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AI निवेश की चिंता से अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट, Nasdaq 100 मार्च 2020 के बाद सबसे ज्यादा टूटा !

AI कंपनियों के भारी निवेश और उससे होने वाली कमाई पर सवालों के बीच 5 नवंबर को अमेरिकी शेयर बाजार में बड़ी बिकवाली हुई। Nasdaq 100 में 6.4%, Nasdaq Composite में 5.5% और S&P 500 में 4.4% की गिरावट दर्ज की गई।

AI निवेश की चिंता से अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट, Nasdaq 100 मार्च 2020 के बाद सबसे ज्यादा टूटा !

अमेरिकी शेयर बाजार में गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को टेक्नोलॉजी और AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई। Nasdaq 100 में 6.4% की गिरावट आई, जो मार्च 2020 के बाद इस इंडेक्स की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट थी। वहीं, Nasdaq Composite 5.5% और S&P 500 4.4% टूट गया।

इस गिरावट में करीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट वैल्यू खत्म हो गया। इसके पीछे AI पर बढ़ते खर्च से कमाई को लेकर चिंता, चिप कंपनियों के कमजोर बिक्री अनुमान और अमेरिकी चुनाव के बाद डेटा सेंटर निर्माण पर संभावित पाबंदियों की आशंका रही। इस बिकवाली ने दुनिया भर के टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव बढ़ा दिया।

अमेरिकी शेयर बाजार में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

5 नवंबर को Wall Street पर बिकवाली का सबसे ज्यादा दबाव टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में रहा। Nasdaq 100 में 6.4% की गिरावट आई। Reuters के मुताबिक, इस गिरावट से इंडेक्स में शामिल कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू करीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर घट गई।

दूसरी ओर, Nasdaq Composite 5.5% गिरकर 24,315 अंक पर बंद हुआ। S&P 500 में 4.4% की गिरावट आई और यह 7,353.73 अंक पर पहुंच गया। Dow Jones Industrial Average भी 1,833 अंक यानी 3.4% टूटकर 51,523.06 अंक पर बंद हुआ।

इस गिरावट के दौरान Nasdaq Composite अपने 6 अक्टूबर के रिकॉर्ड स्तर से करीब 11.9% नीचे आ गया। जब कोई शेयर बाजार इंडेक्स अपने हालिया उच्च स्तर से 10% या उससे ज्यादा गिरता है, तो इसे करेक्शन (Correction) कहा जाता है।

Associated Press के मुताबिक, S&P 500 की यह अप्रैल 2025 के बाद सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट थी। वहीं, Nasdaq 100 का प्रदर्शन मार्च 2020 के बाद सबसे खराब रहा।

Source - Aaj Tak
Source - Aaj Tak

AI डेटा सेंटर पर बढ़ते खर्च से निवेशकों की चिंता

इस गिरावट की एक बड़ी वजह AI इंडस्ट्री में हो रहे भारी निवेश को लेकर सवाल हैं। पिछले कुछ वर्षों में Alphabet, Meta, Microsoft और Amazon जैसी बड़ी टेक कंपनियों ने AI मॉडल, चिप्स और डेटा सेंटर बनाने पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं।

डेटा सेंटर ऐसे बड़े केंद्र होते हैं, जहां AI और क्लाउड सेवाओं को चलाने के लिए हजारों कंप्यूटर और सर्वर रखे जाते हैं। इन्हें चलाने के लिए बड़ी मात्रा में बिजली, नेटवर्क और दूसरे तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है।

अब निवेशक यह जानना चाहते हैं कि कंपनियां AI पर जितना पैसा खर्च कर रही हैं, उससे उन्हें कितनी और कितनी जल्दी कमाई होगी। अगर कंपनियां भारी निवेश के बावजूद उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं कर पाती हैं, तो उनके शेयरों की मौजूदा कीमतों पर सवाल उठ सकते हैं।

इसके अलावा, डेटा सेंटर बनाने और चलाने के लिए बिजली, जमीन और कर्ज की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। ब्याज दरें ऊंची रहने पर कर्ज लेना महंगा हो सकता है। इससे कंपनियों के खर्च और भविष्य के मुनाफे पर दबाव पड़ने की आशंका है।
इस तरह निवेशकों की चिंता सिर्फ AI की मांग को लेकर नहीं, बल्कि इस तकनीक पर हो रहे भारी खर्च से मिलने वाले रिटर्न को लेकर भी है।

