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शहरी भारत में बदला खरीदारी का ट्रेंड, लोग कम बार जा रहे दुकानों पर लेकिन हर बार खर्च कर रहे 11.5% ज्यादा !

Worldpanel by Numerator की रिपोर्ट के मुताबिक शहरी भारत के FMCG बाजार में 13% की वैल्यू ग्रोथ दर्ज की गई। हालांकि खरीदारी के मौकों में 1.8% की गिरावट आई। उपभोक्ता अब हर खरीदारी पर 11.5% ज्यादा खर्च कर रहे हैं। वहीं ऑनलाइन FMCG बिक्री में 48.9% की तेजी आई है।

शहरी भारत में बदला खरीदारी का ट्रेंड, लोग कम बार जा रहे दुकानों पर लेकिन हर बार खर्च कर रहे 11.5% ज्यादा !

भारत के शहरी बाजार में उपभोक्ताओं की खरीदारी का तरीका बदल रहा है। लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पहले की तुलना में कम बार खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन हर बार ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं। Worldpanel by Numerator की Asia Pulse रिपोर्ट के मुताबिक Q2 2026 में शहरी भारत के FMCG बाजार की वैल्यू ग्रोथ 13% रही। यह एक साल पहले की समान अवधि में दर्ज 9% की वृद्धि से ज्यादा है।

हालांकि बाजार की वैल्यू बढ़ने के बावजूद खरीदारी के मौकों (Shopping Occasions) में 1.8% की गिरावट आई। दूसरी ओर प्रति खरीदारी खर्च (Spending Per Shopping Trip) 11.5% बढ़ गया। यानी बाजार की ग्रोथ के पीछे खरीदारी की संख्या बढ़ने के बजाय हर खरीदारी पर ज्यादा खर्च करना अहम भूमिका निभा रहा है। यह बदलाव Urban India consumer spending trends और Indian urban shopping habits को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

खरीदारी की आवृत्ति घटी, लेकिन हर बार खर्च क्यों बढ़ा?

Worldpanel के आंकड़ों के मुताबिक शहरी भारत में खरीदारी के मौकों में 1.8% की गिरावट आई, जबकि प्रति खरीदारी खर्च 11.5% बढ़ा। इसका मतलब है कि उपभोक्ता पहले की तुलना में कम बार खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन हर बार उनका औसत बिल बड़ा हो रहा है।

इसके पीछे उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ खरीदारी के तरीके में बदलाव भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से जून 2026 के बीच शहरी उपभोक्ता महंगाई 3.2% से 3.9% के दायरे में रही। वहीं प्रति खरीदारी खर्च में वृद्धि इससे काफी ज्यादा थी। Worldpanel के विश्लेषण के मुताबिक बड़े पैक खरीदना और अधिक कीमत वाले उत्पादों की ओर बढ़ना भी इस अंतर की वजह हो सकता है।

उदाहरण के लिए कोई परिवार पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए कई बार किराना दुकान जाता था। अब वह जरूरतों की सूची बनाकर एक बार में ज्यादा सामान खरीद सकता है। इससे खरीदारी के मौके कम होते हैं और हर बार का बिल बढ़ जाता है। यह उदाहरण बदलते shopping behaviour को समझाने के लिए है, न कि हर शहरी परिवार की आदत का दावा।

FMCG बाजार में पर्सनल केयर कैटेगरी की सबसे ज्यादा ग्रोथ

शहरी भारत के FMCG बाजार में पर्सनल केयर कैटेगरी सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख कैटेगरी रही। Worldpanel के मुताबिक जून 2026 में समाप्त अवधि के Moving Annual Total (MAT) आधार पर इस कैटेगरी की वैल्यू ग्रोथ 16.3% रही। एक साल पहले इसी अवधि में यह 8.7% थी।

पर्सनल केयर में साबुन, शैंपू, स्किन केयर, हेयर केयर और ग्रूमिंग से जुड़े उत्पाद शामिल हैं। Worldpanel के अनुसार इस कैटेगरी में तेजी के पीछे ग्रूमिंग से जुड़ी मांग और अधिक कीमत वाले उत्पादों की ओर उपभोक्ताओं का रुझान हो सकता है।

  • अन्य FMCG कैटेगरी की स्थिति भी इस प्रकार रही

• फूड कैटेगरी में 13.3% की वृद्धि।• डेयरी कैटेगरी में 11.1% की वृद्धि।
• बेवरेज कैटेगरी में 9.3% की वृद्धि।
• होम केयर कैटेगरी में 10.8% की वृद्धि।
• पर्सनल केयर कैटेगरी में 16.3% की वृद्धि।

ये आंकड़े बिक्री की वैल्यू में वृद्धि को दर्शाते हैं। इन्हें उत्पादों की बिक्री की मात्रा में समान वृद्धि नहीं समझना चाहिए।

ऑनलाइन FMCG बिक्री में 48.9% की तेजी, बढ़ रहा डिजिटल बाजार !

