Iran Nuclear Survival Advisory : ईरान ने जारी की न्यूक्लियर इमरजेंसी गाइड, क्या देश पर मंडरा रहा है परमाणु हमले का खतरा?
ईरान ने संभावित परमाणु विस्फोट से बचाव के लिए नागरिकों को एडवाइजरी जारी की है। इसमें AC बंद रखने, बेसमेंट या सुरक्षित कमरे में छिपने और कम से कम 24 घंटे घरों में रहने की सलाह दी गई है। रेडियोएक्टिव धूल से बचने के तरीके भी बताए गए हैं।
Iran Nuclear Survival Advisory : ईरान ने अपने नागरिकों के लिए परमाणु विस्फोट की स्थिति में बचाव से जुड़ी एक खास एडवाइजरी जारी की है। इसमें लोगों को सुरक्षित जगहों पर छिपने, खिड़कियों से दूर रहने और बाहर की हवा खींचने वाले एयर कंडीशनर (AC) बंद करने की सलाह दी गई है। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने 29 अक्टूबर को आठ मिनट का एक वीडियो जारी किया, जिसमें परमाणु विस्फोट के बाद रेडिएशन और रेडियोएक्टिव धूल से बचने के तरीके बताए गए हैं।एडवाइजरी में लोगों को कम से कम 24 घंटे तक सुरक्षित जगह पर रहने, पैकेट में बंद खाना और बोतलबंद पानी इस्तेमाल करने की सलाह भी दी गई है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि विस्फोट के बाद हवा में फैलने वाले रेडियोएक्टिव कण शुरुआती धमाके वाली जगह से काफी दूर तक पहुंच सकते हैं। ऐसे में हमले की जगह से दूर रहने वाले लोगों को भी सरकारी निर्देशों का पालन करना चाहिए।
बेसमेंट या इमारत के बीच वाले कमरे में छिपने की सलाह
ईरान के इस्फहान प्रांत की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के शिक्षा और अनुसंधान विभाग के उपनिदेशक इब्राहिम अदेलजादेह ने लोगों को मजबूत इमारतों में शरण लेने की सलाह दी है। उनके मुताबिक, बेसमेंट या किसी इमारत के बीच में मौजूद ऐसा कमरा, जहां खिड़कियां न हों, सुरक्षित ठिकाना बन सकता है। हालांकि, वहां पहुंचने का रास्ता सुरक्षित होना चाहिए।एडवाइजरी में परमाणु विस्फोट से होने वाले चार प्रमुख खतरों का जिक्र किया गया है। इनमें तेज रोशनी, धमाके से उठने वाली दबाव की लहर, अत्यधिक गर्मी और रेडियोएक्टिव पदार्थों का फैलना शामिल है। लोगों को विस्फोट की तेज चमक को सीधे देखने से मना किया गया है।
इसके अलावा दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने तथा ऐसे AC और वेंटिलेशन सिस्टम बंद करने को कहा गया है, जो बाहर की हवा को कमरे के अंदर लाते हैं। इसका मकसद रेडियोएक्टिव कणों को इमारत के अंदर आने से रोकना है।

खुले में फंस जाएं तो जमीन पर लेटकर सिर ढकें
वीडियो में उन लोगों के लिए भी निर्देश दिए गए हैं, जो परमाणु विस्फोट के समय खुले में मौजूद हों। ऐसे लोगों को विस्फोट की चमक की ओर नहीं देखने, जमीन के करीब लेटने और किसी मजबूत दीवार या दूसरी रुकावट के पीछे छिपने की सलाह दी गई है। उन्हें अपने सिर और चेहरे को ढकना चाहिए।धमाके की शुरुआती लहर गुजरने के बाद नजदीकी मजबूत इमारत में पहुंचने को कहा गया है। लोगों को बाहर रुककर विस्फोट देखने या उसकी तस्वीरें लेने से मना किया गया है। गाड़ी के अंदर छिपने को भी सुरक्षित विकल्प नहीं बताया गया है, क्योंकि वाहन रेडियोएक्टिव पदार्थों से पर्याप्त सुरक्षा नहीं देते।
अगर जिस इमारत में कोई व्यक्ति छिपा है, उसमें आग लग जाए या उसके गिरने का खतरा हो, तो उसे दूसरी सुरक्षित जगह पर जाने की सलाह दी गई है।
रेडियोएक्टिव धूल कपड़ों और त्वचा पर जम सकती है
