चांदी $122 से गिरकर $50 के करीब पहुंची, धनतेरस-दिवाली से पहले खरीदारी का मौका या अभी और गिरेगा भाव ?
दिवाली और धनतेरस से पहले चांदी की कीमतों में तेज गिरावट ने खरीदारों और निवेशकों का ध्यान खींचा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव 122 डॉलर के शिखर से फिसलकर 50 डॉलर के करीब आ गया है। ऐसे में सवाल है कि क्या यह खरीदारी का सही समय है?
भारत में धनतेरस और दिवाली के मौके पर सोना-चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। इन त्योहारों पर लोग चांदी के सिक्के, बर्तन, मूर्तियां और गहने खरीदते हैं। इस बार त्योहारों से ठीक पहले चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है।
जनवरी 2026 में करीब 122 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छूने वाली चांदी 4 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 49.67 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। वहीं, घरेलू वायदा बाजार में भी चांदी के भाव दबाव में रहे। ऐसे में त्योहारों की खरीदारी करने वाले लोगों के सामने सवाल है कि क्या इस गिरावट का फायदा उठाना चाहिए या कीमतों में और कमी का इंतजार करना बेहतर होगा?

धनतेरस से पहले चांदी की कीमतों में कितनी गिरावट आई?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी ने 2025 और जनवरी 2026 में जबरदस्त तेजी दिखाई थी। ETMarkets की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में चांदी की कीमतों में करीब 170% की बढ़ोतरी हुई और जनवरी 2026 में इसमें लगभग 71% की अतिरिक्त तेजी दर्ज की गई। इस दौरान चांदी का भाव करीब 122 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था।
हालांकि, इसके बाद बाजार का रुख तेजी से बदला। लगातार बिकवाली के चलते चांदी 60 डॉलर के नीचे आ गई और HSBC की रिपोर्ट में इसका भाव करीब 54 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का जिक्र किया गया। 4 नवंबर को स्पॉट सिल्वर करीब 49.67 डॉलर प्रति औंस पर था। यानी जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से कीमत में बड़ी गिरावट आ चुकी है।
घरेलू बाजार में भी इसका असर दिखा। 4 नवंबर को MCX पर दिसंबर 2026 एक्सपायरी वाले चांदी वायदा का भाव करीब 2,000 रुपये गिरकर 1,77,784 रुपये प्रति किलो पर आ गया। यह उस समय की बाजार स्थिति थी; खुदरा बाजार में शहर, टैक्स और मेकिंग चार्ज के कारण कीमत अलग हो सकती है।
त्योहारों से पहले कीमतों में गिरावट, खरीदारों को मिल सकती है राहत
धनतेरस और दिवाली के दौरान भारत में सोने और चांदी की खरीदारी बढ़ जाती है। इस समय लोग निवेश के साथ-साथ पूजा, उपहार और पारंपरिक इस्तेमाल के लिए भी चांदी खरीदते हैं। ऐसे में कीमतों में गिरावट से उन परिवारों को राहत मिल सकती है, जिन्होंने ऊंचे भाव के कारण खरीदारी टाल दी थी।
ETRetail की 28 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 से 27 अक्टूबर के बीच IBJA के बेंचमार्क भाव में चांदी करीब 18,400 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हुई थी। रिपोर्ट में ज्वेलर्स ने बताया कि कीमतों में नरमी से पहले टली हुई खरीदारी को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, इससे यह तय नहीं होता कि कुल बिक्री या ग्राहकों का खर्च भी उतनी ही तेजी से बढ़ेगा।
इसका मतलब है कि चांदी की कीमतों में गिरावट त्योहारों के दौरान खरीदारों के लिए राहत का मौका हो सकती है, लेकिन बाजार में आगे तेजी की गारंटी नहीं है।
भारत में चांदी की सप्लाई बढ़ने से भी कीमतों पर असर
भारत अपनी चांदी की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अलावा आयात, उपलब्धता और घरेलू बाजार में प्रीमियम का भी खुदरा भाव पर असर पड़ता है।
Business Standard ने 22 अक्टूबर को Bloomberg के हवाले से बताया था कि सरकार की ओर से नए आयात परमिट जारी होने के बाद भारत में चांदी की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, कारोबारियों और बैंक डीलरों को कुल 6,000 टन तक चांदी के आयात की अनुमति देने वाले कोटे मिले थे।
