US $20 Million Iran Nuclear Bounty : रूस के साथ यूरोप की सुरक्षा डील पर भड़के जेलेंस्की, क्यों बताया EU के लिए खतरनाक?
अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों, वैज्ञानिकों, उपकरणों और कर्मचारियों की जानकारी देने पर 20 मिलियन डॉलर तक के इनाम की घोषणा की है। ‘रिवार्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम के तहत जरूरत पड़ने पर सूचना देने वाले को दूसरी जगह बसाने की सुविधा भी मिलेगी।
अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी देने वालों के लिए 20 मिलियन डॉलर यानी करीब 178 करोड़ रुपए तक के इनाम की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के ‘रिवार्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम के तहत यह इनाम ईरान के परमाणु ठिकानों, वहां इस्तेमाल होने वाले उपकरणों, वैज्ञानिकों और दूसरे संबंधित कर्मचारियों की जानकारी देने पर दिया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर जानकारी देने वाले व्यक्ति को दूसरी जगह बसाने की सुविधा भी दी जाएगी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 6 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घोषणा की जानकारी साझा की।अमेरिकी सरकार का कहना है कि उसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी ऐसी जानकारी चाहिए, जिससे वहां की परमाणु गतिविधियों और उनसे जुड़े लोगों व संसाधनों की पहचान की जा सके। इसमें परमाणु सामग्री और उपकरणों की आवाजाही से जुड़ी जानकारी भी शामिल है। हालांकि, अधिकतम 20 मिलियन डॉलर का इनाम पाने के लिए किस तरह की जानकारी जरूरी होगी, इसकी विस्तृत शर्तें सार्वजनिक नोटिस में नहीं बताई गई हैं।

परमाणु ठिकानों से लेकर वैज्ञानिकों तक की जानकारी मांगी
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक ‘रिवार्ड्स फॉर जस्टिस’ पोर्टल पर जारी नोटिस के मुताबिक, ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी कई तरह की जानकारियां इनाम के दायरे में हैं। इनमें परमाणु ठिकानों की लोकेशन, वहां इस्तेमाल होने वाले उपकरण और तकनीक, परमाणु कार्यक्रम से जुड़े संगठन और कर्मचारी शामिल हैं।कार्यक्रम खास तौर पर परमाणु वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी भी चाहता है। इसके अलावा परमाणु गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और संसाधनों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की जानकारी भी मांगी गई है।
CENTCOM ने लोगों को इस जानकारी के साथ अमेरिकी सरकार के आधिकारिक रिपोर्टिंग चैनलों के जरिए संपर्क करने के लिए कहा है। इनाम की अधिकतम सीमा 20 मिलियन डॉलर है, लेकिन हर जानकारी देने वाले को इतनी रकम मिलने की गारंटी नहीं है। इनाम का फैसला सूचना की उपयोगिता और कार्यक्रम की शर्तों के आधार पर होगा।
60% तक यूरेनियम संवर्धन को लेकर अमेरिका की चिंता
अमेरिका ने इनाम की घोषणा के साथ ईरान की यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों का भी जिक्र किया है। अमेरिकी नोटिस में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि ईरान 60% शुद्धता तक यूरेनियम संवर्धित कर रहा था।यूरेनियम संवर्धन वह प्रक्रिया है, जिसमें यूरेनियम में मौजूद यूरेनियम-235 का अनुपात बढ़ाया जाता है। परमाणु ऊर्जा के नागरिक इस्तेमाल के लिए आमतौर पर इससे कम स्तर का संवर्धन पर्याप्त होता है, जबकि परमाणु हथियारों में इस्तेमाल होने वाले यूरेनियम की शुद्धता आमतौर पर करीब 90% होती है। इस लिहाज से 60% संवर्धन हथियार बनाने के लिए जरूरी स्तर के काफी करीब माना जाता है।
अमेरिकी नोटिस के मुताबिक, ईरान ऐसा करने वाला एकमात्र गैर-परमाणु हथियार संपन्न देश है। अमेरिकी कार्यक्रम ने विशेषज्ञों के आकलन का हवाला देते हुए कहा है कि इस स्तर तक संवर्धित यूरेनियम को आगे और शुद्ध करने पर उससे कई परमाणु हथियारों के लिए पर्याप्त सामग्री मिल सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान के पास परमाणु हथियार हैं, बल्कि यह उसके संवर्धित यूरेनियम के भंडार और उसकी निगरानी को लेकर चिंता का विषय है।
IAEA की निगरानी में कमी और सेंट्रीफ्यूज का मुद्दा