Qualcomm के कमजोर अनुमान से भी चिप कंपनियों पर दबाव

AI निवेश को लेकर चिंता के साथ सेमीकंडक्टर कंपनियों के कारोबार से जुड़ी खबरों ने भी बिकवाली बढ़ाई।

Reuters के मुताबिक, Qualcomm के शेयरों में करीब 9.5% की गिरावट आई। कंपनी ने चौथी तिमाही में स्मार्टफोन चिप की बिक्री को लेकर बाजार की उम्मीदों से कमजोर अनुमान दिया था। स्मार्टफोन की मांग में सुस्ती और Apple से जुड़े कारोबार में कमी भी इसकी वजह रही।

इस खबर ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई कि चिप इंडस्ट्री की ग्रोथ को लेकर बाजार की उम्मीदें बहुत ज्यादा हो सकती हैं। इसका असर दूसरी चिप कंपनियों पर भी पड़ा।
इससे साफ हुआ कि बाजार में गिरावट की वजह सिर्फ AI डेटा सेंटर पर खर्च नहीं था। कमजोर कारोबारी अनुमान और टेक कंपनियों के शेयरों की ऊंची कीमतों को लेकर सवालों ने भी निवेशकों को बिकवाली के लिए प्रेरित किया।

अमेरिकी चुनाव के नतीजों से बढ़ी AI सेक्टर में अनिश्चितता

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई। निवेशकों को आशंका है कि चुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण बदलने से AI इंडस्ट्री और डेटा सेंटर के विस्तार पर ज्यादा निगरानी हो सकती है।

डेटा सेंटर बनाने के लिए बड़ी जमीन, बिजली और पानी की जरूरत होती है। इनके बढ़ते इस्तेमाल को लेकर कई इलाकों में स्थानीय लोगों और नेताओं ने चिंता जताई है। बिजली की मांग बढ़ने और आम उपभोक्ताओं के बिल पर इसके असर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

Reuters और Associated Press की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद निवेशकों को आशंका हुई कि डेटा सेंटर निर्माण पर नए नियम लागू हो सकते हैं या कुछ परियोजनाओं को रोकने की मांग बढ़ सकती है।

हालांकि, अभी पूरे अमेरिका में डेटा सेंटर निर्माण पर रोक लगाने का कोई देशव्यापी फैसला नहीं हुआ है। यह निवेशकों की आशंका है, लागू हो चुकी सरकारी नीति नहीं।
अगर डेटा सेंटर बनाने की रफ्तार धीमी होती है, तो AI चिप्स, सर्वर, बिजली और दूसरे उपकरणों की मांग पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने इस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली की।

Nvidia, AMD और CoreWeave के शेयरों में बड़ी गिरावट

AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का सबसे ज्यादा असर चिप बनाने वाली और डेटा सेंटर से जुड़ी कंपनियों पर पड़ा।

Associated Press और Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक, 5 नवंबर को प्रमुख कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन इस तरह रहा:

  • 1- Nvidia: शेयर में 9.3% की गिरावट आई। इस गिरावट के बाद कंपनी का शेयर 2026 की शुरुआत के स्तर से भी नीचे आ गया।

सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का असर पूरे टेक्नोलॉजी सेक्टर पर पड़ा। Philadelphia Semiconductor Index में भी 12.2% की गिरावट आई। यह इस इंडेक्स की अप्रैल 2025 के बाद सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट थी।

Nvidia और AMD जैसी कंपनियां AI इंडस्ट्री के लिए जरूरी चिप्स बनाती हैं। ऐसे में इनके शेयरों में गिरावट से निवेशकों के बीच यह सवाल बढ़ गया कि क्या AI सेक्टर में कंपनियों की ग्रोथ को लेकर उम्मीदें जरूरत से ज्यादा बढ़ गई थीं।

Wall Street की गिरावट का भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर पड़ा?