इससे त्योहारों से पहले बाजार में उपलब्धता बेहतर होने और आयात प्रीमियम घटने की संभावना जताई गई थी। Metals Focus के सलाहकार के मुताबिक, नए परमिट संभावित मांग को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, आयात की अनुमति मिलना और उतनी मात्रा में चांदी का वास्तव में आयात होना अलग-अलग बातें हैं।
आखिर चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
त्योहारों के दौरान भारत में खरीदारी बढ़ने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों पर कई दूसरे कारक असर डाल रहे हैं।
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर चिंता
अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने या उनमें बढ़ोतरी की आशंका से चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो सकता है। निवेशकों को सरकारी बॉन्ड जैसे विकल्पों में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना दिखती है, तो वे चांदी से पैसा निकाल सकते हैं।
ETMarkets की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी और महंगाई की चिंताओं ने चांदी की कीमतों पर दबाव बनाया है।
- डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती
चांदी का अंतरराष्ट्रीय कारोबार डॉलर में होता है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरी मुद्राओं में चांदी खरीदना महंगा पड़ सकता है, जिससे मांग प्रभावित होती है। इसके अलावा, बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों के लिए चांदी जैसे बिना ब्याज वाले निवेश की तुलना में बॉन्ड अधिक आकर्षक हो सकते हैं।
- निवेशकों की मुनाफावसूली
जनवरी में रिकॉर्ड तेजी के बाद कुछ निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू किया। जब बड़ी संख्या में निवेशक एक साथ बिकवाली करते हैं, तो कीमतों में गिरावट तेज हो सकती है। चांदी में सोने की तुलना में उतार-चढ़ाव अधिक रहने के कारण इसका असर भी ज्यादा दिखाई देता है।
चांदी की मांग और सप्लाई का गणित क्या बता रहा है?
चांदी की कीमत केवल निवेशकों की खरीदारी से तय नहीं होती। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहनों और ज्वेलरी जैसे कई क्षेत्रों में होता है। इसलिए औद्योगिक मांग में बदलाव भी इसकी कीमतों को प्रभावित करता है।
Silver Institute के 2026 के अनुमान में वैश्विक चांदी बाजार में करीब 6.7 करोड़ औंस की कमी रहने की बात कही गई थी। हालांकि, HSBC के आकलन में बाजार का घाटा पहले के मुकाबले काफी कम होने की संभावना जताई गई है।
इन अनुमानों में अंतर इसलिए भी हो सकता है क्योंकि संस्थानों के आकलन, मांग-सप्लाई की गणना और अनुमान लगाने की तारीख अलग-अलग होती है। इसलिए किसी एक अनुमान को बाजार की अंतिम स्थिति नहीं माना जा सकता।
ओवरसोल्ड जोन में पहुंचना क्या चांदी की कीमतों में तेजी का संकेत है?
चांदी की कीमतों में तेज गिरावट के बाद तकनीकी विश्लेषण में ओवरसोल्ड जोन की चर्चा हो रही है। इसे समझने के लिए RSI यानी रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स का इस्तेमाल किया जाता है।
RSI एक तकनीकी संकेतक है, जो कीमतों में तेजी और गिरावट की गति को मापता है। आमतौर पर:
- 1- RSI 30 से नीचे होने पर बाजार को ओवरसोल्ड माना जाता है।
- 2- RSI 70 से ऊपर होने पर बाजार को ओवरबॉट माना जाता है।
ओवरसोल्ड स्थिति का मतलब है कि किसी अवधि में बिकवाली बहुत तेज रही है। इससे कीमतों में अस्थायी उछाल की संभावना बन सकती है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि गिरावट खत्म हो गई है या बाजार में तेजी निश्चित है।
इसलिए केवल RSI के आधार पर चांदी खरीदने का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है। निवेशकों को कीमतों के ट्रेंड, मांग-सप्लाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को भी देखना चाहिए।
धनतेरस पर चांदी खरीदें या अभी इंतजार करें?
इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप चांदी किस उद्देश्य से खरीद रहे हैं। त्योहारों के लिए गहने, सिक्के या बर्तन खरीदने वालों और लंबे समय के निवेशकों की रणनीति अलग हो सकती है।
- 1- अगर त्योहार के लिए चांदी खरीदनी है
अगर आप धनतेरस या दिवाली पर पूजा, उपहार या निजी इस्तेमाल के लिए चांदी खरीदना चाहते हैं, तो मौजूदा गिरावट से पहले के मुकाबले बेहतर कीमत मिल सकती है। हालांकि, खरीदारी से पहले अलग-अलग दुकानों के भाव, शुद्धता, GST और मेकिंग चार्ज की तुलना जरूर करें।
- 2- अगर निवेश के लिए चांदी खरीद रहे हैं
निवेशकों को एकमुश्त बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए। कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने पर चरणबद्ध तरीके से निवेश करने पर विचार किया जा सकता है। इससे किसी एक कीमत पर पूरा निवेश करने का जोखिम कम हो सकता है।
- 3- सिल्वर ETF में निवेश करने वालों के लिए
सिल्वर ETF के जरिए निवेश करने वाले लोगों को अंतरराष्ट्रीय चांदी की कीमतों के साथ फंड के खर्च, ट्रैकिंग एरर और अपने निवेश की अवधि को भी समझना चाहिए। केवल कीमत गिरने के कारण निवेश करना सही रणनीति नहीं है।
- 4- जोखिम उठाने की क्षमता का ध्यान रखें
चांदी में सोने की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए निवेश से पहले यह तय करना जरूरी है कि आप कितनी गिरावट सह सकते हैं और कितने समय तक निवेश बनाए रख सकते हैं।
निष्कर्ष
दिवाली और धनतेरस से पहले चांदी की कीमतों में आई गिरावट खरीदारों के लिए राहत का मौका हो सकती है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्याज दरों, डॉलर और मांग-सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ऐसे में त्योहारों के लिए जरूरत के मुताबिक खरीदारी और निवेश के लिए चरणबद्ध रणनीति अपनाना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है। कीमतें सस्ती होने का मतलब यह नहीं कि उनमें आगे गिरावट नहीं आएगी।
FAQ (Frequently Asked Questions):
चांदी की कीमत 122 डॉलर प्रति औंस से गिरकर 50 डॉलर के करीब क्यों आ गई?
अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका, मजबूत डॉलर, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और निवेशकों की मुनाफावसूली ने चांदी की कीमतों पर दबाव बनाया है।
क्या धनतेरस और दिवाली पर चांदी खरीदना सही रहेगा?
अगर खरीदारी पूजा, उपहार या निजी इस्तेमाल के लिए है, तो मौजूदा गिरावट से राहत मिल सकती है। हालांकि, खरीदारी से पहले खुदरा भाव, शुद्धता और अतिरिक्त शुल्क की तुलना करनी चाहिए।
चांदी का ओवरसोल्ड जोन में पहुंचना क्या संकेत देता है?
इसका मतलब है कि हालिया अवधि में बिकवाली काफी तेज रही है। इससे कीमतों में अस्थायी उछाल आ सकता है, लेकिन तेजी की गारंटी नहीं मिलती।
क्या चांदी की कीमतों में अभी और गिरावट आ सकती है?
हां। अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर, औद्योगिक मांग और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के आधार पर कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव हो सकता है।
चांदी में निवेश करने का बेहतर तरीका क्या हो सकता है?
निवेशक अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि के अनुसार चरणबद्ध तरीके से निवेश करने पर विचार कर सकते हैं। एकमुश्त बड़ी रकम लगाने से पहले बाजार की स्थिति समझना जरूरी है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षणिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दिए गए आंकड़े, बाजार से जुड़ी जानकारी, कंपनियों के प्रदर्शन और निवेश संबंधी तथ्य उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों और विश्वसनीय रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, ETF, बॉन्ड, सोना या किसी अन्य निवेश में बाजार जोखिम शामिल होता है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखें तथा जरूरत पड़ने पर SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकार या योग्य वित्तीय विशेषज्ञ की सलाह लें। यह लेख किसी भी तरह की निवेश सलाह, खरीदने या बेचने की सिफारिश अथवा भविष्य में रिटर्न की गारंटी नहीं है। बाजार की स्थिति और आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं, इसलिए निवेश से पहले नवीनतम जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।