इस्फहान रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अदेलजादेह ने बताया कि रेडियोएक्टिव पदार्थ हवा के साथ दूर तक फैल सकते हैं। इसलिए सिर्फ विस्फोट वाली जगह के आसपास रहने वाले लोग ही खतरे में नहीं होते। हवा की दिशा और मौसम के आधार पर रेडियोएक्टिव कण दूसरे इलाकों तक भी पहुंच सकते हैं। अगर हवा इन्हें पूर्व दिशा में ले जाती है, तो पाकिस्तान और भारत के कुछ हिस्सों तक इनके पहुंचने की आशंका हो सकती है। हालांकि, यह एक संभावित स्थिति है, किसी खास इलाके के लिए जारी किया गया पूर्वानुमान नहीं।एडवाइजरी के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति के कपड़ों या शरीर पर रेडियोएक्टिव धूल जमने की आशंका हो, तो उसे सावधानी से अपने बाहरी कपड़े उतारकर बंद बैग में रखने चाहिए। इसके बाद साबुन और गुनगुने पानी से खुली त्वचा और बालों को धोना चाहिए। नहाना संभव न हो तो गीले कपड़े या वाइप्स से त्वचा साफ करने की सलाह दी गई है।
लोगों को कम से कम 24 घंटे सुरक्षित जगह पर रहने और पैकेट में बंद खाना व बोतलबंद पानी इस्तेमाल करने को कहा गया है। हालांकि, 24 घंटे पूरे होने का मतलब यह नहीं है कि बाहर निकलना अपने आप सुरक्षित हो गया है। लोगों को स्थानीय अधिकारियों के निर्देश मिलने तक शरण में रहना चाहिए।
आयोडीन की गोलियां खुद से लेने से मना किया
वीडियो में रेडिएशन से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं का भी जिक्र है। इस्फहान की प्री-हॉस्पिटल इमरजेंसी सर्विस के प्रवक्ता अब्बास आबेदी ने लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना आयोडीन की गोलियां नहीं लेने को कहा है।उन्होंने बताया कि कुछ खास परिस्थितियों में स्टेबल आयोडीन थायरॉइड ग्रंथि में रेडियोएक्टिव आयोडीन के अवशोषण को कम कर सकता है, लेकिन यह दूसरे रेडियोएक्टिव पदार्थों या विस्फोट से निकलने वाले रेडिएशन से सुरक्षा नहीं देता।
वीडियो में प्रशियन ब्लू नाम की दवा का भी उल्लेख है। इसका इस्तेमाल कुछ मामलों में शरीर के अंदर रेडियोएक्टिव सीजियम-137 पहुंचने पर किया जाता है। अधिकारियों ने यह भी चेताया कि परमाणु विस्फोट से पैदा होने वाला इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और संचार व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इसलिए आपात स्थिति में सरकारी सूचनाएं सुनने के लिए बैटरी से चलने वाला रेडियो रखने की सलाह दी गई है।
पिकैक्स माउंटेन पर संभावित हमले की चर्चा के बीच एडवाइजरी
ईरान की यह एडवाइजरी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच नतांज के पास स्थित पिकैक्स माउंटेन को लेकर चर्चा हो रही है। यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक गहराई में बना भूमिगत ठिकाना है। 16 अक्टूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका को इस जगह को निशाना बनाना पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने साफ कहा था कि इसके लिए परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है।इसके बाद 2 नवंबर को अमेरिकी कमेंटेटर टकर कार्लसन ने दावा किया कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ट्रंप पर पिकैक्स माउंटेन के खिलाफ परमाणु हमला करने का दबाव बना रहे हैं। हालांकि, कार्लसन ने अपने दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित सबूत नहीं दिया। अमेरिका या इजरायल की ओर से भी ऐसी किसी योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पैसिव डिफेंस वीक के दौरान जारी हुआ वीडियो