बदलती खरीदारी की आदतों के बीच ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शहरी उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। Worldpanel की रिपोर्ट के मुताबिक Q2 2026 में ऑनलाइन FMCG बिक्री की वैल्यू में सालाना आधार पर 48.9% की वृद्धि हुई।

इस दौरान ऑनलाइन चैनल की बाजार हिस्सेदारी 3% से बढ़कर 4% हो गई। इसके अलावा:
• ऑनलाइन खरीदारी करने वाले परिवारों की संख्या में 32.1% की वृद्धि हुई।
• ऑनलाइन खरीदारी के मौकों में 11.4% का इजाफा हुआ।
• प्रति ऑनलाइन खरीदारी खर्च में 1.2% की वृद्धि हुई।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री बढ़ने के पीछे अधिक परिवारों का जुड़ना और खरीदारी के मौकों का बढ़ना भी अहम है। प्रति ऑनलाइन खरीदारी खर्च में केवल 1.2% की वृद्धि इस बात का संकेत देती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नियमित जरूरतों के लिए भी बढ़ रहा है।

यह बदलाव Indian retail industry trends में ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स की बढ़ती भूमिका को दिखाता है। हालांकि ऑनलाइन चैनल की कुल बाजार हिस्सेदारी अभी भी 4% है। इसलिए तेज ग्रोथ के बावजूद इसे ऑफलाइन बाजार का विकल्प नहीं माना जा सकता।

किराना दुकानों का दबदबा बरकरार, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बढ़ी प्रतिस्पर्धा !

ऑनलाइन FMCG बिक्री में तेजी के बावजूद पारंपरिक किराना दुकानें भारतीय रिटेल बाजार का प्रमुख माध्यम बनी हुई हैं। Moneycontrol की रिपोर्ट में Worldpanel के आंकड़ों के हवाले से किराना दुकानों का रिटेल चैनल में महत्व 77% बताया गया है। सुपरमार्केट के लिए यह आंकड़ा 10% और ऑनलाइन चैनल के लिए 4% था।

रिपोर्ट के मुताबिक किराना दुकानों की वैल्यू मार्केट हिस्सेदारी में 1.5 प्रतिशत अंक की गिरावट आई है। यह संकेत देता है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ पारंपरिक दुकानों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।

इसका मतलब यह नहीं है कि किराना दुकानों की भूमिका खत्म हो रही है। बल्कि शहरी उपभोक्ताओं के पास अब खरीदारी के लिए पहले से ज्यादा विकल्प हैं। वे जरूरत, कीमत और सुविधा के आधार पर ऑफलाइन स्टोर या डिजिटल प्लेटफॉर्म चुन सकते हैं।

FMCG कंपनियों और रिटेल कारोबार पर क्या होगा असर?

बदलते उपभोक्ता व्यवहार का असर FMCG कंपनियों की कीमत, पैकेजिंग, मार्केटिंग और वितरण रणनीति पर पड़ सकता है। जब ग्राहक कम बार खरीदारी करते हैं तो कंपनियों के लिए हर खरीदारी के मौके पर अपने उत्पादों को उपभोक्ता की पसंद में बनाए रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।

  • इस बदलाव के बीच कंपनियों के सामने कुछ अहम प्राथमिकताएं होंगी:

1. अलग-अलग पैक साइज: छोटे बजट वाले ग्राहकों के लिए छोटे पैक और ज्यादा मात्रा खरीदने वालों के लिए बड़े पैक उपलब्ध कराना।2. ऑनलाइन बिक्री का विस्तार: ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाना।
3. कीमत और गुणवत्ता का संतुलन: महंगाई के बीच ग्राहकों को उत्पाद की कीमत के अनुरूप लाभ देना।
4. किराना नेटवर्क मजबूत करना: पारंपरिक दुकानों के साथ वितरण और उपलब्धता बनाए रखना।

इस तरह Indian household spending trends और changing shopping habits India के FMCG कारोबार की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं। कंपनियों को यह समझना होगा कि ग्राहक किन उत्पादों पर खर्च जारी रख रहे हैं और किन खरीदारी के मौकों में कटौती कर रहे हैं।

एशियाई FMCG बाजार की तुलना में भारत की स्थिति क्या है ?

