Home / National / 7 दिन जेल में रहने के बाद CJP के नेताओं की रिहाई, जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने से क्यों मचा था विवाद?
National

7 दिन जेल में रहने के बाद CJP के नेताओं की रिहाई, जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने से क्यों मचा था विवाद?

दिल्ली में जंतर-मंतर के गेट पर चढ़कर राष्ट्रीय ध्वज लहराने के मामले में न्यायिक हिरासत में भेजे गए CJP प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका रिहा हो गए हैं। हालांकि, मामले की जांच जारी रहेगी और अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।

7 दिन जेल में रहने के बाद CJP के नेताओं की रिहाई, जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने से क्यों मचा था विवाद?

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन, राष्ट्रीय ध्वज और कानून के उल्लंघन से जुड़ा एक मामला चर्चा में है। CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका को सात दिन न्यायिक हिरासत में रहने के बाद रिहा करने का आदेश दिया गया है। दोनों को 14 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। यह मामला जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल का दर्जा समाप्त किए जाने के विरोध में वहां के बंद गेट पर चढ़कर तिरंगा लहराने से जुड़ा है।विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने बुधवार को दोनों की रिहाई का आदेश दिया। उनकी जमानत और शांति बनाए रखने से संबंधित बॉन्ड स्वीकार कर लिए गए। हालांकि, मामले की जांच जारी रहेगी और दोनों को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और जमानती बॉन्ड भरने का निर्देश दिया गया है।

जंतर-मंतर पर आखिर क्या हुआ था?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर के बंद गेट पर चढ़कर राष्ट्रीय ध्वज लहराया था। वे इस स्थान को अधिसूचित विरोध स्थल की सूची से हटाए जाने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों की यह कार्रवाई उस शांति बॉन्ड का उल्लंघन थी, जिस पर उन्होंने 10 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद 14 अक्टूबर को उन्हें विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और शुरुआत में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सोमवार को हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई।

CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई कैसे हुई?

दोनों की हिरासत बढ़ाए जाने के फैसले को CJP ने चुनौती दी थी। पार्टी ने आरोप लगाया था कि उनकी रिहाई रोकने के लिए कार्यवाही में जानबूझकर देरी की जा रही है। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का भी रुख किया गया।बुधवार को हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीठ ने शांति बॉन्ड के उल्लंघन का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़ने जैसी कार्रवाई से दूसरे लोग भी ऐसा करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं और हालात प्रदर्शनकारियों के नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं। अदालत ने विदेशों में छात्र आंदोलनों के हिंसक होने के उदाहरणों का भी जिक्र किया।हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद मामला मजिस्ट्रेट के सामने आया। दिल्ली पुलिस ने दोनों की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मजिस्ट्रेट ने आदेश सुरक्षित रख लिया। शाम छह बजे के बाद अदालत ने उनकी रिहाई का आदेश दिया और कहा कि जमानती बॉन्ड तथा शांति बॉन्ड स्वीकार कर लिए गए हैं।

अदालत में उम्र और प्रदर्शन के मुद्दे पर भी हुई चर्चा

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रांका की उम्र पूछी। अदालत को बताया गया कि रांका 27 वर्ष और दास 31 वर्ष के हैं। इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि वे जेन-जी आयु वर्ग के नहीं हैं।अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि पहले की गतिविधियों और मौजूदा विरोध प्रदर्शन के मुद्दों में क्या अंतर है। CJP ने जून और जुलाई में NEET पेपर लीक सहित परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन किए थे। अब पार्टी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। CJP का आरोप है कि वे एकतरफा तरीके से काम कर रहे हैं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताएं हुई हैं।

शांति बनाए रखने का बॉन्ड, अगली सुनवाई शुक्रवार को

अदालत के आदेश के मुताबिक, दोनों प्रवक्ताओं ने शांति भंग न करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का लिखित आश्वासन दिया है। उन्होंने न्यायपालिका और उसकी संस्थाओं में विश्वास जताते हुए यह भी कहा कि जंतर-मंतर को कानून के अनुसार दोबारा अधिसूचित किए जाने तक वे वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि भविष्य में किए जाने वाले प्रदर्शन संविधान के दायरे में होंगे।अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच जारी रहेगी। दोनों को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और जमानती बॉन्ड जमा करने होंगे। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित की गई है।

निष्कर्ष

CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका को सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद रिहाई मिल गई है, लेकिन मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है। जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने और शांति बॉन्ड के कथित उल्लंघन से जुड़े इस मामले में जांच जारी रहेगी। अब अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी, जिस पर आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

सौरव दास और आशुतोष रांका कौन हैं?

वे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता हैं।

दोनों को किस मामले में हिरासत में लिया गया था?

जंतर-मंतर के बंद गेट पर चढ़कर राष्ट्रीय ध्वज लहराने और कथित तौर पर शांति बॉन्ड का उल्लंघन करने के मामले में।

दोनों को कब रिहा किया गया?

बुधवार को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने उनकी रिहाई का आदेश दिया।

क्या मामला अब समाप्त हो गया है?

अदालत के अनुसार, मामले की जांच जारी रहेगी और अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।

दोनों को रिहाई के लिए क्या शर्तें पूरी करनी होंगी?

उन्हें 50,000 रुपये के निजी मुचलके और जमानती बॉन्ड जमा करने होंगे तथा शांति बनाए रखने से संबंधित आश्वासन का पालन करना होगा।

Was this article useful?