अमेरिकी बाजार की गिरावट का असर एशियाई शेयर बाजारों में भी देखने को मिला। 6 नवंबर को दक्षिण कोरिया का Kospi 8% से ज्यादा गिर गया। इस दौरान वहां कारोबार को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। जापान का Nikkei भी करीब 5% नीचे कारोबार कर रहा था।

हालांकि, भारतीय शेयर बाजार ने इस दौरान अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। Reuters की 6 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह 10:33 बजे तक Nifty 50 करीब 0.51% बढ़कर 24,662.80 पर और Sensex 0.76% बढ़कर 79,917.60 पर कारोबार कर रहा था।

भारतीय बाजार को वैश्विक AI ट्रेड में सीमित एक्सपोजर, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला।

रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने 5 नवंबर को भारतीय शेयर बाजार में करीब 14,796 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। फरवरी 2021 के बाद यह उनकी सबसे बड़ी एक दिन की शुद्ध खरीदारी थी।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय बाजार वैश्विक गिरावट से पूरी तरह सुरक्षित है। विदेशी निवेश, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक निवेशकों की धारणा में बदलाव का असर भारतीय शेयरों पर पड़ सकता है।

आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?

आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर बड़ी टेक कंपनियों के AI निवेश, डेटा सेंटर निर्माण की रफ्तार और इन परियोजनाओं से होने वाली कमाई पर रहेगी।

इसके अलावा, Qualcomm जैसी चिप कंपनियों के कारोबारी अनुमान, अमेरिका में AI और डेटा सेंटर से जुड़े संभावित नियमों और ब्याज दरों में बदलाव पर भी बाजार की नजर रहेगी।

अगर कंपनियां अपने AI निवेश से बेहतर कमाई दिखा पाती हैं, तो निवेशकों का भरोसा लौट सकता है। दूसरी ओर, खर्च बढ़ने के बावजूद कमाई में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

निष्कर्ष

5 नवंबर की गिरावट ने दिखाया कि AI इंडस्ट्री में बढ़ता निवेश अब निवेशकों के लिए सिर्फ विकास का अवसर नहीं, बल्कि जोखिम का विषय भी बन रहा है।

फिलहाल बाजार का मुख्य सवाल यह है कि टेक कंपनियां AI पर खर्च किए जा रहे अरबों डॉलर से कितनी कमाई कर पाएंगी। इसके साथ ही चिप कंपनियों की बिक्री, डेटा सेंटर निर्माण और अमेरिकी नीतियों से जुड़े घटनाक्रम भी बाजार की दिशा तय करेंगे।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Wall Street में 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट क्यों आई?

AI कंपनियों के भारी खर्च से कमाई को लेकर चिंता, Qualcomm के कमजोर बिक्री अनुमान और अमेरिकी चुनाव के बाद डेटा सेंटर निर्माण पर संभावित पाबंदियों की आशंका से निवेशकों ने टेक शेयरों में बिकवाली की।

AI investment fears के कारण US stock market में sell-off क्यों हुआ?

निवेशकों को चिंता है कि बड़ी टेक कंपनियों का AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च जल्द पर्याप्त कमाई में नहीं बदल पाएगा। इसके अलावा, डेटा सेंटर निर्माण की रफ्तार धीमी होने की आशंका ने भी दबाव बढ़ाया।

Nasdaq 100 में कितने प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई?

5 नवंबर 2026 को Nasdaq 100 में 6.4% की गिरावट आई। यह मार्च 2020 के बाद इस इंडेक्स की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट थी।

Nvidia और AMD के शेयरों में कितनी गिरावट आई?

5 नवंबर को Nvidia का शेयर 9.3% और AMD का शेयर 17.3% गिरा। CoreWeave में करीब 9.8% की गिरावट दर्ज की गई।

क्या US stock market crash का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है?

हां, अमेरिकी बाजार की गिरावट से विदेशी निवेश और निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है। हालांकि, 6 नवंबर को भारतीय बाजार ने विदेशी निवेशकों की खरीदारी और दूसरे घरेलू कारकों के सहारे मजबूती दिखाई।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षणिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दिए गए आंकड़े, बाजार से जुड़ी जानकारी, कंपनियों के प्रदर्शन और निवेश संबंधी तथ्य उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों और विश्वसनीय रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, ETF, बॉन्ड, सोना या किसी अन्य निवेश में बाजार जोखिम शामिल होता है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखें तथा जरूरत पड़ने पर SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकार या योग्य वित्तीय विशेषज्ञ की सलाह लें। यह लेख किसी भी तरह की निवेश सलाह, खरीदने या बेचने की सिफारिश अथवा भविष्य में रिटर्न की गारंटी नहीं है। बाजार की स्थिति और आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं, इसलिए निवेश से पहले नवीनतम जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।

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