कमी उत्पादन प्रक्रिया, कच्चे माल या मशीनों की गड़बड़ी के कारण आई है, तो कंपनी को उस कमी को दूर करने और दोबारा ऐसी स्थिति न बनने देने की व्यवस्था करनी होगी।
लाइसेंसिंग अथॉरिटी कंपनी की ओर से किए गए सुधारों की जांच करेगी। जब तक संबंधित अधिकारी इन सुधारों से संतुष्ट नहीं होते और CAPA के लागू होने का सत्यापन नहीं कर लेते, तब तक लाइसेंस सस्पेंड रहेगा। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय लाइसेंसिंग अथॉरिटी कंपनी से जांच रिपोर्ट, Root Cause Analysis, CAPA और राज्य स्तर पर की गई अंतिम कार्रवाई का विवरण भी मांग सकेगी।
दवा की जांच रिपोर्ट अब DCGI और निर्माता को भी भेजी जाएगी
सरकार ने दवाओं की गुणवत्ता जांच से जुड़ी रिपोर्ट साझा करने की व्यवस्था में भी बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए Drugs Rules, 1945 के Form 13 में संशोधन किया जाएगा। Form 13 सरकारी विश्लेषक की टेस्ट रिपोर्ट से संबंधित है।नए प्रस्ताव के तहत किसी दवा की जांच रिपोर्ट की कॉपी ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI), संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की लाइसेंसिंग अथॉरिटी, दवा निर्माता और उसके मार्केटर को भी भेजी जाएगी। संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की अथॉरिटी वह होगी, जिसके अधिकार क्षेत्र में दवा बनाने वाली फैक्ट्री स्थित है।
इस व्यवस्था का मकसद यह है कि दवा के NSQ पाए जाने की जानकारी सभी संबंधित पक्षों तक समय पर पहुंचे। इससे केंद्र और राज्य की नियामक एजेंसियां मिलकर कार्रवाई कर सकेंगी और दवा बनाने से लेकर बाजार में बेचने तक की प्रक्रिया में जवाबदेही तय करना आसान होगा।
यह प्रस्ताव 20 दिसंबर 2024 को हुई ड्रग्स कंसल्टेटिव कमिटी (DCC) की 65वीं बैठक में हुई चर्चा और 24 अप्रैल 2025 को हुई ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) की 92वीं बैठक की सिफारिशों के बाद तैयार किया गया है।
अभी कानून नहीं बना, 30 दिन में मांगे गए सुझाव
स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन बदलावों को अभी अंतिम नियम के रूप में लागू नहीं किया है। 28 अक्टूबर 2026 को जारी G.S.R. 956(E) के जरिए ड्राफ्ट नियम सार्वजनिक किए गए हैं। इन्हें 4 नवंबर को सार्वजनिक किया गया। मंत्रालय ने आम लोगों और संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।ड्राफ्ट के मुताबिक, गजट की कॉपी सार्वजनिक होने की तारीख से 30 दिन के भीतर सुझाव और आपत्तियां भेजी जा सकती हैं। इन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी (ड्रग्स), U-6, वर्क हॉल-C विंग, पहली मंजिल, कर्तव्य भवन-1, नई दिल्ली-110001 के पते पर भेजा जा सकता है। इसके अलावा drugsdiv-mohfw@gov.in पर ईमेल भी किया जा सकता है।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों से बाजार में दवाएं पहुंचने के बाद उनकी गुणवत्ता की निगरानी मजबूत होगी। साथ ही, घटिया दवाओं के मामलों में तेजी से कार्रवाई, दवा कंपनियों की जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, अंतिम नियम अधिसूचित होने के बाद ही यह व्यवस्था लागू होगी।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Not of Standard Quality (NSQ) दवाएं क्या होती हैं?
NSQ यानी Not of Standard Quality ऐसी दवाएं होती हैं, जो निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। इनमें सक्रिय तत्व की मात्रा, घुलने की क्षमता, अशुद्धियों या स्टेरिलिटी से जुड़ी कमी हो सकती है।
केंद्र सरकार ने दवा कंपनियों के लाइसेंस को लेकर क्या प्रस्ताव दिया है?
सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट में दवा के गंभीर गुणवत्ता मानकों पर NSQ पाए जाने पर संबंधित दवा का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस तुरंत सस्पेंड किया जा सकेगा।
किन गुणवत्ता मानकों पर खरी न उतरने वाली दवाओं का लाइसेंस तुरंत निलंबित हो सकता है?
प्रस्ताव में पांच मानक शामिल हैं- Assay, Dissolution, Related Substances, Impurities और Sterility।
Drugs Rules 1945 में क्या बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं?
नियम 85 और 122O में तत्काल लाइसेंस निलंबन और सुधारों के सत्यापन के बाद ही उसे बहाल करने का प्रावधान प्रस्तावित है। Form 13 में भी बदलाव होगा, ताकि जांच रिपोर्ट संबंधित नियामक अधिकारियों, निर्माता और मार्केटर तक पहुंचे।
क्या दवा का लाइसेंस निलंबित होने के बाद दोबारा बहाल हो सकता है?
हां। निर्माता को Root Cause Analysis करके गुणवत्ता में कमी की वजह पहचाननी होगी और CAPA लागू करना होगा। संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटी के सत्यापन और संतुष्टि के बाद ही लाइसेंस बहाल हो सकेगा।
CDSCO और DCGI की दवाओं की गुणवत्ता जांच में क्या भूमिका है?
CDSCO देश में दवाओं के नियमन और गुणवत्ता मानकों से जुड़े कामों में केंद्रीय भूमिका निभाता है। DCGI इसके प्रमुख नियामक पदों में से एक है। राज्य की दवा नियंत्रण एजेंसियां भी अपने अधिकार क्षेत्र में दवाओं की जांच और लाइसेंस से जुड़ी कार्रवाई करती हैं।
Root Cause Analysis और CAPA क्या होते हैं?
Root Cause Analysis का मतलब गुणवत्ता में कमी आने की असली वजह का पता लगाना है। CAPA यानी Corrective and Preventive Action में मौजूदा समस्या को ठीक करना और भविष्य में उसे दोबारा होने से रोकने के उपाय करना शामिल है।