Worldpanel by Numerator की Asia Pulse रिपोर्ट के मुताबिक Q2 2026 में एशिया के 10 बाजारों में FMCG की वैल्यू ग्रोथ 1.5% रही। एक साल पहले यह 3% थी। यानी एशियाई बाजार की ग्रोथ आधी हो गई।

इसके विपरीत शहरी भारत में FMCG वैल्यू ग्रोथ 13% रही। रिपोर्ट के मुताबिक भारत और इंडोनेशिया ने मिलकर एशिया की कुल FMCG वैल्यू ग्रोथ में लगभग 90% योगदान दिया।

रिपोर्ट में थाईलैंड के FMCG बाजार में 7.1% की गिरावट और मुख्य भूमि चीन में केवल 0.3% की वृद्धि दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि एशिया के अलग-अलग बाजारों में उपभोक्ता खर्च और खरीदारी के पैटर्न एक जैसे नहीं हैं।

इस तुलना में शहरी भारत का प्रदर्शन मजबूत रहा, लेकिन इसकी ग्रोथ को समझने के लिए कीमतों, प्रति खरीदारी खर्च और खरीदारी की आवृत्ति को अलग-अलग देखना जरूरी है।

निष्कर्ष

शहरी भारत में FMCG बाजार की 13% वैल्यू ग्रोथ के साथ खरीदारी के मौकों में 1.8% की गिरावट और प्रति खरीदारी खर्च में 11.5% की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं ऑनलाइन FMCG बिक्री में 48.9% की तेजी आई। ये आंकड़े बताते हैं कि शहरी उपभोक्ता कम बार खरीदारी करते हुए हर बार ज्यादा खर्च कर रहे हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर भी बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में यह बदलाव FMCG कंपनियों और रिटेल कारोबार की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

शहरी भारत में लोग ज्यादा खर्च करने के बावजूद कम बार खरीदारी क्यों कर रहे हैं?

Worldpanel के मुताबिक इसके पीछे खरीदारी की आवृत्ति में कमी और प्रति खरीदारी खर्च में वृद्धि दोनों शामिल हैं। उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी, बड़े पैक खरीदना और अधिक कीमत वाले उत्पादों की ओर रुझान औसत बिल को बढ़ा सकते हैं।

भारत में शहरी उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों में क्या बदलाव आ रहा है?

शहरी उपभोक्ता कम बार खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन हर बार ज्यादा खर्च कर रहे हैं। इसके साथ ही ऑनलाइन FMCG खरीदारी करने वाले परिवारों और डिजिटल खरीदारी के मौकों में भी वृद्धि हुई है।

उपभोक्ता खर्च बढ़ने का क्या अर्थ है?

उपभोक्ता खर्च बढ़ने का अर्थ है कि वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च की गई कुल रकम में वृद्धि हुई है। हालांकि, इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि उत्पादों की खपत की मात्रा भी उतनी ही बढ़ी हो। कीमतों में बढ़ोतरी भी खर्च की वैल्यू बढ़ा सकती है।

खरीदारी की आवृत्ति कम होने से रिटेल कारोबार पर क्या असर पड़ सकता है?

खरीदारी के मौकों में कमी आने से दुकानों और ब्रांड्स के लिए ग्राहकों तक पहुंचने के अवसर घट सकते हैं। ऐसे में कारोबारियों को ग्राहकों को बनाए रखने, सही कीमतों पर उत्पाद उपलब्ध कराने और ऑनलाइन व ऑफलाइन बिक्री के बीच संतुलन बनाने पर ध्यान देना होगा।

बदलती उपभोक्ता आदतें भारतीय बाजार को कैसे प्रभावित कर सकती हैं?

बदलती उपभोक्ता आदतों से FMCG कंपनियों की पैकेजिंग, कीमतों, मार्केटिंग और वितरण रणनीति प्रभावित हो सकती है। ऑनलाइन खरीदारी बढ़ने से ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स को बढ़ावा मिलेगा, जबकि किराना दुकानों को प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी स्थिति बनाए रखनी होगी।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षणिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दिए गए आंकड़े, बाजार से जुड़ी जानकारी, कंपनियों के प्रदर्शन और निवेश संबंधी तथ्य उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों और विश्वसनीय रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, ETF, बॉन्ड, सोना या किसी अन्य निवेश में बाजार जोखिम शामिल होता है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखें तथा जरूरत पड़ने पर SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकार या योग्य वित्तीय विशेषज्ञ की सलाह लें। यह लेख किसी भी तरह की निवेश सलाह, खरीदने या बेचने की सिफारिश अथवा भविष्य में रिटर्न की गारंटी नहीं है। बाजार की स्थिति और आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं, इसलिए निवेश से पहले नवीनतम जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।

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