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Russia-Linked AI Videos US Midterm Elections : अमेरिकी चुनाव से पहले रूस से जुड़े AI वीडियो वायरल, डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को क्यों बनाया निशाना?

अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनावों से पहले रूस से जुड़े होने के संदेह वाले AI वीडियो में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार शेरोड ब्राउन और जेम्स टालारिको को निशाना बनाया गया। X ने शुरुआती पोस्ट हटाकर कुछ अकाउंट सस्पेंड किए, लेकिन वीडियो की कॉपी अन्य अकाउंट्स पर मौजूद रही। विशेषज्ञों ने Storm-1516 नेटवर्क की संभावित भूमिका की आशंका जताई, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

Russia-Linked AI Videos US Midterm Elections : अमेरिकी चुनाव से पहले रूस से जुड़े AI वीडियो वायरल, डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को क्यों बनाया निशाना?

Russia-Linked AI Videos US Midterm Elections : अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनावों से पहले रूस से जुड़े माने जा रहे AI वीडियो के जरिए डेमोक्रेटिक पार्टी के दो सीनेट उम्मीदवारों के खिलाफ गलत जानकारी फैलाने का मामला सामने आया है। इन वीडियो में असली लोगों के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल करके ऐसे आरोप दिखाए गए, जिन्हें संबंधित लोगों ने झूठा बताया है। ओहायो में शेरोड ब्राउन और टेक्सास में जेम्स टालारिको को निशाना बनाने वाले इन वीडियो के शुरुआती पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने हटा दिए हैं और उन्हें साझा करने वाले कुछ अकाउंट सस्पेंड किए हैं। हालांकि, वीडियो की कॉपी दूसरे अकाउंट्स पर मौजूद होने की जानकारी सामने आई है। इससे चुनाव के अंतिम दिनों में AI के जरिए फैलने वाली गलत जानकारी को रोकने की चुनौती बढ़ गई है।

शेरोड ब्राउन के पूर्व इंटर्न की तस्वीर का इस्तेमाल

ओहायो में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार शेरोड ब्राउन रिपब्लिकन सीनेटर जॉन हस्टेड के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। ब्राउन को निशाना बनाने वाले वीडियो में न्यूज बुलेटिन जैसा दृश्य दिखाया गया है। इसमें हाया अकबिक की तस्वीर भी शामिल है, जो कई साल पहले ब्राउन के साथ इंटर्न के तौर पर काम कर चुकी हैं। वीडियो में अकबिक के नाम से कुछ दावे किए गए, लेकिन उन्होंने एसोसिएटेड प्रेस से बातचीत में इन्हें पूरी तरह मनगढ़ंत बताया।

ओहायो में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार शेरोड ब्राउन
ओहायो में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार शेरोड ब्राउन

अकबिक ने कहा कि वीडियो में उनके नाम और प्रतिष्ठा का इस्तेमाल करके गलत आरोप लगाए गए हैं। इससे न केवल उन्हें, बल्कि संबंधित दूसरे लोगों को भी नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने इंटरनेट पर AI से तैयार होने वाली भ्रामक सामग्री को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस से कदम उठाने की जरूरत बताई।

जेम्स टालारिको के खिलाफ भी वीडियो जारी

दूसरा वीडियो टेक्सास के डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको को निशाना बनाकर बनाया गया। वह रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन के खिलाफ सीनेट सीट के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। इस वीडियो में एक व्यक्ति खुद को टालारिको का पूर्व छात्र बताकर कैमरे के सामने आरोप लगाता दिखाई देता है। वीडियो में AI के इस्तेमाल या छेड़छाड़ की आशंका जताई गई है।

टेक्सास के डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको
टेक्सास के डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको

टालारिको के प्रवक्ता जेटी एनिस ने आरोप लगाया कि उनके उम्मीदवार को निशाना बनाने के लिए AI डीपफेक, विदेशी बॉट और साजिश से जुड़े दावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके मुताबिक, इस तरह की सामग्री का मकसद मतदाताओं के सामने गलत तस्वीर पेश करना है।हालांकि, इन वीडियो में लगाए गए आरोपों को सही साबित करने वाला कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों वीडियो में वास्तविक लोगों की पहचान और तस्वीरों का इस्तेमाल करके भ्रामक कहानी पेश की गई।

