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ईरान के तेल कारोबार में भारतीय दंपती का बड़ा खेल? अमेरिका ने लगाया प्रतिबंध, फर्जी जहाज रजिस्ट्रेशन से जुड़ा मामला

अमेरिका ने भारतीय दंपती सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद पर प्रतिबंध लगाए हैं। आरोप है कि उन्होंने फर्जी समुद्री रजिस्ट्रेशन और प्रमाणपत्रों के जरिए ईरान के प्रतिबंधित तेल कारोबार में शामिल जहाजों की मदद की।

ईरान के तेल कारोबार में भारतीय दंपती का बड़ा खेल? अमेरिका ने लगाया प्रतिबंध, फर्जी जहाज रजिस्ट्रेशन से जुड़ा मामला

ईरान के तेल कारोबार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच भारत से जुड़ा एक मामला सामने आया है। अमेरिका ने US Sanctions Indian Couple Iran Oil Trade कार्रवाई के तहत भारतीय नागरिक सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, दंपती ने कथित तौर पर फर्जी समुद्री पहचान, झंडे और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराकर ईरान के प्रतिबंधित तेल कारोबार में शामिल जहाजों की मदद की। इन जहाजों में ईरानी सेना और उससे जुड़े संगठनों की ओर से संचालित जहाज भी शामिल बताए गए हैं।

अमेरिका ने भारतीय दंपती पर क्यों लगाया प्रतिबंध?

The shadow fleet refers to vessels involved in Russian, Iranian, and Venezuelan crude oil and petroleum products trade. (Source: File)
The shadow fleet refers to vessels involved in Russian, Iranian, and Venezuelan crude oil and petroleum products trade. (Source: File)

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के आरोपों के मुताबिक, सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी ने कई देशों के समुद्री नियामक प्रशासन को धोखा देकर फर्जी जहाज रजिस्ट्रेशन प्राधिकरण और समुद्री वर्गीकरण संस्थाएं स्थापित कीं। इन कथित संस्थाओं के जरिए ईरान के तेल की ढुलाई करने वाले प्रतिबंधित जहाजों को झूठे झंडे और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए गए। इससे जहाजों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचकर अपना परिचालन जारी रखने में मदद मिलती थी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत ईरानी शासन की मदद करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे जमीन, समुद्र या हवाई रास्ते से ऐसा करें।

US Sanctions Indian Couple Iran Oil Trade: कैसे चलता था कथित फर्जीवाड़ा?

अमेरिकी आरोपों के अनुसार, इस कथित नेटवर्क की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। उस समय दंपती ने डोमिनिका के जहाजों के झंडे जारी करने वाले अधिकृत प्राधिकरण के रूप में खुद को पेश करने की कोशिश की थी। इसके बाद वर्ष 2023 में शर्मा ने सिंगापुर में Eswatini Maritime Affairs and International Ship Registry PTE. Ltd. नाम की कंपनी स्थापित की। इसे Eswatini Maritime के नाम से भी जाना जाता है। अमेरिका का आरोप है कि इस कंपनी ने ईरानी पेट्रोलियम की ढुलाई करने वाले जहाजों को झंडा संबंधी सेवाएं दीं, जबकि एस्वातिनी के अधिकारियों ने ऐसी गतिविधियों को पहले ही अस्वीकार कर दिया था।

फर्जी वेबसाइट बनाकर कई देशों के नाम का इस्तेमाल करने का आरोप

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, दंपती ने कथित तौर पर ऐसी फर्जी वेबसाइटें भी बनाईं, जिन पर अलग-अलग देशों की ओर से समुद्री सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था। इन सेवाओं में जहाजों का पंजीकरण, नाविकों को प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र देना तथा जहाजों का वर्गीकरण शामिल था। आरोप है कि उन्होंने गुयाना से लेकर एस्वातिनी और लाओस तक कई देशों का प्रतिनिधित्व करने का दावा किया। जबकि संबंधित देशों ने उन्हें ऐसी सेवाएं देने की अनुमति नहीं दी थी। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय समुद्री कारोबार में जहाज का झंडा उसकी राष्ट्रीय पहचान और नियामकीय जिम्मेदारी से जुड़ा होता है। जहाज जिस देश के झंडे के तहत पंजीकृत होता है, उस देश के नियमों और निगरानी व्यवस्था का पालन करना होता है। ऐसे में फर्जी रजिस्ट्रेशन के जरिए जहाजों की वास्तविक पहचान और परिचालन पर निगरानी मुश्किल हो सकती है।

ईरान के तेल व्यापार पर अमेरिकी प्रतिबंधों का क्या है असर?

अमेरिका लंबे समय से ईरान के पेट्रोलियम कारोबार और उससे जुड़े नेटवर्क पर आर्थिक प्रतिबंध लगाता रहा है। प्रतिबंधित तेल की ढुलाई में शामिल जहाजों और कंपनियों की पहचान करने के लिए अमेरिकी एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, जहाजों के रजिस्ट्रेशन और समुद्री सेवाओं की निगरानी करती हैं। Iran Oil Trade Sanctions 2026 के तहत इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले नेटवर्क पर दबाव बनाना है। भारतीय दंपती पर की गई कार्रवाई भी इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा बताई गई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में दंपती की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने आरोपों के समर्थन में अपना पक्ष रखा है, लेकिन इस रिपोर्ट में किसी अदालत के फैसले या आरोपों पर न्यायिक निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है।

निष्कर्ष

US Sanctions Indian Couple Iran Oil Trade का मामला दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए कथित तौर पर फर्जी जहाज रजिस्ट्रेशन और समुद्री प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है। अमेरिका की कार्रवाई ईरान के तेल कारोबार से जुड़े ऐसे नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने की कोशिश है। हालांकि, भारतीय दंपती पर लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति और आगे की कानूनी कार्रवाई से जुड़े तथ्य सामने आना अभी बाकी है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

अमेरिका ने भारतीय दंपती पर प्रतिबंध क्यों लगाए हैं?

अमेरिकी वित्त मंत्रालय का आरोप है कि सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद ने फर्जी समुद्री रजिस्ट्रेशन और प्रमाणपत्रों के जरिए ईरान के प्रतिबंधित तेल कारोबार में शामिल जहाजों की मदद की।

ईरान के तेल कारोबार से जुड़े भारतीय दंपती कौन हैं?

अमेरिका की ओर से प्रतिबंधित भारतीय दंपती की पहचान सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद के रूप में की गई है।

अमेरिका के अनुसार भारतीय दंपती पर क्या आरोप लगाए गए हैं?

उन पर कई देशों के नाम से फर्जी समुद्री प्राधिकरण और वेबसाइटें चलाने, जहाजों को झूठे झंडे और प्रमाणपत्र देने तथा प्रतिबंधित ईरानी तेल की ढुलाई में मदद करने के आरोप हैं।

Operation Economic Outcast क्या है?

यह अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के बयान में उल्लेखित अभियान है, जिसके तहत ईरानी शासन को आर्थिक या अन्य माध्यमों से समर्थन देने वाले नेटवर्क के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।

अमेरिकी प्रतिबंधों का भारतीय कंपनियों और ईरान के तेल व्यापार पर क्या असर हो सकता है?

ऐसी कार्रवाई से प्रतिबंधित नेटवर्क से जुड़े कारोबार, वित्तीय लेनदेन और समुद्री सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इस मामले में भारतीय कंपनियों पर व्यापक असर को लेकर उपलब्ध रिपोर्ट में कोई विशिष्ट आकलन नहीं दिया गया है।

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