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समंदर में 3,000 KM दूर भारतीय नौसेना का बड़ा ऑपरेशन! सोमालियाई समुद्री लुटेरों से 20 लोगों को ऐसे बचाया

भारतीय नौसेना ने अरब सागर में 48 घंटे तक चले ऑपरेशन में अपहृत ईरानी मछली पकड़ने वाले जहाज Azini और उसके 20 सदस्यों को समुद्री लुटेरों से सुरक्षित मुक्त कराया। अभियान में भारतीय वायुसेना ने भी सहयोग दिया।

समंदर में 3,000 KM दूर भारतीय नौसेना का बड़ा ऑपरेशन! सोमालियाई समुद्री लुटेरों से 20 लोगों को ऐसे बचाया

हिंद महासागर में समुद्री लुटेरों के लिए अब दूरी भी सुरक्षा की गारंटी नहीं रह गई है। भारतीय नौसेना ने मुंबई से 3,000 किलोमीटर से अधिक दूर अरब सागर में एक बड़ा अभियान चलाकर अपहृत जहाज और उसके 20 सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया। Indian Navy Pirate Rescue Operation के नाम से चर्चा में आया यह अभियान भारतीय नौसेना की लंबी दूरी तक पहुंचने और समुद्र में लगातार तैनात रहने की क्षमता का बड़ा उदाहरण है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस सफल अभियान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जहाज और चालक दल का तेजी से पता लगाना, उसे रोकना और सभी सदस्यों को सुरक्षित मुक्त कराना नौसेना की उच्च परिचालन तैयारियों को दर्शाता है। इस अभियान में भारतीय वायुसेना (IAF) ने भी समय पर सहयोग दिया।

समुद्री लुटेरों ने कैसे किया जहाज Azini का अपहरण?

Armed MARCOS aboard the hijacked fishing vessel as destroyer INS Kolkata stands by in the Arabian Sea.Photo| X/Rajnath Singh
Armed MARCOS aboard the hijacked fishing vessel as destroyer INS Kolkata stands by in the Arabian Sea.Photo| X/Rajnath Singh

यूरोपीय संघ के नेतृत्व वाले Maritime Security Centre-Indian Ocean (MSCIO) और पुंटलैंड समुद्री पुलिस के अनुसार, ईरानी मछली पकड़ने वाले जहाज Azini को पिछले गुरुवार सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट के पास 12 हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने अपने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद MSCIO ने जहाज की गतिविधियों पर नजर रखी। निगरानी में सामने आया कि जहाज पूर्व दिशा में एक व्यस्त व्यापारिक समुद्री मार्ग की ओर बढ़ रहा था। आशंका जताई गई कि समुद्री लुटेरे इस जहाज को 'मदरशिप' यानी बड़े समुद्री जहाजों पर हमले करने के लिए तैरते हुए ठिकाने के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। सोमालियाई समुद्री लुटेरे अक्सर मछली पकड़ने वाली नौकाओं और धौ जहाजों को कब्जे में लेकर उनका इस्तेमाल बड़े व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए करते हैं। ऐसे में Azini को समय रहते मुक्त कराना महत्वपूर्ण था।

Indian Navy Pirate Rescue Operation: 48 घंटे तक चला अभियान

भारतीय नौसेना ने अरब सागर में करीब 48 घंटे तक अभियान चलाकर जहाज और उसके सभी 20 सदस्यों को सुरक्षित मुक्त कराया। इस ऑपरेशन में नौसेना के युद्धपोत INS Kolkata ने अहम भूमिका निभाई। भारतीय वायुसेना ने भी अभियान को समय पर सहयोग दिया। रक्षा मंत्री की ओर से साझा की गई तस्वीर में INS Kolkata जहाज के पास खड़ा दिखाई दे रहा है। तस्वीर में हथियारबंद कमांडो जहाज के डेक पर बैठे संदिग्ध समुद्री लुटेरों की निगरानी करते नजर आ रहे हैं। उनके पास जब्त किए गए हथियार भी रखे दिखाई देते हैं। हालांकि, नौसेना ने अभी तक इस अभियान में शामिल अन्य युद्धपोतों और विमानों का विस्तृत ब्योरा जारी नहीं किया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि पकड़े गए समुद्री लुटेरों को Maritime Anti-Piracy Act, 2022 के तहत मुकदमे के लिए भारत लाया जाएगा या नहीं।