2024 के चुनाव जैसे दिखे वीडियो, Storm-1516 पर शक

विशेषज्ञों ने इन वीडियो की तुलना 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान सामने आई रूस से जुड़ी कथित दुष्प्रचार सामग्री से की है। उस समय Storm-1516 नाम के नेटवर्क पर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस और उनके साथी उम्मीदवार टिम वॉल्ज को निशाना बनाने वाले वीडियो फैलाने के आरोप लगे थे।क्लेमसन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और मीडिया फॉरेंसिक विशेषज्ञ डैरेन लिनविल के मुताबिक, नए वीडियो में भी उसी तरह के संकेत दिखाई देते हैं। उन्होंने पाया कि हालिया वीडियो साझा करने वाले कुछ अकाउंट पहले Storm-1516 से जुड़ी सामग्री भी पोस्ट कर चुके थे। इस आधार पर उन्होंने नए वीडियो के पीछे उसी नेटवर्क के होने की आशंका जताई है। हालांकि, इसे लेकर सार्वजनिक रूप से अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।
डार्टमाउथ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हनी फरीद ने भी वीडियो का विश्लेषण किया। उनके मुताबिक, ब्राउन को निशाना बनाने वाला वीडियो अपेक्षाकृत कम तकनीकी तरीके से तैयार किया गया फर्जी वीडियो लगता है, जबकि टालारिको के खिलाफ वीडियो AI से बनाया गया हो सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव के करीब इस तरह की सामग्री जारी होना पहले देखे गए दुष्प्रचार अभियानों से मेल खाता है।
वॉशिंगटन स्थित रूसी दूतावास ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोध का तत्काल जवाब नहीं दिया। रूस पहले अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप के आरोपों से इनकार करता रहा है। अमेरिकी साइबर सिक्योरिटी एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी ने भी इस मामले पर टिप्पणी नहीं की।

X ने पोस्ट हटाए, लेकिन वीडियो की कॉपी अब भी मौजूद

X ने वीडियो साझा करने वाले शुरुआती पोस्ट हटा दिए और प्लेटफॉर्म के नियमों का उल्लंघन करने वाले अकाउंट्स को सस्पेंड कर दिया। इसके बावजूद, कुछ वीडियो की कॉपी दूसरे अकाउंट्स पर देखी गईं। इनमें कुछ पोस्ट को सैकड़ों बार साझा किए जाने की जानकारी भी सामने आई।यह समस्या इसलिए गंभीर है क्योंकि किसी वीडियो को एक बार सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद उसकी कॉपी दूसरे अकाउंट्स, वेबसाइटों और अन्य प्लेटफॉर्म पर पहुंच सकती है। मूल पोस्ट हटाने के बाद भी उसे पूरी तरह रोकना मुश्किल हो जाता है। चुनाव के अंतिम दिनों में ऐसी सामग्री तेजी से फैलने पर मतदाताओं तक गलत जानकारी पहुंच सकती है।
AI की मदद से वीडियो में किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या पहचान इस तरह इस्तेमाल की जा सकती है कि वह असली लगे। ऐसे में केवल वीडियो देखकर उसकी सत्यता तय करना मुश्किल हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी दुष्प्रचार में इस तकनीक का इस्तेमाल गलत आरोपों को विश्वसनीय दिखाने के लिए किया जा सकता है।

अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में विदेशी दखल की चिंता

अमेरिका के मिडटर्म चुनावों में मतदाता यह तय करेंगे कि कांग्रेस पर किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा। ऐसे समय में किसी उम्मीदवार के खिलाफ झूठे आरोप फैलाने वाली सामग्री चुनावी चर्चा और मतदाताओं की धारणा को प्रभावित कर सकती है।इस मामले में शेरोड ब्राउन और जेम्स टालारिको के खिलाफ वीडियो को रूस से जोड़ने की आशंका विशेषज्ञों के विश्लेषण और सोशल मीडिया अकाउंट्स की गतिविधियों पर आधारित है। इसे लेकर हर पहलू की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए वीडियो के स्रोत और उसके पीछे काम करने वाले लोगों के बारे में दावों को सावधानी से समझना जरूरी है।
यह घटना दिखाती है कि चुनावों के दौरान गलत जानकारी फैलाने के पुराने तरीकों को अब AI के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। असली लोगों की तस्वीरों और नामों को फर्जी दावों के साथ जोड़कर ऐसी सामग्री बनाई जा सकती है, जिसे देखकर लोग उसे वास्तविक समझ लें। ऐसे वीडियो की पहचान, उनके स्रोत की जांच और उनकी कॉपी को फैलने से रोकना सोशल मीडिया कंपनियों और चुनाव सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Russia-linked AI Videos में अमेरिकी Midterm Election Candidates को निशाना क्यों बनाया गया?

इन वीडियो के जरिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों के खिलाफ गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की गई। विशेषज्ञों को इनके पीछे रूस से जुड़े नेटवर्क की भूमिका होने का संदेह है। हालांकि, इनका सटीक उद्देश्य और जिम्मेदार लोगों की पहचान पूरी तरह आधिकारिक तौर पर स्थापित नहीं हुई है।

Sherrod Brown और James Talarico के खिलाफ वायरल वीडियो में क्या दावे किए गए?

शेरोड ब्राउन के खिलाफ वीडियो में उनके पूर्व इंटर्न हाया अकबिक की तस्वीर का इस्तेमाल करके उनके नाम से दावे किए गए, जिन्हें उन्होंने पूरी तरह झूठा बताया। जेम्स टालारिको के खिलाफ वीडियो में एक व्यक्ति खुद को उनका पूर्व छात्र बताकर आरोप लगाता दिखाई दिया। इन वीडियो में लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने वाला प्रमाण सामने नहीं आया है।

Storm-1516 Network क्या है और इसका Russia से क्या संबंध बताया गया है?

Storm-1516 एक ऐसा नेटवर्क है जिसे विशेषज्ञ रूस से जुड़े दुष्प्रचार अभियानों से जोड़ते रहे हैं। 2024 के अमेरिकी चुनाव के दौरान कमला हैरिस और टिम वॉल्ज को निशाना बनाने वाली सामग्री से भी इसकी तुलना की गई थी। हालिया वीडियो साझा करने वाले कुछ अकाउंट्स की पुरानी गतिविधियों के आधार पर विशेषज्ञों ने फिर इसी नेटवर्क की भूमिका होने की आशंका जताई है।

AI Deepfake Videos अमेरिकी चुनावों में मतदाताओं को कैसे गुमराह कर सकते हैं?

AI डीपफेक में किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या तस्वीर का इस्तेमाल करके ऐसा वीडियो बनाया जा सकता है, जिसमें वह ऐसी बात कहता या करता दिखाई दे जो उसने वास्तव में नहीं की। इससे मतदाताओं तक गलत जानकारी पहुंच सकती है और उम्मीदवारों की छवि प्रभावित हो सकती है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने इन वीडियो के खिलाफ क्या कार्रवाई की?

X ने वीडियो साझा करने वाले शुरुआती पोस्ट हटा दिए और अपने नियमों का उल्लंघन करने वाले अकाउंट्स को सस्पेंड कर दिया। इसके बावजूद, वीडियो की कॉपी दूसरे अकाउंट्स पर मौजूद होने की जानकारी सामने आई।

क्या इन वीडियो में किए गए आरोप सही साबित हुए हैं?

नहीं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो में किए गए दावों की पुष्टि करने वाला प्रमाण सामने नहीं आया है। हाया अकबिक ने उनके नाम से किए गए दावों को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है। टालारिको के प्रवक्ता ने भी वीडियो को AI डीपफेक और भ्रामक अभियान का हिस्सा बताया।

US Midterm Elections में AI-generated Disinformation को रोकना क्यों मुश्किल है?

ऐसे वीडियो तेजी से साझा किए जा सकते हैं और मूल पोस्ट हटने के बाद भी उनकी कॉपी दूसरे अकाउंट्स पर मौजूद रह सकती है। AI से तैयार सामग्री वास्तविक जैसी दिख सकती है, इसलिए उसकी सत्यता की जांच करना भी चुनौतीपूर्ण होता है।

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