ईरान ने बताया है कि यह एडवाइजरी पैसिव डिफेंस वीक के तहत जारी की गई है। देश में यह आयोजन एक दशक से भी ज्यादा समय से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नागरिकों और संस्थानों को संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयार करना है।हालांकि, इस बार जारी वीडियो इसलिए चर्चा में है क्योंकि इसमें परमाणु विस्फोट के बाद बचाव के लिए काफी विस्तार से निर्देश दिए गए हैं। जून 2025 में इजरायल और अमेरिका के ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों के बाद तेहरान ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि रेडिएशन लक्षित ठिकानों से बाहर नहीं फैला है। इसके उलट, इस बार की एडवाइजरी में संभावित परमाणु विस्फोट, रेडियोएक्टिव कणों के फैलाव और लंबे समय तक सुरक्षित जगह पर रहने की तैयारी पर जोर दिया गया है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
ईरान ने नागरिकों के लिए न्यूक्लियर सर्वाइवल एडवाइजरी क्यों जारी की?
ईरान ने यह एडवाइजरी पैसिव डिफेंस वीक के तहत जारी की है। इसका उद्देश्य नागरिकों को संभावित परमाणु विस्फोट और रेडियोएक्टिव प्रदूषण की स्थिति में बचाव के तरीकों की जानकारी देना है।
परमाणु विस्फोट की स्थिति में ईरान ने लोगों को घरों में रहने की सलाह क्यों दी?
परमाणु विस्फोट के बाद रेडियोएक्टिव कण हवा में फैलकर लोगों के शरीर और कपड़ों पर जम सकते हैं। मजबूत इमारतों के अंदर रहने से इन कणों और रेडिएशन के संपर्क में आने का खतरा कम किया जा सकता है।
ईरान ने AC और वेंटिलेशन सिस्टम बंद करने को क्यों कहा?
ऐसे AC और वेंटिलेशन सिस्टम बाहर की हवा को अंदर लाते हैं। इन्हें बंद रखने से हवा के साथ आने वाले रेडियोएक्टिव कणों को इमारत में प्रवेश करने से रोकने में मदद मिल सकती है।
Nuclear Fallout क्या होता है?
परमाणु विस्फोट के बाद रेडियोएक्टिव पदार्थ धूल और मलबे के साथ हवा में फैलते हैं और बाद में जमीन, इमारतों व दूसरी सतहों पर जम सकते हैं। इस रेडियोएक्टिव पदार्थ के फैलाव और जमाव को न्यूक्लियर फॉलआउट कहते हैं।
परमाणु विस्फोट के बाद रेडिएशन से खुद को कैसे बचाएं?
ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द मजबूत इमारत या बेसमेंट में पहुंचना चाहिए, खिड़कियों से दूर रहना चाहिए और बाहर की हवा लाने वाले AC बंद करने चाहिए। बाहर रहने के दौरान कपड़ों पर रेडियोएक्टिव धूल लगने की आशंका हो तो बाहरी कपड़े उतारकर त्वचा और बालों को साबुन-पानी से साफ करना चाहिए। सरकारी निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
क्या ईरान पर संभावित परमाणु हमले का खतरा है?
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तथा पिकैक्स माउंटेन को लेकर बयानबाजी हुई है, लेकिन अमेरिका या इजरायल ने ईरान पर परमाणु हमला करने की किसी योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। टकर कार्लसन का ऐसा दावा भी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।
Passive Defence Week क्या है?
पैसिव डिफेंस वीक ईरान में आयोजित होने वाला एक वार्षिक अभियान है। इसके तहत नागरिकों और संस्थानों को युद्ध, हमले और दूसरी आपात स्थितियों के दौरान सुरक्षा और बचाव के तरीकों के बारे में जागरूक किया जाता है।