2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस: फांसी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, दोषी मोहम्मद तनवीर की अपील में अब क्या होगा?
2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में दोषी मोहम्मद तनवीर की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने जेल में आचरण, प्रोबेशन और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की रिपोर्ट मांगी है। अब 12 सप्ताह बाद मामले पर सुनवाई होगी।
2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों में 56 लोगों की मौत और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस मामले में मौत की सजा पाए मोहम्मद तनवीर की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। Ahmedabad Serial Blasts Convict Execution मामले में अदालत ने उसकी अपील पर सुनवाई करने की सहमति देते हुए संबंधित रिकॉर्ड और कई रिपोर्ट तलब की हैं। हालांकि, यह आदेश दोषी को बरी किए जाने का फैसला नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद तनवीर की फांसी पर क्यों लगाई रोक?

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने गुजरात हाई कोर्ट के 7 जुलाई के फैसले को चुनौती देने वाली तनवीर की याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। हाई कोर्ट ने इस मामले में 38 दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी थी। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर के आदेश में कहा कि अपीलकर्ता तनवीर को दी गई मौत की सजा के अमल पर रोक रहेगी। अदालत ने ट्रायल कोर्ट और गुजरात हाई कोर्ट से मूल केस रिकॉर्ड मंगाने का निर्देश भी दिया।
Ahmedabad Serial Blasts Convict Execution मामले में कोर्ट ने कौन-सी रिपोर्ट मांगी?
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को आठ सप्ताह के भीतर तनवीर से संबंधित सभी प्रोबेशन अधिकारियों की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। संबंधित जेल के अधीक्षक को भी इसी समयसीमा में रिपोर्ट देनी होगी।इस रिपोर्ट में जेल में तनवीर द्वारा किए गए काम, उसके आचरण और व्यवहार का विवरण शामिल होगा। इसके अलावा, जेल अधीक्षक को सरकारी मेडिकल अस्पताल से तनवीर का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन भी करवाना होगा और उसकी रिपोर्ट अदालत में जमा करनी होगी।सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 12 सप्ताह बाद सूचीबद्ध किया है। इससे पहले 1 अक्टूबर को अदालत ने इसी मामले में दोषी अहमद बावा उर्फ अब्बू अबुबकर बरेलवी की मौत की सजा पर भी रोक लगाई थी।
2008 Ahmedabad Serial Blasts: आखिर क्या हुआ था उस दिन?
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में महज 70 मिनट के भीतर 21 बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई और 200 से अधिक लोग घायल हुए। इस मामले में अहमदाबाद धमाकों और सूरत में मिले बिना फटे बमों से जुड़े कुल 35 पुलिस केसों को एक साथ जोड़ा गया था।कुल 78 लोगों पर मुकदमा चला। विशेष अदालत ने फरवरी 2022 में 49 लोगों को दोषी ठहराया था। इनमें से 38 को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद दी गई। एक ही मामले में 38 दोषियों को मौत की सजा सुनाया जाना उस समय अदालत के इतिहास में एक असाधारण फैसला था।
गुजरात हाई कोर्ट ने मौत की सजा क्यों बरकरार रखी?
गुजरात हाई कोर्ट ने दोषियों की अपील खारिज करते हुए विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट के मुताबिक, अभियोजन पक्ष के साक्ष्य और दोषियों की भूमिका से आतंकवादी साजिश में उनकी भागीदारी स्थापित हुई थी।अदालत ने बड़ी संख्या में लोगों की मौत, व्यापक आतंक फैलाने की साजिश, निर्दोष लोगों की जान जाने और अपराध की गंभीरता को मौत की सजा बरकरार रखने के प्रमुख आधारों में शामिल किया। उम्रकैद पाए 11 दोषियों की सजा भी बरकरार रखी गई। अभियोजन के अनुसार, इन दोषियों की भूमिका में आतंकी प्रशिक्षण शिविरों में भागीदारी, साजिश में इस्तेमाल होने वाले स्कूटर, प्लास्टिक कंटेनर और घड़ियों की व्यवस्था तथा अन्य आरोपियों को ठिकाना उपलब्ध कराना शामिल था।
मौत की सजा पर रोक का क्या मतलब है?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी पर रोक लगाए जाने का अर्थ है कि अपील पर आगे विचार होने तक तनवीर की मौत की सजा को अमल में नहीं लाया जाएगा। यह न तो दोषसिद्धि रद्द होने का फैसला है और न ही बरी किए जाने का आदेश। अदालत अब अपील, केस रिकॉर्ड और मांगी गई रिपोर्टों पर विचार करेगी।
निष्कर्ष
Ahmedabad Serial Blasts Convict Execution मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश मोहम्मद तनवीर की मौत की सजा के अमल को फिलहाल रोकता है, लेकिन दोषसिद्धि पर अंतिम फैसला नहीं है। अब अदालत उसकी अपील, केस रिकॉर्ड और संबंधित रिपोर्टों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Supreme Court ने Ahmedabad Serial Blasts Case में फांसी पर रोक क्यों लगाई?
सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद तनवीर की अपील पर सुनवाई स्वीकार करते हुए जेल, प्रोबेशन और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की रिपोर्ट मांगी है। इस दौरान उसकी मौत की सजा पर रोक लगाई गई है।
2008 Ahmedabad Serial Blasts में क्या हुआ था?
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में 70 मिनट के भीतर 21 बम धमाके हुए थे। इनमें 56 लोगों की मौत हुई और 200 से अधिक लोग घायल हुए।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद तनवीर को बरी कर दिया है?
अदालत ने केवल मौत की सजा के अमल पर रोक लगाई है। उसकी अपील पर आगे सुनवाई होनी है।
Ahmedabad Serial Blasts Case में कितने लोगों को दोषी ठहराया गया था?
विशेष अदालत ने 49 लोगों को दोषी ठहराया था। इनमें 38 को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई कब होगी?
अदालत ने मामले को 12 सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। जेल, प्रोबेशन और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की रिपोर्ट आठ सप्ताह के भीतर मांगी गई है।