अमेरिकी नोटिस में ईरान और IAEA के बीच सुरक्षा निगरानी से जुड़े विवाद का भी जिक्र है। IAEA का कहना है कि ईरान की ओर से सुरक्षा समझौतों से जुड़ी जिम्मेदारियों का पालन नहीं किए जाने के कारण एजेंसी की निगरानी प्रभावित हुई है। इससे उसे ईरान में सेंट्रीफ्यूज के उत्पादन और मौजूदा भंडार की पूरी जानकारी रखने में मुश्किल हुई है।सेंट्रीफ्यूज ऐसी मशीनें होती हैं, जिनका इस्तेमाल यूरेनियम को संवर्धित करने के लिए किया जाता है। ये ईरान के परमाणु कार्यक्रम का अहम हिस्सा हैं। IAEA की मई 2025 की रिपोर्ट में कहा गया था कि एजेंसी ने सेंट्रीफ्यूज, उनके रोटर और बेलो जैसे जरूरी उपकरणों के उत्पादन और मौजूदा भंडार के बारे में अपनी ‘कंटिन्यूटी ऑफ नॉलेज’ यानी लगातार और भरोसेमंद जानकारी बनाए रखने की क्षमता खो दी है।
इसका मतलब है कि एजेंसी के पास इन उपकरणों की पूरी जानकारी और उनकी आवाजाही का लगातार सत्यापन करने की क्षमता नहीं रही। अमेरिका इसी निगरानी की कमी को अपनी चिंता का आधार बता रहा है।
पहले भी ईरान से जुड़ी जानकारी पर इनाम दे चुका है अमेरिका
अमेरिका इससे पहले भी ईरान से जुड़े नेटवर्क और गतिविधियों की जानकारी देने पर बड़े इनाम घोषित कर चुका है। साल 2019 में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उसकी कुद्स फोर्स के वित्तीय नेटवर्क को बाधित करने में मदद करने वाली जानकारी के लिए 15 मिलियन डॉलर तक के इनाम की घोषणा की थी। इसमें कथित अवैध तेल बिक्री, फ्रंट कंपनियों और प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नेटवर्क की जानकारी शामिल थी।इसके बाद 2024 में अमेरिका ने IRGC के सदस्य शाहराम पूरसाफी के बारे में जानकारी देने पर 20 मिलियन डॉलर तक का इनाम घोषित किया था। अमेरिकी अधिकारियों ने उस पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया था। अमेरिकी सरकार के मुताबिक, पूरसाफी ने अमेरिका में इस हत्या को अंजाम देने के लिए लोगों को काम पर रखने की कोशिश की थी।
ट्रंप के ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह करने के दावे के बाद इनाम
यह घोषणा ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद आई है। 21 जून 2025 को अमेरिका ने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के तहत फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन हमलों के बाद दावा किया था कि ईरान की प्रमुख परमाणु संवर्धन सुविधाएं पूरी तरह तबाह हो गई हैं।हालांकि, हमलों के बाद सामने आए अमेरिकी खुफिया आकलन ने इस दावे पर सवाल उठाए थे। रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नुकसान पहुंचा और उसे कुछ महीनों के लिए पीछे धकेला गया, लेकिन उसकी परमाणु क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि कुछ अहम उपकरण और ढांचा पूरी तरह नष्ट नहीं हुए थे।
IAEA और परमाणु विशेषज्ञों ने भी हमलों के बाद ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार की स्थिति और उसके स्थान को लेकर सवाल उठाए थे। ऐसे में अमेरिका का नया इनाम कार्यक्रम ईरान के परमाणु ठिकानों, उपकरणों और उनसे जुड़े लोगों की जानकारी जुटाने की एक और कोशिश है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम की जानकारी के लिए कितने डॉलर का इनाम घोषित किया है?
अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी देने पर 20 मिलियन डॉलर यानी करीब 178 करोड़ रुपए तक का इनाम घोषित किया है। जरूरत पड़ने पर जानकारी देने वाले व्यक्ति को दूसरी जगह बसाने की सुविधा भी दी जा सकती है।
अमेरिका का $20 मिलियन का इनाम किन जानकारियों के लिए दिया जाएगा?
यह इनाम ईरान के परमाणु ठिकानों, उपकरणों, वैज्ञानिकों, तकनीकी कर्मचारियों और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े संगठनों की जानकारी देने पर मिल सकता है। परमाणु संसाधनों और उपकरणों की आवाजाही से जुड़ी जानकारी भी इसके दायरे में है।
Rewards for Justice कार्यक्रम क्या है?
Rewards for Justice अमेरिकी विदेश मंत्रालय का एक इनाम कार्यक्रम है। इसकी शुरुआत 1984 में हुई थी। इसके तहत अमेरिकी नागरिकों और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा में मदद करने वाली जानकारी देने वालों को आर्थिक इनाम दिया जाता है।
ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों और सुविधाओं से जुड़ी जानकारी क्यों मांगी जा रही है?
अमेरिका ईरान के यूरेनियम संवर्धन, परमाणु उपकरणों और वैज्ञानिक गतिविधियों पर नजर रखना चाहता है। IAEA की निगरानी में आई कमी के कारण ईरान के सेंट्रीफ्यूज और दूसरे परमाणु संसाधनों की पूरी जानकारी जुटाना भी मुश्किल हुआ है।
क्या इनाम पाने वाले व्यक्ति को स्थानांतरण की सुविधा भी दी जाएगी?
हां। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इनाम के साथ जरूरत पड़ने पर जानकारी देने वाले व्यक्ति को दूसरी जगह बसाने की सुविधा भी दी जा सकती है। इसका उद्देश्य उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।