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जेल में अब कैदियों की पहचान नहीं बनेगी परेशानी? Hyderabad में Gender Neutral Prison Cell की नई पहल

हैदराबाद की सेंट्रल जेल में ट्रांसजेंडर कैदियों के लिए अलग जेंडर-न्यूट्रल सेल बनाया गया है। NHRC के हस्तक्षेप के बाद उन्हें अपनी लैंगिक पहचान के अनुरूप रहने और कपड़े पहनने की अनुमति भी मिली है।

जेल में अब कैदियों की पहचान नहीं बनेगी परेशानी? Hyderabad में Gender Neutral Prison Cell की नई पहल

जेल की सलाखों के पीछे भी हर व्यक्ति को सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार है। लेकिन अब तक पुरुष और महिला कैदियों के लिए बनी पारंपरिक व्यवस्था में ट्रांसजेंडर बंदियों के रहने की जगह तय करना चुनौतीपूर्ण रहा है। इसी समस्या को दूर करने की दिशा में हैदराबाद की चंचलगुडा सेंट्रल जेल ने नई पहल की है। यह कदम भारत में Transgender Prisoners in India के अधिकारों और सुरक्षित जेल व्यवस्था को लेकर एक अहम चर्चा भी शुरू करता है।

NHRC के हस्तक्षेप के बाद हैदराबाद जेल में बनी नई व्यवस्था

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 5 नवंबर 2026 को बताया कि हैदराबाद सेंट्रल जेल में अलग जेंडर-न्यूट्रल सेल स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग लैंगिक पहचान और अभिव्यक्ति वाले लोगों को सम्मानजनक और उपयुक्त आवास उपलब्ध कराना है। यह पहल 8 अक्टूबर 2026 को जेल के निरीक्षण के बाद सामने आई। NHRC के विशेष मॉनिटर ने जेल का दौरा किया था, जिन्हें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और LGBTQ+ समुदाय के अधिकारों से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। निरीक्षण के दौरान NHRC और केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों को लागू करने पर जोर दिया गया। इसके बाद जेल अधीक्षक ने आयोग को अनुपालन रिपोर्ट सौंपकर बताया कि जेंडर-न्यूट्रल सेल बनाने की सिफारिश लागू कर दी गई है। यहां रहने वाले कैदियों को अपनी लैंगिक पहचान के अनुरूप कपड़े पहनने की अनुमति भी दी गई है।

Transgender Prisoners in India के लिए गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस क्या कहती हैं?

ट्रांसजेंडर कैदियों के अधिकारों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय ने जेल प्रशासन के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य केवल अलग सेल बनाना नहीं, बल्कि कैदियों की निजता, सम्मान और बुनियादी जरूरतों को भी सुरक्षित करना है।प्रमुख दिशा-निर्देश इस प्रकार हैं:

ट्रांसजेंडर कैदियों के लिए पुरुष और महिला वार्ड से अलग सेल या वार्ड बनाया जाए, लेकिन उन्हें पूरी तरह अलग-थलग न रखा जाए।

उनके लिए अलग शौचालय और स्नानघर की व्यवस्था हो।

तलाशी उनकी पसंद के जेंडर के व्यक्ति या प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ से कराई जाए।

कपड़ों की व्यवस्था, मेडिकल जांच और जेल में प्रवेश के दौरान उनकी लैंगिक पहचान का सम्मान किया जाए।

स्ट्रिप सर्च केवल निजी स्थान पर हो और इसका इस्तेमाल किसी की लैंगिक पहचान तय करने के लिए न किया जाए।

स्वास्थ्य सेवाओं में भेदभाव न हो और जरूरत पड़ने पर हार्मोन थेरेपी या जेंडर-अफर्मिंग केयर से वंचित न किया जाए।

इच्छुक कैदियों को उनकी लैंगिक पहचान से संबंधित प्रमाणपत्र प्राप्त करने में सहायता दी जाए।

इन प्रावधानों का मकसद जेल के भीतर ट्रांसजेंडर कैदियों को भेदभाव, अपमान और असुरक्षा से बचाना है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी SOP बनाने का दिया था निर्देश

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर सितंबर 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया था। याचिका में दलील दी गई थी कि दिल्ली पुलिस के पास महिलाओं से जुड़े मामलों के लिए दिशा-निर्देश हैं, लेकिन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। अदालत ने मई 2026 में NHRC की ओर से जारी एडवाइजरी के अनुरूप SOP तैयार करने को कहा था। यह मामला दिखाता है कि ट्रांसजेंडर अधिकारों की सुरक्षा केवल जेलों तक सीमित नहीं है। गिरफ्तारी से लेकर हिरासत और न्यायिक प्रक्रिया तक संवेदनशील व्यवस्था की जरूरत है।

महाराष्ट्र की जेल में भी शुरू हुई अलग बैरक बनाने की तैयारी

हैदराबाद अकेला ऐसा स्थान नहीं है जहां ट्रांसजेंडर कैदियों के लिए अलग व्यवस्था पर काम हो रहा है। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) स्थित हर्सुल सेंट्रल जेल में भी इस दिशा में पहल की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां 16 ट्रांसजेंडर कैदी बंद हैं। उनके लिए अलग बैरक बनाने के वास्ते 12.12 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है। इसके साथ ही जेल परिसर में 100 कैदियों की क्षमता वाली खुली जेल विकसित करने की योजना भी है।

निष्कर्ष

हैदराबाद की जेल में जेंडर-न्यूट्रल सेल की स्थापना Transgender Prisoners in India के अधिकारों और सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। लेकिन असली बदलाव तभी आएगा, जब ऐसी सुविधाएं देश की दूसरी जेलों में भी लागू हों और कैदियों को आवास के साथ स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा निजता का अधिकार भी मिले। जेल की सजा किसी व्यक्ति की लैंगिक पहचान और गरिमा छीनने का आधार नहीं बननी चाहिए।

FAQ (Frequently Asked Questions):

हैदराबाद की जेल में ट्रांसजेंडर कैदियों के लिए क्या नई व्यवस्था की गई है?

हैदराबाद सेंट्रल जेल में ट्रांसजेंडर और विविध लैंगिक पहचान वाले कैदियों के लिए अलग जेंडर-न्यूट्रल सेल बनाया गया है। यहां उन्हें अपनी पहचान के अनुरूप कपड़े पहनने की अनुमति भी है।

जेंडर-न्यूट्रल सेल क्या होता है?

यह ऐसी अलग आवासीय व्यवस्था है, जहां कैदियों को केवल पुरुष या महिला वार्ड में रखने के बजाय उनकी लैंगिक पहचान और जरूरतों को ध्यान में रखकर रहने की सुविधा दी जाती है।

भारत में ट्रांसजेंडर कैदियों के अधिकार क्या हैं?

उन्हें सम्मानजनक आवास, निजता, सुरक्षित तलाशी, स्वास्थ्य सेवाओं और भेदभाव से सुरक्षा का अधिकार है। जेल प्रशासन को उनकी लैंगिक पहचान का सम्मान करना चाहिए।

जेलों में ट्रांसजेंडर कैदियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है?

अलग लेकिन गैर-अलगाववादी आवास, उपयुक्त शौचालय, प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा तलाशी और भेदभाव रहित स्वास्थ्य सेवाओं जैसी व्यवस्थाओं से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

ट्रांसजेंडर कैदियों के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत क्यों है?

पारंपरिक पुरुष और महिला वार्ड में उन्हें रखने से निजता, सुरक्षा और पहचान से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। अलग व्यवस्था इन चुनौतियों को कम करने और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने में मदद करती है।

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