2024 के ऑपरेशन से भी ज्यादा दूर पहुंची भारतीय नौसेना

यह अभियान मार्च 2024 में भारतीय नौसेना के चर्चित एंटी-पायरेसी ऑपरेशन से भी अधिक दूरी पर चलाया गया। उस समय INS Kolkata ने भारतीय तट से करीब 2,600 किलोमीटर दूर समुद्री लुटेरों के जहाज MV Ruen को रोका था। उस अभियान में भारतीय वायुसेना के C-17 विमान ने करीब 10 घंटे की उड़ान भरकर MARCOS कमांडो और दो लड़ाकू नौकाओं को पैराशूट के जरिए समुद्र में उतारा था। करीब 40 घंटे के गतिरोध के बाद सभी 35 समुद्री लुटेरों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। भारतीय नौसेना ने जनवरी 2024 में भी INS Sumitra के जरिए दो ईरानी मछली पकड़ने वाले जहाजों Iman और Al Naeemi को 36 घंटे से कम समय में मुक्त कराया था। इन जहाजों पर सवार 36 लोगों को सुरक्षित बचाया गया था। इसके दो महीने बाद INS Sumedha और INS Trishul ने Al-Kambar जहाज के 23 पाकिस्तानी सदस्यों को भी बचाया था।

हिंद महासागर में भारत की समुद्री ताकत क्यों है अहम?

इस अभियान का महत्व केवल 20 लोगों को बचाने तक सीमित नहीं है। हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) भारत के व्यापार और ऊर्जा आयात के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां समुद्री मार्गों की सुरक्षा देश की आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों से जुड़ी है। सोमालियाई समुद्री लुटेरों की गतिविधियां दोबारा बढ़ने के बाद से भारतीय नौसेना जनवरी 2024 से अरब सागर और अदन की खाड़ी में लगातार युद्धपोत तैनात कर रही है। दूर समुद्र में किसी छोटे मछली पकड़ने वाले जहाज का पता लगाना, युद्धपोतों और विमानों को लंबे समय तक तैनात रखना और अलग-अलग सैन्य इकाइयों के बीच तालमेल बनाए रखना आसान नहीं होता। यह क्षमता किसी नौसेना को ब्लू-वॉटर फोर्स बनाती है, जो अपने तटों से काफी दूर जाकर भी अभियान चला सकती है। इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी के बीच भारत की ऐसी क्षमता का रणनीतिक महत्व और बढ़ जाता है। चीन अदन की खाड़ी में एंटी-पायरेसी टास्क फोर्स तैनात करता है और जिबूती में उसका पहला विदेशी सैन्य अड्डा भी है।

निष्कर्ष

Indian Navy Pirate Rescue Operation ने दिखाया है कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर में अपने तटों से हजारों किलोमीटर दूर भी प्रभावी अभियान चला सकती है। 48 घंटे की कार्रवाई में 20 लोगों को सुरक्षित बचाना न केवल मानवीय सफलता है, बल्कि भारत की समुद्री सुरक्षा और ब्लू-वॉटर क्षमता का भी महत्वपूर्ण प्रदर्शन है। अब यह देखना बाकी है कि पकड़े गए समुद्री लुटेरों के खिलाफ आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

भारतीय नौसेना ने समुद्री लुटेरों से कितने लोगों को सुरक्षित बचाया?

Indian Navy Rescues 20 Crew Members अभियान में नौसेना ने अपहृत जहाज Azini पर सवार सभी 20 सदस्यों को सुरक्षित मुक्त कराया।

समुद्री लुटेरों ने किस मछली पकड़ने वाले जहाज का अपहरण किया था?

समुद्री लुटेरों ने ईरानी मछली पकड़ने वाले जहाज Azini का अपहरण किया था। इसे सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट के पास 12 हथियारबंद लोगों ने कब्जे में लिया था।

भारतीय नौसेना का यह रेस्क्यू ऑपरेशन मुंबई से कितनी दूरी पर चलाया गया?

यह अभियान मुंबई से 3,000 किलोमीटर से अधिक दूर अरब सागर में चलाया गया था।

इस अभियान में INS Kolkata और भारतीय वायुसेना की क्या भूमिका रही?

INS Kolkata ने समुद्र में अभियान के दौरान अहम भूमिका निभाई, जबकि भारतीय वायुसेना ने समय पर सहयोग दिया। हालांकि, अभियान में शामिल अन्य युद्धपोतों और विमानों का विवरण अभी जारी नहीं किया गया है।

भारतीय नौसेना का यह अभियान हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

यह अभियान समुद्री व्यापार मार्गों को समुद्री लुटेरों से सुरक्षित रखने और भारत की Indian Navy Blue Water Capability को प्रदर्शित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इन मार्गों से भारत का बड़ा व्यापार और ऊर्जा आयात जुड़ा है।

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