G20 बैठक में दुनिया के बड़े देश आमने-सामने! रूस-यूक्रेन से ईरान तक उलझे मुद्दे, बिना सहमति खत्म हुई Atlanta Meeting
अटलांटा में हुई G20 विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक कई अहम वैश्विक मुद्दों पर सहमति के बिना समाप्त हो रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान और व्यापारिक तनावों के बीच संयुक्त बयान जारी नहीं होगा। इसकी जगह अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio अध्यक्षीय बयान जारी करेंगे।
दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के विदेश मंत्री एक मंच पर जुटे, लेकिन वैश्विक तनावों पर एक राय नहीं बना सके। G20 foreign ministers meeting Atlanta में रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-ईरान तनाव, व्यापारिक टकराव और दक्षिण चीन सागर जैसे मुद्दों पर मतभेद इतने गहरे रहे कि बैठक के अंत में साझा बयान जारी करने पर सहमति नहीं बन पाई। दो दिवसीय बैठक शनिवार को समाप्त हो रही है। राजनयिकों के मुताबिक, सदस्य देश संयुक्त कम्युनिके की जगह अध्यक्षीय बयान पर निर्भर रहेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio बैठक के समापन पर यह बयान जारी करेंगे। यह घटनाक्रम दिखाता है कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग की राह कितनी चुनौतीपूर्ण हो गई है।
G20 meeting without consensus: क्यों नहीं बन पाई देशों के बीच सहमति?

G20 बैठक में कई ऐसे मुद्दे सामने आए, जिन पर सदस्य देशों के हित और रणनीतिक नजरिए एक-दूसरे से टकराते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर पश्चिमी देशों और रूस के बीच गहरे मतभेद रहे। इसके अलावा अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष, अमेरिकी टैरिफ और दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियां भी चर्चा के केंद्र में रहीं।इन तनावों का असर केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है। ऊर्जा आपूर्ति, ईंधन की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता भी बढ़ी है।पोलैंड के विदेश मंत्री Radoslaw Sikorski ने बैठक में सहमति न बनने पर हैरानी नहीं जताई। उन्होंने कहा कि जब युद्ध जारी हों और उनमें शामिल देश एक ही मेज पर बैठे हों, तो साझा रुख तय करना बेहद मुश्किल हो जाता है।बैठक में शामिल राजनयिकों के अनुसार, सभी देशों ने मतभेदों के बावजूद बातचीत जारी रखने और अगले महीने होने वाले G20 नेताओं के शिखर सम्मेलन को सफल बनाने की कोशिश पर सहमति जताई।
रूस की मौजूदगी पर यूरोपीय देशों की नाराजगी, फोटो सेशन भी रद्द
Atlanta G20 meeting की शुरुआत से ही रूस की भागीदारी विवाद का विषय बनी रही। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने बैठक के उद्घाटन में एकता की अपील की थी, लेकिन शुक्रवार को विदेश मंत्रियों का पारंपरिक समूह फोटो रद्द कर दिया गया। यूरोपीय राजनयिकों ने रूसी विदेश मंत्री Sergey Lavrov की मौजूदगी पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने फोटो सेशन का बहिष्कार करने या वहां से बाहर चले जाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद समूह फोटो नहीं कराया गया। रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने यूक्रेन को लेकर मॉस्को का पुराना रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि रूस ऐसी स्थिति स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें यूक्रेन उसके वैध सुरक्षा हितों के लिए सैन्य खतरा बने। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था। इसके बाद पश्चिमी देशों ने मॉस्को पर कई प्रतिबंध लगाए। इसी वजह से Lavrov की NATO सदस्य देशों की यात्राएं भी सीमित रही हैं। इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन के लिए 2.1 अरब डॉलर के Patriot Air Defence Interceptors की प्रस्तावित बिक्री को मंजूरी देने की घोषणा की। इससे बैठक के दौरान रूस-यूक्रेन संघर्ष पर कूटनीतिक तनाव और स्पष्ट दिखाई दिया।
ईरान युद्ध और Strait of Hormuz पर भी बढ़ी चिंता
G20 foreign policy discussions में समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और सुरक्षा भी प्रमुख मुद्दा रही। अमेरिका की प्राथमिकताओं में Strait of Hormuz, Red Sea, Black Sea और South China Sea में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना शामिल था। ईरान को लेकर बढ़ते सैन्य तनाव ने इस चर्चा को और संवेदनशील बना दिया। अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका से पश्चिम एशिया के कई देश चिंतित हैं। इनमें G20 सदस्य सऊदी अरब भी शामिल है। बैठक के दौरान Marco Rubio ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan और तुर्किये के विदेश मंत्री Hakan Fidan से अलग-अलग मुलाकात की। तुर्किये इस क्षेत्र में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। Associated Press की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने मध्य पूर्व के कई देशों और क्षेत्रीय सहयोगियों को संभावित नए सैन्य हमलों के लिए तैयार रहने को कहा है। रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई कि अमेरिका मंगलवार के मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान पर दोबारा हमले कर सकता है और इसके जवाब में ईरान क्षेत्रीय देशों को निशाना बना सकता है।
G20 बैठक के नतीजे वैश्विक कूटनीति के लिए क्या संकेत देते हैं?
G20 का उद्देश्य दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग, वित्तीय स्थिरता और वैश्विक चुनौतियों पर समन्वय बढ़ाना है। लेकिन इस बार अटलांटा में हुई बैठक ने दिखाया कि भू-राजनीतिक संघर्ष आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग को भी प्रभावित कर रहे हैं। संयुक्त बयान जारी नहीं होना इस बात का संकेत है कि सदस्य देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर साझा रुख बनाना आसान नहीं है। अब सबकी नजर अगले महीने फ्लोरिडा में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की मेजबानी में होने वाले G20 नेताओं के शिखर सम्मेलन पर है।
निष्कर्ष
G20 foreign ministers meeting Atlanta का बिना साझा सहमति समाप्त होना वैश्विक कूटनीति के सामने खड़ी चुनौतियों को उजागर करता है। रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर ईरान और व्यापारिक तनावों तक, दुनिया के बड़े देशों के बीच मतभेद गहरे हैं। अब देखना होगा कि नेताओं का अगला शिखर सम्मेलन इन दूरियों को कम कर पाता है या नहीं।
FAQ (Frequently Asked Questions):
G20 विदेश मंत्रियों की बैठक अटलांटा में क्यों आयोजित की गई?
इस बैठक का उद्देश्य G20 देशों के बीच वैश्विक सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और अन्य प्रमुख कूटनीतिक मुद्दों पर चर्चा करना था।
बैठक में किन प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई?
रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव, अमेरिकी टैरिफ और दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों पर देशों के बीच मतभेद रहे।
G20 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
G20 दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसका उद्देश्य वैश्विक आर्थिक सहयोग, वित्तीय स्थिरता और साझा अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर समन्वय बढ़ाना है।
G20 देशों के बीच सहमति बनना क्यों महत्वपूर्ण है?
सहमति से वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों पर साझा रणनीति बनाने में मदद मिलती है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और राजनीतिक स्थिरता को मजबूती मिल सकती है।
इस बैठक के नतीजों का वैश्विक कूटनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
संयुक्त बयान जारी नहीं होने से देशों के बीच मतभेद उजागर हुए हैं। इसका असर अगले G20 शिखर सम्मेलन की चर्चाओं और वैश्विक सहयोग की कोशिशों पर पड़ सकता है।