दुश्मन के रडार को चकमा देकर 500 KM दूर तक वार करेगी ‘प्रलय’! डीआरडीओ का मिसाइल परीक्षण सफल, एक साथ साधे दो लक्ष्य
भारत ने स्वदेशी ‘प्रलय’ क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल का ओडिशा तट से सफल परीक्षण किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिसाइल ने करीब 500 किलोमीटर दूर दो सिम्युलेटेड लक्ष्यों को निशाना बनाया। इसकी खासियत है उड़ान के दौरान रास्ता बदलने की क्षमता।
भारत की रक्षा ताकत को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम सामने आया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्वदेशी DRDO Pralay Missile Test 2026 को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से दागी गई इस मिसाइल ने करीब 500 किलोमीटर दूर दो निर्धारित सिम्युलेटेड लक्ष्यों को निशाना बनाया। यह परीक्षण भारत की स्वदेशी मिसाइल तकनीक और सटीक मारक क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ओडिशा तट से हुआ परीक्षण, 2,500 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित हटाया गया

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रलय मिसाइल का परीक्षण 3 नवंबर को ओडिशा के बालासोर जिले के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) के लॉन्च कॉम्प्लेक्स-3 से किया गया। मिसाइल ने करीब 500 किलोमीटर दूर मौजूद दो सिम्युलेटेड लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। परीक्षण से पहले सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के गांवों से 2,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। हालांकि, इस ताजा परीक्षण को लेकर डीआरडीओ की ओर से आधिकारिक बयान जारी होने की जानकारी उपलब्ध स्रोत में नहीं है। फिलहाल परीक्षण की सफलता से जुड़ी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।
DRDO Pralay Missile Test 2026: क्या है प्रलय मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत?
प्रलय भारत में विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता 500 किलोमीटर तक बताई गई है और यह अलग-अलग प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी खासियत उड़ान के दौरान रास्ता बदलने की क्षमता है। पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलें आमतौर पर एक अनुमानित प्रक्षेपवक्र पर आगे बढ़ती हैं, लेकिन क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर उड़ान भर सकती है और रास्ते में अपनी दिशा बदल सकती है। इस वजह से दुश्मन के रडार और मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए इसे ट्रैक करना और रोकना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रलय मिसाइल ने अपनी अंतिम उड़ान अवस्था में मैक-5 तक की गति हासिल की। हालांकि, इस गति की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
मोबाइल लॉन्चर से दागी जा सकती है, कई तरह के वारहेड ले जाने में सक्षम
प्रलय मिसाइल में ठोस ईंधन आधारित रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया गया है। इसका फायदा यह है कि मिसाइल को लंबे समय तक लॉन्च के लिए तैयार स्थिति में रखा जा सकता है। इसे मोबाइल प्लेटफॉर्म से भी लॉन्च किया जा सकता है, जिससे सैन्य अभियानों के दौरान इसकी तैनाती में लचीलापन मिलता है। मिसाइल में उन्नत गाइडेंस और नेविगेशन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है, जो लक्ष्य को सटीकता से भेदने में मदद करती है। इसके निर्माण और सिस्टम इंटीग्रेशन में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।
2021 से अब तक कई सफल परीक्षण, सेना में शामिल करने की तैयारी
प्रलय मिसाइल का पहला परीक्षण दिसंबर 2021 में किया गया था। इसके बाद जुलाई 2025 में डीआरडीओ ने ओडिशा तट से लगातार दो सफल उड़ान परीक्षण किए। दिसंबर 2025 में दो प्रलय मिसाइलों का एक ही लॉन्चर से कम अंतराल में सैल्वो लॉन्च भी किया गया था। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, दोनों मिसाइलों ने अपने निर्धारित रास्ते का पालन किया और उड़ान से जुड़े सभी लक्ष्य पूरे किए। चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज के ट्रैकिंग सेंसर और प्रभाव क्षेत्र के पास तैनात जहाज पर लगे टेलीमेट्री सिस्टम से इनके प्रदर्शन की पुष्टि की गई थी। इस मिसाइल को भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना में शामिल करने की योजना है। इसकी सटीक मारक क्षमता और मोबाइल लॉन्चिंग की सुविधा पारंपरिक रक्षा तैयारियों को मजबूत कर सकती है।
निष्कर्ष
DRDO Pralay Missile Test 2026 भारत के स्वदेशी रक्षा विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 500 किलोमीटर तक की मारक क्षमता, रास्ता बदलकर उड़ान भरने की क्षमता और मोबाइल लॉन्चिंग जैसी खूबियां इसे खास बनाती हैं। प्रलय का विकास और सफल परीक्षण भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के साथ सेना की पारंपरिक मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी अहम कदम है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
डीआरडीओ ने प्रलय मिसाइल का परीक्षण कहां किया?
प्रलय मिसाइल का परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसे लॉन्च कॉम्प्लेक्स-3 से दागा गया था।
प्रलय मिसाइल की मारक क्षमता कितनी है?
प्रलय मिसाइल की अधिकतम मारक क्षमता 500 किलोमीटर तक बताई गई है। ताजा परीक्षण में इसने करीब 500 किलोमीटर दूर दो सिम्युलेटेड लक्ष्यों को निशाना बनाया।
प्रलय मिसाइल को किस प्रकार की मिसाइल माना जाता है?
प्रलय सतह से सतह पर मार करने वाली क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है। यह उड़ान के दौरान अपनी दिशा बदल सकती है, जिससे इसे रोकना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
प्रलय मिसाइल में किस प्रकार के प्रणोदक का इस्तेमाल किया गया है?
इस मिसाइल में ठोस प्रणोदक आधारित रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया गया है। इससे इसे लंबे समय तक लॉन्च के लिए तैयार रखा जा सकता है।
प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण भारतीय रक्षा क्षमता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
इसकी लंबी मारक क्षमता, सटीक निशाना लगाने की तकनीक और मोबाइल लॉन्चिंग की सुविधा भारतीय सेना और वायुसेना की पारंपरिक मारक क्षमता को मजबूत कर सकती है।