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उमर अब्दुल्ला सरकार पर गहराया Jammu Kashmir Political Crisis! 25 विधायकों का 14 दिन का अल्टीमेटम, क्या गिर जाएगी सत्ता?

नेशनल कॉन्फ्रेंस के 25 असंतुष्ट विधायकों ने उमर अब्दुल्ला सरकार को 14 दिन का अल्टीमेटम दिया है। मंत्रिमंडल में बदलाव की मांग के बीच आगा रुहुल्लाह का इस्तीफा भी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा चुका है।

उमर अब्दुल्ला सरकार पर गहराया Jammu Kashmir Political Crisis! 25 विधायकों का 14 दिन का अल्टीमेटम, क्या गिर जाएगी सत्ता?

जम्मू-कश्मीर में Jammu Kashmir Political Crisis गहराता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार को विपक्ष से ज्यादा चुनौती अपनी ही पार्टी के भीतर से मिल रही है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के 25 असंतुष्ट विधायकों ने कथित तौर पर पार्टी नेतृत्व को 14 दिन का अल्टीमेटम देते हुए सरकार से समर्थन वापस लेने की चेतावनी दी है। उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे राजभवन जाकर अपना समर्थन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

25 विधायकों की बगावत, आखिर क्या हैं मांगें?

J&K CM Omar Abdullah. (Photo: PTI/File)
J&K CM Omar Abdullah. (Photo: PTI/File)

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, असंतुष्ट विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को एक पत्र भेजकर सरकार और संगठन में बड़े बदलाव की मांग की है। इस दस्तावेज पर 16 विधायकों के हस्ताक्षर बताए गए हैं, जबकि अन्य 9 विधायक भी इस गुट के साथ होने का दावा किया गया है। हालांकि, सभी 25 विधायकों के हस्ताक्षर पत्र पर मौजूद नहीं हैं। बागी गुट की प्रमुख मांग है कि मौजूदा मंत्रियों से उनके विभाग वापस लेकर 14 दिनों के भीतर नए सिरे से मंत्रिमंडल का गठन किया जाए। इसके अलावा मुख्यमंत्री के सलाहकार को तत्काल पद से हटाने की मांग भी की गई है। विधायक चाहते हैं कि नए मंत्रियों का चयन पारदर्शी और योग्यता आधारित प्रक्रिया से हो। इसके लिए पूरी विधायक दल की राय लेने की बात भी कही गई है। उनका आरोप है कि मंत्रियों के चयन और महत्वपूर्ण फैसलों में कुछ चुनिंदा लोगों का प्रभाव अधिक है।

Jammu Kashmir Political Crisis: अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली पर भी जोर

असंतुष्ट विधायकों की नाराजगी केवल मंत्रिमंडल तक सीमित नहीं है। उन्होंने पार्टी के वैचारिक एजेंडे और चुनावी घोषणापत्र को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि सरकार अनुच्छेद 370, अनुच्छेद 35A और जम्मू-कश्मीर से जुड़े अन्य संवैधानिक संरक्षणों की बहाली के लिए केंद्र सरकार के सामने मजबूती से अपनी बात रखे। विधायकों का मानना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को चुनाव के दौरान किए गए वादों पर अधिक आक्रामक तरीके से आगे बढ़ना चाहिए। यदि 14 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे राजभवन जाकर सरकार से अपना विधायी समर्थन वापस लेने की चेतावनी दे चुके हैं। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने असंतोष को दूर करने की कोशिश शुरू कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, हाईकमान ने कुछ भरोसेमंद नेताओं को नाराज विधायकों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करने की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि विवाद को बढ़ने से रोका जा सके।

आगा रुहुल्लाह के इस्तीफे से बढ़ी उमर अब्दुल्ला की मुश्किलें

नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर जारी असंतोष के बीच श्रीनगर के पूर्व सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का इस्तीफा भी पार्टी के लिए बड़ा झटका है। रुहुल्लाह ने 3 नवंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्राथमिक सदस्यता और लोकसभा सीट दोनों से इस्तीफा देने का ऐलान किया था। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर जम्मू-कश्मीर के लोगों से किए गए चुनावी वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया। उनकी नाराजगी खास तौर पर अनुच्छेद 370 की बहाली और क्षेत्र के संवैधानिक अधिकारों को लेकर पार्टी के रुख पर थी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनका इस्तीफा 3 नवंबर से प्रभावी मानते हुए स्वीकार कर लिया है। इस तरह पार्टी को एक तरफ विधायकों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ एक प्रमुख नेता के अलग होने से उसकी राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।

क्या गिर सकती है उमर अब्दुल्ला सरकार?

जम्मू-कश्मीर की 90 सदस्यीय विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41 विधायक हैं। ऐसे में यदि 25 विधायक वास्तव में समर्थन वापस लेते हैं, तो पार्टी की अपनी विधायी ताकत काफी घट जाएगी और सरकार की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। हालांकि, केवल इस चेतावनी के आधार पर सरकार गिरने का दावा करना जल्दबाजी होगी। सरकार का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि असंतुष्ट विधायक वास्तव में समर्थन वापस लेते हैं या पार्टी नेतृत्व उनकी मांगों को बातचीत से सुलझा लेता है। गठबंधन के सहयोगियों और अन्य समर्थक विधायकों की भूमिका भी अहम होगी।

निष्कर्ष

जम्मू-कश्मीर का यह Jammu Kashmir Political Crisis उमर अब्दुल्ला सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है। 25 विधायकों का कथित अल्टीमेटम, मंत्रिमंडल में बदलाव की मांग और आगा रुहुल्लाह का इस्तीफा नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने दोहरी मुश्किल खड़ी कर चुके हैं। फिलहाल सरकार गिरने की स्थिति तय नहीं है, लेकिन आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व का फैसला सरकार की स्थिरता और जम्मू-कश्मीर की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक संकट की वजह क्या है?

नेशनल कॉन्फ्रेंस के 25 असंतुष्ट विधायकों की ओर से मंत्रिमंडल में बदलाव की मांग और समर्थन वापस लेने की चेतावनी इस संकट की प्रमुख वजह है।

जम्मू-कश्मीर में मौजूदा सरकार की स्थिति क्या है?

उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार को पार्टी के भीतर असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, सरकार गिरने की आधिकारिक स्थिति नहीं बनी है।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बहुमत के लिए कितनी सीटें जरूरी हैं?

90 सदस्यीय निर्वाचित विधानसभा में सामान्य बहुमत का आंकड़ा 46 है।

जम्मू-कश्मीर में सरकार गिरने की स्थिति कब बन सकती है?

यदि पर्याप्त विधायक समर्थन वापस लेते हैं और सरकार सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाती, तो सरकार गिरने की स्थिति बन सकती है।

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में विपक्ष की क्या भूमिका है?

विपक्ष सरकार के कामकाज, नीतियों और बहुमत पर सवाल उठा सकता है। लेकिन मौजूदा घटनाक्रम में सरकार के लिए तत्काल चुनौती सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर से आई है।

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