पंजाब में पराली जलाने के 3,000 पार मामले! दिल्ली-NCR की हवा पर फिर मंडराया प्रदूषण का खतरा, इस जिले में सबसे ज्यादा आग
पंजाब में 6 नवंबर तक पराली जलाने की 3,144 घटनाएं दर्ज हुईं। तरनतारन 611 मामलों के साथ सबसे आगे है। कार्रवाई के बावजूद खेतों में आग की घटनाएं जारी हैं, जिससे दिल्ली-NCR के प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
पंजाब में धान की कटाई के बाद खेतों में फसल अवशेष जलाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। Punjab Stubble Burning Cases 2026 का आंकड़ा 3,000 के पार पहुंच गया है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 6 नवंबर के बीच राज्य में पराली जलाने की 3,144 घटनाएं दर्ज की गईं। एक दिन पहले यानी 5 नवंबर तक यह संख्या 2,787 थी। ऐसे में महज एक दिन में 357 नए मामले सामने आए।
तरनतारन में सबसे ज्यादा पराली जली, इन जिलों में भी स्थिति गंभीर

PPCB के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब के तरनतारन जिले में सबसे अधिक 611 खेतों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसके बाद फिरोजपुर और संगरूर का स्थान है। प्रमुख जिलों का आंकड़ा इस प्रकार है:
तरनतारन: 611 मामले
फिरोजपुर: 410 मामले
संगरूर: 281 मामले
बठिंडा: 262 मामले
अमृतसर: 231 मामले
ये आंकड़े बताते हैं कि राज्य के कई जिलों में Stubble Burning in Punjab की समस्या अब भी चुनौती बनी हुई है।
Punjab Stubble Burning Cases 2026: कार्रवाई के बावजूद क्यों नहीं थम रही आग?
पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का सहारा लिया है। PPCB के मुताबिक, अब तक 1,077 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजे के तौर पर 54.55 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसमें से 30.05 लाख रुपये की वसूली हो चुकी है। इसके अलावा, खेतों में आग लगाने की घटनाओं को लेकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत 795 FIR दर्ज की गई हैं। यह धारा किसी लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवहेलना से संबंधित है। प्रशासन ने फसल अवशेष जलाने वाले किसानों के भूमि रिकॉर्ड में 931 रेड एंट्री भी दर्ज की हैं। इनमें 301 तरनतारन और 98 फिरोजपुर में हैं। रेड एंट्री होने पर किसान अपनी कृषि भूमि के बदले कर्ज लेने या जमीन बेचने में बाधा का सामना कर सकते हैं।
दिल्ली-NCR के प्रदूषण से क्या है पराली जलाने का संबंध?
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं को अक्सर दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण के प्रमुख कारकों में गिना जाता है। खेतों में फसल अवशेष जलने से धुआं और सूक्ष्म कण हवा में फैलते हैं। मौसम की परिस्थितियां अनुकूल न होने पर ये प्रदूषक वातावरण में जमा हो सकते हैं और हवा की गुणवत्ता बिगाड़ सकते हैं। हालांकि, दिल्ली-NCR का प्रदूषण केवल पराली जलाने से नहीं होता। वाहनों का धुआं, निर्माण गतिविधियां, औद्योगिक उत्सर्जन और मौसम संबंधी परिस्थितियां भी इसमें योगदान देती हैं। इसलिए Delhi NCR Air Pollution Crisis को समझने के लिए इन सभी कारकों को ध्यान में रखना जरूरी है।
पिछले वर्षों में घटे थे मामले, अब फिर बढ़ी चिंता
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं के आंकड़े पिछले कुछ वर्षों में लगातार घटे थे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 2023 के दौरान 36,663 और 2024 में 10,909 खेतों में आग लगने की घटनाएं दर्ज हुई थीं। वहीं, 2025 के धान कटाई सीजन में यह संख्या 5,114 रही। हालांकि, 2026 में 6 नवंबर तक ही मामले 3,144 तक पहुंच चुके हैं। धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के लिए किसानों के पास समय कम होता है। इसी दबाव में कुछ किसान खेत जल्दी साफ करने के लिए फसल अवशेष जला देते हैं।
निष्कर्ष
Punjab Stubble Burning Cases 2026 का 3,144 तक पहुंचना बताता है कि पराली प्रबंधन की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। जुर्माने, FIR और भूमि रिकॉर्ड में रेड एंट्री जैसी कार्रवाई के बावजूद खेतों में आग की घटनाएं जारी हैं। दिल्ली-NCR के प्रदूषण पर दबाव कम करने के लिए प्रभावी निगरानी के साथ किसानों को फसल अवशेषों के वैकल्पिक प्रबंधन की सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
पंजाब में 2026 में पराली जलाने के कितने मामले सामने आए हैं?
PPCB के आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 6 नवंबर 2026 के बीच पंजाब में पराली जलाने की 3,144 घटनाएं दर्ज की गईं।
पंजाब के किस जिले में पराली जलाने की सबसे अधिक घटनाएं हुई हैं?
तरनतारन जिले में सबसे ज्यादा 611 घटनाएं दर्ज की गईं। इसके बाद फिरोजपुर में 410 और संगरूर में 281 मामले सामने आए।
पराली जलाने से दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण पर क्या असर पड़ता है?
पराली जलाने से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण हवा की गुणवत्ता खराब कर सकते हैं। अनुकूल मौसम न होने पर प्रदूषक वातावरण में जमा हो सकते हैं। हालांकि, दिल्ली-NCR के प्रदूषण के अन्य कारण भी हैं।
पंजाब में पराली जलाने पर क्या कार्रवाई की गई है?
PPCB के मुताबिक, 1,077 मामलों में 54.55 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया, जिसमें से 30.05 लाख रुपये वसूले गए। इसके अलावा 795 FIR और 931 रेड एंट्री दर्ज की गई हैं।
किसानों के भूमि रिकॉर्ड में रेड एंट्री का क्या असर होता है?
रेड एंट्री दर्ज होने पर किसान अपनी कृषि भूमि के बदले कर्ज लेने या जमीन बेचने में बाधा का सामना कर सकते हैं।